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ईंट फैक्ट्री में दर्दनाक हादसा: मशीन की चपेट में आने से महिला मजदूर की मौत

Korba जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक ईंट बनाने वाली फैक्ट्री में दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें मशीन की चपेट में आने से एक महिला मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार दोपहर करीब 3 बजे प्रेम एंटरप्राइजेज राखड़ ईंट फैक्ट्री में हुई। महिला मजदूर मशीन की सफाई कर रही थी, तभी अचानक लीवर नीचे गिर गया और वह मशीन की चपेट में आ गई। हादसे के समय फैक्ट्री में कुछ अन्य मजदूर भी मौजूद थे, लेकिन वे तुरंत कुछ नहीं कर सके। मशीन में फंसने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई। मृतका की पहचान 26 वर्षीय बिछनी बाई के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए काम कर रही थी। वह कुछ समय बाद दोबारा काम पर लौटी थी और उसी दिन यह हादसा हो गया। हादसे के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और ग्रामीणों ने शव उठाने से इनकार कर दिया। लोगों ने मृतका के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। यह दर्दनाक घटना एक बार फिर फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था और मशीन संचालन के दौरान सावधानी की जरूरत को उजागर करती है।

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बलरामपुर क्रशर प्लांट हादसा: कन्वेयर बेल्ट की सफाई के दौरान युवक की मौत

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में क्रशर प्लांट में काम करने के दौरान एक 20 साल के युवक की मौत हो गई। यह हादसा राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भेलाई स्थित सिंघल क्रशर प्लांट में हुआ। जानकारी के अनुसार, रविवार को युवक अल्मोन कन्वेयर बेल्ट की सफाई कर रहा था। इसी दौरान उसके ऊपर लोहे की भारी जाली गिर गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्लांट में मौजूद अन्य मजदूरों ने उसे गैस कटर और जेसीबी की मदद से बाहर निकाला। घायल हालत में उसे अंबिकापुर मिशन अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक युवक सरगुजा जिले के लुण्ड्रा क्षेत्र के खाराकोना गांव का रहने वाला था। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए थे। मजदूरों का कहना है कि प्लांट में काम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते थे। यहां तक कि प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। आरोप यह भी है कि हादसे के बाद मजदूरों पर दबाव बनाया गया कि वे घटना को किसी अन्य कारण से हुआ बताएं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने क्रशर प्लांटों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।

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बालोद में सीवरेज प्रोजेक्ट के दौरान दर्दनाक हादसा: मिट्टी धंसने से 3 मजदूरों की मौत, 10 फीट गड्ढे में दबे थे

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के सीवरेज पाइपलाइन प्रोजेक्ट के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। यह घटना मंगलवार शाम दास पान ठेला चौक के पास हुई, जहां सीवरेज लाइन बिछाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था। काम के दौरान अचानक 10 फीट गहरा गड्ढा भरभराकर धंस गया और उसमें काम कर रहे मजदूर दब गए। मृतकों की पहचान किशुन कुमार, राकेश कुमार और बैशाखिन के रूप में हुई है। देर रात तक तीनों के शवों को बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद परिजनों और आदिवासी संगठनों ने बीएसपी अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया रोक दी गई। परिजन शव लेने से भी इनकार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के गहरे गड्ढे में काम कराया जा रहा था। न तो बैरिकेडिंग थी और न ही मिट्टी धंसने से बचाव के उचित इंतजाम किए गए थे। हादसे के बाद पुलिस, प्रशासन और बीएसपी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान चलाया गया, लेकिन तब तक तीनों की जान जा चुकी थी। भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लुनिया ने आरोप लगाया कि मजदूरों से बिना मानक सुरक्षा के काम कराया जा रहा था और हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारी देर से पहुंचे। नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू ने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। वहीं सांसद भोजराज नाग ने भी घटना को दुखद बताते हुए कहा कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।

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बिलासपुर में फैक्ट्री हादसा: 25 फीट ऊंचाई से गिरने पर मजदूर की मौत, सुरक्षा लापरवाही के आरोप

Bilaspur जिले के सीपत थाना क्षेत्र में एक बोरा फैक्ट्री में काम के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। प्लांट में सफाई करते समय एक मजदूर करीब 25 फीट ऊंचाई से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक ग्राम जांजी निवासी Laxmi Prasad Dheewar (45) सोमवार सुबह रोज की तरह फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। दोपहर करीब 3 बजे वे प्लांट के ऊपरी हिस्से में सफाई का काम कर रहे थे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। बताया जा रहा है कि मजदूर को काम के दौरान हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल मजदूर को इलाज के लिए Shri Ram Care Hospital ले जाया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि फैक्ट्री में पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मजदूरों से लंबे समय तक काम कराया जाता है और श्रम कानूनों का भी ठीक से पालन नहीं होता। परिवार ने मृतक के लिए उचित मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं Chhattisgarh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।

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सक्ती वेदांता प्लांट हादसा: अपनों की तलाश में रातभर भटके परिजन, 22 घंटे बाद जारी हुई मृतकों की सूची

सक्ती स्थित वेदांता प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट के बाद हालात बेहद दर्दनाक रहे। हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन परिजनों को झेलनी पड़ी, जो अपने अपनों की तलाश में पूरी रात अस्पतालों और सड़कों पर भटकते रहे। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के हरदी विशाल गांव निवासी सनी कुमार अनंत अपने भाई की तलाश में शाम से लेकर देर रात तक कई अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। रात के करीब साढ़े तीन बजे तक उन्होंने 5 से 6 अस्पतालों में खोजबीन की, यहां तक कि ICU तक जाकर देखा, लेकिन कहीं भी उनके भाई का पता नहीं चला। सनी के भाई रामेश्वर महिलांगे वेदांता प्लांट में बॉयलर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। उनकी उम्र करीब 28-29 साल थी और वे शादीशुदा थे, उनके एक छोटा बच्चा भी है। हादसे के दिन उनका फोन बंद आ रहा था, जिसके बाद उनके साथियों से घटना की जानकारी मिली। परिजन प्लांट भी पहुंचे, लेकिन वहां गेट बंद मिला और प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाहर भीड़ जमा थी, लेकिन किसी अधिकारी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। करीब 12 घंटे तक भूखे-प्यासे परिजन अस्पतालों में अपने परिजनों को ढूंढते रहे। जिंदल अस्पताल में अधिक घायलों के होने की सूचना मिली, लेकिन वहां भी शुरू में अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। काफी अनुरोध के बाद ICU में जाकर देखने की इजाजत मिली, लेकिन वहां भी सनी को अपने भाई का कोई सुराग नहीं मिला। अस्पताल में भर्ती ज्यादातर लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए थे, जिनकी पहचान करना भी मुश्किल था। आखिरकार बुधवार सुबह सनी को उनके भाई की मौत की सूचना मिली, जबकि मृतकों की आधिकारिक सूची दोपहर में जारी की गई। इस दौरान एक और समस्या सामने आई, जब प्लांट प्रबंधन की ओर से ठहरने की व्यवस्था के नाम पर होटल भेजे गए परिजनों से वहां पैसे मांगे गए। काफी बहस के बाद ही उन्हें कमरा मिल पाया। हादसे के बाद प्रशासन और प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई। मृतकों की पहचान और सूची जारी करने में करीब 22 घंटे का समय लगा, जिससे परिजन लगातार परेशान होते रहे। इतना ही नहीं, रात करीब 12 बजे तक प्लांट परिसर में एंबुलेंस में शव रखे होने की बात भी सामने आई। आशंका जताई गई कि बाहर मौजूद भीड़ के उग्र होने के डर से शवों को तुरंत बाहर नहीं लाया गया। बाद में भीड़ कम होने पर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आपदा प्रबंधन और सूचना व्यवस्था की गंभीर कमियों को भी उजागर करता है।

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रायपुर,उरला के लक्ष्मीनारायण रोलिंग मिल में हादसा करंट लगने से कर्मचारी की मौत, फैक्ट्री प्रबंधन फरार

नगर निगम बिरगांव क्षेत्र में स्थित उरला के एक युवक मनोहर साहू की दुखद मौत से इलाके में शोक का माहौल है। मनोहर साहू पेशे से इलेक्ट्रीशियन थे और लक्ष्मीनारायण रोलिंग मिल उरला में काम कर रहे थे। मिली जानकारी के अनुसार, कार्य के दौरान कंपनी के क्रेन से काम करते समय उन्हें करंट लग गया और वह नीचे गिर गए। उन्हें तत्काल नजदीकी एनकेडी अस्पताल बिरगांव लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मनोहर साहू की अचानक और दुखद मौत से उनके परिवार में गहरा सदमा है। पीड़ित परिवार ने कंपनी प्रबंधन से उचित मुआवजे की मांग की है, लेकिन कंपनी में ताला लगा हुआ है और फैक्ट्री मालिक फरार हैं। इस स्थिति ने परिवार की नाराजगी और चिंता को और बढ़ा दिया है। स्थानीय समाज और कार्यकर्ता भी पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े हैं। क्रांति सेना ने स्पष्ट किया है कि वे पीड़ित परिवार के साथ पूरी तरह खड़े हैं और कंपनी से न्याय दिलाने तक पीछे नहीं हटेंगे। मामले में सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों की कमी के कारण यह हादसा हुआ। स्थानीय प्रशासन को भी मामले में संज्ञान लेने की आवश्यकता है। लोगों का कहना है कि फैक्ट्री मालिकों की लापरवाही और कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान न देने के कारण यह हादसा हुआ है। इस दुखद घटना ने न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरे बिरगांव क्षेत्र को झकझोर दिया है। मनोहर साहू की मौत ने इलाके में सुरक्षा और मजदूर अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। परिवार और समाज चाहते हैं कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।

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