Chhattisgarh Politics

बिलासपुर जिला पंचायत में भाजपा का इंडिया गठबंधन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास, महिला आरक्षण पर सियासत तेज

छत्तीसगढ़ के Bilaspur जिला पंचायत की विशेष सामान्य सभा में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। बैठक के दौरान Bharatiya Janata Party ने INDIA Alliance के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया, जिसे बहुमत के आधार पर मंजूरी दी गई। जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे भाजपा सदस्यों का समर्थन मिला। वहीं Indian National Congress समर्थित सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और सभा में शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी में प्रस्ताव बिना विरोध के पारित हो गया। बैठक के दौरान भाजपा सदस्यों ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीति करना सही नहीं है। उनका कहना था कि इस तरह के कदम महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ हैं। सभा में विकास और प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा हुई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल ने ‘ज्ञान भारतम’ पांडुलिपि संरक्षण योजना का उल्लेख करते हुए इसे सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया। बैठक के बाद भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों ने कांग्रेस पर तीखा हमला जारी रखते हुए कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के रास्ते में बाधा डाल रहा है, जबकि यह कानून महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देने की दिशा में अहम कदम है। इसके अलावा बैठक में ‘सुशासन तिहार 2026’ के आयोजन पर भी निर्णय लिया गया। 1 मई से 10 जून तक ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। यह शिविर 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह स्तर पर आयोजित होंगे, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर ही समस्याओं का समाधान करेंगे। कार्यक्रम के तहत बिल्हा, मस्तूरी और तखतपुर में 8-8 शिविर, जबकि कोटा क्षेत्र में 7 शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य ग्रामीणों को त्वरित राहत और सरकारी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।

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नगर निगम सभा में हंगामा: महिला सशक्तिकरण पर तीखी बहस, माइक छीना तो बढ़ा विवाद

नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर जमकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल काफी गरमा गया। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए ‘अंग्रेजों के मुखबिर’ जैसी टिप्पणी कर दी। इस बयान पर भाजपा पार्षद नाराज हो गए और विरोध जताते हुए उनका माइक छीनने तक पहुंच गए। इसके चलते करीब 15 मिनट तक हंगामा और नारेबाजी होती रही, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए सभापति को बैठक कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। करीब साढ़े पांच घंटे तक चली इस बैठक में आखिरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इससे पहले भाजपा पार्षद महिला आरक्षण संशोधन के विरोध में काले कपड़े और काले रिबन पहनकर सभा में पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने निगम मुख्यालय से कोतवाली चौक तक रैली निकालकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला अधिकारों के मुद्दे पर सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है और शहर की मूलभूत समस्याएं जैसे पेयजल, सफाई और सड़क को नजरअंदाज किया जा रहा है। महापौर मीनल चौबे ने महिला सशक्तिकरण को एक जरूरी पहल बताते हुए विपक्ष की आलोचना की, जबकि विपक्ष ने इसे महज राजनीतिक एजेंडा करार दिया।

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छत्तीसगढ़ में BJP का जनआक्रोश महिला सम्मेलन शुरू, आरक्षण बिल को लेकर प्रदेशभर में विरोध

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किए हैं। रायपुर में जनआक्रोश रैली के बाद अब 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनआक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम भी किए जाएंगे। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की महिलाओं में नाराजगी है। इसी वजह से अलग-अलग चरणों में इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। महिला सम्मेलन के जरिए इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। इससे पहले राजधानी रायपुर में भी भाजपा ने जनआक्रोश रैली निकाली थी, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक पहुंची। इस दौरान एक सभा का आयोजन भी किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई नेता शामिल हुए। इसी बीच 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पास नहीं होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश कर सकती है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका, जिसे लेकर वे दुख व्यक्त करते हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया था। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। बिल को पारित करने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर देश से माफी मांगते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ पार्टियों ने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी, जिसका असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ा।

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महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, साय सरकार बुलाएगी विशेष सत्रc

महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। विष्णुदेव साय की सरकार इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र इसी महीने आयोजित हो सकता है, जिसमें विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रवैया निराशाजनक रहा है। इस रैली का आयोजन भाजपा महिला मोर्चा द्वारा किया गया था, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंची, जहां सभा आयोजित हुई। विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया के तहत पहले राज्य कैबिनेट इसकी मंजूरी देती है, जिसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाता है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विधानसभा सत्र आयोजित किया जाता है। महिला आरक्षण को लेकर भाजपा ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो 27 अप्रैल तक जारी रहेंगे। 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विपक्ष के कारण पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ पार्टियां “फूट डालो और राज करो” की नीति पर काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी 21-22 प्रतिशत है। वहीं, नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी राजनीति के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

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महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी का प्रदर्शन आज से, रायपुर में निकलेगी जन आक्रोश यात्रा

महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी आज से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर में 20 अप्रैल को भाजपा महिला मोर्चा द्वारा जन आक्रोश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा दोपहर 3 बजे बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंचेगी, जहां एक सभा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, डिप्टी सीएम अरुण साव, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, कमलेश जांगड़े और लक्ष्मी वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए व्यापक स्तर पर आंदोलन की तैयारी की है। भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव के संसद में पारित नहीं होने को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी इसी क्रम में चरणबद्ध तरीके से विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 20 अप्रैल को पदयात्रा के बाद 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन होंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के रवैये के कारण यह बिल पास नहीं हो सका। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है और इसके खिलाफ जनजागरूकता जरूरी है। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए अधिक मतों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में प्रस्ताव गिर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर देश को संबोधित करते हुए महिलाओं से माफी जताई और कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता आगे भी बनी रहेगी।

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छत्तीसगढ़ के सभी नगर निगम सीटों पर चुनाव लड़ेगी AAP, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारी

आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी नगर निगम सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे। इसके लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। रायपुर में आयोजित एक संगठनात्मक बैठक में दिल्ली के पूर्व मंत्री और छत्तीसगढ़ के सह-प्रभारी मुकेश अहलावत ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है और पार्टी आने वाले चुनावों में पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी। मुकेश अहलावत ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के आरोपों से मुक्त होने के बाद कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हमेशा से साफ और ईमानदार राजनीति की बात करती आई है और शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती है। बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि संगठन को बूथ स्तर से लेकर विधानसभा, जिला और लोकसभा स्तर तक मजबूत किया जाए। इसके अलावा आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और नगरीय निकाय चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा की गई। अहलावत ने कार्यकर्ताओं से प्रदेश में चल रही “छत्तीसगढ़ बचाओ यात्रा” और “किसान न्याय जनसभा” जैसे कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाने की अपील भी की, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पार्टी की बात पहुंच सके।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: कस्टोडियल डेथ से रेव पार्टी तक गूंजे कई अहम मुद्दे, सरकार पर विपक्ष का दबाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और आबकारी नीति जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस के आसार हैं। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। कस्टोडियल डेथ और जेलों की स्थिति पर सरकार घिरी पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने राज्य में बढ़ते कस्टोडियल डेथ के मामलों को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही जेलों में स्वीकृत क्षमता से अधिक कैदियों के बंद होने की स्थिति पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि जेल प्रशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। 108 एंबुलेंस, रोजगार और अधूरे सड़क कार्य प्रश्नकाल में 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से जवाब तलब किया जाएगा। तकनीकी संस्थानों से पासआउट युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों और नक्सल पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा होगी। मेकाहारा की बदहाल व्यवस्था पर सवाल मेकाहारा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर सुधारात्मक कदमों की मांग की जाएगी। रायपुर के फार्महाउस और रेव पार्टी का मामला रायपुर में फार्महाउस पर कथित अवैध गतिविधियों और रेव पार्टियों के आयोजन का मुद्दा भी सदन में उठेगा। गृह विभाग से यह पूछा जाएगा कि ऐसे आयोजनों की निगरानी और कार्रवाई के लिए क्या व्यवस्था है और अब तक कितनी कार्रवाई की गई है। शराब दुकानों के आवंटन पर ध्यानाकर्षण शराब दुकानों और आहता आवंटन में पारदर्शिता और स्पष्ट मापदंडों के अभाव का मुद्दा भी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि दुकान आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। पारधी समुदाय के जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा आदिम जाति और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग से जुड़े मामलों में पारधी समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं होने का विषय भी सदन में उठेगा। बजट पर चर्चा की शुरुआत प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के बाद 24 फरवरी को पेश किए गए बजट पर चर्चा शुरू होगी। विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को बजट से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगेंगे। कुल मिलाकर, बजट सत्र का चौथा दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन बहस का साक्षी बनने जा रहा है। कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

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सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर का धरना: 11 लाख की मंजूरी न मिलने पर निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन विरोध

रायपुर नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। शहीद हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड से कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर ने मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए राशि स्वीकृत न होने पर नगर निगम मुख्यालय में गांधी जी की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पार्षद शेख मुशीर का कहना है कि वे पिछले 11 महीनों से अपने वार्ड की जर्जर सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। धरने पर बैठे पार्षद ने साफ ऐलान किया है कि जब तक मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए मात्र 11 लाख रुपए की राशि स्वीकृत नहीं की जाती, तब तक वे रोजाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते रहेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि वार्ड में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हुआ है। धरने को समर्थन देने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी भी निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि 11 लाख रुपए जैसी छोटी राशि के लिए एक जनप्रतिनिधि को 11 महीनों तक भटकना पड़ रहा है, तो इससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि जब छोटे विकास कार्यों की यह स्थिति है, तो शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स का हाल समझा जा सकता है।

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BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। बीजेपी के इतिहास में यह दूसरी बार है जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। इससे पहले जेपी नड्डा ने भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठनात्मक प्रयोग किए थे, जिनका असर बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ से जुड़े अनुभव अब राष्ट्रीय रणनीति में नितिन नवीन को 2023 में छत्तीसगढ़ बीजेपी का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर प्रदेश प्रभारी थे। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिलों और मंडलों से फीडबैक लेना और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, वहां संगठन को संतुलन में रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। नितिन नवीन ने इन जमीनी हालात को समझते हुए अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठनात्मक सख्ती और स्पष्ट संदेश पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ बीजेपी को कांग्रेस सरकार, स्थानीय मुद्दों और आंतरिक गुटबाजी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान नितिन नवीन ने संगठन को नीचे तक सक्रिय रखने पर जोर दिया। मंडल से लेकर जिला स्तर तक नियमित फीडबैक और संगठनात्मक बदलाव किए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन की कार्यशैली शांत लेकिन निर्णायक रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल जरूरी है। इसी नीति के तहत कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल भी किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संभावित फायदे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य से जुड़े मुद्दे जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, आदिवासी इलाकों का विकास, शहरी प्रशासन और कानून-व्यवस्था अब सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश तेज हो सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधे जुड़े होने के कारण संतुलन साधने की भूमिका और मजबूत हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन में बदलाव के संकेत आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू होगी। ऐसे में पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में नाम से ज्यादा काम और जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी नेताओं के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नितिन नवीन पहले भी छत्तीसगढ़ में यह संदेश दे चुके हैं कि जिम्मेदारी प्रदर्शन के आधार पर तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से सीधा जुड़ाव केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाएं भी बढ़ाता है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रस्तुत किया जाए, इस पर रणनीति और स्पष्ट हो सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। जेपी नड्डा मॉडल की पुनरावृत्ति? जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बना था। अब नितिन नवीन के चयन को भी उसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मिले संगठनात्मक अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश है कि छत्तीसगढ़ में किए गए संगठनात्मक काम और जमीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से लेता है। इससे संगठन में भरोसा और सक्रियता बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य को पार्टी किस तरह की प्राथमिकता देती है।

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मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही बीजेपी सरकार: गांधी प्रतिमा के सामने उपवास, कांग्रेस का आरोप

दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत रविवार से दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस ने सार्वजनिक विरोध की शुरुआत कर दी है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता दुर्ग के गांधी प्रतिमा स्थल पर सुबह से शाम तक उपवास पर बैठे रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने और मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया। 25 फरवरी तक चलेगा आंदोलन दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी के साथ छल किया है। उनका आरोप है कि बीते 11 वर्षों में मजदूरों को औसतन सिर्फ 38 दिन का काम मिला है और “गारंटी” शब्द को ही कानून से हटाने की कोशिश की जा रही है। हर साल घट रहे मानव दिवस राकेश ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दुर्ग जिले में मनरेगा के मानव दिवस लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का पूरा योगदान था, लेकिन अब इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। सरकारी खजाने पर बढ़ाया जा रहा दबाव शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ रही है। मनरेगा में लगातार कटौती कर राज्य सरकार के अंशदान को बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा। बीजेपी अमीरों की पार्टी: कांग्रेस भिलाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था। अब न सिर्फ योजना का स्वरूप बदला जा रहा है, बल्कि बजट में भी कटौती की गई है। उन्होंने भाजपा को अमीरों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह मजदूर विरोधी सोच का परिणाम है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर है। 125 दिन का वादा भी जुमला: साहू कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा की थी, लेकिन भाजपा सरकार मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर रही है। उन्होंने 125 दिन रोजगार के वादे को भी 15 लाख और 2 करोड़ नौकरियों की तरह जुमला करार दिया। योजना को खत्म करने का आरोप कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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