Chhattisgarh News

10 साल से खांसी में खून आने से परेशान युवक की मेकाहारा में सफल सर्जरी, फेफड़े का संक्रमित हिस्सा निकालकर बचाई जान

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur स्थित Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital में डॉक्टरों ने एक 25 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी कर उसकी जान बचाई। युवक पिछले करीब 10 वर्षों से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। हाल के दिनों में उसकी स्थिति और बिगड़ गई थी। हर बार खांसने पर अधिक मात्रा में खून निकलने लगा था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि युवक के दाएं फेफड़े के निचले हिस्से में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और वहां कैविटी बन गई है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ Dr. Krishnakant Sahu ने बताया कि मरीज के फेफड़े में “एस्परजिलोमा” नाम का फंगल इंफेक्शन पाया गया। यह संक्रमण अक्सर पुराने टीबी मरीजों के फेफड़ों में विकसित हो जाता है और समय के साथ खून आने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में “हीमोप्टाइसिस” कहा जाता है। यह कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जिनमें टीबी, फेफड़ों का संक्रमण और कैंसर जैसी बीमारियां शामिल हैं। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने “लोबेक्टॉमी” सर्जरी करने का फैसला लिया। इस प्रक्रिया में फेफड़े के संक्रमित और खराब हिस्से को निकाल दिया जाता है ताकि संक्रमण शरीर के बाकी हिस्सों में न फैले और स्वस्थ फेफड़ा सुरक्षित रह सके। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने आधुनिक “लंग स्टेपलर” तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक सर्जरी के बाद खून और हवा के रिसाव को कम करने में मदद करती है और मरीज की रिकवरी तेज होती है। सफल सर्जरी के बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया गया। Dr. Vivek Choudhary ने बताया कि समय पर इलाज और सर्जरी से मरीज को नई जिंदगी मिल सकी। वहीं Dr. Santosh Sonkar ने कहा कि अस्पताल जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है।

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बिरगांव नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर सवाल, खराब सफाई मशीन का वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित बिरगांव नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर निगम की सफाई गाड़ी की खराब और लापरवाह स्थिति सामने आती दिख रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सफाई मशीन का पानी टैंकर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा मशीन का ब्रश सिस्टम भी बंद स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं पीछे लगा वाइपर सिस्टम बिना पानी के सड़क पर सफाई करने के बजाय धूल को और अधिक फैला रहा है, जिससे सड़क की स्थिति और खराब होती दिखाई दे रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यह सफाई मशीन केवल नाम की सफाई कर रही है, जबकि वास्तविकता में यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे शहर की स्वच्छता प्रभावित हो रही है। वहीं इस पूरे मामले पर अब तक बिरगांव नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। इससे लोगों की नाराजगी और भी बढ़ती जा रही है। फिलहाल यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या शहर की सफाई व्यवस्था वास्तव में ठीक से काम कर रही है या फिर यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। हम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई आधिकारिक अपडेट आता है, उसे सबसे पहले आपके सामने रखा जाएगा।

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बिरगांव में नाली से मिला 7 महीने का भ्रूण, इलाके में फैली सनसनी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बिरगांव क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यह मामला बड़ा तालाब क्षेत्र का है, जहां आज सुबह लगभग 6 बजे नाली के अंदर एक भ्रूण मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह के समय कुछ लोग जब इलाके से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर नाली में पड़े भ्रूण पर पड़ी। यह देखकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इसकी सूचना उरला थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के लिए भेज दिया। घटना के बाद आसपास के इलाके में दहशत और तरह-तरह की चर्चाओं का माहौल बन गया है। स्थानीय लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में भ्रूण यहां कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ भी की जा रही है ताकि घटना से जुड़े हर पहलू का पता लगाया जा सके। शुरुआती तौर पर यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। मामले की जांच जारी है और पुलिस हर सुराग को गंभीरता से खंगाल रही है।

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बालोद में सीवरेज प्रोजेक्ट के दौरान दर्दनाक हादसा: मिट्टी धंसने से 3 मजदूरों की मौत, 10 फीट गड्ढे में दबे थे

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के सीवरेज पाइपलाइन प्रोजेक्ट के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। यह घटना मंगलवार शाम दास पान ठेला चौक के पास हुई, जहां सीवरेज लाइन बिछाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था। काम के दौरान अचानक 10 फीट गहरा गड्ढा भरभराकर धंस गया और उसमें काम कर रहे मजदूर दब गए। मृतकों की पहचान किशुन कुमार, राकेश कुमार और बैशाखिन के रूप में हुई है। देर रात तक तीनों के शवों को बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद परिजनों और आदिवासी संगठनों ने बीएसपी अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया रोक दी गई। परिजन शव लेने से भी इनकार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के गहरे गड्ढे में काम कराया जा रहा था। न तो बैरिकेडिंग थी और न ही मिट्टी धंसने से बचाव के उचित इंतजाम किए गए थे। हादसे के बाद पुलिस, प्रशासन और बीएसपी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान चलाया गया, लेकिन तब तक तीनों की जान जा चुकी थी। भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लुनिया ने आरोप लगाया कि मजदूरों से बिना मानक सुरक्षा के काम कराया जा रहा था और हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारी देर से पहुंचे। नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू ने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। वहीं सांसद भोजराज नाग ने भी घटना को दुखद बताते हुए कहा कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।

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रायगढ़ जंगल में युवती की अर्धनग्न लाश मिलने से सनसनी, गला और चेहरा कुचलकर हत्या की आशंका

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक युवती का शव अर्धनग्न अवस्था में जंगल से बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। शव तुमीडीह डैम के पास पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के जंगल में मिला है। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे हत्या का मामला माना है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम स्थानीय लोगों ने डैम किनारे जंगल में एक युवती का शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि युवती की डेडबॉडी जमीन पर औंधे मुंह पड़ी थी और उसके कपड़े पास में बिखरे हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद पहचान छिपाने की कोशिश की गई। युवती के चेहरे को पत्थर से बुरी तरह कुचल दिया गया, जिससे उसकी शिनाख्त मुश्किल हो गई है। इसके अलावा गले और गर्दन के पीछे धारदार हथियार से वार के निशान भी मिले हैं। मृतका की उम्र लगभग 20 से 22 वर्ष के बीच बताई जा रही है, लेकिन अब तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ के बावजूद कोई जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए घरघोड़ा अस्पताल भेज दिया है। साथ ही आसपास के थानों में गुमशुदगी के मामलों से मिलान किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच हत्या के एंगल से कर रही है और घटनास्थल के आसपास से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

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दुर्ग में LLB फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट पर बवाल: हिंदी में उत्तर लिखने पर फेल करने का आरोप, यूनिवर्सिटी घेरकर छात्रों का विरोध

दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में LLB फर्स्ट सेमेस्टर के खराब परिणाम को लेकर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि लीगल लैंग्वेज विषय में अचानक नियम बदल दिए गए और हिंदी में उत्तर लिखने वाले विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जारी परिणाम के अनुसार 417 छात्रों में से केवल 101 छात्र ही सफल हो पाए हैं। 230 छात्रों को पूरक परीक्षा में रखा गया है, जबकि 77 छात्र पूरी तरह अनुत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में फेल होने का मुख्य कारण केवल एक विषय है। छात्रों ने दावा किया कि पहले इसी विषय में हिंदी में उत्तर लिखने पर भी अंक दिए जाते थे, लेकिन इस बार केवल अंग्रेजी में लिखे उत्तरों का ही मूल्यांकन किया गया, जिसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि बार काउंसिल के नियमों के अनुसार लीगल लैंग्वेज विषय में उत्तर अंग्रेजी में देना अनिवार्य था और उसी आधार पर मूल्यांकन किया गया है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कोई बदलाव किया गया था तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि विद्यार्थी उसी अनुसार तैयारी कर सकें। छात्रों ने मांग की है कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिले हैं उन्हें न्याय दिया जाए। साथ ही पुनर्मूल्यांकन की सुविधा फिर से शुरू करने की भी मांग की गई है। इसी तरह धनरसायन सिंह गुरुल महाविद्यालय में भी परिणाम को लेकर नाराजगी देखी गई, जहां 56 में से 50 छात्रों को एक विषय में पूरक की स्थिति में रखा गया है। छात्रों का कहना है कि चारों संबद्ध कॉलेजों में यही स्थिति बनी है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह परिणाम देर से जारी किया है, जबकि छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद तय समय सीमा के भीतर परिणाम घोषित नहीं किया गया, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया है। अब सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा नजदीक होने से छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

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रायपुर में हाईवोल्टेज ड्रामा: 35 फीट ऊंचे होर्डिंग पर चढ़ी युवती, 40 मिनट तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शंकर नगर इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवती अचानक सड़क किनारे लगे लगभग 35 फीट ऊंचे होर्डिंग पर चढ़ गई। घटना खम्हारडीह थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। युवती काफी देर तक ऊंचाई पर होर्डिंग पर बैठी रही, जिससे मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। युवती को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए लंबी सीढ़ी लगाई गई, साथ ही नीचे सुरक्षा के लिए जाली भी बिछाई गई। करीब 40 मिनट तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस बल ने भीड़ को नियंत्रित कर स्थिति को संभाला। स्थानीय लोगों की मदद से युवती को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया, जिसके बाद उसे थाने ले जाया गया और पूछताछ शुरू की गई। शुरुआती जांच में युवती मानसिक रूप से अस्थिर नजर आई है, हालांकि उसने किसी विवाद या परेशानी से इनकार किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि युवती होर्डिंग पर क्यों चढ़ी थी।

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दुर्ग कुम्हारी में दर्दनाक हादसा: सिलेंडर ब्लास्ट और शॉर्ट सर्किट से एक ही परिवार के 4 लोग जिंदा जले, प्रशासन और नेताओं ने जताया शोक

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुम्हारी क्षेत्र में एक भीषण हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मकान में बिजली के खंभे से हुए शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी, जिसने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया। आग तेजी से फैलते हुए घर के किचन तक पहुंच गई, जहां गैस सिलेंडर में धमाका हो गया। जोरदार ब्लास्ट के बाद घर में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला। मृतकों में पिता अनिल वैष्णव, उनकी दो बेटियां लक्ष्मी और चांदनी, तथा डेढ़ साल की मासूम बच्ची शामिल हैं। परिवार मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता था। हादसे के समय घर में कुछ सदस्य मौजूद थे, जबकि कुछ लोग बाहर थे, जिससे उनकी जान बच गई। लेकिन घर के अंदर मौजूद मासूम बच्ची भी आग की चपेट में आ गई और उसकी भी मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर खाक हो चुका था। मौके से चारों शव बरामद किए गए, जिन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये और जिला प्रशासन की ओर से 4-4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटनास्थल का दौरा कर बिजली विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज करने और परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। परिजनों के अनुसार, परिवार ने उसी दिन सिलेंडर भरवाकर लाया था। हादसे के समय परिवार के सदस्य सो रहे थे, तभी अचानक आग फैल गई और फिर सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर अभिजीत सिंह, एसएसपी विजय अग्रवाल, सांसद विजय बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने मामले की जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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छत्तीसगढ़ BJP कोर कमेटी में बड़ा बदलाव: ओपी चौधरी, विजय शर्मा और अमर अग्रवाल शामिल, कई वरिष्ठ नेता बैठक से दूर

छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। पार्टी की कोर कमेटी का पुनर्गठन करते हुए कई नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नई सूची में मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और पूर्व मंत्री व विधायक अमर अग्रवाल को कोर कमेटी में जगह दी गई है। इसके साथ ही संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल माना जा रहा है। हालांकि कोर कमेटी की हालिया बैठक में पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि की है। वहीं पार्टी के अंदर इसे संगठन को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को बूथ और ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने, आगामी रणनीति और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई थी। बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अब प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हैं, जहां आगामी रणनीति और संगठनात्मक दिशा को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा में यह बदलाव सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पुनर्गठन की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं। कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चाएं हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन में भविष्य में और बदलाव की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीतिक रणनीति नए मोड़ पर जाती दिख रही है।

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बस्तर में सल्फी से बनेगा गुड़ और साबूदाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत

बस्तर में पारंपरिक रूप से नशीले पेय के रूप में पहचानी जाने वाली सल्फी अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का नया माध्यम बन सकती है। वैज्ञानिक नाम केरियोटा यूरेंस और सामान्य रूप से फिश टेल पाम कहलाने वाले इस वृक्ष का उपयोग अब प्राकृतिक गुड़ और साबूदाना बनाने के लिए किए जाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बस्तर में बड़े स्तर पर सल्फी के पौधों का संरक्षण और रोपण किया जाए, तो यह क्षेत्र आने वाले समय में प्राकृतिक गुड़ उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है। पीजी कॉलेज के प्राणी शास्त्र विशेषज्ञ प्रोफेसर सुशील कुमार दत्ता के अनुसार, सल्फी के रस से गुड़ तैयार करने की परंपरा काफी पुरानी है। श्रीलंका समेत कई देशों में इसके मीठे रस से उच्च गुणवत्ता वाला गुड़ लंबे समय से बनाया जाता रहा है। सल्फी से गुड़ बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है। सूर्यास्त के बाद पेड़ की पुष्प शाखा से मीठा रस एकत्र किया जाता है। इस रस को सूर्योदय से पहले इकट्ठा करना जरूरी होता है, क्योंकि धूप पड़ते ही इसमें फरमेंटेशन शुरू हो जाता है और यह नशीला बनने लगता है। ताजा रस को बड़े बर्तनों में लगातार उबालकर गाढ़ा किया जाता है। कुछ समय बाद यह सुनहरे रंग के प्राकृतिक गुड़ में बदल जाता है, जिसे जगेरी भी कहा जाता है। सल्फी का उपयोग केवल गुड़ तक सीमित नहीं है। इसके तने के बीच वाले हिस्से, जिसे पिथ कहा जाता है, में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। इस हिस्से को प्रोसेस करके साबूदाना भी तैयार किया जा सकता है। दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में फिश टेल पाम का उपयोग खाद्य उत्पादों के निर्माण में पहले से किया जा रहा है। बस्तर के जंगलों में सल्फी के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, लेकिन अब तक इनका उपयोग मुख्य रूप से स्थानीय पेय तक ही सीमित था। अब जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए सल्फी आधारित उत्पादों को नए बाजार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और वन आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक बाजार के मेल से सल्फी भविष्य में बस्तर की नई पहचान बन सकती है।

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