BJP Protest

राहुल गांधी और दीपक बैज के बयान पर भाजपा का विरोध: बिलासपुर में भाजयुमो ने फूंका पुतला

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij के बयान को लेकर बिलासपुर में भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। शुक्रवार को पुराना बस स्टैंड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौक पर भाजयुमो ने दोनों नेताओं का पुतला दहन कर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेताओं के बयान की आलोचना की। शहर विधायक Amar Agrawal ने कहा कि लगातार चुनावों में हार के कारण कांग्रेस नेताओं में निराशा और हताशा साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को संकुचित मानसिकता का प्रतीक बताया। भाजयुमो जिलाध्यक्ष Vaibhav Gupta ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश ने आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है और भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत शक्ति बनकर उभरा है। प्रदर्शन में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर, महापौर पूजा विधानी, सभापति विनोद सोनी, अजीत सिंह भोगल, मनीष अग्रवाल, महेश चंद्रिकापुरे, चंद्रप्रकाश मिश्रा, गौरी गुप्ता और मोनू रजक सहित बड़ी संख्या में भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं भाजपा ग्रामीण इकाई ने भी राहुल गांधी और दीपक बैज का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष Mohit Jaiswal ने कांग्रेस के बयान को अराजक मानसिकता से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में मर्यादा और सामाजिक सद्भाव का विशेष महत्व है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष Rishabh Chaturvedi ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी देशवासियों की भावनाओं को आहत करने वाली है। प्रदर्शन में महामंत्री यश मनहर, चंद्रप्रकाश सूर्या और तुषार चंद्राकर समेत कई कार्यकर्ता शामिल रहे।

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Bilaspur, Political

भिलाई नगर निगम घेराव: भ्रष्टाचार के आरोपों पर BJP का हंगामा, पार्षद का माइक छीने जाने से बढ़ा विवाद

छत्तीसगढ़ के Bhilai में नगर निगम के खिलाफ Bharatiya Janata Party का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर पार्टी की जांच एवं संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब भाजपा पार्षद संतोष मौर्य निगम आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे थे। इसी बीच उनका माइक छीन लिया गया, जिससे कार्यकर्ता भड़क उठे और मौके पर जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि महापौर Neeraj Pal और निगम आयुक्त की मिलीभगत से वित्तीय गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने शिक्षा उपकर निधि, 1248 भूखंडों की नीलामी से मिली राशि और अन्य आर्थिक मामलों में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया। इसके अलावा संजय नगर तालाब के पास स्थित व्यावसायिक भूमि के बिना शासन अनुमति किए गए ऑक्शन को भी गंभीर मामला बताया गया। नेताओं ने यह भी कहा कि निगम की सामान्य सभा में पास प्रस्तावों के विपरीत कार्य किए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शहर में पेयजल संकट और सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। नेताओं का कहना है कि भीषण गर्मी में लोग पानी की कमी और गंदगी से परेशान हैं, लेकिन निगम प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। यह प्रदर्शन Ramji Bharti और Purushottam Dewangan के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और पार्षद शामिल रहे। नेताओं ने चेतावनी दी कि जनता से जुड़े मुद्दों पर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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छत्तीसगढ़ में BJP का जनआक्रोश महिला सम्मेलन शुरू, आरक्षण बिल को लेकर प्रदेशभर में विरोध

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किए हैं। रायपुर में जनआक्रोश रैली के बाद अब 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनआक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम भी किए जाएंगे। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की महिलाओं में नाराजगी है। इसी वजह से अलग-अलग चरणों में इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। महिला सम्मेलन के जरिए इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। इससे पहले राजधानी रायपुर में भी भाजपा ने जनआक्रोश रैली निकाली थी, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक पहुंची। इस दौरान एक सभा का आयोजन भी किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई नेता शामिल हुए। इसी बीच 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पास नहीं होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश कर सकती है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका, जिसे लेकर वे दुख व्यक्त करते हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया था। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। बिल को पारित करने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर देश से माफी मांगते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ पार्टियों ने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी, जिसका असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ा।

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महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, साय सरकार बुलाएगी विशेष सत्रc

महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। विष्णुदेव साय की सरकार इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र इसी महीने आयोजित हो सकता है, जिसमें विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रवैया निराशाजनक रहा है। इस रैली का आयोजन भाजपा महिला मोर्चा द्वारा किया गया था, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंची, जहां सभा आयोजित हुई। विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया के तहत पहले राज्य कैबिनेट इसकी मंजूरी देती है, जिसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाता है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विधानसभा सत्र आयोजित किया जाता है। महिला आरक्षण को लेकर भाजपा ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो 27 अप्रैल तक जारी रहेंगे। 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विपक्ष के कारण पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ पार्टियां “फूट डालो और राज करो” की नीति पर काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी 21-22 प्रतिशत है। वहीं, नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी राजनीति के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

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महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी का प्रदर्शन आज से, रायपुर में निकलेगी जन आक्रोश यात्रा

महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी आज से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर में 20 अप्रैल को भाजपा महिला मोर्चा द्वारा जन आक्रोश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा दोपहर 3 बजे बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंचेगी, जहां एक सभा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, डिप्टी सीएम अरुण साव, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, कमलेश जांगड़े और लक्ष्मी वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए व्यापक स्तर पर आंदोलन की तैयारी की है। भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव के संसद में पारित नहीं होने को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी इसी क्रम में चरणबद्ध तरीके से विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 20 अप्रैल को पदयात्रा के बाद 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन होंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के रवैये के कारण यह बिल पास नहीं हो सका। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है और इसके खिलाफ जनजागरूकता जरूरी है। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए अधिक मतों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में प्रस्ताव गिर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर देश को संबोधित करते हुए महिलाओं से माफी जताई और कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता आगे भी बनी रहेगी।

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