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रायपुर में साइबर ठगी: IES अफसर के पिता से बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर ठगे पैसे

रायपुर के डीडी नगर इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड इंजीनियर साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उनके बेटे को गिरफ्तार करने का झूठा दावा कर उनसे पैसे ऐंठ लिए। आरोपी ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर संपर्क किया और बताया कि उनके बेटे को दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार 4 अप्रैल को पीड़ित को व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने पुलिस अधिकारी बनकर बात की और बेटे को छुड़ाने के नाम पर 1.60 लाख रुपए की मांग की। इस दौरान आरोपी ने वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर दबाव बनाया, जिससे वे घबरा गए और स्थिति को सच मान बैठे। घबराहट में पीड़ित ने तुरंत 80 हजार रुपए आरोपी के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए और बाकी रकम बाद में देने की बात कही। कुछ समय बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया, तब पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी गिरफ्तारी जैसी कोई घटना नहीं हुई है। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ। बताया जा रहा है कि पीड़ित का बेटा दिल्ली में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) में कार्यरत है, इसी वजह से ठगों की बातों पर उन्होंने जल्दी भरोसा कर लिया। शिकायत मिलने के बाद डीडी नगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के कॉल आने पर घबराएं नहीं और पहले अपने परिजनों से संपर्क कर सच्चाई की पुष्टि करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने से बचें। साइबर ठगी से बचने के उपाय:

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रायपुर में एक दिन में दो चाकूबाजी की घटनाएं, दो युवक गंभीर घायल

रायपुर में एक ही दिन में दो अलग-अलग इलाकों में चाकूबाजी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पहली घटना विधानसभा थाना क्षेत्र के सड्डू इलाके की है। जानकारी के अनुसार गांधीनगर-शंकरनगर निवासी 26 वर्षीय छवि महानंद अपने दोस्तों के साथ एक परिचित के पास स्कूटी गिरवी रखने गया था। इसी दौरान पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में उसके सीने, पेट, हाथ और कलाई पर गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत मोवा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दूसरी घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हुई। यहां मोबाइल शॉप संचालक गोविंद निचलानी अपनी परिचित युवती के साथ घर लौट रहा था। श्याम नगर स्थित दिव्या होटल के पास दो नशे में धुत युवकों ने युवती पर अभद्र टिप्पणी की। इसका विरोध करने पर पहले दोनों पक्षों के बीच झूमाझटकी हुई, जिसके बाद आरोपियों ने गोविंद पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में उसके सीने और जांघ पर चोट आई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटी है और आरोपियों की तलाश जारी है।

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पीजी पढ़ाई के लिए डॉक्टरों को 3 साल का अवकाश, पुराने बैच को भी लाभ देने की मांग

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सेवारत डॉक्टरों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्स करने वाले चिकित्सकों को अध्ययन अवकाश 2 साल की बजाय 3 साल तक दिया जाएगा। इस निर्णय से राज्य के कई डॉक्टरों को सीधा फायदा मिलेगा। इस मांग को लेकर छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन लंबे समय से प्रयास कर रहा था। फेडरेशन का मानना है कि उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है, ताकि डॉक्टर बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई पूरी कर विशेषज्ञ बन सकें और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकें। इस फैसले से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह संगठन के लगातार प्रयासों और संवाद का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा लंबे समय से सरकार के सामने उठाया जा रहा था। हालांकि, फेडरेशन ने यह भी कहा है कि वर्ष 2025 से पहले पीजी अध्ययन अवकाश पर गए डॉक्टरों को इस नई व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है। संघ के उपाध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने सरकार से मांग की है कि 2021 से 2023 बैच के डॉक्टरों के लिए भी स्पष्ट निर्देश जारी कर उन्हें समान लाभ दिया जाए, ताकि किसी प्रकार की असमानता न रहे।

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100 किलो से ज्यादा कचरा पर नया नियम: कॉलोनियों को खुद करनी होगी प्रोसेसिंग, नहीं तो लगेगा शुल्क

राजधानी रायपुर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। यदि किसी कॉलोनी, सोसायटी या संस्थान से प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, तो उसे वहीं पर प्रोसेस करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम कचरे के निपटान के लिए अलग से शुल्क वसूलेगा। यह व्यवस्था नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के तहत लागू की गई है, जो अप्रैल 2026 से देशभर में प्रभावी हो चुके हैं। हालांकि, अभी नगर निकायों में इस नियम को लागू करने के लिए पूरी व्यवस्था तैयार नहीं है, लेकिन सर्वे और बैठकों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नए नियमों के अनुसार अब कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग एकत्र किया जाएगा—गीला, सूखा, सैनेटरी और खतरनाक कचरा। नियम लागू होने से पहले सभी कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स, अस्पतालों, मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसमें कचरे की मात्रा, प्रोसेसिंग की विधि और नियमों के पालन की जानकारी देनी होगी, जिसे नगर निगम सत्यापित कर प्रमाण पत्र जारी करेगा। आने वाले समय में कॉलोनियों को अपने स्तर पर कचरा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी होगी। गीले कचरे को कंपोस्ट या बायोगैस में बदला जा सकता है, जबकि सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 500 ग्राम कचरा उत्पन्न करता है। इस हिसाब से 5 लोगों के एक परिवार से रोजाना करीब 3 किलो कचरा निकलता है। यदि किसी कॉलोनी में 50 परिवार हैं, तो वहां प्रतिदिन लगभग 150 किलो कचरा उत्पन्न होगा, जिससे वह ‘बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर’ की श्रेणी में आ जाएगी। ऐसी स्थिति में यदि कॉलोनी खुद कचरा प्रोसेस नहीं करती है, तो नगर निगम प्रति टन के हिसाब से शुल्क वसूलेगा। राजधानी में लगभग 1500 कॉलोनियां, अपार्टमेंट और कवर्ड कैंपस इस नियम के दायरे में आएंगे, साथ ही कई होटल और व्यावसायिक संस्थान भी प्रभावित होंगे। नियमों को लागू करने के लिए नगर निगम द्वारा वार्डवार सूची तैयार की जा रही है, ताकि बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान कर उन्हें कचरा प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सके।

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रायपुर में बनेगी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, 1000 करोड़ की योजना से खिलाड़ियों को मिलेगा नया मंच

छत्तीसगढ़ अब केवल धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने राजधानी रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है। इस यूनिवर्सिटी के संचालन पर हर साल करीब 155 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए वित्तीय संसाधन केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना, यूजीसी तथा सेल और एनटीपीसी जैसी कंपनियों के सीएसआर फंड से जुटाने की योजना बनाई गई है। शुरुआत में इसे मणिपुर स्थित नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से संबद्ध करने का भी प्रस्ताव है। हाल ही में आयोजित खेलो इंडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद खेल संचालनालय ने प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में प्राकृतिक खेल क्षमता का बड़ा भंडार मौजूद है। यह यूनिवर्सिटी न केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करेगी, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित खेल कॉलेजों के लिए एक संबद्ध संस्था के रूप में भी कार्य करेगी। इससे स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और खेल क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यूनिवर्सिटी का मॉडल देश के प्रमुख संस्थानों से प्रेरित होगा, जिसमें गुजरात की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के आधुनिक रिसर्च सिस्टम, मणिपुर की नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक ढांचा और दिल्ली के एकीकृत स्कूल-यूनिवर्सिटी मॉडल को शामिल किया जाएगा, ताकि कम उम्र से ही खिलाड़ियों को तैयार किया जा सके। राज्य के खेल मंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ खेल, पर्यटन और रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन सके।

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ई-रिक्शों से बिगड़ी ट्रैफिक व्यवस्था: बिना परमिट और नियंत्रण के सड़कों पर अव्यवस्था

राजधानी में ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बड़ी समस्या बन गई है। सिग्नल तोड़ना, बीच सड़क पर गाड़ी रोककर सवारी बैठाना और उतारना आम बात हो गई है, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्टेशन चौक, फाफाडीह चौक, अंबेडकर अस्पताल चौक, जयस्तंभ चौक, आमापारा, लोधीपारा, अवंति बाई चौक, कलेक्टोरेट चौक, कपड़ा मार्केट चौक, कालीबाड़ी और पचपेड़ी नाका जैसे प्रमुख स्थानों पर स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इन जगहों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ई-रिक्शा चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे कहीं भी वाहन खड़ा कर सवारी चढ़ाते-उतारते हैं, क्योंकि उनके लिए कोई तय स्टॉप या पार्किंग स्थान निर्धारित नहीं है। कई बार समझाने पर चालक अभद्र व्यवहार भी करते हैं। पुलिस का कहना है कि ई-रिक्शों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन तकनीकी दिक्कतें इसमें बाधा बन रही हैं। ग्रीन नंबर प्लेट कैमरों में साफ नजर नहीं आती, जिससे ई-चालान जारी करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में मौके पर फोटो लेकर कार्रवाई की जा रही है। ई-रिक्शा संचालन को लेकर शहर में अब तक कोई ठोस नीति लागू नहीं की गई है। नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और आरटीओ के बीच समन्वय की कमी के कारण न तो रूट तय किए गए हैं और न ही संचालन के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के चलते बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बेचे जा रहे हैं, लेकिन इनके लिए परमिट अनिवार्य नहीं है और चालकों का कोई पंजीकृत रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा। कई लोग एक से अधिक ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें किराए पर चला रहे हैं। शहर में कितने ई-रिक्शों की जरूरत है, किस मार्ग पर कितनी गाड़ियां चलनी चाहिए और उनके स्टॉपेज कहां होंगे—इस पर अब तक कोई सर्वे या योजना तैयार नहीं की गई है। हालांकि, पुलिस ने ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए एक प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा था। इसमें शहर को चार जोन में बांटकर प्रत्येक क्षेत्र में ई-रिक्शों का संतुलित संचालन और उनके लिए निर्धारित रूट तय करने का सुझाव दिया गया था। इससे ट्रैफिक दबाव कम हो सकता था और लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करते, लेकिन यह योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है।

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महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी घोटाला: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली छोटी और घटिया साड़ियां

महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी वितरण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। ठेकेदारों द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित माप से छोटी और खराब गुणवत्ता की साड़ियां दी गई हैं। वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख महिलाओं के लिए साड़ियों की खरीदी की गई थी। इस खरीद की जिम्मेदारी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को दी गई थी। करीब 9.7 करोड़ रुपए खर्च कर प्रत्येक साड़ी 500 रुपए में खरीदी गई। कार्यादेश के अनुसार साड़ी की कुल लंबाई 6.3 मीटर होनी थी, जिसमें 5.5 मीटर साड़ी और 80 सेंटीमीटर ब्लाउज पीस शामिल था। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच इन साड़ियों का वितरण किया गया। लेकिन कई जिलों में वितरित साड़ियों की लंबाई तय मानक से कम पाई गई। कई जगहों पर सिर्फ 5 मीटर की साड़ी ही दी गई, जिससे कार्यकर्ताओं को पहनने में परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं, साड़ी धोने पर रंग निकल जाता है और कपड़ा सिकुड़कर और छोटा हो जाता है। कार्यकर्ताओं ने गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दी गई साड़ियां बाजार में 250 रुपए या उससे भी कम कीमत की लगती हैं। शिकायतों के बाद विभाग के संचालक ने पूरे प्रदेश में साड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं। जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी साड़ियों में कमी पाई जाए, उन्हें बदला जाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर मंत्रालय को पत्र भेजकर साड़ियां वापस लेने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यूनिफॉर्म उनके सम्मान और पहचान से जुड़ी होती है। कई कार्यकर्ता नई साड़ियां छोड़कर पुरानी पहन रही हैं, जबकि कुछ बिना यूनिफॉर्म के ही काम कर रही हैं। बिलासपुर जिले के मंगला, निरतू, घूटकू और गनियारी क्षेत्रों में जांच के दौरान पाया गया कि साड़ियों की लंबाई और चौड़ाई दोनों कम हैं। पानी में डालते ही रंग छूट गया और कपड़ा काफी पतला व पारदर्शी निकला। बिलासपुर में ही 1930 महिलाओं ने साड़ियों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है और उनका उपयोग बंद कर दिया है। कुछ कार्यकर्ताओं ने बताया कि पहले दी गई साड़ियां सही माप की थीं, लेकिन इस बार की साड़ियां बेहद खराब हैं। मामले की जांच के लिए संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने एक समिति का गठन किया है, जिसने दुर्ग, धमतरी और रायगढ़ सहित कई जिलों में जांच की है। रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। फिलहाल खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को भुगतान रोक दिया गया है। दोषपूर्ण साड़ियों को बदलने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि जहां-जहां खराब साड़ियों की सप्लाई हुई है, उन्हें वापस लेकर नई साड़ियां दी जाएंगी।

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आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर 3 कोर्स अनिवार्य, पूरा न करने पर अप्रैल वेतन पर रोक

राज्य सरकार ने मिशन कर्मयोगी के तहत विकसित आई-गॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म को लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। यह एआई आधारित ऑनलाइन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य सभी शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना, कौशल विकसित करना और उन्हें नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। अब सभी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एआई से जुड़े कोर्स सहित कम से कम तीन कोर्स पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। वर्ष 2026-27 से इन कोर्सों को एपीएआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) से भी जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से अप्रैल महीने का वेतन प्राप्त करने के लिए तीनों कोर्स पूरे करना जरूरी होगा। डीडीओ (आहरण एवं संवितरण अधिकारी) वेतन जारी करने से पहले कर्मचारियों के कोर्स पूर्ण होने के प्रमाण पत्र की जांच करेंगे, उसके बाद ही भुगतान किया जाएगा। आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। कर्मचारी परिचय पोर्टल या ईएचआरएमएस पोर्टल के ‘ट्रेनिंग के अवसर’ सेक्शन के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। उन्हें अपनी प्रोफाइल में पदनाम, विभाग, एनआईसी ईमेल और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी अपडेट करनी होगी। सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन और पूर्ण किए गए कोर्स का विवरण ई-ऑफिस के माध्यम से भेजना होगा। प्रशिक्षण को तीन तरीकों से संचालित किया जाएगा—इंडक्शन प्रोग्राम, मिड-करियर लर्निंग और सेल्फ लर्निंग। प्रत्येक कोर्स के अंत में परीक्षा होगी और सफल उम्मीदवारों को डिजिटल प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इन प्रमाण पत्रों का प्रभाव पदोन्नति और अन्य लाभों पर भी पड़ेगा। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द अपने कर्मचारियों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ें और उनकी ऑनबोर्डिंग सुनिश्चित करें।

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मुरैना में रेत माफिया का कहर, वन रक्षक को ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या

Morena में अवैध रेत परिवहन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हमला हो गया। रेत माफिया के ट्रैक्टर ड्राइवर ने एक वन रक्षक को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना बुधवार सुबह करीब 6 बजे दिमनी थाना क्षेत्र के रानपुर गांव के पास हुई। वन विभाग की टीम गश्त पर थी, तभी सामने से रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखी। टीम ने वाहन को रोकने का इशारा किया, लेकिन ड्राइवर भागने लगा। वन रक्षक हरकेश गुर्जर जब उसे रोकने आगे बढ़े, तो आरोपी ने जानबूझकर ट्रैक्टर उन पर चढ़ा दिया और मौके से फरार हो गया। पूरी घटना पास के पेट्रोल पंप के सीसीटीवी में कैद हो गई है। घटना के बाद प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है। वन विभाग ने ट्रैक्टर ड्राइवर के साथ-साथ वाहन मालिकों के नाम भी पुलिस को दिए हैं। आरोप है कि ये लोग मिलकर अवैध रेत का कारोबार चला रहे थे। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश है। मृतक वन रक्षक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।

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रायगढ़ में लिव-इन पार्टनर ने मंगलसूत्र से घोंटा गला, महिला की हत्या; आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के Raigarh में एक महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला अपने लिव-इन पार्टनर के साथ रह रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मृतका की पहचान धनेश्वरी विश्वकर्मा (32) के रूप में हुई है। 1 अप्रैल को उसे जिंदल अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले इसे सामान्य मौत माना गया, लेकिन बाद में रिपोर्ट आने पर मामला हत्या का निकला। जांच में पता चला कि महिला पिछले 4 साल से विकेश बरैठ नाम के युवक के साथ रह रही थी। दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे, खासकर दवा नहीं लेने और शादी न हो पाने को लेकर। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि झगड़े के दौरान उसने महिला के मंगलसूत्र को पीछे से खींचा, जिससे उसका गला दब गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। बाद में उसकी मौत हो गई। आरोपी ने घटना को छिपाने की कोशिश भी की और महिला को अस्पताल ले गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि आपसी विवाद को हिंसा में बदलना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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