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रायपुर में 50 लाख की ठगी: ड्राइवर अकाउंटेंट को उतारकर कैश समेत फरार

राजधानी रायपुर में एक कंस्ट्रक्शन कारोबारी के साथ 50 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कारोबारी के ड्राइवर ने अकाउंटेंट को रास्ते में उतारकर कार और नकदी लेकर फरार हो गया। घटना गीतांजलि नगर क्षेत्र की है। मामले में कारोबारी के रिश्तेदार अखिलेश प्रसाद की शिकायत पर खम्हारडीह थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित कारोबारी उमेश प्रसाद कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं और गीतांजलि नगर में रहते हैं। शनिवार 25 अप्रैल को उन्होंने अपने अकाउंटेंट और ड्राइवर कृष्णा साहू को 50 लाख रुपये कैश देकर घर भेजा था। दोनों कार (CG 04 QG 6633) से निकल पड़े, लेकिन खम्हारडीह थाने से कुछ ही दूरी पर ड्राइवर ने चालाकी दिखाते हुए अकाउंटेंट को गुटखा लाने के बहाने उतार दिया। जैसे ही अकाउंटेंट नीचे उतरा, ड्राइवर गाड़ी लेकर मौके से भाग निकला। अकाउंटेंट ने तुरंत इस घटना की जानकारी कारोबारी को दी, जिसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। बताया जा रहा है कि आरोपी कृष्णा साहू भाठागांव का रहने वाला है और करीब एक साल से कारोबारी के यहां काम कर रहा था। घटना के बाद से उसका मोबाइल बंद है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। उसकी तलाश के लिए शहरभर में दबिश दी जा रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। खम्हारडीह थाना प्रभारी आईपीएस मान्सी नानाभाई साकुरे ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।

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रायगढ़ में लापरवाही पर ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, संजय मैदान प्रोजेक्ट की निविदा निरस्त

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में विकास कार्य में देरी करने वाले ठेकेदार के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की है। संजय मैदान के निर्माण कार्य को तय समय में पूरा नहीं करने पर निगम आयुक्त ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही उसकी निविदा रद्द करते हुए जमानत राशि भी जब्त कर ली गई है। इस परियोजना में फेंसिंग, गेट निर्माण, पाथवे, नाली, बिजली व्यवस्था, ग्राउंड तैयार करना और बैठने की व्यवस्था जैसे कई काम शामिल थे। इन कार्यों की जिम्मेदारी कान्हा कंस्ट्रक्शन को दी गई थी, जिसकी समय-सीमा करीब पांच महीने तय की गई थी। हालांकि तय अवधि बीतने के बाद भी काम में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। नगर निगम ने 29 सितंबर 2025 को पहला नोटिस जारी किया था, जिसके बाद दूसरा और अंतिम नोटिस भी भेजा गया, लेकिन ठेकेदार की ओर से कोई सुधार नहीं किया गया। स्थिति को देखते हुए निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने कड़ा कदम उठाते हुए अनुबंध को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया। साथ ही नियमों के तहत ठेकेदार की जमानत राशि भी जब्त कर ली गई। इसके अलावा, संबंधित ठेकेदार को एक साल तक किसी भी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। नगर निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शहर के विकास कार्यों में देरी या लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और तय समय में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा नहीं करने पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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रायगढ़ के जंगल में मिला हाथी के शावक का शव, मौत की वजह स्पष्ट नहीं

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगल में एक हाथी के छोटे शावक का शव मिलने से वन विभाग में हलचल मच गई है। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन फिलहाल मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। यह मामला लैलूंगा वन परिक्षेत्र का है, जहां बुधवार सुबह हाथी मित्र दल के सदस्य चिल्कागुड़ा और अंडोडेरा क्षेत्र में हाथियों की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कक्ष क्रमांक 176 आरएफ में एक शावक मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में शावक के शरीर पर किसी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। पोस्टमार्टम के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, जिसके चलते नमूनों को जांच के लिए बरेली स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। बताया जा रहा है कि लैलूंगा क्षेत्र में 13 हाथियों का एक दल घूम रहा है, जिसमें 4 से 5 शावक भी शामिल हैं। मृत शावक की उम्र एक महीने से कम बताई जा रही है और वह इसी दल का हिस्सा था। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती तौर पर किसी संक्रमण की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

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रायगढ़ में वर्दी में नशे में मिला आरक्षक, VIDEO वायरल होने के बाद सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक पुलिस आरक्षक का नशे की हालत में वर्दी पहनकर बेसुध पड़े होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरक्षक को निलंबित कर दिया। जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ थाना में पदस्थ आरक्षक दिलेश चंद्रा का वीडियो बुधवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया। वीडियो में वह क्लब ग्राउंड में वर्दी पहने हुए नशे की हालत में पड़ा हुआ दिखाई दे रहा था। किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में आरक्षक का आचरण उसके पद की गरिमा के विपरीत पाया गया, जिसके चलते उसे तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के दौरान आरक्षक का मुख्यालय रक्षित केंद्र रायगढ़ तय किया गया है और इस अवधि में उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। एसएसपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और वर्दी की गरिमा के खिलाफ किसी भी तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली समिति में शामिल हुए विधायक रिकेश सेन, फुले जयंती कार्यक्रमों में निभाएंगे भूमिका

भिलाई के वैशाली नगर से विधायक रिकेश सेन को केंद्र सरकार की एक अहम समिति में शामिल किया गया है। यह उच्च स्तरीय समिति महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की योजना और संचालन से जुड़ी है। इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस समिति में देशभर की 126 प्रमुख हस्तियों को शामिल किया गया है, जिनमें रिकेश सेन को भी सदस्य बनाया गया है। समिति का काम विभिन्न राज्यों में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना और उनके बेहतर संचालन के लिए मार्गदर्शन देना है। ये कार्यक्रम 11 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 11 अप्रैल 2028 तक दो साल तक चलेंगे। इनका उद्देश्य महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना है, खासकर सामाजिक समानता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना। सरकार ने इस समिति के गठन को 13 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है, जिसके बाद से ही देशभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। रिकेश सेन को इस जिम्मेदारी की जानकारी भारत सरकार के संयुक्त सचिव समर नंदा द्वारा भेजे गए पत्र के माध्यम से दी गई। पत्र में उनके अनुभव और सुझावों को कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। आने वाले समय में इस समिति की बैठकों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहेगी और वे इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे।

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दुर्ग के गांवों में पानी का संकट गहराया, ग्रामीण बोले—शराब सस्ती, पानी महंगा

दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर नगपुरा के पास अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात बेहद गंभीर हैं। यहां ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर गांव में अवैध शराब की बिक्री खुलेआम जारी है। करीब 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में पानी का एकमात्र सहारा एक बोरवेल है, जिसकी क्षमता बेहद कम है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जो देर रात तक जारी रहती हैं। इस समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई और लोगों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं गांव में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध है। पूर्व सरपंच सुमरन साहू ने बताया कि इस मुद्दे को कई बार प्रशासन के सामने उठाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अवैध शराब ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है। पिछले साल कलेक्ट्रेट घेराव के बाद शिवनाथ नदी से पानी लाने के लिए करीब 31 लाख रुपये की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल सका। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का पैसा खर्च हो गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल और आंदोलन करेंगे। साथ ही पाइपलाइन निर्माण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की गई है। सिर्फ अंजोरा ही नहीं, बल्कि पाटन क्षेत्र के औरी, उतई थाना इलाके के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा, अचानकपुर, सेलूद और छाटा जैसे कई गांवों में भी पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और ऐसे आरोप निराधार हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिले में रोजाना अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि अवैध शराब की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी बताते हुए संबंधित योजनाओं में देरी को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही

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ठगी के आरोपी जय प्रकाश यादव फरार, 5 हजार का इनाम घोषित

राजनांदगांव पुलिस ने ठगी के आरोपी और खुद को बीजेपी नेता बताने वाले जय प्रकाश यादव को फरार घोषित करते हुए उस पर 5 हजार रुपये का इनाम रखा है। वही जय प्रकाश यादव, जिसने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की हत्या की साजिश का दावा किया था। पुलिस के अनुसार जय प्रकाश यादव के खिलाफ राजनांदगांव और दुर्ग जिलों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के कई मामले दर्ज हैं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में 5 लोगों से करीब 11 लाख रुपये और दुर्ग जिले के सुपेला थाना क्षेत्र में 6 लोगों से लगभग 16 लाख रुपये ठगने के आरोप हैं। डोंगरगढ़ निवासी धीरज साहू की शिकायत पर दर्ज मामले में बताया गया कि आरोपी ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और पैसे लिए। इसी तरह कई अन्य लोगों से भी अलग-अलग रकम वसूली गई। इस मामले में सह-आरोपी देवेंद्र कुमार गोरले को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जय प्रकाश यादव अभी भी फरार है। दुर्ग में दर्ज दूसरे मामले में भी आरोपी ने किसानों और युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर लाखों रुपये ऐंठे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग रकम तय की गई थी। कुछ लोगों ने पैसे देने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी और कर्ज भी लिया। पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुटी है और उसकी जानकारी देने वालों को 5 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की गई है। साथ ही सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखने की बात भी कही गई है। गौरतलब है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद मार्च महीने में जय प्रकाश यादव ने एक वीडियो जारी कर खुद को चर्चा में लाया था, जिसमें उसने एक फाइल दिखाते हुए विधायक की हत्या की साजिश का दावा किया था। हालांकि, उस दावे के बाद से न तो कोई ठोस जानकारी सामने आई और न ही आरोपी सार्वजनिक रूप से दिखाई दिया।

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रेरा कोर्ट नहीं, नियामक संस्था है: हाईकोर्ट ने कहा—शिकायत पर समय सीमा लागू नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को अदालत की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, बल्कि यह एक विशेष नियामक संस्था है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई तय समय सीमा नहीं है, इसलिए देरी के आधार पर शिकायत को खारिज करना उचित नहीं है। यह मामला जगदलपुर निवासी निधि साव से जुड़ा है, जिन्होंने दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित ग्रीन अर्थ सिटी परियोजना में एक फ्लैट बुक किया था। उन्होंने बिल्डर पर समय पर कब्जा नहीं देने और निर्माण की गुणवत्ता खराब होने का आरोप लगाया था। निधि साव ने पहले स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने रेरा में याचिका दायर की। रेरा ने बिल्डर को दो महीने के भीतर निर्माण पूरा कर कब्जा देने का निर्देश दिया और साथ ही खरीदार को बकाया राशि जमा करने के लिए कहा। इस आदेश से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई करने के बजाय यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि शिकायत देर से की गई है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने ट्रिब्यूनल के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रेरा कानून की धारा 31 में शिकायत दर्ज करने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए केवल देरी के आधार पर केस खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने मामले को वापस ट्रिब्यूनल को भेजते हुए निर्देश दिया कि अब इस पर नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाए, न कि तकनीकी आधार पर।

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डंगनिया टंकी में लापरवाही से 34 लाख लीटर पानी बर्बाद, डेढ़ लाख आबादी की सप्लाई ठप

रायपुर में पहले से जारी पानी संकट के बीच नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। डंगनिया स्थित पानी टंकी से बुधवार सुबह सप्लाई पूरी तरह प्रभावित रही, जिससे शहर के 10 से अधिक इलाकों में करीब 1.5 लाख लोगों को पानी नहीं मिल सका। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम सप्लाई के बाद टंकी का वॉल्व बंद किया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वह पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। इसके चलते ओवरहेड टैंक भरने के बाद रातभर पानी बहता रहा और करीब 34 लाख लीटर पानी बर्बाद हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही जल कार्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वॉल्व की समस्या को ठीक किया गया। इसके बाद टंकी को दोबारा भरा गया और शाम तक पानी सप्लाई बहाल की गई। बताया जा रहा है कि डंगनिया टंकी शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों जैसे समता कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, कुशालपुर, सुंदरनगर, पुरानी बस्ती, कंकालीपारा, खो-खो पारा, अमरपुरी और भीमनगर में पानी सप्लाई का मुख्य स्रोत है। इससे पहले भाठागांव में भी मेन राइजिंग लाइन का वॉल्व खराब होने से पानी का फव्वारा फूट पड़ा था, जिसे करीब दो घंटे बाद ठीक किया गया था। जोन-5 के आयुक्त खीरसागर नायक ने कहा कि तकनीकी खराबी के कारण यह समस्या हुई, जिसे तुरंत सुधार लिया गया है। साथ ही वॉल्व की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। इधर, पानी संकट को लेकर शहर में असमानता की तस्वीर भी सामने आई है। जहां वीवीआईपी इलाकों में टैंकर से पर्याप्त पानी पहुंच रहा है, वहीं आम लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं। महापौर मीनल चौबे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक की और स्पष्ट कहा कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने शहर में पानी के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कुछ इलाकों में बोर से पानी निकालकर बेचा जा रहा है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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रायपुर में मॉल पार्किंग पर बड़ा फैसला, उपभोक्ता फोरम ने कहा—शुल्क वसूली अवैध

राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता आयोग की अतिरिक्त बेंच ने मॉल पार्किंग शुल्क को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने साफ कहा है कि मॉल प्रबंधन ग्राहकों से पार्किंग के नाम पर पैसे नहीं ले सकता और इसे पूरी तरह नि:शुल्क करना होगा। यह मामला सिविल लाइन निवासी अजिनेश शुक्ला से जुड़ा है, जो 15 जून 2025 को अपनी कार से एक मॉल पहुंचे थे। वे केवल अपनी बुजुर्ग मां को छोड़ने गए थे, लेकिन इसके बावजूद उनसे 30 रुपये पार्किंग शुल्क लिया गया। इसे अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने की। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि किसी भी वाणिज्यिक भवन को निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दी जाती है कि पार्किंग सुविधा आम जनता के लिए आवश्यक हिस्सा होगी। ऐसे में मॉल या बिल्डर इसके लिए अलग से शुल्क नहीं ले सकते। आयोग ने यह भी कहा कि मॉल का उद्देश्य ग्राहकों को सुविधाएं देना है, जबकि प्रबंधन पहले से ही दुकानों से किराया और मेंटेनेंस शुल्क लेता है। ऐसे में ग्राहकों पर अतिरिक्त पार्किंग शुल्क डालना गलत है। फोरम ने मॉल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग पूरी तरह मुफ्त की जाए। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया है। यह राशि 45 दिनों के भीतर देनी होगी, अन्यथा 7% वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा। हालांकि, इस फैसले के बाद भी शहर के कई मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली जारी है। जांच के दौरान सामने आया कि कई जगह एंट्री पर पर्ची दी जाती है और बाहर निकलते समय शुल्क लिया जाता है। कुछ स्थानों पर एंट्री के समय ही पैसा वसूला जा रहा है, जिससे लोगों और कर्मचारियों के बीच बहस की स्थिति भी बन रही है।

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