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पटना हिट-एंड-रन कांड: कॉन्स्टेबल कोमल के परिवार पर मौत का साया, मां की गुहार – “छोटी बेटी को नौकरी दिलाएं”

पटना: अटल पथ पर हुए हिट-एंड-रन कांड में मारी गई कॉन्स्टेबल कोमल कुमारी का परिवार दुखों के सागर में डूब गया है। कोमल अपने चार बहनों और माता-पिता की एकमात्र आस थी, जिसकी तनख्वाह से घर का खर्च चलता था। उसकी मौत ने परिवार को सदमे में डाल दिया है। मां रंजू देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं और सरकार से इंसाफ के साथ-साथ अपनी छोटी बेटी के लिए नौकरी की मांग कर रही हैं। “मेरी बेटी चली गई, अब छोटी को नौकरी चाहिए” – मां का रुदन रोती हुई मां रंजू देवी ने कहा, “हमारे पांच बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं। कोमल ही घर की जिम्मेदारी संभालती थी। अब वो चली गई, तो हमारी छोटी बेटी को नौकरी मिलनी चाहिए। हमें इंसाफ चाहिए।” उन्होंने बताया कि रात दो बजे एकंगरसराय थाने से फोन आया था, जिसमें हादसे की खबर दी गई। परिवार तुरंत पटना पहुंचा, लेकिन तब तक कोमल की मौत हो चुकी थी। “वो हमारी चौथी बेटी थी, पूरे घर का सहारा थी। अब उसके बिना कैसे गुजारा होगा?” गरीब परिवार की एकमात्र कमाने वाली थी कोमल कोमल नालंदा के धनहर गांव के एक गरीब किसान परिवार से थी। पिता प्रमोद प्रसाद पंजाब में मजदूरी करते थे, जबकि कोमल ने महज 22 साल की उम्र में बिहार पुलिस की नौकरी पाकर परिवार को संभाला था। वह चार साल पहले पुलिस में भर्ती हुई थी और हाल ही में श्रीकृष्णापुरी थाने में 112 डायल सेवा में तबादला हुआ था। मां ने बताया कि कोमल ने उनसे आखिरी बार दो दिन पहले बात की थी, जब वह घर के खर्च और छोटी बहन की पढ़ाई को लेकर चिंतित थी। अब पिता लुधियाना से वापस आ रहे हैं, जबकि पूरा गांव कोमल की मौत पर शोक में डूबा है। बुधवार रात श्रीकृष्णापुरी थाने के पास अटल पथ पर पुलिसकर्मी वाहनों की जांच कर रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में कोमल की मौत हो गई, जबकि उपनिरीक्षक दीपक कुमार और एएसआई अवधेश कुमार घायल हो गए। पुलिस ने कार के दो यात्रियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ड्राइवर फरार है। पटना एसएसपी अवकाश कुमार ने बताया कि “पुलिस टीम वाहन चेक कर रही थी कि तेज गति से आई कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी।” कोमल की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ऐसे मामलों में जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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शेयर ट्रेडिंग ठगी: 2.66 करोड़ की धोखाधड़ी में MBA और IT एक्सपर्ट समेत 4 गिरफ्तार

रायपुर में शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा का झांसा देकर एक मसाला व्यापारी से 2.66 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों में एक MBA डिग्री धारक और एक IT विशेषज्ञ भी शामिल हैं। मामले की प्रमुख जानकारी: ✔ पीड़ित: हेमंत जैन (मसाला व्यापारी, गुढ़ियारी)✔ ठगी की राशि: 2 करोड़ 66 लाख रुपये✔ गिरफ्तार आरोपित: ठगी का तरीका: पुलिस की कार्रवाई: बड़ा सवाल: यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के परिष्कृत तरीकों को उजागर करता है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के मुखिया की गिरफ्तारी से पूरा नेटवर्क उजागर हो सकता है।

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4 साल जेल में रहने के बाद निर्दोष व्यक्ति बरी: नाबालिग ने प्रेग्नेंसी छुपाने के लिए लगाया था झूठा बलात्कार का आरोप

रायपुर के एक विशेष न्यायालय ने एक चौंकाने वाले मामले में एक निर्दोष व्यक्ति को बरी कर दिया, जिसे एक नाबालिग लड़की ने झूठे बलात्कार के आरोप में फंसाया था। यह मामला 4 साल पुराना है, जिसमें आरोपी को गलत तरीके से सजा मिली थी, लेकिन डीएनए टेस्ट के बाद सच सामने आया। मामले की मुख्य बातें: ✔ नाबालिग ने झूठ बोला था: लड़की ने अपनी प्रेग्नेंसी छुपाने और अपने वास्तविक प्रेमी को बचाने के लिए एक निर्दोष व्यक्ति पर झूठा बलात्कार का केस दर्ज कराया था।✔ 4 साल जेल में बिताए: आरोपी को गलत आरोपों में सजा मिली और उसे 4 साल जेल में रहना पड़ा, जबकि वह पूरी तरह निर्दोष था।✔ डीएनए टेस्ट ने खोली पोल: जब बच्ची और आरोपी का डीएनए टेस्ट हुआ, तो पता चला कि आरोपी बच्ची का पिता नहीं है। इसके बाद लड़की ने अपना झूठ स्वीकार कर लिया।✔ अदालत ने आरोपी को बरी किया: विशेष न्यायालय ने पीड़िता की गवाही को अविश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। क्यों लगाया था झूठा आरोप? न्यायालय का फैसला: सवाल उठते हैं: यह मामला एक बार फिर झूठे आरोपों के दुष्परिणाम को उजागर करता है। अदालत के फैसले के बाद न्याय तो मिल गया, लेकिन 4 साल की जेल की सजा एक निर्दोष व्यक्ति के जीवन का बड़ा नुकसान है।

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सरगुजा: मुफ्त इलाज-शिक्षा के झांसे में मतांतरण की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

सरगुजा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ग्रामीणों को मुफ्त इलाज, शिक्षा और सरकारी नौकरी का लालच देकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया था। प्रमुख तथ्य: कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 299 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया है। अब और गहन जांच की जा रही है। संवेदनशील मुद्दा: छत्तीसगढ़ में लालच देकर धर्म परिवर्तन की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। इस मामले ने एक बार फिर सामाजिक सद्भाव को लेकर चर्चा छेड़ दी है। पुलिस का कहना है कि ऐसे अवैध प्रयासों पर सख्त नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह के धार्मिक उन्माद को रोकने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

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रायपुर: सूदखोर तोमर बंधुओं पर पुलिस का शिकंजा कसा, यूपी में छिपे हैं आरोपी

रायपुर पुलिस ने सूदखोरी के आरोप में फरार चल रहे तोमर बंधुओं – वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर – के करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की। दोनों भाई पिछले 10 दिनों से फरार हैं और संभवतः उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में छिपे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे नेपाल भागने की योजना बना रहे हैं। मामले की प्रमुख जानकारी: ✔ अवैध निर्माण पर बुलडोजर की तैयारी: नगर निगम की टीम ने तोमर बंधुओं के अवैध निर्माण का निरीक्षण किया था। आज बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है।✔ नेपाल भागने की फिराक: आरोपी रायपुर पुलिस से बचने के लिए यूपी में किसी मामले में जेल जाने की भी तैयारी कर रहे हैं, ताकि उनके अन्य अपराध न खुलें।✔ बड़े नेताओं से संबंध: वीरेंद्र तोमर का मंत्रियों और विधायकों से नजदीकी रिश्ता रहा है, जिसके चलते पीड़ित उनसे शिकायत करने से डरते थे।✔ कई संगीन आरोप, कोई सजा नहीं: दोनों भाइयों पर हत्या, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और वसूली जैसे कई मामले दर्ज हैं, लेकिन अब तक किसी में सजा नहीं हुई। पुलिस की कार्रवाई: यह मामला एक बार फिर अपराध और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ को उजागर करता है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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रायपुर: 26 करोड़ के जीएसटी घोटाले में लोहा व्यापारी गिरफ्तार, मृतकों के नाम से बनाई थीं फर्जी फर्में

रायपुर में जीएसटी विभाग ने एक बड़े टैक्स चोरी के मामले में कार्रवाई करते हुए लोहा व्यापारी अमन अग्रवाल (32) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने मृत व्यक्तियों के नाम से कई फर्जी फर्में बनाकर 26 करोड़ रुपये का जीएसटी घोटाला किया। घोटाले की मुख्य बातें: क्या हुआ अब तक? अधिकारियों का बयान: जीएसटी संयुक्त आयुक्त नरेंद्र वर्मा ने बताया कि अमन अग्रवाल ने 262 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन कर 26 करोड़ का गैरकानूनी ITC लाभ उठाया। उसने छत्तीसगढ़ के अन्य व्यापारियों को झूठे बिल बेचकर सरकार को चूना लगाया। यह मामला जीएसटी व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाकर किए गए व्यवस्थित टैक्स फ्रॉड को उजागर करता है। विभाग ने और जांच शुरू कर दी है।

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बिरगांव: सर्वोदय होटल में देह व्यापार का भंडाफोड़, पार्षदों की सक्रियता से हुआ खुलासा

बिरगांव, 7 जून – बिरगांव के चर्चित सर्वोदय होटल में लंबे समय से चल रहे देह व्यापार के गोरखधंधे का आज दोपहर करीब 1:30 बजे भंडाफोड़ किया गया। स्थानीय वार्ड क्रमांक 33 के पार्षद पुत्र राजू सिन्हा और वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद डिकेन सिन्हा को पिछले कई दिनों से इस अवैध गतिविधि की जानकारी मिल रही थी। सूचना की पुष्टि होने के बाद दोनों पार्षदों ने मौके पर छापा मारा। होटल में देह व्यापार का काम खुलेआम चलते देख इसकी सूचना तत्काल 112 नंबर और उरला थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल कर होटल संचालक गणेश समेत दो महिलाओं और एक पुरुष को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। उरला थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर ने बताया कि होटल में अवैध देह व्यापार चलने की पुष्टि होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर थाने लाया गया है। पूछताछ के बाद यह स्पष्ट किया जाएगा कि वहां रुके लोग किस आधार पर होटल में ठहरे थे और उनकी संलिप्तता क्या है। पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। पार्षद डिकेन सिन्हा ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने पुलिस को अवैध शराब बिक्री की जानकारी दी थी, जिस पर कार्रवाई भी की गई थीऔर अब सर्वोदय  होटल में देह व्यापार सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सरवोदय होटल को तत्काल सील कर बंद किया जाए, क्योंकि यह क्षेत्र में लगातार आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

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बिरगांव में दिनदहाड़े ठेलेवाले पर हमला, पुलिस मूकदर्शक

अवैध वसूली में असफल होने पर युवक ने किया धारदार हथियार से वार, घायल की कमाई भी लूटी रायपुर/बिरगांव: राजधानी के बिरगांव क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर कानून व्यवस्था तार-तार हो गई, जब खुलेआम एक फुटपाथ पर ठेले में फल बेचने वाले पर जानलेवा हमला किया गया। घटना बुधवारी बाजार के सामने दोपहर करीब 2 बजे हुई, जहां सुरेंद्र गुप्ता पर इलाके के कुख्यात असामाजिक तत्व राहुल भुंकार (उम्र 25) ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी राहुल ने सुरेंद्र से अवैध वसूली के तहत शराब के लिए पैसे मांगे। इंकार करने पर कहासुनी के दौरान राहुल ने सुरेंद्र पर अचानक हमला कर दिया, जिससे उनके चेहरे और हाथ में गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने आए एक अन्य व्यक्ति को भी चोटें लगीं। हमले के तुरंत बाद सुरेंद्र उरला थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस द्वारा कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही के चलते आरोपी का मनोबल और बढ़ गया और वह शाम 5 बजे फिर घटनास्थल पर लौट आया। इस बार उसने सुरेंद्र से ₹3000 की कमाई भी लूट ली और दोबारा मारपीट की। स्थानीय लोगों में उबाललगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं और पुलिस की निष्क्रियता से क्षेत्र में भय का माहौल है। व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना है कि बिरगांव में असामाजिक तत्व बेखौफ हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जनता की मांगस्थानीय निवासियों ने मांग की है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर उस पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

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उरला में CSIDC की जमीन पर अवैध कब्जा: कांग्रेस ने किया घेराव, अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

रायपुर। 28 मई, उरला बिरगांव क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आज बिरगांव ब्लॉक युवा कांग्रेस अध्यक्ष बैसाखू सागर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CSIDC कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि CSIDC की जमीन पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू के संरक्षण में अवैध निर्माण कर दुकानों को किराये पर दिया जा रहा है। बताया गया कि उरला इंडस्ट्रियल एरिया में जो जमीन पेड़ों के लिए छोड़ी गई थी, वहां पेड़ों को काटकर दुकानें बनाई जा रही हैं। साथ ही बिरगांव नाले के पास स्थित पंप हाउस और उरला सिंघानिया चौक पर भी अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस पूरे मामले में CSIDC के अधिकारियों और स्थानीय भाजपा नेताओं की मिलीभगत है। आरोप है कि नगर निगम बिरगांव के पार्षद वेदराम साहू ने भी इन जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर दुकानों का निर्माण कराया है और उन्हें किराये पर दे दिया गया है। मीडिया से बातचीत में जब न्यूज़22 भारत ने वेदराम साहू से इस मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरा उरला क्षेत्र ही वर्षों से अवैध कब्जे की समस्या से जूझ रहा है। जिस जमीन को लेकर कांग्रेस आरोप लगा रही है, उसके बगल में एक छोटा हनुमान मंदिर स्थित है, जहां बारिश के मौसम में भंडारा करने में परेशानी होती है। इसलिए स्थानीय समितियों ने मिलकर वहां एक ढांचा बनवाया है, जिससे भंडारे की व्यवस्था की जा सके। इस बीच कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द अवैध निर्माण कार्यों को नहीं रोका गया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो युवा कांग्रेस उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इसके लिए प्रशासन पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा |

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रायपुर में दर्ज हुआ कोरोना का पहला मामला: एक खौफनाक दौर की शुरुआत

रायपुर, छत्तीसगढ़ — साल 2020 में जब पूरी दुनिया सामान्य जीवन जी रही थी, किसी ने भी नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों में हर गली, हर घर और हर देश पर एक अदृश्य खतरा मंडराने लगेगा। यही वह समय था जब रायपुर में कोरोना वायरस (COVID-19) का पहला मामला सामने आया। यह एक ऐसा क्षण था जिसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे राज्य की चिंता और भय को जन्म दिया। कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी, लेकिन इसकी भयावहता जल्द ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हुए भारत में भी फैल गई। जब रायपुर में पहला संक्रमित मरीज मिला, तब तक देशभर में यह महामारी चिंता का विषय बन चुकी थी। लेकिन जैसे ही इस वायरस ने छत्तीसगढ़ में दस्तक दी, लोगों की चिंता और डर कई गुना बढ़ गया। रायपुर में संक्रमित मरीज की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया। जिले भर में सघन संपर्क ट्रेसिंग, सैंपल कलेक्शन और क्वारंटीन की व्यवस्था शुरू हो गई। शहर की गलियों में सन्नाटा पसर गया, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य कर दिया गया। अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई गई, ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर्स का इंतज़ाम किया गया। हर व्यक्ति के मन में बस एक ही डर था—कहीं अगला नंबर हमारा न हो। ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी अदृश्य दुश्मन ने पूरे समाज को ठहरने पर मजबूर कर दिया। न स्कूल खुले, न मंदिरों की घंटियाँ बजीं, न बाज़ारों में रौनक रही। यह वो समय था जब हम सबने मिलकर अपनों को बचाने की लड़ाई लड़ी। समाचार चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया पर केवल एक ही शब्द गूंज रहा था—”कोरोना”। लोग टीवी से चिपके रहे, हर अपडेट पर नज़र रखते हुए। लेकिन इस सब के बीच जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, वो थे मजदूर, छोटे दुकानदार और बुज़ुर्ग लोग। कई परिवारों ने अपनों को खोया, और कुछ ने कभी न भरने वाला खालीपन पाया। इस घटना ने न केवल मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की असलियत उजागर की, बल्कि यह भी बताया कि जब संकट आता है, तो समाज में एकजुटता और संवेदनशीलता की कितनी ज़रूरत होती है। आज भले ही हम उस भयावह समय से निकल चुके हैं, लेकिन वो डर, वो सन्नाटा और वो संघर्ष कभी भुलाए नहीं जा सकते। रायपुर में मिला पहला कोरोना मरीज उस इतिहास की पहली स्याही थी, जिसने आने वाले कई अध्यायों को लिखा।

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