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रायपुर: गुरु घासीदास जयंती की शोभायात्रा में चाकूबाजी, डांस को लेकर हुए विवाद में युवक की मौत

रायपुर में गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मोवा रोड इलाके में DJ पर नाचने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक 18 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में करीब छह युवकों को हिरासत में लिया है, जिनमें कुछ नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। घटना गुरुवार देर रात मोवा बाजार के पास हुई। शोभायात्रा में धुमाल बैंड की धुन पर नाचते समय कुछ युवकों के बीच कथित छेड़खानी को लेकर कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। इसी दौरान किसी युवक ने धारदार हथियार से 18 वर्षीय दिनेश निषाद, पिता गोपाल निषाद, निवासी डबरीपारा (मोवा तालाब के पास) पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल दिनेश को देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जोमैटो डिलीवरी ब्वॉय था मृतक पंडरी थाना प्रभारी स्वराज त्रिपाठी ने बताया कि मृतक दिनेश निषाद जोमैटो में डिलीवरी ब्वॉय के तौर पर काम करता था। घटना के बाद पुलिस ने आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पंडरी थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का दावा है कि शनिवार तक पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। समाज के लोगों ने जताया आक्रोश घटना से नाराज समाज के पदाधिकारी शुक्रवार शाम पंडरी थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि शोभायात्रा में कई बस्तियों के लोग शामिल थे। भीड़ में धुमाल बैंड के साथ घुसे कुछ युवकों को बाहर निकालने के दौरान विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और CCTV फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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BJP नेता द्वारा CM से 1500 करोड़ मांगने के दावे पर सियासी घमासान, FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि एक भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से 1500 करोड़ रुपए की मांग की है। वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। भाजपा ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे कांग्रेस की सोची-समझी साजिश करार दिया है। मामले को गंभीर मानते हुए रायपुर उत्तर विधानसभा से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है। विधायक ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं और सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा जानबूझकर झूठा और भ्रामक वीडियो फैलाया गया, जिसका उद्देश्य भाजपा नेतृत्व और राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाना है। पुरंदर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई गई बातें मनगढ़ंत हैं और मुख्यमंत्री या भाजपा के किसी भी नेता ने इस तरह की कोई मांग नहीं की है। उनका कहना है कि वीडियो में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और झूठे संवाद जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई है। विधायक के मुताबिक यह दुष्प्रचार न केवल नेताओं की छवि खराब करने का प्रयास है, बल्कि इससे जनता को गुमराह कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास पर भी चोट पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि फर्जी वीडियो के जरिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, संगठन महामंत्री अजय जम्वाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव और संगठन महामंत्री पवन साय पर कथित तौर पर 1500 करोड़ रुपए की ‘वसूली’ का झूठा आरोप लगाया गया है। पुरंदर मिश्रा ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी जाए और वीडियो बनाने, अपलोड करने और वायरल करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत के साथ पुलिस को वीडियो के स्क्रीनशॉट, लिंक और संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की सूची भी सौंपी गई है। शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह वीडियो कांग्रेस की ओर से जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, सफाई देना उनकी जिम्मेदारी है। सुशील शुक्ला ने कहा कि अगर 1500 करोड़ रुपए के लेन-देन का आरोप लगा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि छोटे-छोटे मामलों में ईडी और ईओडब्ल्यू जांच करती है, तो इस मामले में भी जांच से क्यों डर है। एफआईआर दर्ज कराना केवल दबाव बनाने की कोशिश है।

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निजी स्कूलों में RTE से अब सिर्फ कक्षा-1 में मिलेगा दाखिला

नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 में गरीब बच्चों की एंट्री बंद, अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों को नर्सरी के बजाय सीधे कक्षा-1 से ही प्रवेश मिलेगा। यह व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। सरकार के इस फैसले से राज्य को सालाना करीब 63 करोड़ रुपए की बचत होगी, लेकिन इसका सीधा असर गरीब परिवारों और उनके बच्चों पर पड़ेगा। पहले जहां नर्सरी से ही बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलती थी, अब अभिभावकों को नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 की पूरी फीस खुद वहन करनी होगी। क्यों बदला गया नियम आरटीई अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसी आधार पर निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। करीब 12 साल पहले छत्तीसगढ़ में नर्सरी से ही RTE के तहत दाखिले की अनुमति दी गई थी, लेकिन नए निर्देशों में इसे खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ कक्षा-1 को ही प्रवेश कक्षा माना जाएगा। गरीब बच्चों के सामने मुश्किलें इस बदलाव के बाद बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे कक्षा-1 से पहले निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जो अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम होंगे, वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला दिलाएंगे। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के पास आंगनबाड़ी या सीमित सरकारी विकल्प ही बचेंगे। अधिकांश सरकारी स्कूलों में नर्सरी की सुविधा नहीं है, सिर्फ कुछ आत्मानंद स्कूलों में ही पीपी-1 और पीपी-2 संचालित हैं। फायदे और नुकसान नुकसान फायदा शिक्षा विशेषज्ञों की चिंता शिक्षाविदों का मानना है कि 3 से 6 वर्ष की उम्र बच्चों के विकास के लिए सबसे अहम होती है। इस उम्र में भाषा, व्यवहार और सीखने की बुनियाद पड़ती है। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित रहने पर गरीब बच्चों का शैक्षणिक स्तर कमजोर रह सकता है। इससे आत्मविश्वास में कमी, पढ़ाई में पिछड़ना और ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ सकता है। खर्च का गणित ऐसे समझें इस सत्र में प्रदेश के 6,947 निजी स्कूलों में RTE के तहत करीब 53 हजार सीटें थीं। इनमें से लगभग 30 हजार सीटें नर्सरी स्तर की थीं। सरकार प्रति छात्र 7 हजार रुपए सालाना की प्रतिपूर्ति करती थी। यदि नर्सरी से लेकर केजी तक 90 हजार बच्चों को शामिल किया जाए, तो सरकार पर लगभग 63 करोड़ रुपए का वार्षिक खर्च आता था, जो अब बचेगा। एक्सपर्ट की राय शिक्षाविद राजीव गुप्ता के अनुसार, यह फैसला शैक्षणिक असमानता को और बढ़ाएगा। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित बच्चे फॉनिक्स, बुनियादी शब्दावली और कक्षा की दिनचर्या से अनजान रहेंगे। इससे कक्षा-1 का अंग्रेजी माध्यम पाठ्यक्रम उनके लिए भारी साबित होगा। परिणामस्वरूप स्कूलों में रेमेडियल क्लासेस की जरूरत पड़ेगी, लेकिन संसाधनों की कमी इसे मुश्किल बना देगी। यह स्थिति अभिभावकों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगी और बच्चों के स्कूल छोड़ने की आशंका भी बढ़ा सकती है।

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शराब घोटाला मामला: ED रिमांड पर सौम्या चौरसिया, सिंडिकेट से 2500 करोड़ की अवैध कमाई का दावा

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर लिया है। इससे पहले उन्हें दो दिन की रिमांड पर रखा गया था। प्रारंभिक रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ED ने उन्हें दोबारा PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां विस्तारित रिमांड की अनुमति दी गई। ED ने सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर की है। जांच एजेंसी के अनुसार, सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर–चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड में कई अहम सबूत सामने आए हैं। ED का कहना है कि ACB/EOW द्वारा IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (POC) की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले से सौम्या चौरसिया को लगभग 115.5 करोड़ रुपये मिले। डिजिटल साक्ष्यों, जब्त दस्तावेजों और लिखित बयानों से यह संकेत मिलता है कि सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं। ED के अनुसार, वे अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल सहित सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों के बीच समन्वयक और मध्यस्थ की भूमिका निभाती थीं, जिससे अवैध धन के उत्पादन और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिला। चैट्स से यह भी पता चला कि सिंडिकेट के शुरुआती गठन में उनकी अहम भूमिका रही और उन्होंने आबकारी विभाग में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में भी हस्तक्षेप किया। इस मामले में पहले ही अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लो, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच अब भी जारी है। बचाव पक्ष का आरोपसौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिया ने आरोप लगाया कि ED ने उन्हें पूछताछ के नाम पर जोनल ऑफिस बुलाकर शाम 5:30 बजे अवैध रूप से गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट जांच के कहानी और रकम बदली गई। वहीं, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कोर्ट में पेशी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और प्रताड़ना के आरोप लगाए। पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारीED ने सौम्या चौरसिया को इससे पहले दिसंबर 2022 में कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया था। वे करीब ढाई साल जेल में रहीं और छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुई थीं। इसके बाद अब शराब घोटाले में उनकी दोबारा गिरफ्तारी हुई है। कोयला, DMF और आय से अधिक संपत्ति मामलों सहित वे अब तक चार अलग-अलग घोटालों में जेल जा चुकी हैं। व्हाट्सऐप चैट और ‘बिग बॉस’ ग्रुपED की प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट में सामने आया कि शराब घोटाले को संचालित करने के लिए ‘बिग बॉस’ नाम से एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, चैतन्य बघेल और अन्य अहम लोग शामिल थे। इसी ग्रुप के जरिए पैसों के लेन-देन और निर्देश साझा किए जाते थे। 49 करोड़ से अधिक की संपत्ति अटैचACB-EOW ने हाल ही में सौम्या चौरसिया के खिलाफ 8000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी के मुताबिक, 17 साल की नौकरी में उन्हें 2.51 करोड़ रुपये वेतन मिला, जबकि उन्होंने करीब 49.69 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां खरीदीं। इन संपत्तियों को अटैच कर लिया गया है। शराब घोटाले की कार्यप्रणालीED और EOW की जांच में सामने आया है कि यह घोटाला तीन स्तरों पर किया गया— इन सभी तरीकों से हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा जांच एजेंसियों ने किया है।छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर लिया है। इससे पहले उन्हें दो दिन की रिमांड पर रखा गया था। प्रारंभिक रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ED ने उन्हें दोबारा PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां विस्तारित रिमांड की अनुमति दी गई। ED ने सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर की है। जांच एजेंसी के अनुसार, सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर–चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड में कई अहम सबूत सामने आए हैं। ED का कहना है कि ACB/EOW द्वारा IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (POC) की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले से सौम्या चौरसिया को लगभग 115.5 करोड़ रुपये मिले। डिजिटल साक्ष्यों, जब्त दस्तावेजों और लिखित बयानों से यह संकेत मिलता है कि सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं। ED के अनुसार, वे अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल सहित सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों के बीच समन्वयक और मध्यस्थ की भूमिका निभाती थीं, जिससे अवैध धन के उत्पादन और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिला। चैट्स से यह भी पता चला कि सिंडिकेट के शुरुआती गठन में उनकी अहम भूमिका रही और उन्होंने आबकारी विभाग में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में भी हस्तक्षेप किया। इस मामले में पहले ही अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लो, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच अब भी जारी है। बचाव पक्ष का आरोपसौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिया ने आरोप लगाया कि ED ने उन्हें पूछताछ के नाम पर जोनल ऑफिस बुलाकर शाम 5:30 बजे अवैध रूप से गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट जांच के कहानी और रकम बदली गई। वहीं, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कोर्ट में पेशी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और प्रताड़ना के आरोप लगाए। पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारीED ने सौम्या चौरसिया को इससे पहले दिसंबर 2022 में कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया था। वे करीब ढाई साल जेल में रहीं और छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुई थीं। इसके बाद

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राजधानी के 18 प्रमुख चौराहों का बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, बनेंगे लेफ्ट-फ्री रोड जंक्शन

राजधानी रायपुर में बढ़ते यातायात दबाव और रोज़ लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। शहर के 18 सबसे ज्यादा जामग्रस्त चौराहों को अब आधुनिक लेफ्ट-फ्री रोड जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 9.2 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। सुबह और शाम के व्यस्त समय में ट्रैफिक सिग्नल पर वाहनों की लंबी कतारें आम समस्या बन चुकी हैं। इसी को देखते हुए निगम ने ऐसे चौराहों की पहचान की है, जहां लेफ्ट टर्न के कारण सबसे ज्यादा अवरोध होता है। नए कॉन्सेप्ट के तहत बाएं मुड़ने वाले वाहनों को सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा। इन चौराहों पर होगा काम जयस्तंभ चौक, अनुपम गार्डन चौक, शास्त्री चौक, भगत सिंह चौक, खजाना चौक, भारतमाता चौक, कालीबाड़ी, महिला थाना, राजीव गांधी चौक समेत कुल 18 चौराहों पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी। परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। जयस्तंभ चौक में क्या बदलाव होंगे जयस्तंभ चौक राजधानी का सबसे व्यस्त चौराहा है, जहां से रोजाना करीब 1.25 लाख वाहन गुजरते हैं। यहां सर्कल का रेडियस बढ़ाकर 3.69 मीटर से 9.23 मीटर किया जाएगा। चारों दिशाओं के डिवाइडर को छोटा किया जाएगा और तीन लेन को स्पष्ट करने के लिए पेवमेंट मार्किंग की जाएगी। लेफ्ट टर्न को पूरी तरह फ्री बनाने के लिए चारों ओर ट्रैफिक आईलैंड बनाए जाएंगे। इससे तीसरी लेन केवल बाएं मुड़ने वाले वाहनों के लिए होगी और जाम की स्थिति कम होगी। भगत सिंह चौक का भी बदलेगा स्वरूप भगत सिंह चौक से प्रतिदिन करीब 90 हजार वाहन गुजरते हैं। यहां तीन मार्गों के डिवाइडर आगे बढ़ाए जाएंगे। शास्त्री चौक से शंकर नगर जाने वाले मार्ग पर तीसरी लेन और अलग-अलग साइज के ट्रैफिक आईलैंड बनाए जाएंगे। इसी तरह शंकर नगर से तेलीबांधा और सीएम हाउस रोड से शास्त्री चौक की ओर लेफ्ट टर्न के लिए भी अलग लेन विकसित की जाएगी। क्यों जरूरी हैं ट्रैफिक आईलैंड ट्रैफिक आईलैंड सड़क पर बनाया गया एक चिन्हित या उठा हुआ हिस्सा होता है, जो वाहनों को सही दिशा में चलने में मदद करता है। लेफ्ट टर्न के लिए अलग लेन बनने से सीधे जाने वाले वाहनों का ट्रैफिक बिना रुकावट चलता है। इससे जाम और टकराव की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। नगर निगम का दावा है कि इन 18 चौराहों पर लेफ्ट-फ्री व्यवस्था लागू होने के बाद राजधानी के ट्रैफिक में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा और लोगों को रोज़मर्रा के जाम से राहत मिलेगी।

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PM आवास योजना में गड़बड़ी का मामला, एक की जमीन पर दूसरे के नाम से बना मकान

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में अनियमितताओं को लेकर पंचायत विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। ताजा मामला बलौदाबाजार जिले के पलारी विकासखंड से सामने आया है, जहां एक व्यक्ति की जमीन पर किसी अन्य के नाम से पीएम आवास स्वीकृत कर मकान बना दिया गया। जानकारी के अनुसार, जमीन के वास्तविक मालिक ने जब इस फर्जीवाड़े की शिकायत ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से की, तो उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, मकान को हटाने के लिए आवेदन देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मजबूरन जमीन मालिक को राजस्व विभाग से लेकर पंचायत विभाग तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत प्रदेश में लगभग 18 लाख आवासों का निर्माण किया जाना है। फर्जी तरीके से किया गया आवास स्वीकृत पीड़ित डोमार देवांगन ने बताया कि पलारी के ग्राम जंगलोर में उनकी मां बसंती देवांगन के नाम पर दो डिसमिल जमीन दर्ज है। इसी में से एक डिसमिल जमीन पर गांव के ही सुकवारो देवांगन के नाम से पीएम आवास स्वीकृत कर मकान बना दिया गया। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों से यह सामने आया है कि आवास स्वीकृति में नियमों की अनदेखी की गई। दस्तावेजों के मुताबिक, सुकवारो देवांगन के नाम से भरे गए फॉर्म में जमीन से संबंधित सभी कॉलम निरंक दर्शाए गए हैं। न तो जमीन के कोई वैध दस्तावेज लगाए गए और न ही किसी तरह का सर्वे कराया गया। इसके बावजूद किसी और की जमीन पर उनके नाम से आवास स्वीकृत कर निर्माण कर दिया गया। हटाने का आवेदन, लेकिन कार्रवाई नहीं डोमार देवांगन ने बताया कि उन्होंने मकान हटाने के लिए दो से तीन बार ग्राम पंचायत और पंचायत विभाग में आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब उन्होंने राजस्व विभाग में कब्जा हटाने और अपने मालिकाना हक को लेकर आवेदन किया है, ताकि उन्हें अपनी जमीन वापस मिल सके।

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देर रात फार्म हाउस में बर्थडे पार्टी की आड़ में हुड़दंग, पुलिस रेड में 22 युवक-युवतियां पकड़े गए

राजधानी के विधानसभा थाना क्षेत्र में स्थित एक फार्म हाउस में देर रात तक चल रही अवैध पार्टी पर पुलिस ने छापा मारकर 22 लोगों को पकड़ा है। इनमें 15 युवक और 7 युवतियां शामिल हैं। मौके पर बिना अनुमति शराब परोसी जा रही थी और तेज आवाज में साउंड सिस्टम चलाया जा रहा था, जिससे आसपास के लोग परेशान थे। पुलिस को बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात सूचना मिली कि पिरदा स्थित जेडी फार्म हाउस में रात 3 बजे तक बर्थडे पार्टी के नाम पर हंगामा किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और छापा मारा। पुलिस के अनुसार, पार्टी में शामिल युवक-युवतियां नशे में थे और समझाइश के बावजूद हंगामा करते रहे। इसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पार्टी बंद कराई। मौके से 15 युवक और 7 युवतियों को पकड़ा गया, जिनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। फार्म हाउस संचालक भी गिरफ्तार देर रात तक पार्टी कराने और अवैध रूप से शराब परोसने के आरोप में जेडी फार्म हाउस के संचालक अमन दुलानी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आउटर इलाके में बढ़ रहा अवैध धंधा पुलिस का कहना है कि शहर के आउटर क्षेत्रों में स्थित कई फार्म हाउस अवैध गतिविधियों का अड्डा बनते जा रहे हैं। यहां संगठित रूप से जुआ, शराब पार्टी और हुक्का पार्टी का आयोजन किया जाता है। इससे पहले भी पुलिस गवली स्थित एक फार्म हाउस में छापा मार चुकी है, जहां जुआ संचालित किया जा रहा था। रिंग रोड-3 और पिरदा इलाके में किराए की जमीन पर कई कबाड़ी, सट्टा और पेट्रोल-डीजल माफिया सक्रिय हैं। पुलिस लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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20 दिसंबर से स्थायी रूप से बंद होगा यह रेलवे फाटक, जानिए रेलवे के फैसले की वजह

रायपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले एक व्यस्त मार्ग पर स्थित संपर्क फाटक संख्या 404 को 20 दिसंबर 2025 से हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन ने इसकी आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल लाइन पर बैकुंठ–सिलियारी सेक्शन में लंबे समय से बन रहा रोड अंडर ब्रिज (RUB) अब पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, किलोमीटर संख्या 802/21-23 पर स्थित फाटक संख्या 404 को यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद किया जाएगा। फाटक की जगह बनाए गए आधुनिक रोड अंडर ब्रिज को 20 दिसंबर 2025 से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इससे रेल और सड़क दोनों तरह के यातायात को अधिक सुरक्षित और सुचारु बनाया जा सकेगा। जाम और हादसों से मिलेगी राहत हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर होने के कारण इस फाटक से रोजाना कई एक्सप्रेस और मालगाड़ियां गुजरती थीं। इसके चलते फाटक बार-बार और लंबे समय तक बंद रहता था, जिससे लोगों को भारी जाम, समय की बर्बादी और दुर्घटनाओं की समस्या झेलनी पड़ती थी। कई मौकों पर एंबुलेंस और अन्य आपात सेवाएं भी प्रभावित होती थीं। रोड अंडर ब्रिज के शुरू होने से इन सभी परेशानियों से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा RUB के चालू होते ही बैकुंठ, सिलियारी और आसपास के गांवों के लोगों को बिना रुके आवागमन की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे के इस फैसले को क्षेत्र के विकास की दिशा में अहम कदम बताया है। रेलवे की जनता से अपील रायपुर रेल मंडल ने लोगों से अनुरोध किया है कि 20 दिसंबर 2025 के बाद फाटक संख्या 404 का उपयोग न करें और केवल रोड अंडर ब्रिज से ही आवागमन करें। साथ ही रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की भी अपील की गई है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह कदम दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित होगा।

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रायपुर: तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आई महिला पत्रकार, हालत नाजुक

राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाके में बुधवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहां तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार महिला पत्रकार को कुचल दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुईं गायत्री सिंह की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उन्हें कमल विहार स्थित वीवाई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज जारी है। जानकारी के मुताबिक, 18 दिसंबर की रात करीब साढ़े 9 बजे गायत्री सिंह स्कूटी से घर लौट रही थीं। इसी दौरान सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का पहिया उनके पैरों पर चढ़ गया, जिससे दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। डॉक्टरों के अनुसार, जिस पैर पर ट्रक का पहिया चढ़ा था, उसे सर्जरी के जरिए हटाने की तैयारी की जा रही है। वहीं दूसरे पैर में भी ब्लड सर्कुलेशन नहीं होने की स्थिति बनी हुई है, जिसे लेकर चिकित्सक लगातार निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल गायत्री को 48 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। तेलीबांधा थाना प्रभारी अविनाश सिंह ने बताया कि हादसे के बाद घायल महिला को पहले मेकाहारा के कैजुअल्टी ट्रॉमा यूनिट में ले जाया गया, इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि आरोपी चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जा सके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक की रफ्तार काफी तेज थी और लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ। इस घटना को लेकर परिवार के साथ-साथ मीडिया जगत में भी गहरी चिंता और आक्रोश है। सभी ने दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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Telegram पर बिक रहे प्राइवेट और इंटिमेट वीडियो, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के कपल्स की वीडियो का रेट अधिक

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बंग्ला कपल का इंटिमेट वीडियो काफी वायरल हुआ था। यह वीडियो कपल ने खुद अपने मोबाइल से रिकॉर्ड किया था, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह करोड़ों लोगों के मोबाइल तक पहुँच गया। भास्कर की पड़ताल में यह सामने आया कि ऐसे वीडियो केवल एक घटना नहीं हैं। टेलीग्राम पर खुलेआम बिक रहे प्राइवेट वीडियोजांच में पता चला कि टेलीग्राम पर केवल 100 रुपए से लेकर 400 रुपए तक की कीमत पर सैकड़ों कपल्स के इंटिमेट वीडियो बेचे जा रहे हैं। दलाल इन वीडियो को अलग-अलग ग्रुप के लिंक के जरिए कस्टमर तक पहुँचाते हैं। इन वीडियो में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बंगाल, दिल्ली, पंजाब, यूपी और बिहार के कपल्स शामिल हैं। सिर्फ कपल्स के ही नहीं, 14 साल की बच्चियों से लेकर 40 साल की महिलाओं के न्यूड वीडियो भी दलालों के पास मौजूद हैं। अधिकांश वीडियो सीधे मोबाइल से लीक हुए हैं। ग्रुप और लोकेशन के हिसाब से रेटभास्कर ने एक दलाल उज्जवल से संपर्क किया, जो खुद कॉलेज स्टूडेंट है। उसने बताया कि वीडियो का रेट आयु समूह और लोकेशन पर निर्भर करता है। 14 से 25 साल की लड़कियों के वीडियो की कीमत 200–400 रुपए, जबकि अन्य आयु समूह का 100–200 रुपए है। छत्तीसगढ़ के कपल्स या लड़कियों के वीडियो की मांग अधिक होने के कारण उनका रेट भी ज्यादा होता है। कैसे लीक होते हैं वीडियो?उज्जवल ने बताया कि ज्यादातर मामलों में वीडियो लड़के ही अपने दोस्तों को भेजते हैं, और फिर वीडियो वायरल हो जाता है। कभी-कभी वीडियो इरादतन वायरल करने के लिए रिकॉर्ड किया जाता है। इसके अलावा, रिवेंज पोर्न और साइबर क्राइम के जरिए भी वीडियो लीक होते हैं। चाइल्ड पोर्न का भयावह डेटाजांच में यह भी सामने आया कि कुछ सर्वर पर 5000 से अधिक बच्चों के पोर्न वीडियो मौजूद हैं, जिनकी उम्र 8 से 14 साल के बीच है। ये वीडियो भी टेलीग्राम के जरिए सेल और शेयर किए जा रहे हैं। सेल्फ प्लेजर के लिए वीडियो रिकॉर्ड करना और साइकोलॉजिकल पहलूकई लोग खुद की यौन गतिविधियों का वीडियो रिकॉर्ड करते हैं ताकि उसे देखकर यौन उत्तेजना मिल सके। इसे मनोवैज्ञानिक भाषा में कटोप्ट्रोनोफिलिया कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह आपसी सहमति और निजी सीमा के भीतर हो, तो इसे मानसिक रोग नहीं माना जाता। लेकिन अगर इसमें ब्लैकमेल, दबाव या डर शामिल हो, तो यह मानसिक और कानूनी समस्या बन सकती है। साइबर सुरक्षा और प्राइवेसी चेतावनीसाइबर एक्सपर्ट अक्षय बाजपेयी ने बताया कि मोबाइल निजी हो सकता है, लेकिन उसमें मौजूद डेटा हमेशा सुरक्षित नहीं होता। एक छोटी गलती से आपका डेटा थर्ड पार्टी के हाथ लग सकता है। इसलिए अगर कोई अपने या अपने पार्टनर के साथ प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड करता है, तो प्राइवेसी का खतरा हमेशा रहता है। भारत में कानूनी प्रावधानभारत में ऑनलाइन पोर्न देखना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन इसे बनाना, प्रकाशित करना और फैलाना अपराध है। IT एक्ट 2000 के सेक्शन 67 और 67A के तहत दोषियों को 3 साल की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा IPC के सेक्शन 292, 293, 500, 506 और POCSO एक्ट के तहत भी कार्रवाई होती है। इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के उपाय

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