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रायपुर में डीएड और CAF अभ्यर्थियों पर सख्ती, मंत्रालय घेराव से पहले 175 से अधिक को जेल भेजा गया

राजधानी रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे डीएड और CAF अभ्यर्थियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को डीएड अभ्यर्थियों द्वारा आत्मदाह की कोशिश के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद करीब 125 डीएड अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया, जिनमें 45 महिलाएं और 80 पुरुष शामिल हैं। गुरुवार को मंत्रालय घेराव के लिए निकले CAF अभ्यर्थियों को भी पुलिस ने तूता प्रदर्शन स्थल के प्रवेश द्वार पर रोक दिया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 50 से अधिक अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर सेंट्रल जेल भेज दिया। फिलहाल सभी का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। 60 दिनों से जारी है आंदोलन दोनों समूह के अभ्यर्थी पिछले 60 दिनों से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। अब तक आंदोलन के दौरान 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति आक्रामक प्रदर्शन या घेराव की इजाजत नहीं दी जाएगी। डीएड अभ्यर्थियों का आरोप: आरक्षित पदों पर भी नियुक्ति नहीं डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद निकाले गए थे, जिनमें लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह स्थिति तब है जब राज्य में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री की सरकार है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को आदेश दिए थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया है। CAF वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों की पीड़ा CAF अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन वेटिंग लिस्ट में शामिल 417 अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि पद रिक्त नहीं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में अयोग्य घोषित हुए या उन्होंने नौकरी छोड़ दी, जिससे पद खाली हुए, लेकिन वेटिंग लिस्ट वालों को मौका नहीं दिया गया। समय बीतने के साथ 417 में से 250 से अधिक अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और अब नई भर्ती में शामिल होने के पात्र नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से गुहार लगाने की बात कही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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रायपुर में शिवाजी जयंती पर कुनबी समाज का भव्य महोत्सव: शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में कुनबी समाज द्वारा भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम कोटा स्थित कुनबी समाज भवन में आयोजित होगा, जहां समाज के लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को जोड़ने की पहल समाज के अध्यक्ष महेश्वर धाण्डेकर ने बताया कि सुबह से ही विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों और युवाओं के लिए रंगोली, निबंध लेखन और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य और राष्ट्रभक्ति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उद्देश्य है। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। शोभायात्रा बनेगी मुख्य आकर्षण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भव्य शोभायात्रा होगी। यह यात्रा कुनबी समाज भवन से शुरू होकर जगन्नाथ चौक, रामनगर और भारत माता चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगी। शोभायात्रा में शिवाजी महाराज के जीवन प्रसंगों पर आधारित झांकियां, पारंपरिक परिधान में कलाकारों की प्रस्तुति और ढोल-ताशों की गूंज माहौल को उत्सवमय बनाएगी। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति आयोजन में राजेश मूणत, मीनल चौबे, पार्षद अमन ठाकुर और श्रीकुमार मेनन विशेष रूप से शामिल होंगे। जनप्रतिनिधि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालेंगे। समाज पदाधिकारियों—उपाध्यक्ष लखाराम बेदरे, सचिव राधेश्याम टोंडरे, कोषाध्यक्ष मानिक सिलारे, संयुक्त सचिव दिनेश मिसार और कार्यकारिणी सदस्य कुलेश्वर पारधी व रूपेश घोरमोड़े—ने सभी नागरिकों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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सूरजपुर में दर्दनाक हादसा: बंद कमरे में जलती सिगड़ी से दम घुटा, दंपती और 4 साल की बेटी की मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई गई सिगड़ी एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई। चंद्रपुर गांव में कोयले के धुएं से दम घुटने के कारण पति-पत्नी और उनकी 4 वर्षीय बेटी की मौत हो गई। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के अनुसार, कंवल सिंह मंगलवार रात परिवार के साथ भोजन करने के बाद सोने चले गए। अधिक ठंड होने के कारण वे अपनी पत्नी कुंती (25 वर्ष) और 4 साल की छोटी बेटी के साथ पास में बने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कमरे में सोए। कमरे को गर्म रखने और सुबह जल्दी भोजन बनाने की सुविधा के लिए कुंती जलती हुई सिगड़ी कमरे के अंदर ले गई। कमरे में न तो खिड़की थी और न ही रोशनदान, जिससे पूरी रात धुआं और जहरीली गैस भीतर ही जमा होती रही। सुबह हुआ खुलासा सुबह जब 5 वर्षीय बड़ी बेटी अपनी मां को जगाने पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। अनहोनी की आशंका पर कंवल सिंह के बड़े भाई ने दीवार में छेद कर अंदर झांका। टॉर्च की रोशनी में तीनों को अचेत अवस्था में पड़ा देखा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ⚠️ कार्बन मोनोऑक्साइड: अदृश्य और जानलेवा कोयला जलने पर कई गैसें निकलती हैं, जिनमें सबसे खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड होती है। यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है। जब यह गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है, तो रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इससे शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और दम घुटने से मौत तक हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में सिगड़ी या अंगीठी जलाकर सोना बेहद खतरनाक हो सकता है। ठंड के मौसम में सावधानी बरतना जरूरी है।

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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज: 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सेवा से बदल सकती है तस्वीर

रायपुर। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के फैलते दायरे के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब बुनियादी जरूरत बन चुका है। कई योजनाएं बनीं, बस सेवाएं शुरू भी हुईं, लेकिन आज भी आम लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ‘रायपुर मांगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ अभियान के तहत आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने खुलकर अपनी बात रखी। 350 बसें चलें तो बढ़े भरोसा पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नवा रायपुर और सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बस सुविधा नहीं है। आम लोगों को मंत्री या अधिकारियों से मिलने के लिए 400–500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूट पर चलाई जाएं। उन्होंने निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत बस संचालन को व्यावहारिक विकल्प बताया, ताकि सरकारी फंड की देरी से बचा जा सके। मिनी बसें और लंबी दूरी के रूट जरूरी पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शहर के अंदरूनी इलाकों के लिए मिनी सिटी बसें शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद सेवा लगभग ठप हो गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का मानना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। लंबी दूरी के रूट पर समयबद्ध बस सेवा शुरू होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। जाम से राहत का समाधान राजेश मूणत ने कहा कि शहर में कई बस स्टॉप बने हैं, लेकिन बसें नियमित नहीं चल रहीं। जब तक सिटी बस सेवा व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और रूट प्लानिंग की कमी रही। अब केंद्र की योजनाओं के तहत सुधार की कोशिश की जा रही है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि सस्ती और भरोसेमंद बस सेवा जनता का अधिकार है। सरकार को किराया और रूट निर्धारण पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। परिवहन विभाग की स्थिति परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल ने बताया कि 30 सिटी बसों के परमिट जारी हैं, लेकिन कितनी बसें संचालित हो रही हैं, इसकी जानकारी निगम के पास है। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए किराया निर्धारित है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पीएम ई-बस योजना पर फोकस केंद्र सरकार की पीएम ई-बस योजना के तहत रायपुर को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। जरवाय में करीब 2 हेक्टेयर में बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जो चार महीने में तैयार होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सरोना से 33 केवी लाइन बिछाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समयबद्ध, सस्ती और पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं तो रायपुर में निजी वाहनों की निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी।

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नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की चपेट में आने से युवती की मौत, युवक गंभीर

भिलाई में शुक्रवार रात नेशनल हाईवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ बाइक पर सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना रायपुर से भिलाई आने वाले मार्ग पर चरोदा जीआरपी चौकी के पास रात करीब 10 से 11 बजे के बीच हुई। मृतका की पहचान गूंजा चतुर्वेदी निवासी सुभाष मार्केट, जोन-2, वार्ड 31, बापू नगर खुर्सीपार के रूप में हुई है। घायल युवक 41 वर्षीय दीपक मोंगराज बताया गया है, जो ओडिया मोहल्ला, वार्ड 33, खुर्सीपार भिलाई का रहने वाला है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह प्राथमिक जानकारी के अनुसार दोनों रायपुर से भिलाई लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक तेज गति में थी और संतुलन बिगड़ने के बाद एक ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना भिलाई-3 थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही भिलाई-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। हादसे के कारणों की पुष्टि के लिए आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन विस्तृत जांच जारी है।

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1600 आदिवासी शिक्षक पदों की नियुक्ति को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को भेजे हजारों पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत रिक्त पड़े 1600 अनुसूचित जनजाति (ST) पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से हजारों पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। नियुक्ति नहीं होने से नाराज अभ्यर्थी आमरण अनशन पर अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इससे आक्रोशित अभ्यर्थी और उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। 2300 पदों में 1600 ST, फिर भी नियुक्ति शून्य प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद घोषित किए गए थे, जिनमें से करीब 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है।आदिवासी समाज का आरोप है कि यह स्थिति तब बनी हुई है, जब राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार है। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दावा है कि अनशन के दौरान बिगड़ी 200 से अधिक युवाओं की तबीयत आदिवासी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। आंदोलन के दौरान 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई अभ्यर्थियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। आदिवासी परिवारों पर बढ़ा सामाजिक-आर्थिक दबाव आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे आदिवासी परिवार गहरे सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें आंदोलन और तेज करने की चेतावनी अभ्यर्थियों और आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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उधारी के पैसे को लेकर युवक की हत्या: NSUI नेता और साथियों ने होटल में बंधक बनाकर पीटा, इलाज के दौरान मौत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां उधारी के पैसे को लेकर NSUI के एक नेता और उसके साथियों ने मिलकर एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। होटल के कमरे में बंधक बनाकर लात-घूंसों से पीटे गए युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में NSUI जिला उपाध्यक्ष सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान ऋषि निर्मलकर (19) के रूप में हुई है। वह अपने पिता की कपड़े प्रेस करने की दुकान में हाथ बंटाता था। यह घटना दुर्ग सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पैसे नहीं लौटाए तो उठा लिया रास्ते से पुलिस जांच में सामने आया है कि NSUI जिला उपाध्यक्ष मेजर सागर ने ऋषि को कुछ पैसे उधार दिए थे। जब ऋषि ने पैसे लौटाने में देर की और फोन उठाना बंद कर दिया, तो आरोपी गुस्से में आ गए। 20 जनवरी को ऋषि अपने एक दोस्त के साथ बाइक से घूम रहा था। इसी दौरान स्टेशन रोड पर पीछे से कार में आए मेजर सागर और उसके साथियों ने उसे रोक लिया। जबरदस्ती बाइक से उतारकर उसे कार में बैठाया गया और सीधे दुर्ग स्थित “36 इन होटल” ले जाया गया। होटल के कमरे में बंधक बनाकर की पिटाई बताया जा रहा है कि जिस होटल में ऋषि को ले जाया गया, वहां आरोपी मेजर सागर ही मैनेजर था। होटल के एक कमरे में ऋषि को बंद कर सभी आरोपियों ने उसकी लात-घूंसों से जमकर पिटाई की। अधमरा हालत में उसे होटल के बाहर फेंक दिया गया। इसके बाद ऋषि ने अपने दोस्त को फोन कर बुलाया और किसी तरह घर पहुंचा। घरवालों ने चोटों के बारे में पूछा, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। दो दिन बाद बिगड़ी हालत, अस्पताल में मौत घटना के दो दिन बाद ऋषि की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर भिलाई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर अंदरूनी चोटें बताया गया है। पांच आरोपी गिरफ्तार, सभी ने कबूला जुर्म परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 26 जनवरी को हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पहले 27 जनवरी को दो आरोपियों—NSUI जिला संयोजक प्रशांत राव (26) और लक्की उर्फ किशन ध्रुवे (18) को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 2 फरवरी को पुलिस ने मुख्य आरोपी मेजर सिंह सागर उर्फ राज सिंह सागर (19), काके उर्फ हरविंदर सिंह (20) और अंकित झा (22) को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। सभी आरोपी दुर्ग के निवासी हैं और पूछताछ में उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है और मामले की आगे जांच जारी है।

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भिलाई के कल्याण कॉलेज में हंगामा: प्राचार्य से अभद्रता और सरकारी काम में बाधा, दो आरोपी गिरफ्तार

भिलाई के सेक्टर-7 स्थित कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुई तोड़फोड़ और उपद्रव के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर कॉलेज परिसर में जबरन घुसकर हंगामा करने, प्राचार्य से दुर्व्यवहार करने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। भिलाई नगर थाना पुलिस ने खुर्सीपार निवासी अतुल कुमार चौधरी (19) और नेहरू नगर सुपेला निवासी केतन तिवारी (23) को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा के अनुसार, यह घटना 9 दिसंबर की है। उस दिन कल्याण कॉलेज में प्राचार्य कक्ष के भीतर परीक्षा फॉर्म के सत्यापन और हस्ताक्षर से संबंधित शासकीय कार्य चल रहा था। इसी दौरान कॉलेज का पूर्व छात्र आकाश कन्नौजिया अपने साथ कई छात्रों को लेकर नारेबाजी करते हुए अनधिकृत रूप से कॉलेज परिसर में घुस आया। आरोप है कि सभी आरोपी एकजुट होकर प्राचार्य कक्ष में घुसे और वहां गाली-गलौज शुरू कर दी। उपद्रवियों ने प्राचार्य की टेबल का कांच तोड़ दिया, टेबल पर रखे शासकीय दस्तावेजों को फेंक दिया और कुछ दस्तावेज फाड़कर उन पर स्याही डाल दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने जूते की माला बनाकर प्राचार्य को पहनाने का प्रयास किया और उनके नाम पट्ट पर भी स्याही पोत दी। घटना के दौरान धक्का-मुक्की और हंगामे के कारण कॉलेज में अफरा-तफरी मच गई और शासकीय कार्य पूरी तरह से बाधित हो गया। इसके बाद प्राचार्य की शिकायत पर भिलाई नगर थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस इस केस में पहले ही कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एनएसयूआई के महासचिव आकाश कन्नौजिया भी शामिल है। वहीं, अतुल चौधरी और केतन तिवारी घटना के बाद से फरार चल रहे थे। लगातार दबिश, तकनीकी साक्ष्यों और सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की। पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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रेल मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऊंघते दिखे अफसर, वीडियो वायरल; बिलासपुर जोन को 545 करोड़ ज्यादा, नया प्रोजेक्ट शून्य

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोनल मुख्यालय से एक हैरान करने वाला दृश्य सामने आया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय रेलवे के दो वरिष्ठ अधिकारी नींद में झपकी लेते नजर आए, जिसका वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है। यह वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस सोमवार को आयोजित की गई थी, जिसमें रेल मंत्री ने छत्तीसगढ़ में चल रही और प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की जानकारी साझा की। इस दौरान बिलासपुर जोनल मुख्यालय में मौजूद रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PCCM) जेएस बिंद्रा और प्रमुख चीफ इंजीनियर मुरीत भटनागर कैमरे में झपकी लेते दिखाई दिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिलासपुर जोन के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, डीआरएम राकेश रंजन समेत करीब एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। रेल मंत्री ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में रेल विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इनके पूरा होने से बस्तर जैसे दूरस्थ इलाकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। रेल मंत्री ने रावघाट परियोजना, परमालकसा–खरसिया रेल कॉरिडोर सहित कई महत्वपूर्ण रेल लाइनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद राज्य में ट्रेनों की संख्या मौजूदा स्थिति की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी, जिससे ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों को भी फायदा होगा। इस वर्ष के रेल बजट में छत्तीसगढ़ को 7,470 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 545 करोड़ रुपये अधिक है। बिलासपुर जोन को भी बजट में बढ़ोतरी मिली है, लेकिन इसके बावजूद इस बार कोई भी नई रेल परियोजना स्वीकृत नहीं की गई है। वर्तमान में राज्य में करीब 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में चल रही हैं। इनमें ट्रैक डबलिंग, ट्रिपलिंग, नई लाइन निर्माण, स्टेशन पुनर्विकास, यात्री सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। रेल मंत्री ने बताया कि बीते 11 वर्षों में छत्तीसगढ़ के रेल बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान जहां राज्य को औसतन 311 करोड़ रुपये का वार्षिक रेल बजट मिलता था, वहीं 2026–27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य में अमृत स्टेशन योजना के तहत 32 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिस पर 1,674 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें से डोंगरगढ़ (प्रथम चरण), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में प्रीमियम रेल सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। फिलहाल राज्य से दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस और एक जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को तेज और आधुनिक रेल सुविधा मिल रही है।

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तेलीबांधा पार्किंग विवाद पर निगम का प्लान साफ, आम लोगों से नहीं वसूला जाएगा शुल्क

रायपुर। तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बीच महापौर मीनल चौबे ने निगम की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि सुबह 12 बजे तक आने वाले लोगों से किसी भी प्रकार का पार्किंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही शाम के समय इवनिंग वॉक के लिए आने वालों के लिए अलग से पार्किंग स्पेस सुरक्षित रखा जाएगा। महापौर ने साफ किया कि पार्किंग शुल्क केवल उन होटल और रेस्टोरेंट संचालकों व उनके ग्राहकों से लिया जाएगा, जो घंटों तक सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर देते हैं और इससे यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है। “कमाई नहीं, व्यवस्था सुधार हमारा लक्ष्य” सोमवार को तेलीबांधा पार्किंग मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या को नियंत्रित करना है।उन्होंने आश्वासन दिया कि सुबह की मॉर्निंग वॉक और शाम की इवनिंग वॉक के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। बोर्ड लगते ही शुरू हुआ विरोध नगर निगम द्वारा तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर पार्किंग शुल्क वसूली की तैयारी के तहत जैसे ही सूचना बोर्ड लगाए गए, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इस मुद्दे को मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। फिलहाल निगम द्वारा वाहनों का डाटा संग्रह किया जा रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किस समय, कितने वाहन और किस उद्देश्य से यहां खड़े होते हैं। कर्मचारी तैनात, जुटाया जा रहा डाटा नगर निगम ने जोन क्रमांक-3 और मुख्यालय के कर्मचारियों को दोपहर 3 बजे के बाद तेलीबांधा क्षेत्र में तैनात किया है। ये कर्मचारी— का डाटा जुटा रहे हैं। निगम का कहना है कि इसी आधार पर अंतिम व्यवस्था लागू की जाएगी। वीकेंड पर सबसे ज्यादा दबाव यातायात पुलिस के अनुसार, वीकेंड पर शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर— खड़ी रहती हैं। यानी हर वीकेंड करीब 1600 लोग इस क्षेत्र में शाम से देर रात तक मौजूद रहते हैं। नियम तोड़ने पर कार्रवाई जारी लेन से बाहर वाहन खड़े करने वालों पर यातायात पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। वीकेंड पर रोजाना करीब 70 वाहनों पर ई-चालान की कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा एक टीम पूरे दिन क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी करती है।

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