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अफीम बीज सप्लायर जोधपुर से गिरफ्तार, दुर्ग पुलिस ने अवैध खेती मामले में चौथे आरोपी को पकड़ा

दुर्ग जिले में सामने आए अवैध अफीम खेती मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने चौथे आरोपी को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अफीम की खेती के लिए बीज बाहर से मंगाए गए थे और आरोपी छोटू राम इन्हें उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार आरोपी घटना के बाद राजस्थान भाग गया था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना मोबाइल फोन बंद रखकर छिपा हुआ था। 12 मार्च को पुलिस ने उसे जोधपुर से हिरासत में लिया। मामले में एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। इस केस में पुलिस पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक स्थानीय नेता समेत अन्य सहयोगी शामिल हैं। सभी आरोपियों को 7 मार्च को पकड़ा गया था और फिलहाल उनकी न्यायिक रिमांड समाप्त होने वाली है। पुलिस को आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की जरूरत पड़ सकती है। यह पूरा मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा, झेनझरी और सिरसा गांवों के बीच स्थित खेतों से जुड़ा है, जहां 6 मार्च को सूचना मिलने पर पुलिस ने छापा मारा था। जांच में मक्का की फसल के बीच छिपाकर अफीम के पौधे लगाए गए मिले। पुलिस ने करीब 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली फसल को जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई गई। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से नकद राशि और मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। इससे पहले की कार्रवाई में खेती में उपयोग किए गए ट्रैक्टर, जेसीबी, मोटरसाइकिल और अन्य उपकरण भी जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को जल्द पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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दुर्ग में ट्रैफिक सख्ती का असर, चालान 85% बढ़े तो सड़क हादसों में मौतें घटीं

दुर्ग जिले में यातायात पुलिस की कड़ी कार्रवाई का सकारात्मक असर अब सड़क सुरक्षा के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त चालानी कार्रवाई के चलते सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च के बीच सड़क हादसों में 89 लोगों की मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में इसी अवधि में यह संख्या घटकर 62 रह गई है। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 27 कम लोगों की जान गई है। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में जनवरी में 36, फरवरी में 23 और मार्च में 10 मार्च तक 3 लोगों की मौत दर्ज की गई। पुलिस का मानना है कि यह कमी लगातार चल रहे सघन जांच अभियान और नियमों के कड़ाई से पालन कराने का परिणाम है। चालानी कार्रवाई में भी इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च तक कुल 14,162 चालान काटे गए थे, जबकि 2026 में इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 26,234 हो गई है, जो लगभग 85 प्रतिशत अधिक है। यातायात पुलिस ने दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग, सेंट्रल एवेन्यू, सुपेला चौक, नेहरू नगर चौक और पावर हाउस जैसे व्यस्त क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया है। यहां हेलमेट जांच, ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग और तेज या लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस वाहन चालकों से हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने, शराब पीकर वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील कर रही है।

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बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बकाया बिल पर पेनल्टी माफ और मूल राशि में 75% तक छूट

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से बिजली बिल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने नई समाधान योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बकाया बिल पर लगे जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाएगा, जबकि मूल बिल की राशि में भी 75 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पुराने बकायादार उपभोक्ताओं को राहत देना और उनके बिजली कनेक्शन फिर से बहाल करना है। अधिकारियों के अनुसार बकाया राशि जमा करने के बाद उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना का लाभ भी मिलने लगेगा, जो पहले बकाया होने के कारण नहीं मिल पाता था। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को 30 जून तक पंजीयन कराना होगा। इसके लिए ‘मोर बिजली’ मोबाइल एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्रों में आवेदन किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष शिविर लगाकर लोगों को योजना से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी उपभोक्ता का मूल बिल 10 हजार रुपये है और जुर्माना बढ़कर 40 हजार हो गया है, तो योजना के तहत 40 हजार रुपये का पूरा जुर्माना समाप्त हो जाएगा। वहीं मूल राशि भी घटकर लगभग 2500 रुपये तक रह सकती है। भुगतान करने के बाद उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन पुनः चालू कर दिया जाएगा। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह योजना आम लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए काफी राहतभरी साबित होगी।

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रायपुर में मुंशी 10 लाख लेकर फरार, कंपनी का कैश जमा कराने गया था बैंक

राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में एक कारोबारी के साथ विश्वासघात का मामला सामने आया है, जहां कंपनी का मुंशी 10 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़ित विजय गोयल देवेंद्र नगर के निवासी हैं और आयरन एंड स्टील ट्रेडिंग का व्यवसाय करते हैं। उनका कार्यालय स्टेशन रोड स्थित अरिहंत कॉम्प्लेक्स में संचालित होता है। कंपनी के लेन-देन से संबंधित नकदी इकट्ठा कर बैंक में जमा करने की जिम्मेदारी मुंशी अनिल साल्वे को सौंपी गई थी। बताया गया कि अनिल साल्वे विभिन्न पार्टियों से कंपनी के लगभग 10 लाख रुपये लेकर आया, लेकिन रकम बैंक में जमा कराने के बजाय वह फरार हो गया। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटा तो कारोबारी ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद विजय गोयल ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले को गंभीरता से लिया गया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है।

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प्रदेश में 7 लाख से ज्यादा एक्सपायर रजिस्ट्रेशन वाले वाहन सड़कों पर, मालिकों का रिकॉर्ड भी अधूरा

प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 7 लाख से अधिक कार और दोपहिया वाहन बिना रिन्यूअल, फिटनेस और बीमा के ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये वाहन वर्ष 2005 से 2010 के बीच खरीदे गए थे। उस समय ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू नहीं था, जिसके कारण परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में कई वाहन मालिकों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। नाम-पते अधूरे हैं और मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं हैं। इससे ट्रैफिक नियम उल्लंघन होने पर भी कैमरों के जरिए चालान जारी करना मुश्किल हो रहा है। नियमों के अनुसार 15 साल पुराने वाहनों का या तो दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होता है या उन्हें स्क्रैप घोषित करना होता है। रजिस्ट्रेशन से पहले वाहन की फिटनेस जांच भी अनिवार्य होती है, लेकिन अधिकांश वाहन मालिकों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं कराई। जानकारी के मुताबिक 2005 से 2010 के बीच करीब 8 लाख वाहन खरीदे गए थे, जिनमें से केवल लगभग 1 लाख वाहनों का ही नवीनीकरण कराया गया है। बाकी करीब 7 लाख वाहन अब भी सड़कों पर चल रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में केवल कुछ ही वाहनों को आधिकारिक रूप से कबाड़ घोषित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पुराने और बिना रिकॉर्ड वाले वाहनों का इस्तेमाल अपराध में भी किया जा सकता है, क्योंकि नंबर प्लेट से मालिक की पहचान करना कठिन होता है। हाल ही में एक आपराधिक मामले में आरोपी इसी तरह की एक्सपायर रजिस्ट्रेशन वाली बाइक का उपयोग करते हुए फरार हुआ था। सरकार अब ऐसे वाहनों के लिए समय सीमा तय करने की तैयारी में है। निर्धारित अवधि के बाद जिन वाहनों का नवीनीकरण नहीं कराया जाएगा, उन्हें रिकॉर्ड से हटाकर जब्त कर सीधे स्क्रैप किया जा सकता है।

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रायपुर में व्यापारी से 5 लाख की ठगी, नकली चांदी के सिक्के देकर ले गए कैश और सोना

रायपुर: राजधानी रायपुर में एक व्यापारी के साथ करीब 5 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ठगों ने पुराने चांदी के सिक्के सस्ते दाम में बेचने का लालच देकर व्यापारी से नकद और सोने के जेवर ले लिए और बदले में नकली सिक्कों की पोटली थमा कर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। सस्ते दाम में चांदी देने का दिया लालच यह मामला न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार अमलीडीह निवासी मुरली केसरवानी को कुछ लोगों ने संपर्क कर बताया कि उनके पास बड़ी संख्या में पुराने चांदी के सिक्के हैं। आरोपी अमर कुमार और उसके साथियों ने भरोसा दिलाने के लिए पहले कुछ असली सिक्के दिखाए। इसके बाद बाजार भाव से कम कीमत पर चांदी बेचने का प्रस्ताव दिया, जिससे व्यापारी उनके झांसे में आ गया। पैसे और जेवर लेकर आरोपी हुए फरार सौदा तय होने के बाद तय स्थान पर मुलाकात हुई, जहां मुरली केसरवानी ने आरोपियों को 5 लाख रुपए नकद और कुछ सोने के आभूषण दे दिए। जैसे ही पैसे और जेवर उनके हाथ लगे, आरोपी जल्दी में वहां से निकल गए। जांच में सामने आया नकली सिक्कों का खेल आरोपियों के जाने के बाद जब व्यापारी ने सिक्कों की पोटली खोली और जांच की, तो पता चला कि ऊपर रखे कुछ सिक्के ही असली थे, जबकि अंदर रखे बाकी सिक्के नकली और सस्ती धातु के बने हुए थे। खुद को ठगा महसूस करने के बाद पीड़ित ने तुरंत न्यू राजेंद्र नगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। CCTV फुटेज के आधार पर तलाश जारी पुलिस ने मुख्य आरोपी अमर कुमार और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस अमलीडीह और आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है।

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लापरवाही पर निगम की कार्रवाई, रायगढ़ में दो ठेकेदार कंपनियां ब्लैकलिस्ट

Raigarh नगर निगम ने शहर में विकास और सफाई कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। निगम ने सफाई कार्य में अनियमितता और अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने पर नीलामेश मेन पावर प्राइवेट लिमिटेड को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। वहीं सीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी और काम में देरी पाए जाने पर यशराज स्टील्स फर्म को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। सफाई ठेकेदार का अनुबंध रद्द नगर निगम कमिश्नर Brijesh Singh Kshatriya के निर्देश पर शहर में चल रहे नाला-नाली, सीसी सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आईं। जांच में पाया गया कि बिलासपुर की कंपनी नीलामेश मेन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया और ईपीएफ जमा करने में भी लापरवाही बरती। इसके चलते निगम ने कंपनी का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया और उसकी अमानत राशि भी जब्त कर ली। कर्मचारियों को नहीं मिली जरूरी सुविधाएं निगम के आदेश के अनुसार एजेंसी के पास वाहन और विद्युत शाखा के 94 प्लेसमेंट कर्मचारी कार्यरत थे। अनुबंध के तहत हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना जरूरी था, लेकिन सितंबर 2025 से जनवरी 2026 तक भुगतान में लगातार देरी हुई। इसके अलावा कर्मचारियों को सुरक्षा जैकेट, एप्रन और पहचान पत्र जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। सीसी सड़क निर्माण में भी मिली गड़बड़ी वार्ड क्रमांक 40 में लगभग 26 लाख रुपये की लागत से बन रही सीसी सड़क और वार्ड 29 में अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और देरी पाए जाने पर यशराज स्टील्स फर्म को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। लापरवाह एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जो भी ठेकेदार काम में लापरवाही बरत रहे हैं या नियमों का पालन नहीं कर रहे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गुणवत्ता और समयसीमा से समझौता करने वाली एजेंसियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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दुर्ग-भिलाई में गैस सिलेंडर को लेकर असमंजस, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

Durg और Bhilai में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। जिला प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति सामान्य है, लेकिन कई उपभोक्ता दावा कर रहे हैं कि बुकिंग के बाद भी उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। कई गैस एजेंसियों में सर्वर की तकनीकी समस्या और बुकिंग में देरी के कारण उपभोक्ताओं को एजेंसी के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि नंबर लगने के बाद भी कई दिनों तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकी भिलाई में सबसे ज्यादा समस्या कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर को लेकर सामने आ रही है। होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद है। इससे उनके रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने लगा है। होटल कारोबारियों का कहना है कि यदि स्थिति कुछ दिन और ऐसी ही रही तो खाना बनाने और व्यवसाय चलाने में परेशानी बढ़ सकती है। वहीं अस्पताल, हॉस्टल और अन्य संस्थानों में भी गैस उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। सर्वर समस्या से बुकिंग प्रभावित भिलाई की एक गैस एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों से सर्वर बार-बार डाउन हो रहा है। सुबह कुछ समय तक सिस्टम काम करता है, लेकिन फिर बंद हो जाता है। इसके कारण बुकिंग पर्ची निकालने और होम डिलीवरी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे 10 से 15 दिनों से सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार सर्वर समस्या बताकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि कई दिन पहले बुकिंग करने के बाद भी उन्हें अभी तक सिलेंडर नहीं मिला। प्रशासन ने की समीक्षा बैठक इस स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर Abhijeet Singh ने कलेक्ट्रेट में ऑयल कंपनियों और गैस वितरकों के अधिकारियों के साथ बैठक कर गैस की उपलब्धता और सप्लाई व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि जिले में घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और रोजाना लगभग 9,750 सिलेंडरों की रिफिलिंग की जा रही है। जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। प्रशासन ने गैस एजेंसियों को सप्लाई और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न हो और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। जिला प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और जिन लोगों का ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है, वे जल्द ही इसे गैस एजेंसी में पूरा करा लें। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3555 जारी किया गया है।

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एकीकृत विकास की दिशा में बड़ा कदम, रायपुर–नवा रायपुर और दुर्ग–भिलाई को जोड़ेगा मेट्रो प्लान

Raipur, Nava Raipur, Durg और Bhilai के संयुक्त विकास के लिए राज्य सरकार ने नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर मॉडल की तर्ज पर इन चारों शहरों को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के तहत एकीकृत रूप से विकसित करने की तैयारी है। इस योजना में खास तौर पर मेट्रो प्रोजेक्ट, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़कर विकसित किया जाएगा। इस संबंध में पहली बैठक मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति और विभिन्न परियोजनाओं की रूपरेखा पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी मास्टर प्लान सरकार ने तय किया है कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया जाएगा, जो चारों शहरों के लिए संयुक्त विकास योजना तैयार करेगा। इसमें खास तौर पर मेट्रो रूट, क्षेत्रीय मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को ध्यान में रखते हुए टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी। बैठक में प्राधिकरण के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तय करने, ऑडिट सेवाओं के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने और परियोजनाओं की प्लानिंग के लिए विशेषज्ञ सलाहकार रखने पर भी सहमति बनी। शुरुआती कामों के लिए 27 करोड़ का प्रावधान राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। बैठक में उप मुख्यमंत्री Arun Sao, वित्त मंत्री OP Choudhary सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आवास, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन का गठन बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इससे आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे और क्षेत्र का संतुलित विकास संभव हो सकेगा। NCR मॉडल से प्रेरित योजना यह पहल दिल्ली के National Capital Region Planning Board के मॉडल से प्रेरित है, जिसकी स्थापना 1985 में हुई थी। एनसीआर बनने के बाद नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर बड़े आर्थिक और आईटी केंद्र के रूप में विकसित हुए। उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी राजधानी क्षेत्र के चारों शहरों को जोड़कर एक व्यापक विकास मॉडल लागू किया जाएगा। एक मास्टर प्लान के तहत होगा विकास नई व्यवस्था लागू होने के बाद रायपुर, नवा रायपुर और दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में अब अलग-अलग एजेंसियों की जगह एक संयुक्त योजना के तहत विकास कार्य किए जाएंगे। इससे पूरे क्षेत्र का इन्फ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट और शहरी विस्तार बेहतर तरीके से प्लान किया जा सकेगा।

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QR कोड से डाउनलोड होगा एडमिट कार्ड, नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी ने शुरू की नई सुविधा

Shaheed Nandkumar Patel University, Raigarh ने परीक्षा व्यवस्था को आसान बनाने के लिए नई डिजिटल पहल शुरू की है। अब छात्र-छात्राएं QR कोड स्कैन करके सीधे अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र प्राप्त करने में होने वाली परेशानियों से राहत देना है। विश्वविद्यालय के अनुसार पहले कई छात्रों को एडमिट कार्ड लेने के लिए कॉलेज या अन्य जगहों के चक्कर लगाने पड़ते थे, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अधिक दिक्कत होती थी। अब QR कोड के जरिए छात्र सीधे लिंक पर जाकर कुछ ही मिनटों में अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकेंगे। परीक्षा व्यवस्था पर होगी सख्त निगरानी परीक्षा के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी भी कर रहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए बनेगा टास्क फोर्स परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों की समस्याओं को तुरंत हल करने के लिए विश्वविद्यालय एक टास्क फोर्स भी गठित कर रहा है। यदि परीक्षा शुरू होने के 15 से 30 मिनट के भीतर किसी प्रश्न को लेकर छात्रों को कोई संदेह होता है, तो वे अपने क्लास टीचर के माध्यम से इसकी जानकारी केंद्र अधीक्षक तक पहुंचा सकेंगे। इसके बाद मामला विश्वविद्यालय तक भेजा जाएगा और विशेषज्ञों की टीम तुरंत निर्णय लेगी। चार जिलों के छात्रों को मिलेगा फायदा विश्वविद्यालय से रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती और जांजगीर-चांपा जिलों के कुल 137 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इस नई व्यवस्था से इन सभी कॉलेजों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा। वेबसाइट से होगा एडमिट कार्ड डाउनलोड विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को यूजर आईडी/नामांकन क्रमांक और आधार नंबर का उपयोग करना होगा।

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