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रायपुर में NEET अभ्यर्थी की आत्महत्या, भांठागांव की अवधपुरी कॉलोनी में घटना

रायपुर। राजधानी के भांठागांव स्थित अवधपुरी कॉलोनी में रविवार को एक नीट अभ्यर्थी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान रायगढ़ जिले के रहने वाले पुष्पेंद्र पटेल के रूप में हुई है। मामला Raipur के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र भांठागांव में किराए के मकान में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने मकान की दूसरी मंजिल से गले में जीआई तार बांधकर छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस, जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही पुरानी बस्ती थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की गई और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। कमरे की तलाशी ली गई है और कुछ सामान जब्त किया गया है। परिजनों को दी गई सूचना पुलिस ने मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। आसपास के लोगों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है, हालांकि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को लेकर मानसिक दबाव में था। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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छत्तीसगढ़ में रफ्तार का कहर: दो अलग-अलग सड़क हादसों में 5 लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को तेज रफ्तार ने पांच जिंदगियां छीन लीं। रायपुर और बिलासपुर जिले में हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हैं। शुरुआती जांच में दोनों घटनाओं के पीछे तेज गति को मुख्य कारण माना जा रहा है। रायपुर जिले के आरंग थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर पारागांव के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। टाटा विस्ता कार (CG 04 HD 2156) में सवार चार युवक महासमुंद से अपने रिश्तेदार को छोड़कर लौट रहे थे। वापसी के दौरान तेज रफ्तार के कारण चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया। कार पहले डिवाइडर से टकराई और फिर उछलकर बिजली के पोल से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस दुर्घटना में हर्ष कुमार देवांगन (21), राहुल देवांगन (20) और थानू सतनामी (22) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं मिथलेश धीवर (23) गंभीर रूप से घायल है, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है। आरंग थाना प्रभारी हरीश साहू के मुताबिक, शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और क्षतिग्रस्त वाहन हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 📍 बिलासपुर में आमने-सामने टक्कर – 2 की मौत बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में एक रेलकर्मी समेत दो लोगों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। जानकारी के अनुसार, भरवीडीह निवासी मनहरण कमल (61) रेलवे में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे और कोटा रेलवे स्टेशन पर तैनात थे। वे ड्यूटी के लिए निकले थे। जूना शहर के पास सामने से तेज रफ्तार में आ रही बाइक से उनकी बाइक की सीधी भिड़ंत हो गई। दूसरी बाइक पर शिव धनुहार (35) और कृष्णा धनुहार सवार थे, जो एक बारात में शामिल होने जा रहे थे। टक्कर के बाद सभी सड़क पर गिर पड़े। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मनहरण कमल और शिव धनुहार की मौके पर ही मौत हो गई। कृष्णा धनुहार को पहले रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर बिलासपुर रेफर किया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

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5 दिन में सुधार का वादा, 42 दिन बाद भी हालात जस के तस: खारुन नदी में मिल रहा गंदा पानी

Raipur की जीवनदायिनी Kharun River में गंदे पानी का प्रवाह अब भी जारी है। 4 जनवरी को निरीक्षण के दौरान 5 दिन में सुधार का दावा किया गया था, लेकिन 42 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। 261 करोड़ के एसटीपी बेअसर? शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले सीवेज को रोकने के लिए 261 करोड़ रुपये की लागत से तीन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए गए थे। उद्देश्य था कि गंदा पानी सीधे खारुन नदी में न पहुंचे।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चिंगरी नाला समेत अन्य स्थानों से गंदा पानी अब भी सीधे नदी में मिल रहा है। निरीक्षण में जताई गई थी नाराजगी 4 जनवरी को स्थानीय विधायक Rajesh Munat, महापौर Meenal Choubey और निगम आयुक्त Vishwadeep अधिकारियों के साथ चिंगरी नाला और चंदनीडीह एसटीपी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नदी में मिलते गंदे पानी को देखकर नाराजगी जताई गई और 5 दिन में व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया था। सफाई और स्क्रीनिंग रॉड तक सीमित कार्रवाई निर्देश के बाद चिंगरी नाले की सफाई कराई गई और स्क्रीनिंग रॉड लगा दी गई। अधिकारियों का दावा है कि इससे कचरा रुकता है और पानी एसटीपी की ओर जाता है। हालांकि स्थानीय स्तर पर अब भी नाले का गंदा पानी सीधे खारुन में मिलते देखा जा रहा है। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि? विधायक राजेश मूणत का कहना है कि खारुन शहर की लाइफलाइन है और इसे स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि पिछली सरकार ने बिना ठोस प्लानिंग के प्लांट तैयार किया था। उन्होंने सुधार के लिए आवश्यक फंड देने की बात कही है। महापौर मीनल चौबे ने बताया कि पाइपलाइन पर वॉल्व चैंबर बनाना जरूरी है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और मॉनिटरिंग की जा रही है। निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, चैंबर वॉल्व निर्माण के प्रस्ताव पर स्टेट टीम सर्वे कर चुकी है और लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। सवाल अब भी कायम खारुन नदी शहर की पहचान और जलस्रोत दोनों है। ऐसे में इसका प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है।

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दो साल का रिपोर्ट कार्ड: पीक आवर्स में बिजली बचाने पर मिलेगी छूट, रायपुर-बिलासपुर में लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

राज्य के ऊर्जा विभाग ने अपने दो साल के कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए बिजली प्रबंधन से जुड़ी कई अहम योजनाओं की जानकारी दी। विभाग के अनुसार सुबह 5 से 8 बजे और शाम 5 से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। इन पीक आवर्स में आपूर्ति का दबाव बढ़ने से पावर कंपनियों को निजी स्रोतों से 8–10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि इस अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए “टाइम ऑफ डे (TOD)” मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को पीक समय में खपत कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि उपभोक्ता निर्धारित समय में उपयोग घटाते हैं तो उन्हें मासिक बिल में 2 से 3 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। विभाग उपभोक्ताओं को मैसेज और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भारी खपत वाले उपकरण—जैसे वॉशिंग मशीन और प्रेस—का उपयोग पीक समय में टालने की सलाह देगा। सौर ऊर्जा उत्पादन सुबह-शाम कम होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है। इसी को संतुलित करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनसे हर आधे घंटे और प्रतिदिन की खपत की जानकारी मिल रही है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप के जरिए अपनी बिजली खपत की निगरानी कर सकते हैं और अनावश्यक उपयोग कम कर सकते हैं। रायपुर और बिलासपुर में अंडरग्राउंड होंगी बिजली लाइनें राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में बिजली लाइनों को भूमिगत करने की बड़ी योजना बनाई गई है। रायपुर में 5394 किमी लाइन को अंडरग्राउंड करने पर लगभग 7600 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिलासपुर में 2150 किमी लाइन को करीब 3100 करोड़ रुपये में भूमिगत किया जाएगा। रायपुर के नयापारा में 18 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला जीआईएस आधारित 33 केवी सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा। साथ ही 2027-28 तक 2000 मेगावॉट क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना है, जिसमें से 1260 मेगावॉट के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। इससे दिन में सौर ऊर्जा से बनी बिजली का उपयोग रात में किया जा सकेगा। 524 गांवों में ग्रिड विस्तार के जरिए बिजली पहुंचाई जाएगी। कोरबा में राखड़ बांध पर 32 मेगावॉट की सौर परियोजना (बैटरी स्टोरेज सहित) स्थापित करने की भी तैयारी है। एनटीपीसी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं ऊर्जा विभाग ने बताया कि करीब 2000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए NTPC Green Energy Limited और राज्य की पावर जनरेशन कंपनी के साथ संयुक्त कंपनी बनाई गई है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों के सहयोग से 32100 मेगावॉट क्षमता के बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए हैं। ऊर्जा सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विकसित करना लक्ष्य है। इस अवसर पर वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला और जनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, प्रो. मनोज दयाल बने कुलपति

छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए प्रोफेसर मनोज दयाल की कुलपति पद पर नियुक्ति की घोषणा की है। प्रोफेसर मनोज दयाल वर्तमान में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग से जुड़े हुए हैं। वे लंबे समय से मीडिया शिक्षा और अकादमिक प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके अनुभव और शैक्षणिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम 2004 तथा संशोधित अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति का कार्यकाल, सेवा शर्तें और अधिकार संबंधित अधिनियम के नियमों के अनुरूप होंगे। नई नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी और पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोध, प्रशिक्षण और मीडिया अध्ययन से जुड़ी गतिविधियों में भी नई ऊर्जा आने की संभावना जताई जा रही है।

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वेतन विसंगति पर KVK अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल तेज, वार्ता विफल; अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी और कर्मचारी वेतन विसंगति, सेवा-लाभ की बहाली और पिछले 18 महीनों से लंबित देयकों के मुद्दे पर हड़ताल पर डटे हुए हैं। पांच दिवसीय कामबंद आंदोलन का आज पांचवां दिन है। चौथे दिन कुलपति के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं। कुलपति से वार्ता में नहीं निकला समाधान धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा पहुंचे और कर्मचारियों से चर्चा की। उनके नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात की, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि बैठक में ठोस और समयबद्ध समाधान नहीं दिया गया। कभी मामले को राज्यपाल स्तर का बताया गया तो कभी वित्त विभाग और राज्य शासन का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल दी गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है। राजभवन के सामने धरने की चेतावनी फेडरेशन ने साफ कहा है कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर राजभवन (लोकभवन) के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। ICAR के नए निर्देशों से बढ़ी समस्या विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि KVK पूरी तरह से Indian Council of Agricultural Research (ICAR) से वित्त पोषित हैं। 20 अगस्त 2024 को जारी नए निर्देशों के बाद एनपीएस अंशदान, पेंशन अनुदान और अन्य भत्तों में कटौती कर दी गई। फिलहाल ICAR केवल मूल वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता ही जारी कर रहा है। देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं और नए नियमों के बाद सभी जगह पूर्ण वेतन भुगतान में कठिनाई आ रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिया गया वेतन कर्मचारियों की याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपने संसाधनों से 1.6 करोड़ रुपए खर्च कर कर्मचारियों को पूर्ववत वेतन दिया। राज्य शासन से 3.50 करोड़ की मांग विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसकी स्वयं की आय सीमित है। इसलिए 2025-26 के लिए राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता मांगी गई है, ताकि वेतन भुगतान नियमित हो सके। भविष्य में यदि ICAR या राज्य शासन से पूरी राशि मिलती है, तो कर्मचारियों को सभी भत्तों सहित वेतन दिया जाएगा। सेवानिवृत्ति आयु पर स्थिति स्पष्ट प्रशासन के अनुसार KVK कर्मचारी गैर-शिक्षकीय संवर्ग में आते हैं और उनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। विश्वविद्यालय में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु केवल शिक्षकों के लिए लागू है। परिसर में हड़ताल पर रोक विश्वविद्यालय ने परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक का कारण बताते हुए कहा कि यहां कन्या छात्रावास संचालित है और परीक्षाएं जारी हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

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रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव, पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर मंथन

छत्तीसगढ़ के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विषयों पर समन्वित चर्चा के लिए रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम 19 और 20 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड द्वारा आरएसबी कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन 10 जिलों के अधिकारी शामिल कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर विवेक शर्मा (सेवानिवृत्त) ने की। पहले दिन राज्य के दस जिलों—रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, जशपुर, अंबिकापुर, बैकुंठपुर, जगदलपुर और कांकेर—के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न जिलों में संचालित सैनिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आ रही समस्याओं, चुनौतियों और समाधान के प्रयासों को साझा किया। उद्देश्य यह है कि सभी जिलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो और कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके। लंबित मामलों पर होगी विशेष चर्चा कॉन्क्लेव के दूसरे दिन 20 फरवरी को पूर्व सैनिक संगठनों और संबंधित विभागों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान COSA, National Cadet Corps (NCC), Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS), Canteen Stores Department (CSD), स्टेशन मुख्यालय और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। बैठक में पूर्व सैनिकों की लंबित समस्याओं, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पूर्व सैनिकों को मिलेगा सीधा लाभ राज्य में पहली बार आयोजित यह कॉन्क्लेव पूर्व सैनिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह के समन्वित प्रयासों से योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

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रायपुर कलेक्टर ने धरसींवा में स्कूलों और योजनाओं का किया निरीक्षण, मध्यान्ह भोजन चखकर परखी गुणवत्ता

राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने धरसींवा विकासखंड का दौरा कर शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न विभागीय योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था, मत्स्य पालन केंद्र और पशुपालन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। स्कूल पहुंचकर बच्चों से की बातचीत कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला कांदुल में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ मध्यान्ह भोजन का स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता जांची। उन्होंने स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद शासकीय प्राथमिक शाला सेजबहार में बच्चों की कॉपियां देखीं और उनसे पढ़ाई के विषय में सवाल किए। उन्होंने बच्चों से पूछा कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है और मध्यान्ह भोजन में क्या-क्या परोसा जाता है। अधिकारियों को शिक्षा स्तर और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 17 टन मासिक उत्पादन सेजबहार में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत संचालित मत्स्य पालन केंद्र का निरीक्षण किया। यहां पांच नर्सरी और चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। नर्सरी में तैयार मछली बीज को तालाबों में छोड़ा जाता है। हितग्राहियों ने बताया कि इस केंद्र से हर महीने लगभग 17 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। कलेक्टर ने जल संरक्षण और अधिक पौधारोपण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र की समीक्षा डॉ. गौरव सिंह ने सेजबहार स्थित कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1047 गाय और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है, जिससे करीब 450 उच्च नस्ल के बछड़े-बछियों का जन्म हुआ है। कलेक्टर ने टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी ली और खुरहा-चपका बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।

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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज, 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सुविधा पर जोर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरूरत एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है। शहर में सस्ती, सुलभ और नियमित बस सेवा नहीं होने से आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी विषय को लेकर आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने खुलकर अपनी बात रखी। सभी का मानना है कि जब तक मजबूत और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित नहीं होगा, तब तक ट्रैफिक और महंगे निजी साधनों पर निर्भरता कम नहीं होगी। 350 सिटी बसों की जरूरत पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि शहर में कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूटों पर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने नवा रायपुर (एससीआर) तक सुगम आवागमन की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि आम नागरिक को अपनी बात रखने के लिए भी नवा रायपुर जाने में 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बस संचालन शुरू किया जा सकता है, जिससे फंडिंग में देरी न हो और बेहतर परिणाम मिल सकें। मिनी बसों और लंबी दूरी के रूट पर फोकस रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शहर के आंतरिक इलाकों के लिए मिनी सिटी बसों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा एक समय 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद व्यवस्था चरमरा गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर की “संस्कृति” का हिस्सा बनाना होगा। लंबी दूरी के रूटों पर नियमित बसें चलेंगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा। माना, सेजबहार जैसे इलाकों में भी मांग बढ़ रही है। ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने कहा कि कई जगह बस स्टॉप तो बने हैं, लेकिन बसें नहीं चल रहीं। ई-बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है। उनका मानना है कि सिटी बसों के नियमित संचालन से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। निगम और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मेयर मीनल चौबे ने कहा कि पूर्व की व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और प्लानिंग की कमी रही, जिसके कारण सेवा प्रभावित हुई। वहीं नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सरकार से ठोस पहल की मांग की। परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल के अनुसार 30 सिटी बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं, लेकिन संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम की है। ऑटो और ई-रिक्शा के किराए तय हैं, उल्लंघन पर शिकायत की जा सकती है। 100 पीएम ई-बसें और नया डिपो शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए पीएम ई-बस योजना के तहत 100 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं। जरवाय क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर डिपो निर्माण कार्य जारी है, जो करीब 4 महीने में पूरा होने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। सस्ती और भरोसेमंद सेवा ही समाधान जनप्रतिनिधियों का मानना है कि अगर नागरिकों को 10-20 रुपए में समय पर बस सुविधा मिलेगी तो उनका भरोसा बढ़ेगा। मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम न केवल ट्रैफिक और प्रदूषण कम करेगा, बल्कि शहर की समग्र छवि भी बदलेगा।

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पलारी जनपद पंचायत में SDO 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, खेल मैदान के काम में मांगे थे 1 लाख

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी जनपद पंचायत में पदस्थ SDO को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्राम पंचायत भवानीपुर में स्कूल के खेल मैदान में मुरूम बिछाने के 10 लाख रुपए के काम की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में अधिकारी द्वारा 1 लाख रुपए की मांग की गई थी। फाइल क्लियर करने के बदले मांगी रिश्वत जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत भवानीपुर में मैदान समतलीकरण और मुरूम डालने का कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन भुगतान और अंतिम सत्यापन की प्रक्रिया लंबित थी। आरोप है कि SDO गोपाल कृष्ण शर्मा ने अनुकूल रिपोर्ट देने और फाइल जल्द पास करने के लिए पहले 1 लाख रुपए की मांग की। बाद में बातचीत के बाद यह राशि 80 हजार रुपए में तय हुई। शिकायतकर्ता द्वारा पहले ही 20 हजार रुपए दिए जा चुके थे। इसके बाद दूसरी किस्त के रूप में 25 हजार रुपए देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। ACB ने बिछाया जाल, 25 हजार लेते ही दबोचा पीड़ित सरपंच और ग्रामीणों ने मामले की शिकायत Anti Corruption Bureau रायपुर में दर्ज कराई। प्रारंभिक सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार (19 फरवरी) को शिकायतकर्ता तय रकम लेकर SDO के पास पहुंचा। पहले से तैनात 15 सदस्यीय एसीबी टीम ने जैसे ही अधिकारी को 25 हजार रुपए नकद लेते देखा, तुरंत दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर रिश्वत की रकम जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। हाल ही में हुआ था प्रमोशन बताया जा रहा है कि गोपाल कृष्ण शर्मा पहले पलारी जनपद पंचायत में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। करीब दो महीने पहले ही उसे प्रमोट कर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में SDO बनाया गया था। मामला गिधपुरी थाना क्षेत्र का है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ जारी है और संबंधित फाइलों व दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल तो नहीं है। कार्रवाई के बाद जनपद पंचायत कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों ने एसीबी की कार्रवाई का स्वागत करते हुए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

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