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कोरबा में मेडिकल स्टोर्स पर सख्त कार्रवाई, 3 के लाइसेंस सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। जांच के दौरान इन दुकानों में बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित और नशीली दवाइयों की बिक्री समेत कई अनियमितताएं पाई गई थीं। कार्रवाई के तहत हरदी बाजार स्थित अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर्स, पाली के जीके मेडिकल स्टोर्स और सोहागपुर के गर्वित मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं। विभाग ने पहले इन दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। निलंबन अवधि के दौरान ये दुकानें किसी भी प्रकार की दवाइयों का क्रय-विक्रय नहीं कर सकेंगी। इसके अलावा, औषधि विभाग ने हाल ही में जिले के कई अन्य मेडिकल स्टोर्स की भी जांच की थी। इनमें बालको के मिश्रा मेडिकल स्टोर्स, ओम सांई मेडिकल, भैसमा के मेनन मेडिकल, जायसवाल मेडिकल, मोनिशा मेडिकल, प्रिशा मेडिकल (ढेलवाडीह) और छुरी के मारुति मेडिकल स्टोर्स शामिल हैं। इन दुकानों में भी खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ियां मिलने पर नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि नशीली दवाओं का बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री करना कानूनन अपराध है। इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जिलेभर में अभियान चलाएगी। वहीं, निरीक्षण के दौरान कुछ मेडिकल स्टोर्स से दवाइयों के नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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छत्तीसगढ़: कोरबा में दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर मिली, पुलिस जांच में

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम बेलाकछार में गुरुवार सुबह दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर लटकी मिली। मृतकों की पहचान प्रमोद कंवर (27) और अमित माथुर (28) के रूप में हुई है। दोनों शादीशुदा थे और इसी गांव में रहते थे। ये दोनों बालको पावर प्लांट में ठेका कर्मी के रूप में काम करते थे। पुलिस फिलहाल मामले की सुसाइड और मर्डर दोनों एंगल से जांच कर रही है। घटना से पहले की स्थिति जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से प्रमोद और अमित काम पर नहीं जा रहे थे। बुधवार दोपहर करीब 1 बजे प्रमोद अमित के घर पहुंचे। इसके बाद दोनों घूमने जाने की बात कहकर घर से निकले, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। परिजन उनकी खोजबीन में जुट गए, कॉल करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। पहले उन्हें लगा कि दोनों दोस्त आसपास होंगे, लेकिन समय बीतने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला। ग्रामीणों ने देखा शव गुरुवार सुबह कुछ ग्रामीण जंगल की ओर जा रहे थे, तभी उनकी नजर पेड़ पर लटके हुए युवकों पर पड़ी। तुरंत ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस और मृतकों के परिजन मौके पर पहुंचे और शवों का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। बालको थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों व ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है।कपड़ों से लटके शव, मर्ग कायम पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों की लाश कपड़ों से लटकी मिली। मामले की गहनता को देखते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। आगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हुई थी ऐसी घटना याद दिला दें कि करीब एक महीने पहले, रायगढ़ जिले में भी दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर लटकी मिली थी। मामला पुसौर थाना क्षेत्र के चिखली गांव का था। दोनों ने एक दिन पहले जन्मदिन मनाया था और शराब पी थी। अगले दिन सुबह उन्हें एक ही फंदे पर लटका पाया गया। तब भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह खुदकुशी थी या हत्या।

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कोरबा में मैकेनिक ने वीडियो बनाकर दी जान: पुलिस की धमकी से डरने की बात, जांच में आया नया सच

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक युवक द्वारा आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो सामने आया है। वीडियो में युवक ने खुद को पुलिस की प्रताड़ना और गाली-गलौज से परेशान बताया था। हालांकि पुलिस जांच में मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में क्या सामने आया पुलिस के अनुसार, युवक का रूम पार्टनर अपनी प्रेमिका के साथ घर से चला गया था। इसके बाद युवती के भाई सचिन खरे ने पुलिसकर्मी बनकर मृतक सनत कश्यप (लगभग 21 वर्ष) को फोन किया। फोन पर उसे धमकाया गया और थाने आने के लिए कहा गया। इससे वह गंभीर तनाव में आ गया और बाद में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुसाइड से पहले वीडियो में क्या कहा सनत ने वीडियो में कहा था कि उसे परिवार से कोई समस्या नहीं है, लेकिन जांजगीर-चांपा के पंतोरा थाना से फोन कर गालियां दी गईं और थाने बुलाया गया। उसने यह भी कहा कि रूम पार्टनर को भगाने में उसका कोई हाथ नहीं है और वह बेहद तनाव में है। पूरा घटनाक्रम मृतक सनत कश्यप जांजगीर-चांपा जिले के चोरभट्टी गांव का रहने वाला था और उरगा क्षेत्र के पास स्थित एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में मैकेनिक के रूप में काम करता था। कंपनी द्वारा दिए गए कमरे में वह अपने साथी धीरेंद्र पाटले के साथ रहता था। बताया गया कि धीरेंद्र एक युवती के साथ चला गया, जिसके बाद युवती के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई। युवती के भाई ने धीरेंद्र के दोस्त सनत को ही जिम्मेदार मानते हुए पुलिस बनकर फोन किया और धमकाया। फोन कॉल के बाद सनत घबरा गया, उसने वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में आत्महत्या कर ली। जांच में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 (छद्म प्रतिरूपण) के तहत मामला दर्ज किया है। परिवार में सबसे छोटा था सनत चार भाइयों में सबसे छोटा था। घटना की सूचना मिलते ही परिजन कोरबा पहुंचे, जहां घर में शोक का माहौल है।

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कोरबा मेडिकल कॉलेज परिसर में कबाड़ गाड़ियों में लगी आग, छह वाहन जलकर नष्ट

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में सोमवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के पीछे लंबे समय से खड़ी पुरानी और अनुपयोगी गाड़ियों में आग भड़क उठी, जिससे कुछ ही देर में आसपास का इलाका धुएं से भर गया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते छह वाहन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर के पीछे कई पुरानी गाड़ियां कबाड़ के रूप में खड़ी थीं। अचानक इन्हीं वाहनों में आग लग गई और आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। धुएं और आग की लपटों को देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए और मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। दमकल की टीम पहुंचने में हुई देरी घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पहले खुद ही आग बुझाने की कोशिश की और साथ ही दमकल विभाग को सूचना दी। बताया जा रहा है कि दमकल की टीम को मौके पर पहुंचने में कुछ समय लग गया, जिसके कारण आग ने कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक दमकल की गाड़ियां पहुंचीं, तब तक छह वाहन पूरी तरह जल चुके थे। पास में है डॉक्टरों और स्टाफ की कॉलोनी जिस स्थान पर आग लगी, उसके पास ही डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनी स्थित है। आग लगने की खबर से कॉलोनी में रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल बन गया। हालांकि दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पा लिया और उसे आगे फैलने से रोक दिया। पहले भी उठते रहे हैं सुरक्षा के सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में लंबे समय से पुरानी गाड़ियां और अन्य कबाड़ पड़ा हुआ था, जिसे हटाने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है। लोगों का यह भी कहना है कि जिस जगह पर यह गाड़ियां खड़ी थीं, वहां अक्सर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता था। बताया जा रहा है कि पास में संचालित ओएसटी सेंटर में आने वाले कुछ नशे के आदी युवक भी कई बार इन गाड़ियों के आसपास बैठते देखे जाते थे। आग लगने के कारणों की जांच जारी फिलहाल आग लगने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। आशंका जताई जा रही है कि किसी असामाजिक तत्व की हरकत से आग लगी हो सकती है। घटना के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कबाड़ वाहनों को हटाने को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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