Education

CG बोर्ड 10वीं रिजल्ट आज 2:30 बजे जारी, 3.20 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) आज दोपहर 2:30 बजे 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित करने जा रहा है। लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने वाला है और वे अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर के जरिए देख सकेंगे। इस साल करीब 3,20,535 छात्र-छात्राओं ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीयन कराया था। परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थी अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो अब कुछ ही घंटों में खत्म हो जाएगा। पिछले वर्ष यानी 2025 की बात करें तो लगभग 3,23,094 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 76.53 प्रतिशत छात्र सफल हुए थे। यह परिणाम पिछले चार वर्षों में सबसे बेहतर माना गया था, जिसमें करीब 2.46 लाख विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की थी। 2025 में कुल मिलाकर करीब 5.65 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिसमें 10वीं के परीक्षार्थियों की संख्या 3.23 लाख के आसपास थी। वहीं 2026 में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर लगभग 3.20 लाख रह गया है। पिछले साल की तरह इस बार भी रिजल्ट में छात्राओं के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि बीते वर्षों में लड़कियों ने बेहतर परिणाम दिए हैं। इसके अलावा मेरिट लिस्ट, टॉपर्स और पास प्रतिशत को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों की उत्सुकता बनी हुई है।

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छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) कल दोपहर 2:30 बजे हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के नतीजे घोषित करेगा। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी। इस साल करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनकी मेहनत का परिणाम अब सामने आने वाला है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्र अपना रोल नंबर दर्ज कर आसानी से रिजल्ट देख सकेंगे। इस बार 10वीं में 3,20,535 और 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थी शामिल हुए। आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं के छात्रों की संख्या 12वीं से लगभग 31 प्रतिशत अधिक रही, जो हर साल की तरह इस बार भी ट्रेंड को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों की संख्या लगभग स्थिर रही है, हालांकि 12वीं में छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। रिजल्ट का इंतजार सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों के लिए भी बेहद अहम होता है। 10वीं के छात्र जहां आगे के विषय और स्ट्रीम का चयन करेंगे, वहीं 12वीं के छात्र कॉलेज एडमिशन और करियर की दिशा तय करेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी सभी की नजर पास प्रतिशत, मेरिट लिस्ट और टॉपर्स पर टिकी हुई है। मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे रिजल्ट को सकारात्मक रूप से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी में जुटें, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराश होने के बजाय नए अवसरों पर ध्यान दें।

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छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। 16 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का असर राज्य के करीब 38 हजार गरीब बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस फैसले को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे संविधान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में शिक्षा की शुरुआत प्री-स्कूल स्तर से होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस शुरुआती चरण से बाहर करना उन्हें आगे की पढ़ाई में भी पीछे धकेल सकता है। सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया है कि RTE अधिनियम मूल रूप से 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों, यानी कक्षा 1 से 8 तक के लिए बनाया गया है। ऐसे में प्री-स्कूल को इसमें शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। सरकार के अनुसार यदि प्री-स्कूल को RTE के तहत रखा जाता है, तो हर साल लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। सरकार का यह भी कहना है कि पहले प्री-स्कूल को RTE में शामिल करना एक प्रशासनिक त्रुटि थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का एक अलग पक्ष भी है। साल 2015-16 में राज्य सरकार ने खुद यह निर्णय लिया था कि प्री-स्कूल को RTE के दायरे में लाया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा मिल सके। उस समय सरकार का मानना था कि प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और भविष्य में ड्रॉपआउट दर भी कम होती है। साथ ही, यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए भी अहम माना गया था, ताकि गरीब और अमीर बच्चे एक साथ पढ़ सकें। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि छोटे बच्चों में ड्रॉपआउट दर अधिक होती है और प्री-स्कूल के नाम पर कई नए संस्थान खुल रहे हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 से 8 साल के बच्चों में ड्रॉपआउट दर लगभग 2 से 3 प्रतिशत के बीच है, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। हालांकि, नामांकन में कमी जरूर देखी गई है, जहां 16 से 28 प्रतिशत तक बच्चे अब भी प्री-प्राइमरी शिक्षा से बाहर हैं। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्री-स्कूल कक्षाएं दोबारा RTE के दायरे में आएंगी या नहीं, और राज्य की शिक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी

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राजनांदगांव में व्यापम की MBSI परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न, 99 केंद्रों पर सख्त व्यवस्था

राजनांदगांव में व्यापम द्वारा आयोजित मंडी बोर्ड उप निरीक्षक (MBSI) भर्ती परीक्षा रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। जिले में इस परीक्षा के लिए कुल 99 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर सख्त व्यवस्था रखी गई थी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या नकल न हो सके। सुरक्षा के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीम लगातार जांच करती रही। कलेक्टर जितेंद्र यादव ने खुद अलग-अलग परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां जाकर अभ्यर्थियों की एंट्री, पहचान पत्र जांच, तलाशी और बैठने की व्यवस्था को देखा। कलेक्टर ने यह भी देखा कि परीक्षा हॉल में सही दूरी बनी हुई है या नहीं और रोशनी व अन्य सुविधाएं ठीक हैं या नहीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। जिला प्रशासन ने परीक्षा को सफल बनाने के लिए पहले से ही पूरी तैयारी की थी। सभी केंद्रों पर अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से भी नियमों का पालन करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।

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26 अप्रैल को MBSI भर्ती परीक्षा, सख्त नियम लागू; जूते-मोजे बैन, 9:30 के बाद नहीं मिलेगी एंट्री

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मंडी बोर्ड उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा (MBSI26) का आयोजन 26 अप्रैल को किया जाएगा। रायपुर के 104 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली इस परीक्षा में करीब 34,168 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक निर्धारित किया गया है। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, घड़ी, कैलकुलेटर या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ड्रेस कोड को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को हल्के रंग के आधी बांह के कपड़े पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिलेगा। काले, गहरे नीले और हरे रंग के कपड़ों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा जूते, मोजे, स्कार्फ और बेल्ट पहनने की अनुमति नहीं होगी। अभ्यर्थियों को चप्पल पहनकर आना होगा। साथ ही कान के आभूषण पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश सुबह 9:30 बजे तक ही दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों की पुलिस द्वारा जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की प्रतिबंधित वस्तु अंदर न पहुंच सके। अभ्यर्थियों को केवल काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन के साथ ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। परीक्षा प्रबंधन ने सभी उम्मीदवारों से समय पर पहुंचने और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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सरगुजिहा बोली पर एडमिशन से इनकार, स्कूल को नोटिस; दूसरे स्कूल ने दिया फ्री प्रवेश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बच्चे को स्थानीय सरगुजिहा बोली बोलने के कारण प्री-प्राइमरी स्कूल में प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि एक अन्य स्कूल ने बच्चे को निःशुल्क प्रवेश देकर मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, अभिभावक अपने 4 वर्षीय बेटे का दाखिला कराने चोपड़ापारा स्थित एक प्राइवेट स्कूल पहुंचे थे। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बच्चे ने सवालों के जवाब सरगुजिहा बोली में दिए। आरोप है कि डेमो क्लास के बाद स्कूल ने यह कहते हुए एडमिशन से इनकार कर दिया कि अन्य बच्चे उसकी भाषा से प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की गई, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि नियमों के उल्लंघन पर उसकी मान्यता क्यों न समाप्त कर दी जाए। साथ ही स्कूल से संबंधित दस्तावेज भी तलब किए गए हैं। दूसरी ओर, एक अन्य प्ले स्कूल ने पहल करते हुए बच्चे को मुफ्त में प्रवेश दिया है, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वह स्थानीय बोली के साथ-साथ हिंदी भी सीख सके। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के क्षेत्र में भाषा के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कही है, वहीं छात्र संगठन ने संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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गंभीर बीमारी से जंग जीतकर छात्रा ने CBSE में 90.4% हासिल किए, व्हीलचेयर पर दी परीक्षा

छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर की एक छात्रा ने असाधारण हिम्मत और संघर्ष का परिचय देते हुए गंभीर बीमारी को मात देकर सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 90.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। महज 15 साल की इस छात्रा को गुइलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नसों को प्रभावित करता है। बीमारी के दौरान उसकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा और बाद में ट्रैकियोस्टोमी भी करनी पड़ी। कई महीनों तक वह बोल नहीं पा रही थी और इशारों या हाथ पर अक्षर लिखकर ही अपनी बात समझाती थी। इस दौरान उसने अपने भाई से आखिरी बार परिवार से बात कराने की इच्छा भी जताई थी। करीब डेढ़ महीने तक रायपुर में इलाज के बाद उसे नागपुर ले जाया गया, जहां लंबे समय तक उपचार चला। जब वह वापस लौटी तो उसके हाथों में इतनी कमजोरी थी कि पेन पकड़ना भी मुश्किल था। इसके बावजूद उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी जारी रखी। धीरे-धीरे फिजियोथेरेपी और अभ्यास के जरिए उसने फिर से लिखना सीखा। प्री-बोर्ड परीक्षा उसने व्हीलचेयर पर बैठकर दी और अच्छे अंक हासिल किए। बोर्ड परीक्षा में उसे अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन उसने निर्धारित समय से पहले ही पेपर पूरा कर लिया और शानदार 90.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। परिवार के अनुसार, इलाज के दौरान उसने कई मरीजों को संघर्ष करते और जान गंवाते देखा, लेकिन उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। अब उसका सपना सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने का है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला काफी जटिल था और उसे आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया था। विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयास और छात्रा की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही यह संभव हो सका।

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RTE फीस बढ़ाने की मांग पर 5 हजार निजी स्कूल बंद, असहयोग आंदोलन तेज

छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को प्रदेशभर के करीब 5 हजार निजी स्कूलों में ताला लगा रहा। इससे पहले एक दिन स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपनी नाराजगी जताई थी। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने साफ कहा है कि जब तक सरकार आरटीई के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी नहीं करती, तब तक लॉटरी से चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह आंदोलन 1 मार्च से जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले 14 वर्षों से आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान में प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र 7,000 रुपये और माध्यमिक स्तर के लिए 11,400 रुपये दिए जाते हैं, जबकि स्कूल संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार से चर्चा की गई, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से अब आंदोलन को और तेज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं होतीं, तो विरोध और उग्र हो सकता है। फिलहाल स्कूल बंद रखकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इधर, सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने स्कूलों की मान्यता रद्द करने के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को पात्र छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में गर्मी को देखते हुए 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी घोषित किया जा चुका है, ऐसे में स्कूल बंद रहने से छात्रों के लिए छुट्टियों जैसी स्थिति बन गई है।

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जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, भीषण गर्मी में सर्वे को बताया अव्यवहारिक

छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मई-जून की तेज गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा होगा। एक ओर इस समय स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां रहती हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को फील्ड में काम करने के लिए भेजा जा रहा है, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया है। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि इस फैसले में मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है। तेज धूप और उच्च तापमान में लंबे समय तक बाहर रहकर डोर-टू-डोर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। शिक्षक संघ ने मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के समय और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। सरकारी निर्देश के अनुसार, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर का मोबाइल होना जरूरी किया गया है। ऐसे में जिनके पास पुराने फोन हैं, उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। राज्य में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाएगा। कर्मचारी निर्धारित समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। इसके बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे सर्वे के दौरान कर्मचारियों को दिखाना होगा। इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या समेत कुल 33 प्रकार की जानकारियां ली जाएंगी। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना बनाने के ईंधन, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल रहेंगे। घर में रहने वाले सदस्यों और उपयोग किए जाने वाले वाहनों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ में गर्मी का असर: 20 अप्रैल से स्कूलों की छुट्टियां, पहले 1 मई से होना था अवकाश

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और लू को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं। अब प्रदेश के सभी सरकारी, अनुदान प्राप्त, निजी और अन्य स्कूलों में 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। पहले जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों में छुट्टियां 1 मई से शुरू होनी थीं, लेकिन मौजूदा तापमान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि तेज गर्मी में बच्चों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छुट्टियां केवल छात्रों के लिए लागू होंगी। शिक्षकों के लिए अवकाश की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और उन्हें पूर्व निर्धारित निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा। सरकार ने यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उठाया है, ताकि बढ़ती गर्मी से उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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