Education

राजनांदगांव में व्यापम की MBSI परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न, 99 केंद्रों पर सख्त व्यवस्था

राजनांदगांव में व्यापम द्वारा आयोजित मंडी बोर्ड उप निरीक्षक (MBSI) भर्ती परीक्षा रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। जिले में इस परीक्षा के लिए कुल 99 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर सख्त व्यवस्था रखी गई थी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या नकल न हो सके। सुरक्षा के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीम लगातार जांच करती रही। कलेक्टर जितेंद्र यादव ने खुद अलग-अलग परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां जाकर अभ्यर्थियों की एंट्री, पहचान पत्र जांच, तलाशी और बैठने की व्यवस्था को देखा। कलेक्टर ने यह भी देखा कि परीक्षा हॉल में सही दूरी बनी हुई है या नहीं और रोशनी व अन्य सुविधाएं ठीक हैं या नहीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। जिला प्रशासन ने परीक्षा को सफल बनाने के लिए पहले से ही पूरी तैयारी की थी। सभी केंद्रों पर अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से भी नियमों का पालन करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।

राजनांदगांव में व्यापम की MBSI परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न, 99 केंद्रों पर सख्त व्यवस्था Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, RAJNANDGAON, State

26 अप्रैल को MBSI भर्ती परीक्षा, सख्त नियम लागू; जूते-मोजे बैन, 9:30 के बाद नहीं मिलेगी एंट्री

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मंडी बोर्ड उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा (MBSI26) का आयोजन 26 अप्रैल को किया जाएगा। रायपुर के 104 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली इस परीक्षा में करीब 34,168 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक निर्धारित किया गया है। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, घड़ी, कैलकुलेटर या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ड्रेस कोड को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को हल्के रंग के आधी बांह के कपड़े पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिलेगा। काले, गहरे नीले और हरे रंग के कपड़ों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा जूते, मोजे, स्कार्फ और बेल्ट पहनने की अनुमति नहीं होगी। अभ्यर्थियों को चप्पल पहनकर आना होगा। साथ ही कान के आभूषण पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश सुबह 9:30 बजे तक ही दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों की पुलिस द्वारा जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की प्रतिबंधित वस्तु अंदर न पहुंच सके। अभ्यर्थियों को केवल काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन के साथ ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। परीक्षा प्रबंधन ने सभी उम्मीदवारों से समय पर पहुंचने और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

26 अप्रैल को MBSI भर्ती परीक्षा, सख्त नियम लागू; जूते-मोजे बैन, 9:30 के बाद नहीं मिलेगी एंट्री Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

सरगुजिहा बोली पर एडमिशन से इनकार, स्कूल को नोटिस; दूसरे स्कूल ने दिया फ्री प्रवेश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बच्चे को स्थानीय सरगुजिहा बोली बोलने के कारण प्री-प्राइमरी स्कूल में प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि एक अन्य स्कूल ने बच्चे को निःशुल्क प्रवेश देकर मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, अभिभावक अपने 4 वर्षीय बेटे का दाखिला कराने चोपड़ापारा स्थित एक प्राइवेट स्कूल पहुंचे थे। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बच्चे ने सवालों के जवाब सरगुजिहा बोली में दिए। आरोप है कि डेमो क्लास के बाद स्कूल ने यह कहते हुए एडमिशन से इनकार कर दिया कि अन्य बच्चे उसकी भाषा से प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की गई, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि नियमों के उल्लंघन पर उसकी मान्यता क्यों न समाप्त कर दी जाए। साथ ही स्कूल से संबंधित दस्तावेज भी तलब किए गए हैं। दूसरी ओर, एक अन्य प्ले स्कूल ने पहल करते हुए बच्चे को मुफ्त में प्रवेश दिया है, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वह स्थानीय बोली के साथ-साथ हिंदी भी सीख सके। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के क्षेत्र में भाषा के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कही है, वहीं छात्र संगठन ने संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

सरगुजिहा बोली पर एडमिशन से इनकार, स्कूल को नोटिस; दूसरे स्कूल ने दिया फ्री प्रवेश Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, surguja

गंभीर बीमारी से जंग जीतकर छात्रा ने CBSE में 90.4% हासिल किए, व्हीलचेयर पर दी परीक्षा

छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर की एक छात्रा ने असाधारण हिम्मत और संघर्ष का परिचय देते हुए गंभीर बीमारी को मात देकर सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 90.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। महज 15 साल की इस छात्रा को गुइलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नसों को प्रभावित करता है। बीमारी के दौरान उसकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा और बाद में ट्रैकियोस्टोमी भी करनी पड़ी। कई महीनों तक वह बोल नहीं पा रही थी और इशारों या हाथ पर अक्षर लिखकर ही अपनी बात समझाती थी। इस दौरान उसने अपने भाई से आखिरी बार परिवार से बात कराने की इच्छा भी जताई थी। करीब डेढ़ महीने तक रायपुर में इलाज के बाद उसे नागपुर ले जाया गया, जहां लंबे समय तक उपचार चला। जब वह वापस लौटी तो उसके हाथों में इतनी कमजोरी थी कि पेन पकड़ना भी मुश्किल था। इसके बावजूद उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी जारी रखी। धीरे-धीरे फिजियोथेरेपी और अभ्यास के जरिए उसने फिर से लिखना सीखा। प्री-बोर्ड परीक्षा उसने व्हीलचेयर पर बैठकर दी और अच्छे अंक हासिल किए। बोर्ड परीक्षा में उसे अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन उसने निर्धारित समय से पहले ही पेपर पूरा कर लिया और शानदार 90.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। परिवार के अनुसार, इलाज के दौरान उसने कई मरीजों को संघर्ष करते और जान गंवाते देखा, लेकिन उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। अब उसका सपना सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने का है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला काफी जटिल था और उसे आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया था। विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयास और छात्रा की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही यह संभव हो सका।

गंभीर बीमारी से जंग जीतकर छात्रा ने CBSE में 90.4% हासिल किए, व्हीलचेयर पर दी परीक्षा Read Post »

Chhattisgarh, Education, Top News

RTE फीस बढ़ाने की मांग पर 5 हजार निजी स्कूल बंद, असहयोग आंदोलन तेज

छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को प्रदेशभर के करीब 5 हजार निजी स्कूलों में ताला लगा रहा। इससे पहले एक दिन स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपनी नाराजगी जताई थी। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने साफ कहा है कि जब तक सरकार आरटीई के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी नहीं करती, तब तक लॉटरी से चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह आंदोलन 1 मार्च से जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले 14 वर्षों से आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान में प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र 7,000 रुपये और माध्यमिक स्तर के लिए 11,400 रुपये दिए जाते हैं, जबकि स्कूल संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार से चर्चा की गई, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से अब आंदोलन को और तेज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं होतीं, तो विरोध और उग्र हो सकता है। फिलहाल स्कूल बंद रखकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इधर, सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने स्कूलों की मान्यता रद्द करने के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को पात्र छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में गर्मी को देखते हुए 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी घोषित किया जा चुका है, ऐसे में स्कूल बंद रहने से छात्रों के लिए छुट्टियों जैसी स्थिति बन गई है।

RTE फीस बढ़ाने की मांग पर 5 हजार निजी स्कूल बंद, असहयोग आंदोलन तेज Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, भीषण गर्मी में सर्वे को बताया अव्यवहारिक

छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मई-जून की तेज गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा होगा। एक ओर इस समय स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां रहती हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को फील्ड में काम करने के लिए भेजा जा रहा है, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया है। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि इस फैसले में मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है। तेज धूप और उच्च तापमान में लंबे समय तक बाहर रहकर डोर-टू-डोर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। शिक्षक संघ ने मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के समय और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। सरकारी निर्देश के अनुसार, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर का मोबाइल होना जरूरी किया गया है। ऐसे में जिनके पास पुराने फोन हैं, उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। राज्य में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाएगा। कर्मचारी निर्धारित समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। इसके बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे सर्वे के दौरान कर्मचारियों को दिखाना होगा। इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या समेत कुल 33 प्रकार की जानकारियां ली जाएंगी। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना बनाने के ईंधन, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल रहेंगे। घर में रहने वाले सदस्यों और उपयोग किए जाने वाले वाहनों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।

जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, भीषण गर्मी में सर्वे को बताया अव्यवहारिक Read Post »

census, Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में गर्मी का असर: 20 अप्रैल से स्कूलों की छुट्टियां, पहले 1 मई से होना था अवकाश

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और लू को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं। अब प्रदेश के सभी सरकारी, अनुदान प्राप्त, निजी और अन्य स्कूलों में 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। पहले जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों में छुट्टियां 1 मई से शुरू होनी थीं, लेकिन मौजूदा तापमान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि तेज गर्मी में बच्चों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छुट्टियां केवल छात्रों के लिए लागू होंगी। शिक्षकों के लिए अवकाश की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और उन्हें पूर्व निर्धारित निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा। सरकार ने यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उठाया है, ताकि बढ़ती गर्मी से उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

छत्तीसगढ़ में गर्मी का असर: 20 अप्रैल से स्कूलों की छुट्टियां, पहले 1 मई से होना था अवकाश Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Political, State, Top News, weather

PCI इंस्पेक्शन के बीच रावतपुरा विश्वविद्यालय में NSUI का हंगामा: हॉस्टल सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन

रायपुर के रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में PCI (फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया) की निरीक्षण टीम के दौरे के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान कुछ छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। जानकारी के अनुसार, जैसे ही PCI की टीम के आने की सूचना मिली, NSUI के जिला कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। NSUI नेताओं का कहना है कि गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। छात्र लंबे समय से फीस बढ़ोतरी, पानी-बिजली की समस्या, कूलर की व्यवस्था और भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर परेशान हैं। इसके अलावा फार्मेसी विभाग की लैब में जरूरी उपकरणों की कमी भी छात्रों की पढ़ाई में बाधा बन रही है। छात्र नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एडमिशन के समय किए गए वादे पूरे नहीं किए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कुलसचिव की ओर से समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद छात्रों ने अपना धरना खत्म कर दिया। हालांकि NSUI ने साफ किया है कि यदि जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बिना सूचना के उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। साथ ही, संगठन के जिला अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय पर फर्जी पाठ्यक्रमों में दाखिले और छात्राओं से वादाखिलाफी के आरोप भी लगाए हैं।

PCI इंस्पेक्शन के बीच रावतपुरा विश्वविद्यालय में NSUI का हंगामा: हॉस्टल सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन Read Post »

Chhattisgarh, Education, Raipur, Top News

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सत्र 2025-26 के लिए आवेदन और स्वीकृति से जुड़ी अंतिम तिथियों की घोषणा कर दी गई है। रायपुर जिले के सभी शासकीय और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग संस्थानों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रवृत्ति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से विभागीय पोर्टल पर संचालित की जा रही है। पात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को निर्धारित समय के भीतर पंजीयन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, ताकि समय पर स्वीकृति और भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को लंबित प्रस्तावों को लॉक कर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को भेजने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद शासकीय संस्थानों और जिला स्तर पर स्वीकृति आदेश लॉक करने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल है। वहीं राज्य कार्यालय को भुगतान प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी तय की गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपए और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1 लाख रुपए रखी गई है। आवेदन के लिए स्थायी जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पिछली कक्षा का परीक्षा परिणाम अनिवार्य होगा। सत्र 2025-26 से कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। अब संस्थानों के लिए जियो-टैगिंग और विद्यार्थियों के लिए NSP पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य कर दिया गया है।

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में 18 अप्रैल को निजी स्कूल बंद: RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध तेज

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन अब और तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 17 और 18 अप्रैल को लेकर अहम फैसले लिए हैं, जिससे स्कूल संचालन प्रभावित होगा। एसोसिएशन के अनुसार, 1 मार्च से शुरू हुए आंदोलन के तहत पहले ही यह तय किया गया था कि शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत लॉटरी से चयनित वंचित वर्ग के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हाल ही में 14 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी बैठक में दो नए निर्णय लिए गए। इसके तहत 17 अप्रैल को स्कूल संचालक और शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे, जबकि 18 अप्रैल को पूरे प्रदेश के निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। एसोसिएशन ने इन फैसलों की जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री को दे दी है। साथ ही मांग की है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च को सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिससे निजी स्कूलों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ में 18 अप्रैल को निजी स्कूल बंद: RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध तेज Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News
Scroll to Top