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छत्तीसगढ़ में पीजी कोर्स में भी लागू होगी NEP, पाठ्यक्रम में जुड़ेगी भारतीय ज्ञान परंपरा

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्नातक (यूजी) के बाद अब स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य का उच्च शिक्षा विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और नए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को भी शामिल किया जाएगा। पिछले शैक्षणिक सत्र में रायपुर के साइंस कॉलेज जैसे स्वायत्त संस्थानों और विश्वविद्यालयों के पीजी कोर्स में NEP लागू किया जा चुका है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे प्रदेश के अन्य शासकीय और निजी कॉलेजों में भी विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत पीजी पाठ्यक्रमों को अधिक लचीला और रोजगारपरक बनाया जाएगा। इसमें मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा, क्रेडिट आधारित सिस्टम और फ्लेक्सिबल एंट्री-एग्जिट जैसे प्रावधान शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रमों में बदलाव, शिक्षकों का प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में 9 शासकीय विश्वविद्यालय हैं, जिनसे सैकड़ों शासकीय और निजी कॉलेज संबद्ध हैं, जिनमें ऑटोनोमस कॉलेज भी शामिल हैं। 7 मई को होगी अहम समीक्षा बैठक:उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा 7 मई को विभागीय समीक्षा बैठक लेंगे। इस बैठक में पीजी पाठ्यक्रमों में NEP लागू करने सहित 17 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में शिक्षक भर्ती, शैक्षणिक कैलेंडर और कॉलेजों में ऑनलाइन उपस्थिति जैसे विषय भी शामिल होंगे। क्या है भारतीय ज्ञान परंपरा:भारतीय ज्ञान परंपरा भारत की प्राचीन बौद्धिक धरोहर है, जिसमें गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, दर्शन और धातु विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना है, ताकि छात्र अपनी जड़ों से जुड़ सकें और समकालीन चुनौतियों का समाधान खोज सकें। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत इसे पीजी पाठ्यक्रम में शामिल करने का मकसद छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास करना और उन्हें प्राचीन भारतीय ज्ञान से परिचित कराना है। इसके जरिए छात्र कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर वैदिक गणित जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर सकेंगे।

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“सपनों को लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत ही सफलता की कुंजी” — मेधावी छात्रों को CM साय की सीख

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। Balrampur-Ramanujganj जिले के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने छात्रों से बातचीत के दौरान उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जाना। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा जताई, जबकि कुछ ने प्रशासनिक सेवा और न्यायिक क्षेत्र में जाने का लक्ष्य रखा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए बड़े सपने देखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उन्हें लक्ष्य में बदलकर लगातार मेहनत करना। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने की सलाह दी और कहा कि दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता के लिए उनके माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को भी सराहा। कार्यक्रम में जिले के कई मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला, जिससे उनमें आगे बढ़ने का उत्साह और भी बढ़ गया।

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रायपुर में शिक्षिका का तलवार वाला वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर हथियार लहराकर चुनौती, जांच के घेरे में मामला

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। अब एक शिक्षिका का तलवार के साथ वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में एक युवती हाथ में खुली तलवार लेकर रील बनाती नजर आ रही है। सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर उसकी पहचान श्रद्धा शर्मा के रूप में की जा रही है, जो खुद को लेक्चरर बताती है। जानकारी के अनुसार वह Pandit Girija Shankar Atmanand School में पढ़ाने का दावा करती है। बताया जा रहा है कि वीडियो में तलवार लहराते हुए बैकग्राउंड में फिल्मी डायलॉग का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह कंटेंट और भी विवादित हो गया है। खास बात यह है कि ऐसे वीडियो उस समय सामने आए हैं, जब पुलिस पहले से ही सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन के खिलाफ सख्ती बरत रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस मामले में भी कार्रवाई की जाएगी और क्या कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। इससे पहले पुलिस कई मामलों में युवकों पर कार्रवाई कर चुकी है। इस तरह के वीडियो न केवल कानून-व्यवस्था के लिहाज से चिंता का विषय हैं, बल्कि समाज पर भी इसका असर पड़ता है। खासकर जब शिक्षा से जुड़े लोग इस तरह का कंटेंट बनाते हैं, तो यह बच्चों और युवाओं के लिए गलत संदेश दे सकता है। फिलहाल मामले को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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रायपुर कला केंद्र में समर कैंप की शुरुआत, बच्चों को कला और खेल की मिल रही ट्रेनिंग

राजधानी Raipur के कला केंद्र में 15 दिनों के समर कैंप के पहले बैच की शुरुआत हो गई है। यह कैंप कलेक्टर Dr. Gaurav Kumar Singh के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। पहले ही दिन 135 से ज्यादा बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया। कैंप के पहले दिन बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेते हुए नई चीजें सीखना शुरू किया। इस समर कैंप में गायन, वादन, गिटार, कीबोर्ड, नृत्य, क्ले आर्ट, पेंटिंग, माटी कला और ताइक्वांडो जैसी कई चीजों की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह समर कैंप तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 1 मई से 15 मई, दूसरा 16 मई से 30 मई और तीसरा 1 जून से 15 जून तक चलेगा। कैंप का समय सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे तक रखा गया है। हर दिन की शुरुआत 30 मिनट के योग और जुंबा से होती है। इसके बाद बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाता है। कला केंद्र के नोडल अधिकारी केदार पटेल ने बताया कि बच्चों और अभिभावकों में इस कैंप को लेकर अच्छा उत्साह है। उन्होंने कहा कि जो भी अभिभावक अपने बच्चों को इसमें शामिल करना चाहते हैं, वे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

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CGPSC मेंस परीक्षा 2025 की तारीख बदली, अब 6 से 9 जून के बीच होगी परीक्षा

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी Chhattisgarh Public Service Commission ने राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा 2025 की नई तारीखें जारी कर दी हैं। पहले यह परीक्षा 16 से 19 मई 2026 के बीच होनी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 6, 7, 8 और 9 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा। यह परीक्षा प्रदेश के पांच शहरों—Ambikapur, Bilaspur, Durg, Jagdalpur और Raipur—में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का पूरा शेड्यूल इस तरह रहेगा: 6 जून (शनिवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-1 (भाषा)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-2 (निबंध) 7 जून (रविवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-3 (सामान्य अध्ययन-I)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-4 (सामान्य अध्ययन-II) 8 जून (सोमवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-5 (सामान्य अध्ययन-III)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-6 (सामान्य अध्ययन-IV) 9 जून (मंगलवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-7 (सामान्य अध्ययन-V) आयोग के अनुसार, परीक्षा के एडमिट कार्ड परीक्षा से करीब 10 दिन पहले जारी किए जाएंगे। उम्मीदवार इन्हें आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। यह भी साफ कर दिया गया है कि एडमिट कार्ड किसी को डाक या SMS के जरिए नहीं भेजे जाएंगे। सभी अभ्यर्थियों को खुद वेबसाइट पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा।

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छत्तीसगढ़ बोर्ड टॉपर्स की प्रेरक कहानियां: मोबाइल से दूरी, डिजिटल स्टडी और संघर्ष से हासिल की सफलता

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस बार चर्चा सिर्फ पास प्रतिशत या मेरिट लिस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि टॉपर्स की संघर्ष भरी कहानियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। 12वीं में 83.04 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए, जबकि टॉप-10 मेरिट सूची में 43 छात्रों ने जगह बनाई। 10वीं में भी 42 छात्र मेरिट में शामिल रहे। खास बात यह रही कि इस बार लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इन परिणामों के पीछे अलग-अलग परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले छात्रों की मेहनत छिपी है। किसी ने पिछली असफलता को अपनी ताकत बनाया, तो किसी ने बिना कोचिंग डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कर सफलता हासिल की। कुछ छात्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। दो नंबर से छूटा सपना, बना टॉप करने की वजहबलौदाबाजार जिले के पलारी निवासी जिज्ञासु वर्मा ने 12वीं बोर्ड में 98.60 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। खास बात यह है कि 10वीं में वे सिर्फ दो अंकों से मेरिट सूची से बाहर हो गए थे। यही कमी उनके लिए प्रेरणा बन गई। जिज्ञासु एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता किराना दुकान चलाते हैं और मां सरकारी स्कूल में प्रधानपाठिका हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन और फोकस के साथ पढ़ाई की। परीक्षा से 21 दिन पहले उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली और केवल किताबों पर ध्यान दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म से पढ़ाई कर हासिल किया मुकामरायपुर की हिमशिखा गुप्ता ने बिना कोचिंग 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए यूट्यूब और ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। हिमशिखा रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन पूरी एकाग्रता के साथ। किसी भी विषय में समस्या आने पर वे तुरंत ऑनलाइन माध्यमों से समाधान ढूंढती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि सही दिशा में मेहनत करने से सफलता संभव है। मैकेनिक की बेटी बनी मेरिट में शामिलरायपुर की आफिया खातून ने 12वीं बोर्ड में 9वां स्थान हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। उनके पिता मोटर मैकेनिक हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। बिना कोचिंग के आफिया ने स्कूल और ऑनलाइन माध्यमों के सहारे अपनी तैयारी की। अब उनका लक्ष्य UPSC परीक्षा पास कर देश सेवा करना है। करघे के घर से मेरिट तक का सफरबलौदाबाजार के कटगी गांव के नितेश देवांगन ने 12वीं में प्रदेश में 9वां स्थान हासिल किया। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां पारंपरिक रूप से कपड़ा बुनने का काम होता है। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद नितेश ने मेहनत और धैर्य के दम पर यह सफलता हासिल की। उनकी उपलब्धि अब गांव के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है। निष्कर्षइन सभी टॉपर्स की कहानियां यह दिखाती हैं कि सफलता सिर्फ संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही सोच, मेहनत और निरंतरता से हासिल होती है। किसी ने मोबाइल से दूरी बनाकर फोकस बढ़ाया, तो किसी ने उसी तकनीक को अपनी ताकत बनाया। हर कहानी अलग है, लेकिन संदेश एक ही है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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CG बोर्ड पेपर लीक केस में फरार आरोपी पर 5 हजार का इनाम, रायपुर पुलिस ने जारी की घोषणा

छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार आरोपी वेणु जंघेल की गिरफ्तारी के लिए Raipur पुलिस ने 5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। सिटी कोतवाली थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 130/2026 में आरोपी की लंबे समय से तलाश जारी है, लेकिन अब तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस के अनुसार, आरोपी वेणु जंघेल (18) मूल रूप से Bemetara जिले के बोरतरा गांव का रहने वाला है और हाल ही में रायपुर के गुढ़ियारी इलाके में रह रहा था। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 के तहत मामला दर्ज है। यह पूरा प्रकरण 14 मार्च 2026 को सामने आए पेपर लीक मामले से जुड़ा है। इस संबंध में सेंट्रल जोन की डिप्टी पुलिस कमिश्नर Archana Jha ने रायपुर पुलिस रेग्युलेशन के तहत इनाम की घोषणा जारी की है। आदेश में कहा गया है कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपा हुआ है और उसकी गतिविधियां समाज के लिए खतरा बन सकती हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति आरोपी के बारे में ठोस जानकारी देगा या उसकी गिरफ्तारी में मदद करेगा, उसे 5 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इनाम देने का अंतिम निर्णय डिप्टी पुलिस कमिश्नर (मध्य क्षेत्र) द्वारा लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 12वीं बोर्ड के नतीजे जारी होने से पहले इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। अब इनाम घोषित होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश और तेज कर दी है।

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CG बोर्ड 10वीं रिजल्ट आज 2:30 बजे जारी, 3.20 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) आज दोपहर 2:30 बजे 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित करने जा रहा है। लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने वाला है और वे अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर के जरिए देख सकेंगे। इस साल करीब 3,20,535 छात्र-छात्राओं ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीयन कराया था। परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थी अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो अब कुछ ही घंटों में खत्म हो जाएगा। पिछले वर्ष यानी 2025 की बात करें तो लगभग 3,23,094 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 76.53 प्रतिशत छात्र सफल हुए थे। यह परिणाम पिछले चार वर्षों में सबसे बेहतर माना गया था, जिसमें करीब 2.46 लाख विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की थी। 2025 में कुल मिलाकर करीब 5.65 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिसमें 10वीं के परीक्षार्थियों की संख्या 3.23 लाख के आसपास थी। वहीं 2026 में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर लगभग 3.20 लाख रह गया है। पिछले साल की तरह इस बार भी रिजल्ट में छात्राओं के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि बीते वर्षों में लड़कियों ने बेहतर परिणाम दिए हैं। इसके अलावा मेरिट लिस्ट, टॉपर्स और पास प्रतिशत को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों की उत्सुकता बनी हुई है।

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छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) कल दोपहर 2:30 बजे हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के नतीजे घोषित करेगा। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी। इस साल करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनकी मेहनत का परिणाम अब सामने आने वाला है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्र अपना रोल नंबर दर्ज कर आसानी से रिजल्ट देख सकेंगे। इस बार 10वीं में 3,20,535 और 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थी शामिल हुए। आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं के छात्रों की संख्या 12वीं से लगभग 31 प्रतिशत अधिक रही, जो हर साल की तरह इस बार भी ट्रेंड को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों की संख्या लगभग स्थिर रही है, हालांकि 12वीं में छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। रिजल्ट का इंतजार सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों के लिए भी बेहद अहम होता है। 10वीं के छात्र जहां आगे के विषय और स्ट्रीम का चयन करेंगे, वहीं 12वीं के छात्र कॉलेज एडमिशन और करियर की दिशा तय करेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी सभी की नजर पास प्रतिशत, मेरिट लिस्ट और टॉपर्स पर टिकी हुई है। मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे रिजल्ट को सकारात्मक रूप से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी में जुटें, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराश होने के बजाय नए अवसरों पर ध्यान दें।

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छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। 16 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का असर राज्य के करीब 38 हजार गरीब बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस फैसले को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे संविधान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में शिक्षा की शुरुआत प्री-स्कूल स्तर से होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस शुरुआती चरण से बाहर करना उन्हें आगे की पढ़ाई में भी पीछे धकेल सकता है। सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया है कि RTE अधिनियम मूल रूप से 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों, यानी कक्षा 1 से 8 तक के लिए बनाया गया है। ऐसे में प्री-स्कूल को इसमें शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। सरकार के अनुसार यदि प्री-स्कूल को RTE के तहत रखा जाता है, तो हर साल लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। सरकार का यह भी कहना है कि पहले प्री-स्कूल को RTE में शामिल करना एक प्रशासनिक त्रुटि थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का एक अलग पक्ष भी है। साल 2015-16 में राज्य सरकार ने खुद यह निर्णय लिया था कि प्री-स्कूल को RTE के दायरे में लाया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा मिल सके। उस समय सरकार का मानना था कि प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और भविष्य में ड्रॉपआउट दर भी कम होती है। साथ ही, यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए भी अहम माना गया था, ताकि गरीब और अमीर बच्चे एक साथ पढ़ सकें। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि छोटे बच्चों में ड्रॉपआउट दर अधिक होती है और प्री-स्कूल के नाम पर कई नए संस्थान खुल रहे हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 से 8 साल के बच्चों में ड्रॉपआउट दर लगभग 2 से 3 प्रतिशत के बीच है, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। हालांकि, नामांकन में कमी जरूर देखी गई है, जहां 16 से 28 प्रतिशत तक बच्चे अब भी प्री-प्राइमरी शिक्षा से बाहर हैं। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्री-स्कूल कक्षाएं दोबारा RTE के दायरे में आएंगी या नहीं, और राज्य की शिक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी

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