Raipur

रायपुर में दिन के समय रैली-जुलूस पर रोक: जयस्तंभ चौक समेत 4 किमी दायरे में 2 माह का प्रतिबंध

रायपुर। शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक और यातायात क्षेत्र में बढ़ते जाम को देखते हुए रायपुर पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है। जयस्तंभ चौक और उससे जुड़े जीई रोड, मालवीय रोड, एमजी रोड और सदर रोड समेत करीब 4 किलोमीटर के दायरे में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और शोभायात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश फिलहाल दो माह के लिए प्रभावी रहेगा। एक साल में 290 से अधिक जुलूस, ट्रैफिक हुआ बेपटरी पुलिस सर्वे के अनुसार, बीते 365 दिनों में इस क्षेत्र से 290 से ज्यादा छोटे-बड़े जुलूस निकले। इनमें से लगभग 190 रैलियां केवल कोतवाली–जयस्तंभ और शारदा चौक मार्ग से गुजरीं। नतीजतन, कई बार लंबा जाम लगा और एंबुलेंस तक फंस गईं, जिससे मरीजों की हालत गंभीर होने की घटनाएं सामने आईं। 1.20 लाख वाहन रोज गुजरते हैं ट्रैफिक सर्वे में पाया गया कि जयस्तंभ चौक से प्रतिदिन 1.20 लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। यदि करीब हजार लोगों की भी रैली निकलती है तो दो किलोमीटर के दायरे में तीन घंटे तक यातायात ठप हो जाता है और ढाई लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। कमिश्नर सिस्टम के बाद सख्ती पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद ट्रैफिक सुधार को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही थी। डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने नौ साल पहले एसपी रहते हुए भी इसी तरह की अनुशंसा की थी, जिसे उस समय लागू किया गया था। बाद में ढील मिलने से फिर धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। पहले ही दिन विरोध, समझौते से निकला समाधान प्रतिबंध लागू होते ही सिंधी समाज ने विरोध जताया। पुलिस और समाज के पदाधिकारियों के बीच बैठक के बाद सहमति बनी कि जुलूस जीई रोड के बजाय एमजी रोड पर रात 9 बजे समाप्त किया जाएगा। 🚦 इन मार्गों पर दिन में प्रतिबंध ➡️ वैकल्पिक मार्ग तय रैलियां अब शहर के आउटर मार्गों से निकाली जाएंगी। सप्रे मैदान से निकलने वाली रैली फायर ब्रिगेड चौक होते हुए कलेक्टोरेट तिराहे तक जा सकेगी। सामाजिक जुलूसों को गौरवपथ, पुलिस लाइन और निर्धारित धरनास्थल मार्गों का उपयोग करने की अनुमति होगी। दो माह के लिए प्रभावी आदेश जयस्तंभ चौक को शहर का हृदय स्थल माना जाता है। भारी ट्रैफिक दबाव को देखते हुए फिलहाल दो माह के लिए यह प्रतिबंध लागू किया गया है। पुलिस का कहना है कि इससे यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और आम नागरिकों को राहत मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: कस्टोडियल डेथ से रेव पार्टी तक गूंजे कई अहम मुद्दे, सरकार पर विपक्ष का दबाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और आबकारी नीति जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस के आसार हैं। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। कस्टोडियल डेथ और जेलों की स्थिति पर सरकार घिरी पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने राज्य में बढ़ते कस्टोडियल डेथ के मामलों को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही जेलों में स्वीकृत क्षमता से अधिक कैदियों के बंद होने की स्थिति पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि जेल प्रशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। 108 एंबुलेंस, रोजगार और अधूरे सड़क कार्य प्रश्नकाल में 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से जवाब तलब किया जाएगा। तकनीकी संस्थानों से पासआउट युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों और नक्सल पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा होगी। मेकाहारा की बदहाल व्यवस्था पर सवाल मेकाहारा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर सुधारात्मक कदमों की मांग की जाएगी। रायपुर के फार्महाउस और रेव पार्टी का मामला रायपुर में फार्महाउस पर कथित अवैध गतिविधियों और रेव पार्टियों के आयोजन का मुद्दा भी सदन में उठेगा। गृह विभाग से यह पूछा जाएगा कि ऐसे आयोजनों की निगरानी और कार्रवाई के लिए क्या व्यवस्था है और अब तक कितनी कार्रवाई की गई है। शराब दुकानों के आवंटन पर ध्यानाकर्षण शराब दुकानों और आहता आवंटन में पारदर्शिता और स्पष्ट मापदंडों के अभाव का मुद्दा भी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि दुकान आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। पारधी समुदाय के जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा आदिम जाति और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग से जुड़े मामलों में पारधी समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं होने का विषय भी सदन में उठेगा। बजट पर चर्चा की शुरुआत प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के बाद 24 फरवरी को पेश किए गए बजट पर चर्चा शुरू होगी। विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को बजट से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगेंगे। कुल मिलाकर, बजट सत्र का चौथा दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन बहस का साक्षी बनने जा रहा है। कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: गिग वर्करों की सुरक्षा, ग्रीनरी और जनहित के मुद्दों पर गरमाई बहस

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान सदन में गिग वर्करों की सुरक्षा, श्रम अधिकार, शहरी हरियाली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों से जुड़े सवालों के बीच विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने जनहित के विषयों को जोरदार तरीके से उठाया। गिग वर्करों की सुरक्षा पर नियम बनाने की मांग भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले युवाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सदन में पूछा कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्करों को संगठित श्रमिक माना जाएगा या असंगठित? उन्होंने तेज डिलीवरी के दबाव, सड़क सुरक्षा और मानसिक तनाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में सरकार को स्पष्ट नियम-निर्देश बनाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों से परामर्श लेकर या सेवानिवृत्त न्यायाधीश/विधि विशेषज्ञ की समिति बनाकर ठोस नीति तैयार की जाए। इस पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब दिया कि वर्तमान में गिग वर्करों को न तो संगठित और न ही असंगठित श्रमिक की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार ही राज्य में प्रावधान लागू होंगे। बिलासपुर में ग्रीनरी और ऑक्सीजन बढ़ाने का मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान बिलासपुर की हरियाली को लेकर भी चर्चा हुई। तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने शहर में मुक्तिधाम, अप्रोच रोड और नए गार्डन विकसित कर ग्रीनरी बढ़ाने की मांग की। वित्त मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि बिलासपुर को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कई विकास कार्य मिले थे। आठ अलग-अलग स्थानों पर उद्यानों में विशेष पौधारोपण और हेजिंग का काम किया गया है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ऑक्सीजन जोन और हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। आज सदन में किन मुद्दों पर रहेगी नजर? सदन की कार्यवाही के दौरान कई अहम प्रतिवेदन और अधिसूचनाएं पेश की जाएंगी। इसके अलावा जल जीवन मिशन, शहरी पर्यावरण, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रश्नकाल में जनहित से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की कोशिश जारी रहेगी।

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छत्तीसगढ़ बजट 2026: सीएम साय बोले- समावेशी विकास और सुशासन को नई मजबूती देगा बजट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के विज़न को मजबूती देगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बजट समावेशी विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाएगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नकाल में जल संसाधन विभाग पर चर्चा सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक भोलाराम साहू ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जल संसाधन विभाग के किन-किन कार्यों को बजट में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि वर्ष 2024-25 में 16 कार्य शामिल थे, जिनमें से एक कार्य को 13 अगस्त 2025 को स्वीकृति मिली। पाइपलाइन से जुड़े कार्य को पूरा कर लिया गया है, जिस पर 24.51 करोड़ रुपये खर्च हुए। खुज्जी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े 15 अन्य कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। शेष कार्यों की समय-सीमा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। मोबाइल टावर स्थापना पर उठा सवाल विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर जिले में भवनों की उपयुक्तता जांच के बिना मोबाइल टावर लगाए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिना परीक्षण के टावर लगाए गए हैं तो लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल टावर स्थापना के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के “राइट ऑफ वे” पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अपनाई जाती है। सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता भाजपा विधायक सुनील सोनी के प्रश्न के जवाब में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बीते एक वर्ष में प्रदेश में 6,898 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई है। इनमें से 621 मौतें रायपुर जिले में दर्ज की गईं। मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा सुधारने और यातायात व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सदन में सवाल-जवाब के इस दौर के बीच अब सभी की निगाहें बजट के विस्तृत प्रावधानों और घोषणाओं पर टिकी हैं, जिससे प्रदेश के विभिन्न वर्गों को बड़ी उम्मीदें हैं।

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भोपाल में धर्मांतरण और शोषण का जाल उजागर: मुंगेली की ब्यूटिशियन से दुष्कर्म, दो बहनें गिरफ्तार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित धर्मांतरण और यौन शोषण से जुड़े एक हाईप्रोफाइल मामले का खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की रहने वाली एक ब्यूटिशियन और उसकी सहेली ने भोपाल के बाग सेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दो सगी बहनों—अमरीन और आफरीन—को गिरफ्तार कर लिया। मामले में चंदन यादव को भी पकड़ा गया है, जबकि बिलाल, चानू और यासिर फरार बताए जा रहे हैं। इंस्टाग्राम से शुरू हुआ संपर्क, फिर जाल में फंसाया पीड़िताओं की आपसी पहचान इंस्टाग्राम चैट के जरिए हुई थी। आरोप है कि अमरीन और आफरीन गरीब घरों की लड़कियों को निशाना बनाती थीं। पहले उन्हें घरेलू काम के बहाने अपने पास रखतीं, फिर हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का लालच देकर पार्टियों में ले जातीं। वहां अमीर युवकों के साथ जबरन संबंध बनाने का दबाव डाला जाता था। पीड़िताओं के अनुसार, उन्हें शराब और नशीले पदार्थ लेने के लिए मजबूर किया गया और कई बार अलग-अलग लोगों के साथ दुष्कर्म कराया गया। विरोध करने पर बदनाम करने और जान से मारने की धमकी दी जाती थी। धर्म परिवर्तन का दबाव भोपाल की एक पीड़िता ने बताया कि चंदन यादव ने उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। शादी का लालच देकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए राजी किया गया। इसके बाद उसे बुर्का पहनने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। मुंगेली की पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे गुजरात और मुंबई भी ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। झुग्गी से आलीशान विला तक पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बहनें भोपाल के अब्बास नगर की झुग्गी से निकलकर आशिमा मॉल के पास स्थित सागर रॉयल विला में रहने लगी थीं। पुलिस को उनके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप और युवतियों की तस्वीरें मिली हैं। मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। देह व्यापार से जुड़े होने के संकेत पुलिस को शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी बहनें देह व्यापार से जुड़े गिरोह का संचालन कर रही थीं। पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें 10 हजार रुपए मासिक वेतन पर घर में रखा जाता था और पार्टियों में ले जाया जाता था। काम छोड़ने की बात करने पर हत्या की धमकी दी जाती थी। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर और क्राइम ब्रांच की टीम भी जांच में जुटी है।

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रायपुर: ट्रांसपोर्ट नगर की पार्किंग में जुआ, 19 आरोपी गिरफ्तार; 5 लाख से अधिक की रकम और सामान जब्त

राजधानी रायपुर में जुआ खेलने के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 19 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामला ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पार्किंग नंबर-6 का है, जहां आरोपी 52 पत्ती ताश से हार-जीत का दांव लगा रहे थे। खमतराई थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दीदी के ढाबा के पास कुछ लोग पार्किंग परिसर में बैठकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और सभी आरोपियों को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 2,52,520 रुपए नकद और 20 मोबाइल फोन जब्त किए। कुल जब्त माल की कीमत 5,02,520 रुपए आंकी गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर के निर्देश पर की गई। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आकाश मरकाम और सहायक पुलिस आयुक्त उरला पूर्णिमा लामा के नेतृत्व में टीम ने रेड की। नॉर्थ जोन क्षेत्र में असामाजिक तत्वों, जुआरियों और संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। गिरफ्तार आरोपी पुलिस ने जिन 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वे रायपुर के अलग-अलग इलाकों—धनेली, रावाभाठा, उरकुरा, बंजारी नगर, भनपुरी, खुडमुडी और दोन्देकला—के निवासी हैं। सभी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद शहर में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। पुलिस का दावा है कि ऐसी कार्रवाई से अपराधियों पर अंकुश लगेगा और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।

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57 करोड़ की तीन मल्टीलेवल पार्किंग बेअसर: सुरक्षा और सिस्टम फेल, कमिश्नरेट के बाद रिपोर्ट तैयार

रायपुर शहर में करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से बनी तीन मल्टीलेवल पार्किंग सुविधाएं उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, पास सिस्टम और निगरानी की कमी के कारण लोग इन पार्किंग भवनों का उपयोग करने से बच रहे हैं। अब पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पहली बार इन पार्किंग व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जा रही है और पुख्ता बदलाव के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। नगर निगम को यह सवाल परेशान कर रहा है कि सैकड़ों वाहनों की क्षमता होने के बावजूद लोग अपनी गाड़ियां सड़कों पर क्यों खड़ी कर रहे हैं। कमिश्नरेट लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पार्किंग शुल्क, पास सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर सुझाव मांगे गए हैं। सड़कों पर 2 घंटे में 87 हजार वाहन केंद्र सरकार की एजेंसी राइट्स के सर्वे के अनुसार, जिन इलाकों में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई गई है, वहां हर दो घंटे में करीब 87 हजार वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। इसके बावजूद पार्किंग भवन खाली नजर आते हैं। एमजी रोड, सदर बाजार, जीई रोड, मालवीय रोड, गोल बाजार, कोतवाली चौक और रवि भवन जैसे इलाकों में सड़क किनारे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। तीनों पार्किंग की स्थिति कलेक्टोरेट पार्किंग (22 करोड़ रुपये)छह मंजिला इस पार्किंग में 406 कार और 140 दोपहिया वाहन खड़े करने की क्षमता है, लेकिन यहां रोजाना तोड़फोड़ और वाहन चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। जवाहर बाजार पार्किंग (20 करोड़ रुपये)यहां 246 कार और 400 दोपहिया वाहनों की क्षमता है, लेकिन रात में अंधेरा और प्रभावी निगरानी की कमी बड़ी समस्या है। स्थानीय कारोबारियों के दबदबे के कारण कई गाड़ियां बिना शुल्क के खड़ी की जा रही हैं। जयस्तंभ चौक पार्किंग (15 करोड़ रुपये)240 कार और 350 दोपहिया की क्षमता वाली इस पार्किंग में पास सिस्टम में गड़बड़ी है। एक पास पर कई गाड़ियां खड़ी होने और एंट्री-एग्जिट जांच के अभाव की शिकायतें मिल रही हैं। नए पार्किंग भवन की जरूरत राइट्स की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शहर के व्यस्त इलाकों—एमजी रोड (शारदा चौक से गुरुनानक चौक), जीई रोड, सदर बाजार रोड, फाफाडीह से रेलवे स्टेशन चौक और कोतवाली चौक से फायर ब्रिगेड चौक—के बीच छोटे या मध्यम आकार के नए पार्किंग भवन बनाए जाएं, ताकि बाजार आने वाले लोग सड़क पर वाहन खड़े करने के बजाय पार्किंग सुविधा का उपयोग करें। “सिस्टम में बड़े बदलाव होंगे” नगर निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, तीनों मल्टीलेवल पार्किंग के बेहतर उपयोग के लिए व्यापक योजना पर काम हो रहा है। सुरक्षा, निगरानी और शुल्क व्यवस्था में बदलाव कर इन्हें अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि लोग स्वेच्छा से यहां वाहन पार्क करें। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार पार्किंग सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित बदलाव ट्रैफिक जाम की समस्या को कितना कम कर पाते हैं।

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छत्तीसगढ़ बजट 2026-27: पेशी से पहले मंदिर पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी, महिलाओं के लिए खास प्रावधान के संकेत

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी साय सरकार का तीसरा बजट सदन में प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश करने से पहले वे अपने सरकारी निवास स्थित मंदिर में पत्नी अदिति चौधरी के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचे। अदिति चौधरी ने कहा कि इस बार का बजट महिलाओं के लिए विशेष रहेगा। पूजा के बाद वित्त मंत्री राम मंदिर के लिए रवाना हुए और वहां से सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। बजट दोपहर 12:30 बजे पेश किया जाएगा। सीएम साय ने दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बजट को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि नवीन विधानसभा भवन में पेश हो रहा यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के विजन को मजबूती देगा। बड़े ऐलानों की संभावना इस बार के बजट में कई बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें जल बोर्ड गठन, ‘जी राम जी’ (Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) योजना के तहत ग्राम पंचायतों के विकास, स्टार्टअप और MSME को प्रोत्साहन, तथा राजधानी को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार गुड गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासनिक सुधारों पर भी फोकस कर सकती है। ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान संभव हैं। युवा, किसान और महिला वर्ग पर फोकस युवाओं के लिए रोजगार सृजन और स्टार्टअप नीति में नए प्रावधानों की घोषणा हो सकती है। MSME सेक्टर को निवेश प्रोत्साहन योजनाओं से मजबूती दी जा सकती है। किसानों के लिए समर्थन मूल्य, सिंचाई और कृषि अधोसंरचना में अतिरिक्त बजट का प्रावधान संभव है। महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूत करने के संकेत भी मिले हैं। आयुष्मान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपए तक का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजधानी और ग्रामीण विकास मुख्यमंत्री राजधानी विकास योजना के तहत राजधानी को आधुनिक सुविधाओं से लैस मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जी राम जी’ योजना के जरिए सड़क, नाली, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ा बजट रखा जा सकता है। खेल, संस्कृति और शिक्षा पर भी ध्यान शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में उनकी प्रतिमा स्थापना के लिए लगभग 1.86 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सारंगढ़ इंडोर स्टेडियम के नवीनीकरण और छोटे शहरों में खेल मैदान विकसित करने की योजना भी चर्चा में है। इसके अलावा जिलों में नालंदा लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए फंड जारी होने की संभावना है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर यह बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन साधने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजरें वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी हैं।

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रायपुर पुलिस कमिश्नरी को एक माह: 15,836 अपराध दर्ज, शहर में दुष्कर्म-चोरी तो देहात में हत्या के मामले ज्यादा

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 800 से ज्यादा बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत शहर को तीन जोन—सेंट्रल, वेस्ट और नॉर्थ—में विभाजित किया गया है, जिनमें 21 थानों को शामिल किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कमिश्नरी सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी और अपराधों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, पिछले एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 33 थानों में कुल 15,836 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें शहरी क्षेत्र के 21 थानों में दुष्कर्म, चोरी और जालसाजी के मामले अधिक रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों में हत्या, मारपीट, दहेज मृत्यु और सड़क हादसों में मौत के मामले ज्यादा सामने आए। वेस्ट जोन-2 सबसे संवेदनशील आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट क्षेत्र में वेस्ट जोन-2 को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां के 9 थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में 4,072 अपराध दर्ज हुए, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक हैं। “शुरुआत में आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं” रिटायर्ड डीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि कमिश्नरी लागू होने के बाद थानों का पुनर्गठन हुआ है, इसलिए शुरुआत में अपराध के आंकड़े ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। उनका मानना है कि अधिकारी-आधारित पुलिसिंग, नियमित पेट्रोलिंग और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले समय में अपराध में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, ताकि अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। हर दिन 43 अपराध, रोज 5 से ज्यादा चोरी रायपुर जिले में औसतन प्रतिदिन 43 अपराध दर्ज हो रहे हैं। चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल 1,921 चोरी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,442 वाहन चोरी और 479 मकान चोरी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, औसतन हर दिन एक अपहरण का मामला भी सामने आ रहा है। बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर जोर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, फिलहाल बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जोनवार अपराधों की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं और उसी आधार पर रणनीति बनाई जाएगी। कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत को लेकर प्रशासन आश्वस्त है कि सख्त कार्रवाई और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले महीनों में अपराध दर में गिरावट देखने को मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ में होली पर ड्राई डे: सरकार का यू-टर्न, राज्यभर में बंद रहेंगी शराब दुकानें

छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने होली पर शराब बिक्री की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। आबकारी विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा। आदेश जारी होने के बाद राज्यभर में होली के दिन सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। दरअसल, नई आबकारी नीति में पहले तय सात ड्राई डे में से तीन दिन—होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस)—को हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि इन अवसरों पर शराब दुकानें खुली रहेंगी। लेकिन अब सरकार ने अपना रुख बदलते हुए होली पर फिर से ड्राई डे लागू करने का निर्णय लिया है। कानून-व्यवस्था और सामाजिक पहलू को देखते हुए फैसला सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से शराब बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। हालांकि, अन्य ड्राई डे पूर्व निर्धारित नीति के अनुसार ही लागू रहेंगे। 2026-27 में सिर्फ चार तय ड्राई डे नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत फिलहाल केवल चार दिन ही ड्राई डे घोषित किए गए हैं: इन तिथियों पर राज्यभर में शराब बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। 30 जनवरी को खुले दुकानों पर हुआ था विरोध गौरतलब है कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे और नियमों में बदलाव की मांग की थी। अब होली को लेकर सरकार के ताजा निर्णय से स्थिति साफ हो गई है कि त्योहार के दिन शराब बिक्री नहीं होगी। हालांकि, आबकारी विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही अंतिम स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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