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रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

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रायगढ़ में बंद मकानों को बनाया निशाना, दो घरों से नकदी व जेवरात समेत 2.10 लाख की चोरी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चोरों ने त्योहार के दौरान सूने पड़े मकानों को निशाना बनाते हुए दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम दिया है। अज्ञात चोरों ने दोनों घटनाओं में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। दोनों ही परिवार घर में ताला लगाकर त्योहार मनाने बाहर गए हुए थे। मामलों में संबंधित थानों में अपराध दर्ज कर पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। जूटमिल थाना क्षेत्र में पहली वारदात पहली घटना जूटमिल थाना क्षेत्र के मिट्ठुमुड़ा इलाके की है। पीड़ित शिव कुमार साव (42) ने पुलिस को बताया कि वे पीडी कॉमर्स कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। शनिवार सुबह वे अपने परिवार के साथ बड़े भंडार पर्व मनाने के लिए घर बंद कर बाहर गए थे। सोमवार को घर लौटने पर उन्होंने देखा कि कमरे का ताला टूटा हुआ है और घर का सामान बिखरा पड़ा है। अलमारी का लॉकर भी तोड़ दिया गया था, जिसमें रखे 80 हजार रुपये नकद और करीब 1 लाख 20 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो चुके थे। आसपास पूछताछ के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने जूटमिल थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली थाना क्षेत्र में दूसरी चोरी दूसरी चोरी की घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के रामभांठा इलाके में सामने आई है। यहां रहने वाले अनिल कुजूर (52) जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत हैं। वे 26 दिसंबर को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए अपने गृह ग्राम बासाडीह, जिला जशपुर चले गए थे। अगले दिन मकान मालिक से उन्हें सूचना मिली कि घर का ताला टूटा हुआ है। रायगढ़ लौटने पर उन्होंने पाया कि अलमारी का लॉकर तोड़ा गया है और उसमें रखे करीब 90 हजार रुपये के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए हैं। इसके बाद अनिल कुजूर ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही चोरों को गिरफ्तार कर चोरी का खुलासा किया जाएगा।

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रायगढ़ हिंसा: महिला आरक्षक से अमानवीय व्यवहार, 5 आरोपी गिरफ्तार, राजनीतिक बयानबाजी तेज

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि एक महिला आरक्षक के साथ मारपीट और बदसलूकी की गंभीर घटना भी सामने आई है। आरोप है कि महिला आरक्षक को दौड़ाकर पीटा गया और उसकी वर्दी फाड़ दी गई, साथ ही इस अमानवीय कृत्य का वीडियो भी बनाया गया। इस मामले में पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास और वनमाली राठिया शामिल हैं। कैसे बिगड़े हालात दरअसल, 8 दिसंबर को धौराभाठा में JPL के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक को लेकर हुई जनसुनवाई के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर को लिबरा चौक पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए गए। उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों, एम्बुलेंस और अन्य सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट पहुंचे, जहां कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों को नुकसान पहुंचाया गया। अधिकारियों की मौजूदगी में भी हिंसा स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद पथराव और आगजनी जारी रही। JPL प्रबंधन का फैसला लगातार विरोध और बिगड़ते हालात को देखते हुए JPL प्रबंधन ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने का निर्णय लिया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया इस घटना पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने महिला आरक्षक के साथ हुई घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध” बताया और कहा कि सरकार को जनता में बढ़ते गुस्से पर आत्ममंथन करना चाहिए। वहीं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने मामले की गहराई से जांच की बात भी कही।

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रायगढ़ में कोयला खदान की जनसुनवाई टली, ग्रामीणों के विरोध से झुका जिंदल प्रबंधन

3100 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण पर लगा ब्रेक, कंपनी ने आवेदन वापस लेने की मांग की छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के लिए प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक की जनसुनवाई को लेकर उठा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ग्रामीणों के तीखे और लगातार विरोध के चलते कंपनी को पीछे हटना पड़ा है। हालात ऐसे बने कि जिंदल प्रबंधन ने जनसुनवाई के लिए दिया गया आवेदन वापस लेने की मांग प्रशासन से कर दी है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद से ही प्रभावित गांवों के लोग आंदोलन पर डटे रहे, जिसका सीधा असर कंपनी के फैसले पर पड़ा। 14 गांवों की 3100 हेक्टेयर जमीन होनी थी अधिग्रहित यदि गारे पेलमा सेक्टर-1 की जनसुनवाई पूरी हो जाती, तो JPL को 14 गांवों की करीब 3100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करना होता। इसके बदले कंपनी की ओर से प्रति एकड़ 62 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव था। इस परियोजना से धौराभांठा, लिबरा, झिकाबहाल, बागबाड़ी, बुड़िया, समकेरा, झरना, खुरूसलेंगा, लमडांड, बिजना, टांगरघाट, आमगांव, रावनगुड़ार और तिलाईपारा गांव प्रभावित होने वाले थे। पहले भी निरस्तीकरण की मांग कर चुके थे ग्रामीण ग्रामीणों ने जनसुनवाई रद्द कराने के लिए पहले भी आंदोलन किया था। 14 अक्टूबर को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और रात सड़क पर ही बिताई थी। इसके बाद प्रशासन ने सुनवाई स्थगित कर दी थी। दूसरी बार 8 दिसंबर को धौराभांठा के स्कूल मैदान में जनसुनवाई तय की गई, लेकिन इस दौरान भी ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने फर्जी तरीके से जनसुनवाई पूरी दिखा दी। पुलिस-ग्रामीण झड़प के बाद बढ़ा आंदोलन इसके बाद से ग्रामीण लिबरा के सीएचपी चौक पर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे। 27 दिसंबर को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। लगातार आंदोलन और बढ़ते दबाव के बीच 29 दिसंबर को JPL ने प्रशासन को पत्र लिखकर जनसुनवाई के लिए किया गया आवेदन वापस लेने की मांग की। वहीं घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद ने बताया कि जनसुनवाई निरस्त करने की प्रक्रिया प्रशासन स्तर पर शुरू कर दी गई है। पुलिस कार्रवाई पर लगे गंभीर आरोप ग्रामीणों के समर्थन में कांग्रेस ने जांच टीम गठित की थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज 29 दिसंबर को धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने जबरन धरना स्थल के पास से वाहनों को हटाया और 40 से अधिक महिलाओं व पुरुषों को गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने बर्बरता पूर्वक कार्रवाई की, जिससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने जवाबी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है, जिसने जानबूझकर ग्रामीणों को उकसाने का काम किया।

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छत्तीसगढ़ में लोहा कारोबारियों पर IT की बड़ी कार्रवाई, 50 स्थानों पर छापेमारी जारी

छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने लोहा और स्टील से जुड़े कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 50 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में स्पंज आयरन, स्टील रोलिंग मिल, पावर प्लांट संचालकों और रियल एस्टेट कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर टीमों ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक CRPF जवान सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। सभी ठिकानों पर वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की गहन जांच की जा रही है। जमीन खरीद-फरोख्त में शामिल कारोबारियों के घर और दफ्तर भी सर्च ऑपरेशन की सूची में हैं। 5 दिन पहले हुई थी ED की बड़ी रेड 30 नवंबर को मेडिकल कॉलेजों की मान्यता से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में ED ने देशभर के 8 राज्यों में छापे मारे थे, जिनमें रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी शामिल था।इस दौरान ED ने मोबाइल फोन, DVR, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जैसे डिजिटल सबूत जब्त किए थे। कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से पूछताछ भी की गई थी और बैंक खातों का विवरण मांगा गया था। सभी डिजिटल डिवाइस की जांच तकनीकी टीम कर रही है। 11 दिन पहले ACB–EOW ने 19 ठिकानों पर दी थी दबिश 24 नवंबर को ACB और EOW की टीमों ने शराब घोटाले और DMF फंड से जुड़े मामलों में संयुक्त कार्रवाई की थी। रायपुर, बिलासपुर, कोंडागांव, अंबिकापुर और दुर्ग में कुल 19 ठिकानों पर तड़के सुबह छापेमारी की गई। DMF मामले में हरपाल सिंह अरोड़ा और उनसे जुड़े ठेकेदारों के 11 ठिकानों पर सर्च की गई थी। वहीं शराब घोटाले में जेल में बंद अनिल टुटेजा और निरंजन दास के परिजनों से जुड़े रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर के कई स्थानों पर दबिश दी गई थी।

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रायगढ़ RPF गोलीकांड: हेड कॉन्स्टेबल को कनपटी पर मारी गोली, आरोपी पहले भी जा चुका है जेल

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पोस्ट में सोमवार तड़के हुए गोलीकांड में हेड कॉन्स्टेबल पीके मिश्रा की मौत हो गई। उनके ही साथी हेड कॉन्स्टेबल कुमार सिंह लादेर ने पोस्ट के कांच वाले दरवाजे के बाहर से तीन गोलियां चलाईं, जो सीधे मिश्रा की कनपटी से भीतर जाकर गले तक पहुंच गईं। इसके बाद उसने दरवाजा खोलकर एक और फायर किया, जो दाईं आंख के पास से छूकर निकल गया। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर कांच पर गोली के छेद, खून के निशान, एक जिंदा कारतूस और तीन खाली खोखे बरामद किए। मिश्रा का शव कुर्सी पर ही मिला था, जबकि आरोपी वहीं पास में बैठा मिला। RPF के अन्य जवान पहुंचे तो आरोपी ने खुद कबूल किया कि उसने गोली चलाई है। बाद में GRP ने उसे गिरफ्तार कर लिया। दोनों बैचमेट थे, देर रात हुई बहस के बाद चली गोलियां जानकारी के मुताबिक मृतक पीके मिश्रा रीवा (मध्य प्रदेश) के निवासी थे, जबकि आरोपी कुमार सिंह लादेर जांजगीर-चांपा के भाटापारा इलाके का रहने वाला है। दोनों एक ही बैच के थे और उस रात दोनों की संयुक्त ड्यूटी थी।सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 4 बजे किसी बात पर दोनों के बीच बहस हुई और गुस्से में आकर लादेर ने ड्यूटी पर रखी पिस्टल उठाकर मिश्रा पर चार राउंड फायर कर दिए। मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई। रेलवे प्लेटफॉर्म पर तैनात दो जवान—पी. खलखो और जीपी यादव—ने गोली की आवाज सुनकर तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। 3.5 साल से रायगढ़ में थे तैनात मिश्रा, परिवार भी यहीं रहता था पीके मिश्रा लगभग ढाई–तीन साल पहले अनूपपुर से रायगढ़ ट्रांसफर हुए थे। उनकी पत्नी और बेटी रायगढ़ में रहती थीं, जबकि बेटा हैदराबाद में पढ़ाई कर रहा है।आरोपी लादेर भी अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ रायगढ़ में रहता था, जबकि दो अन्य बच्चे जांजगीर में परिवार के पास रहते हैं। 2019 में भी पोस्ट प्रभारी को तलवार दिखाकर धमकाया था, दो साल रहा जेल में जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लादेर पहले भी हिंसक व्यवहार की वजह से सुर्खियों में रह चुका है। DSP एसएन अख्तर के अनुसार आरोपी का यह पुराना इतिहास उसे मानसिक रूप से अस्थिर या हिंसक प्रवृत्ति का संकेत देता है।. फॉरेंसिक रिपोर्ट: तीन गोलियां सिर में आर-पार, एक आंख के पास से गुजरी फॉरेंसिक विशेषज्ञ पीएस भगत ने बताया: प्रारंभिक जांच में साफ है कि आरोपी ने पहले बाहर से फायर किया और फिर दरवाजा खोलकर आखिरी गोली चलाई। मृतक का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद घटना का अंतिम कारण स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर कार्रवाई जारी है।

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