Chhattisgarh

मानसून में बढ़ा गलघोंटू बीमारी का खतरा, पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने की सलाह

रायपुर। मानसून के दौरान पशुओं में फैलने वाली गलघोंटू (हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया-एचएस) बीमारी का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने प्रदेश के सभी पशुपालकों को सतर्क रहने और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय पर वैक्सीनेशन और शुरुआती उपचार से इस गंभीर बीमारी से पशुओं की सुरक्षा की जा सकती है। पशुधन विकास विभाग के अनुसार गलघोंटू एक संक्रामक जीवाणुजनित रोग है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस और भेड़ों को प्रभावित करता है। मानसून के मौसम में नमी और अनुकूल वातावरण के कारण इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो यह बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, गले और जबड़े के नीचे सूजन, मुंह से अत्यधिक लार निकलना, नाक से स्राव, सांस लेने में कठिनाई और गले से घरघराहट जैसी आवाजें सुनाई देना प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन कम हो जाता है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो सकती है। पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें और बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें। यदि किसी क्षेत्र में एक साथ कई पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि मानसून के दौरान पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और शीघ्र उपचार सबसे प्रभावी उपाय हैं। इसी उद्देश्य से राज्यभर में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में सिर्फ डायल-112 बनेगा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 100 से 1091 तक सभी सेवाएं होंगी एकीकृत

देशभर में आपातकालीन सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आने वाले समय में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य सभी इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों की जगह केवल डायल-112 का इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर 100, 101, 102, 108, 1033, 1091 समेत सभी आपातकालीन नंबरों को 112 में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में बैठक कर सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना पर चर्चा की। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 400 डायल-112 वाहन और करीब 375 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। अभी किसी मेडिकल आपात स्थिति की सूचना डायल-112 से 108 सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने जैसी घटनाओं की जानकारी अलग प्रणाली के माध्यम से फायर विभाग तक पहुंचती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी सूचनाएं एक ही सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग तक पहुंचेंगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने माना कि सहायता मिलने में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, इसलिए पूरे देश में एकीकृत आपातकालीन व्यवस्था आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को “एक्के नंबर, सब्बो बर” अभियान के साथ हुई थी। बाद में इस सेवा का विस्तार राज्य के सभी 33 जिलों तक किया गया। वर्तमान में डायल-112 प्रतिदिन लगभग 10 हजार कॉल संभाल रहा है। 20 मई से 16 जून 2026 के बीच इस सेवा पर 3,06,264 कॉल प्राप्त हुईं, जिनमें 79,782 घटनाएं दर्ज की गईं। सुप्रीम Court ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि सड़क दुर्घटना के घायलों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, गुड सेमेरिटन कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए, सभी एंबुलेंस में जीपीएस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य हो, पैरामेडिकल कर्मचारियों को मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए, ट्रॉमा सेंटरों की ग्रेडिंग की जाए और नई व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

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छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी के प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर बनी समितियों की रिपोर्ट और अनुभवों का भी विश्लेषण किया जाएगा, ताकि राज्य के लिए एक उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं। अध्ययन के दौरान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गोवा और उत्तराखंड में लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी देने जैसे प्रावधान मौजूद हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर छत्तीसगढ़ के लिए संभावित कानून तैयार किया जाएगा। राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए समिति यह भी जांच करेगी कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत संरक्षित जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है। उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आंशिक या पूर्ण छूट देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। गोवा सिविल कोड के तहत पति-पत्नी को एक-दूसरे की संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हैं। तलाक की स्थिति में पत्नी को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा मिल सकता है। माता-पिता की संपत्ति में बेटियों और बेटों को समान अधिकार दिए गए हैं। सामान्य रूप से एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है, हालांकि हिंदू समुदाय से जुड़ा एक पुराना अपवाद कानून में मौजूद है, जिसे राज्य सरकार अब अप्रासंगिक मानती है और दशकों से इसका उपयोग नहीं हुआ है। वहीं उत्तराखंड यूसीसी कानून में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार संबंधी समान नियम बनाए गए हैं। बहुविवाह और एकतरफा तलाक पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार और धर्मनिरपेक्ष गोद लेने की व्यवस्था इसके प्रमुख प्रावधान हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता का मार्ग पहले ही निर्धारित किया था और अब छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि समिति सभी वर्गों से चर्चा कर सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि यूसीसी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए एक जटिल विषय है। उनके अनुसार यह सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता और सरकार इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

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छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मिली मंजूरी, अब स्थानीय स्तर पर मिलेगी फ्रेश क्राफ्ट बीयर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार की मंजूरी के बाद अब माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। देश के कई राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और गोवा में यह व्यवस्था पहले से लागू है। खासतौर पर बेंगलुरु अपनी क्राफ्ट बीयर संस्कृति के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में बीयर तैयार की जाती है, जिसे मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट में परोसा जाता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को 10 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करनी होगी और कम से कम 4 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध करानी होगी। क्राफ्ट बीयर पारंपरिक फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होती है। इसे छोटे बैच में उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसी कारण इसका स्वाद अधिक ताज़ा और अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध होता है। सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में बनने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।

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विधानसभा सत्र से पहले बड़ा प्रशासनिक फैसला, 17 जुलाई तक अधिकारी-कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में जिला प्रशासन ने सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। जिला कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने आगामी विधानसभा मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, 13 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान जिले से जुड़े मामलों की जानकारी और जवाब समय पर उपलब्ध कराने के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का मुख्यालय में उपस्थित रहना आवश्यक होगा। इसी वजह से इस अवधि में सभी प्रकार के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान बिना अनुमति कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। यदि किसी को अत्यंत आवश्यक या अपरिहार्य कारणों से अवकाश की जरूरत पड़ती है, तो उसे संबंधित विभागाध्यक्ष या कार्यालय प्रमुख से पूर्व लिखित स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। जिला प्रशासन का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान यदि जिले से संबंधित कोई प्रश्न उठता है, तो उसका समयबद्ध और तथ्यात्मक जवाब देने के लिए सभी विभागों का पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

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चलती 108 एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, ईएमटी और पायलट की सतर्कता से महिला ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म

चलती 108 एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, ईएमटी और पायलट की सतर्कता से महिला ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म राजनांदगांव जिले में 108 संजीवनी एक्सप्रेस एक बार फिर जीवनरक्षक साबित हुई। अस्पताल ले जाते समय एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एम्बुलेंस में मौजूद ईएमटी और पायलट ने बिना घबराए अपनी ट्रेनिंग और सूझबूझ का परिचय दिया और चलते सफर के बीच ही सुरक्षित प्रसव कराया। मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। जानकारी के अनुसार, ग्राम खजरी निवासी राधिका यादव को प्रसव पीड़ा होने पर उनके पति सुदर्शन यादव ने सुबह करीब 7:30 बजे घुमका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। राधिका को 108 संजीवनी एक्सप्रेस से मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ग्राम डूमरडीह के पास उनकी प्रसव पीड़ा अचानक बेहद तेज हो गई। हालात को देखते हुए ईएमटी ललिता बघेल ने तुरंत एम्बुलेंस रुकवाने के निर्देश दिए। पायलट छगन साहू ने वाहन सुरक्षित स्थान पर रोका, जिसके बाद ईएमटी ने पूरी सावधानी और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एम्बुलेंस के भीतर ही सफल प्रसव कराया। राधिका यादव ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। सुरक्षित प्रसव के बाद मां और नवजात को आगे के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दोनों की हालत सामान्य बताई जा रही है। इस मानवीय और साहसिक कार्य के लिए परिजनों ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस की टीम का आभार जताया। उनका कहना है कि यदि एम्बुलेंस स्टाफ ने समय रहते सही निर्णय नहीं लिया होता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी राहत! खाद खरीदने पर टोकन व्यवस्था खत्म | जानें नया नियम

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत भरी खबर! खाद खरीदने के लिए अब टोकन लेने की जरूरत नहीं होगी राज्य सरकार ने सहकारी समितियों और प्राथमिक कृषि साख समितियों (सोसायटियों) से रासायनिक खाद वितरण की टोकन व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब किसान बिना किसी ई-टोकन या पूर्व पंजीकरण के सीधे खाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषि विभाग ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब किसानों को खाद का वितरण टोकन के बजाय उनकी कृषि भूमि के रकबे के आधार पर किया जाएगा, ताकि हर किसान को उसकी जरूरत के अनुसार खाद मिल सके। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें एक ही बार में आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक खाद का भंडारण पहले ही कर लिया गया है। पहले खाद की सीमित उपलब्धता के कारण तीन चरणों में टोकन व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे वितरण को व्यवस्थित किया जा सके। इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जब प्रदेश में खाद की कमी थी, तब सभी किसानों तक समान रूप से खाद पहुंचाने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। अब पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण इस व्यवस्था की जरूरत नहीं रही। उन्होंने कहा कि नए निर्णय से किसानों को बार-बार समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे एक ही बार में अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद प्राप्त कर सकेंगे।

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Chhattisgarh

अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे के बीच बढ़ी जंगलों की कटाई, सरकारी पट्टे की उम्मीद में साफ किए जा रहे वन क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार हो रहे राजस्व सर्वे के बीच बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी भूमि पट्टे मिलने की संभावना को देखते हुए कई स्थानों पर वन क्षेत्र साफ किए जा रहे हैं, ताकि जमीन पर कब्जे और दावे को मजबूत किया जा सके। पहली बार हो रहा राजस्व सर्वे आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ क्षेत्र का राजस्व सर्वे कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वे के बाद पात्र लोगों को भूमि अधिकार और पट्टे दिए जा सकते हैं। इसी को लेकर क्षेत्र में यह धारणा फैल गई है कि अधिक जमीन पर कब्जा दिखाने से भविष्य में उसका लाभ मिल सकता है। कई गांवों में दिखी पेड़ों की कटाई जांच के दौरान नारायणपुर, ओरछा, इरकभट्टी, कच्चापाल, कोडलियार, पदमकोट, कुतुल और नेलांगूर सहित कई गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और जंगल जलाने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर पेड़ों को पहले आंशिक रूप से काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, बाद में उन्हें गिराकर या जलाकर जमीन खाली की जा रही है। स्थानीय और लौटे हुए लोग भी कर रहे हैं कब्जे की तैयारी जानकारी के अनुसार, जंगल साफ करने वालों में स्थानीय आदिवासियों के साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो नक्सल हिंसा, रोजगार या अन्य कारणों से वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे और अब वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग अधिक जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र साफ कर रहे हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बढ़ी गतिविधियां अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां सुरक्षा कारणों से विकास कार्य सीमित थे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने और नए कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में सरकारी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके साथ ही जंगलों की कटाई की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी चिंता पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि अबूझमाड़ का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र की श्रेणी में आता है और यहां अनियंत्रित कटाई से जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। वन विभाग ने शुरू किए रोकथाम के प्रयास वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए नए वन परिक्षेत्र के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा जंगलों की निगरानी और अवैध कटाई रोकने के लिए करीब 30 स्थानों पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वन संरक्षण के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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बिलासपुर में विवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप; पति ने कहा- पत्नी ने की आत्महत्या

बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में 28 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं पति का दावा है कि उसकी पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शादी के बाद से प्रताड़ना का आरोप मृतका अदिति मौर्य मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की रहने वाली थीं। उनकी शादी वर्ष 2019 में बिलासपुर निवासी रविकांत मौर्य से हुई थी। दोनों की 13 महीने की एक बेटी भी है। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही अदिति को पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि अदिति कई बार फोन पर अपने साथ होने वाली मारपीट और उत्पीड़न की जानकारी देती थी। हाल के दिनों में परिवार का उससे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था और फोन पर बात कराने से भी मना किया जाता था। दूसरी महिला से संबंध को लेकर होता था विवाद मृतका के भाई का आरोप है कि रविकांत मौर्य का दूसरी महिला से संबंध था। उनका दावा है कि कुछ दिन पहले अदिति ने पति के मोबाइल में हुई चैट का वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी बड़ी बहन को भेजा था। इसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद और बढ़ गया था। 23 जून को मारपीट का आरोप, फिर मिली मौत की सूचना परिजनों का आरोप है कि 23 जून को भी अदिति के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद जब उन्होंने ससुराल पक्ष से संपर्क किया तो पहले विवाद की जानकारी दी गई और कुछ समय बाद बताया गया कि अदिति की मौत हो गई है तथा उसे अस्पताल ले जाया गया है। परिवार के सदस्य उत्तर प्रदेश से बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्हें अस्पताल में अदिति की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पति, सास-ससुर, ननद और नंदोई पर हत्या का आरोप लगाया। पति का दावा- फांसी लगाने की कोशिश की पुलिस को दिए गए बयान में पति रविकांत मौर्य ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ ऊपर के कमरे में था, जबकि अदिति नीचे थी। नीचे आने पर उसने पत्नी को बेड पर पड़ा देखा। उसके अनुसार अदिति ने सिल्क की साड़ी से फांसी लगाने का प्रयास किया था, लेकिन फंदा खुलने के कारण वह नीचे गिर गई। शरीर पर चोट के निशान मिलने का दावा मायके पक्ष का कहना है कि अदिति के हाथ, गर्दन, पैर और कान पर चोट के निशान थे। उनका आरोप है कि घटनास्थल पर ऐसी परिस्थितियां नहीं थीं, जिनसे आत्महत्या की पुष्टि हो सके। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस से हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। पुलिस सभी पहलुओं और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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बिलासपुर में चाकू की नोक पर युवक का अपहरण, गांजा केस में फंसाने की धमकी देकर मांगी 50 हजार की फिरौती

बिलासपुर में युवक के अपहरण और फिरौती मांगने के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपियों ने चाकू की नोक पर युवक का अपहरण कर उसे जंगल ले जाकर झूठे गांजा मामले में फंसाने की साजिश रची। इसके बाद परिवार से 50 हजार रुपये की फिरौती की मांग की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के एक आरोपी और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। काम के बहाने घर से बुलाकर किया अपहरण पुलिस के अनुसार, रतनपुर थाना क्षेत्र के कलमीटार स्थित भेलवापारा निवासी 21 वर्षीय घनश्याम पाटले बुधवार दोपहर अपने घर के आंगन में मौजूद था। इसी दौरान इशांत सारथी, सोम रजक, निखिल रजक उर्फ एलियन और उनके साथियों ने उसे काम का बहाना बनाकर बाहर बुलाया। बाहर निकलते ही आरोपियों ने उसके गले पर चाकू रख दिया और जबरन बाइक पर बैठाकर कोरबा-भांवर के जंगल की ओर ले गए। गांजा के साथ फोटो खींचकर रची साजिश जंगल में आरोपियों ने एक कागज पर गांजा रखकर पीड़ित के साथ उसकी तस्वीर खींची। इसके बाद उसे धमकी दी गई कि यदि उनकी बात नहीं मानी तो उसे झूठे एनडीपीएस मामले में फंसा दिया जाएगा। डर के माहौल में आरोपियों ने युवक से उसकी मां को फोन करवाया। परिवार से मांगी 50 हजार रुपये की फिरौती आरोपियों के दबाव में युवक ने अपनी मां से कहा कि वह गांजे के साथ पकड़ा गया है और मामले से बचने के लिए 50 हजार रुपये की जरूरत है। इसके बाद आरोपियों ने परिजनों को रकम लेकर पहले महामाया मंदिर बाईपास स्थित बादल महल के पास बुलाया, लेकिन बाद में लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहे। पुलिस ने पीछा कर दबोचा पीड़ित के जीजा को पूरे घटनाक्रम पर शक हुआ और उन्होंने तुरंत रतनपुर पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम सादे कपड़ों में आरोपियों का पीछा करती रही। जब आरोपी फिरौती की रकम लेने के लिए लोकेशन बदल रहे थे, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर इशांत सारथी और एक नाबालिग को पकड़ लिया। दो आरोपी अब भी फरार कार्रवाई के दौरान सोम रजक और यश नामक आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तार आरोपी इशांत सारथी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

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