Chhattisgarh

दहेज में कार के बदले 25 लाख की डिमांड, 8 महीने की गर्भवती विवाहिता को घर से निकाला: पति-सास-ससुर के खिलाफ FIR

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में दहेज प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक विवाहिता पर ससुराल पक्ष ने शादी के दो दिन बाद ही कार के बदले 25 लाख रुपए की मांग कर दी। मांग पूरी न होने पर उसे मारपीट, भूखा-प्यासा रखने और गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया। पीड़िता वर्तमान में 8 माह की गर्भवती है और मायके में रह रही है। महिला थाना पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शादी के बाद शुरू हुई मांग मधुबनपारा निवासी 24 वर्षीय युवती की शादी 23 दिसंबर 2024 को मिर्जा सुहेल बेग (27) के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के समय पीड़िता के परिजनों ने 2.50 लाख रुपए कैश, सोना-चांदी के जेवर और गृहस्थी का 15 लाख रुपए का सामान दिया। शादी के दो दिन बाद ससुराल पक्ष ने शादी के खर्चा न करने का हवाला देते हुए 5 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की। जब यह राशि दे दी गई, तो मांग बढ़कर कार के बदले 25 लाख रुपए तक पहुंच गई। प्रताड़ना, मारपीट और गर्भपात का दबाव अधिक राशि देने से इनकार करने पर ससुराल पक्ष ने पीड़िता को लगातार मारपीट, गाली-गलौज और भूखा-प्यासा रखने की धमकी दी। मई 2025 में गर्भवती होने के बाद भी पति ने बार-बार गर्भपात कराने का दबाव डाला और जबरन आई-पिल गोली खिलाने की कोशिश की, जिसे पीड़िता ने उल्टी कर दी। 2 सितंबर को पीड़िता के पिता और भाई समझाइश के लिए पहुंचे, लेकिन ससुराल पक्ष ने विवाहिता को घर से निकाल दिया। 8 माह की गर्भवती, मायके में सुरक्षित इसके बाद पीड़िता मायके में रहने को मजबूर हुई। दोनों पक्षों के बीच कई बार सामाजिक बैठक हुई, लेकिन ससुराल पक्ष ने उसे रखने से साफ इनकार कर दिया। महिला थाना में FIR दर्ज पीड़िता की शिकायत पर महिला थाना पुलिस ने धारा 3(5)-BNS, 351(2)-BNS और 85-BNS के तहत पति, सास और ससुर के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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नदी किनारे सड़ी-गली लाश से सनसनी: रायगढ़ में महिला की संदिग्ध मौत, 5 दिन पुरानी होने की आशंका

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। कुरकुट नदी के किनारे एक महिला का सड़ा-गला शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि मौत 4 से 5 दिन पहले हुई होगी। सूचना मिलने के बाद घरघोड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने देखा शव, पुलिस को दी सूचना जानकारी के अनुसार, ग्राम पोरडा निवासी रामप्यारी सारथी (45 वर्ष) का शव शनिवार को बैहामुड़ा से बनखेता जाने वाले मार्ग पर कुरकुट नदी के किनारे पड़ा मिला। रास्ते से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत घरघोड़ा पुलिस को सूचना दी। तेज दुर्गंध, पूरी तरह सड़ चुका था शव पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला का शव पूरी तरह सड़-गल चुका था और उससे तेज दुर्गंध आ रही थी। पहचान होने के बाद पुलिस ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। हत्या या आत्महत्या, दोनों एंगल से जांच शव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को आशंका है कि महिला की मौत कई दिन पहले हो चुकी थी। फिलहाल पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

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भगवा वेश में साधु, सवाल पूछते ही टूटा भेष: दुर्ग में भीख मांग रहा युवक मुस्लिम निकला, वीडियो वायरल

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साधु का भेष धारण कर घर-घर भीख मांग रहे एक युवक की पहचान पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब स्थानीय लोगों ने उससे धार्मिक प्रश्न पूछे। युवक भगवा कपड़े पहनकर तंबूरा बजाते हुए “राम-राम” और “जय श्रीराम” का उद्घोष कर रहा था, लेकिन सवालों के जवाब नहीं दे सका और घबरा कर रोने लगा। बाद में जांच में सामने आया कि युवक मुस्लिम समुदाय से है और उत्तर प्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। सवालों पर घबराया, गायत्री मंत्र सुनाने को कहा तो रो पड़ा स्थानीय लोगों को युवक के हाव-भाव पर शक हुआ। शंका दूर करने के लिए उससे पूछा गया कि भगवान राम के पिता का नाम क्या था, लेकिन वह जवाब नहीं दे सका। इसके बाद लंका किसने जलाई—इस प्रश्न पर भी वह चुप रहा। जब उससे गायत्री मंत्र सुनाने को कहा गया, तो वह घबरा गया और रोते हुए छोड़ देने की गुहार लगाने लगा। बिना एंट्री दरगाह में रुका, पहचान पत्र नहीं मिले जानकारी के अनुसार, युवक बिना किसी एंट्री के एक दरगाह में ठहरा हुआ था। उसके पास कोई वैध पहचान पत्र भी नहीं मिला। पहले उसने अपना नाम यादव बताया, लेकिन पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम हवलदार, पिता का नाम मुस्तफा बताते हुए खुद को मुस्लिम बताया। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। निशानदेही पर दूसरा व्यक्ति भी हिरासत में पूछताछ के दौरान युवक ने अपने एक साथी के बारे में जानकारी दी, जो मौर्या टॉकिज के पास एक मजार के आसपास ठहरा होने की बात कही गई। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है। पकड़े जाने पर लौटाने लगा भीख की रकम हिंदू संगठन की प्रतिनिधि ज्योति शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान युवक रोने लगा और मांगे हुए पैसे लौटाने लगा। संगठन का दावा है कि यह इकलौता मामला नहीं हो सकता, बल्कि साधु का भेष धारण कर भीख मांगने वाला 5 लोगों का समूह सक्रिय हो सकता है। बताया जा रहा है कि सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और खुद को प्रतापगढ़ का निवासी बताते हैं। पुलिस जांच जारी सीएसपी छावनी प्रशांत कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई है। संदेह के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही बीजेपी सरकार: गांधी प्रतिमा के सामने उपवास, कांग्रेस का आरोप

दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत रविवार से दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस ने सार्वजनिक विरोध की शुरुआत कर दी है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता दुर्ग के गांधी प्रतिमा स्थल पर सुबह से शाम तक उपवास पर बैठे रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने और मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया। 25 फरवरी तक चलेगा आंदोलन दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी के साथ छल किया है। उनका आरोप है कि बीते 11 वर्षों में मजदूरों को औसतन सिर्फ 38 दिन का काम मिला है और “गारंटी” शब्द को ही कानून से हटाने की कोशिश की जा रही है। हर साल घट रहे मानव दिवस राकेश ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दुर्ग जिले में मनरेगा के मानव दिवस लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का पूरा योगदान था, लेकिन अब इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। सरकारी खजाने पर बढ़ाया जा रहा दबाव शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ रही है। मनरेगा में लगातार कटौती कर राज्य सरकार के अंशदान को बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा। बीजेपी अमीरों की पार्टी: कांग्रेस भिलाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था। अब न सिर्फ योजना का स्वरूप बदला जा रहा है, बल्कि बजट में भी कटौती की गई है। उन्होंने भाजपा को अमीरों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह मजदूर विरोधी सोच का परिणाम है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर है। 125 दिन का वादा भी जुमला: साहू कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा की थी, लेकिन भाजपा सरकार मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर रही है। उन्होंने 125 दिन रोजगार के वादे को भी 15 लाख और 2 करोड़ नौकरियों की तरह जुमला करार दिया। योजना को खत्म करने का आरोप कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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मुनाफे का झांसा, फर्जी ऐप का जाल: दुर्ग में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 24 लाख की साइबर ठगी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शेयर ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 24 लाख रुपये की साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में फर्जी शेयर-ट्रेडिंग ऐप के जरिए एक युवक से 13.90 लाख रुपये ठगे गए, जबकि दूसरे मामले में QR कोड और लिंक के माध्यम से 11.15 लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाना दुर्ग में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। व्हाट्सऐप लिंक से शुरू हुआ फर्जी ट्रेडिंग का खेल खुर्सीपार भिलाई निवासी मनीष कुमार गजपाल (39) ने बताया कि नवंबर 2025 में उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया। इसमें ट्रेडिंग ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने पर वे “Stock Flights D2” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े, जहां लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे थे। दिसंबर 2025 में ग्रुप के निर्देश पर उनसे GTSS LLC नामक ऐप इंस्टॉल कराया गया, जिसमें निवेश और कथित मुनाफा दिखाया जाता था। भरोसा दिलाने के लिए शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपये का एक बार विड्रॉल भी कराया गया। इसके बाद अलग-अलग तिथियों में कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। 31 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच पीड़ित से कुल 13.90 लाख रुपये जमा कराए गए। जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की, तो “आईपीओ पेंडिंग” बताकर और पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया। लगातार भुगतान के बावजूद रकम नहीं मिलने पर पीड़ित को ठगी का शक हुआ और उन्होंने 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। QR कोड और लिंक से दूसरी ठगी, GST के नाम पर मांग दूसरा मामला कोहका भिलाई क्षेत्र का है। पीड़ित शुभम जायसवाल (29) को 20 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “ब्रड सिक्योरिटी” कंपनी का प्रतिनिधि बताया और निवेश पर मोटे मुनाफे का ऑफर दिया। लिंक भेजकर QR कोड के जरिए ट्रांजेक्शन कराए गए। शुरुआत में 10 हजार रुपये निवेश पर 5 हजार रुपये का मुनाफा दिखाकर भरोसा दिलाया गया। इसके बाद 23 दिसंबर से 6 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों और QR कोड के माध्यम से 11.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इस दौरान कुछ रकम विड्रॉल भी कराई गई, जिससे ठगों पर भरोसा और बढ़ गया। 7 जनवरी 2026 को लिंक आईडी में करीब 16 लाख रुपये दिखने लगे। जब पीड़ित ने 5 लाख रुपये विड्रॉल करने की कोशिश की, तो 18% GST जमा करने का मैसेज आया। शक होने पर उन्होंने भुगतान नहीं किया। बाद में संपर्क करने पर एफआईआर की धमकी दी गई, जिससे ठगी का खुलासा हुआ। साइबर पुलिस कर रही जांच दोनों मामलों में साइबर थाना दुर्ग ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(2), 318(4) और 336(3) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ऐप्स, लिंक और डिजिटल ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संगठित साइबर ठग गिरोह की आशंका जताई जा रही है।

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कान में ब्लूटूथ, कपड़ों में डिवाइस: SSC परीक्षा में हाईटेक नकल करते राजस्थान का युवक गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में SSC द्वारा आयोजित दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल का मामला सामने आया है। सिम कार्ड से ऑपरेट होने वाले ब्लूटूथ डिवाइस को कान में छिपाकर और कपड़ों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर परीक्षा दे रहा राजस्थान का अभ्यर्थी रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी को परीक्षा केंद्र प्रभारी ने पुलिस के हवाले कर दिया। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। संदेह हुआ तो घबराया अभ्यर्थी शुक्रवार (9 जनवरी) को सीपत के फरहदा स्थित जीटीबी कॉलेज में SSC द्वारा आयोजित हेड कांस्टेबल (लिपिक) दिल्ली पुलिस भर्ती 2025 की परीक्षा चल रही थी। शाम 4:30 से 6:30 बजे की शिफ्ट के दौरान केंद्र प्रभारी विजय कुमार लहरे को एक अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब वह उसके नजदीक पहुंचे तो अभ्यर्थी घबरा गया। तलाशी लेने पर उसके कान से सिम-ऑपरेटेड ब्लूटूथ और कपड़ों में छिपाए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए, जिनकी मदद से वह प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर रहा था। राजस्थान का रहने वाला है आरोपी पकड़े गए युवक की पहचान मोहित मीना (25) के रूप में हुई है, जो राजस्थान के दौसा जिले के बसवा थाना क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में सामने आया है कि वह सभी डिवाइस राजस्थान से ही लेकर बिलासपुर पहुंचा था और उनका उपयोग कर परीक्षा में नकल कर रहा था। मामला दर्ज, न्यायिक रिमांड पर भेजा गया केंद्र प्रभारी की शिकायत पर सीपत पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बड़े नकल गिरोह की आशंका कड़ी सुरक्षा और जांच व्यवस्था के बावजूद आरोपी का परीक्षा केंद्र के भीतर डिवाइस ले जाना पुलिस के लिए भी सवाल बन गया है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के पीछे किसी संगठित नकल गिरोह की भूमिका हो सकती है। फिलहाल आरोपी के मोबाइल फोन और जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तकनीकी जांच की जा रही है।

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वीजा खत्म, फिर भी सालों से रायपुर में रह रहीं थीं विदेशी युवतियां: पुलिस हिरासत में, IB कर रही पूछताछ

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने दो विदेशी महिला नागरिकों को हिरासत में लिया है। दोनों महिलाएं उज़्बेकिस्तान की रहने वाली बताई जा रही हैं और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद लंबे समय से रायपुर में रह रही थीं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। फिलहाल पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम दोनों महिलाओं से पूछताछ कर रही है। उनके पास मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। IPS–CSP स्तर के अफसर कर रहे जांच पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तेलीबांधा इलाके में दो विदेशी महिलाओं के लंबे समय से रहने की जानकारी मिली थी, लेकिन उनके वीजा और वैध निवास को लेकर संदेह बना हुआ था। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में महिलाओं ने खुद को उज़्बेकिस्तान का नागरिक बताया है। वे किस उद्देश्य से भारत आई थीं, किस श्रेणी का वीजा था और वह वर्तमान में वैध है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। पासपोर्ट-वीजा जब्त, FRRO से संपर्क पुलिस ने दोनों महिलाओं के पासपोर्ट, वीजा और पहचान से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि के लिए विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRRO) और संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया गया है। जरूरत पड़ने पर इमिग्रेशन विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि वीजा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहले भी रायपुर में सामने आ चुका है ऐसा मामला गौरतलब है कि करीब 11 महीने पहले भी रायपुर में एक विदेशी युवती की गिरफ्तारी हुई थी। तब वह अपने साथी के साथ शराब के नशे में तेज रफ्तार कार चला रही थी और VIP रोड पर स्कूटी सवार युवकों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें एक की मौत हो गई थी। उस मामले की जांच के दौरान पुलिस को बड़े सेक्स रैकेट नेटवर्क के संकेत भी मिले थे। घटना 6 फरवरी 2025 की रात की थी, जब उज़्बेकिस्तान के ताशकंद की रहने वाली युवती भारत सरकार लिखी कार चला रही थी और हादसे के बाद मौके पर हंगामा भी किया था।

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कुत्ते के नाम में ‘राम’ विकल्प बना विवाद की जड़: चौथी के पेपर पर बवाल, प्रधान पाठक निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल ने प्रदेशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। प्रश्न में ‘मोना के कुत्ते का नाम’ पूछा गया था, जिसके विकल्पों में बाला, शेरू, कोई नहीं के साथ ‘राम’ नाम भी शामिल था। इस प्रश्न पत्र को रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में परीक्षा के दौरान वितरित किया गया। जैसे ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि कुत्ते के नाम के विकल्प में ‘राम’ लिखे जाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्न पत्र तैयार करने वाली प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है, जबकि मॉडरेटर शिक्षिका को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ‘रामू’ लिखना था, टाइपिंग में गलती हो गई जांच के दौरान दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी-अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित में माफी मांगी है।प्रधान पाठक शिखा सोनी ने स्पष्टीकरण में कहा कि उनका आशय ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग के दौरान ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई मानवीय भूल बताया। वहीं, मॉडरेटर नम्रता वर्मा ने कहा कि उन्हें जो प्रश्न पत्र का सेट मॉडरेशन के लिए मिला, उसमें विकल्प पहले से मौजूद थे और उनसे भी यह त्रुटि नजरअंदाज हो गई। धार्मिक भावनाएं आहत होने की पुष्टि रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति ने प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और अंतिम मुद्रण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की। समिति की रिपोर्ट में माना गया कि राम हिंदू धर्म के आराध्य देव हैं, ऐसे में विकल्प के रूप में यह नाम देना अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र का निर्माण शासकीय प्राथमिक स्कूल नकटी (खपरी), तिल्दा की प्रधान पाठक शिखा सोनी ने किया था और मॉडरेशन सेजेस उच्च माध्यमिक विद्यालय फाफाडीह, रायपुर की सहायक शिक्षक नम्रता वर्मा ने किया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद, राजनीति भी गरमाई 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र वायरल हुआ। इसके अगले दिन NSUI रायपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। DEO हिमांशु भारती ने इसे विभागीय चूक मानते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है, जो तय समय में रिपोर्ट देगी और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा कि उनके जिले में जानकारी मिलते ही विवादित विकल्प को हटाकर अन्य प्रश्न पत्र बांटे गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। प्रिंटिंग को लेकर अलग-अलग दावे प्रश्न पत्र की छपाई को लेकर शिक्षा विभाग और प्रिंटिंग प्रेस के बीच भी बयानबाजी सामने आई है। DEO का कहना है कि गलत सेट छप गया, जबकि प्रिंटिंग हाउस संचालक ने दावा किया कि वही सामग्री छापी गई, जो विभाग से भेजी गई थी। NSUI ने इसे सिर्फ तकनीकी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा है कि यदि जांच के नाम पर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो संगठन आंदोलन करेगा।

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कैशियर की चालबाज़ी! ओम हॉस्पिटल से 11.41 लाख की हेराफेरी, अकाउंटेंट पर FIR

रायपुर। राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र स्थित ओम हॉस्पिटल में आर्थिक गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के कैशियर ने कथित तौर पर अपनी सहयोगी कर्मचारी की मदद से करीब 11.41 लाख रुपये की रकम अस्पताल के खाते से निकालकर परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दी। अस्पताल संचालक की शिकायत पर पुलिस ने अकाउंटेंट ओम प्रकाश गिर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सहयोगी महिला कर्मचारी को फिलहाल छोड़ दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ओम हॉस्पिटल के संचालक विनोद कुमार अग्रवाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके अस्पताल में ओम प्रकाश गिर पिछले करीब ढाई साल से कैशियर के पद पर कार्यरत है। उसके साथ काव्या वर्मा असिस्टेंट के तौर पर काम करती थी। जब अस्पताल की बिलिंग और अकाउंट की नियमित जांच की गई, तो खाते में जमा राशि कम पाई गई। इस पर कैशियर ओम प्रकाश से पूछताछ की गई, तो उसने रसीद भूल जाने जैसे बहाने बनाकर बात को टाल दिया। इसके बाद जब असिस्टेंट काव्या वर्मा से पूछताछ की गई, तो उसने खुलासा किया कि 9 अप्रैल से 10 जनवरी 2026 के बीच, ओम प्रकाश के कहने पर उसने अस्पताल का पैसा पहले अपने खाते में और फिर उसके बताए गए अन्य खातों में ट्रांसफर किया। 10 महीनों में कई किश्तों में ट्रांसफर पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब 10 महीनों के भीतर अलग-अलग किश्तों में अस्पताल की रकम ट्रांसफर की। इस पूरी हेराफेरी से अस्पताल प्रबंधन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और पूरे लेन-देन की बैंकिंग जांच की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और व्यावसायिक दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जोन-9 और जोन-5 क्षेत्र में की गई। जोन-9 में 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन कराई गई मुक्त नगर निगम के नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन-9 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 में अभियान चलाकर करीब 3000 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जांच में सामने आया था कि यहां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान और मकान का निर्माण किया गया था। जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा सीनियर के निर्देश पर कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैय्यद जोहेब और उप अभियंता अतुल बंसल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से अवैध निर्माण को तोड़ा गया। जोन-5 में नियमों के विपरीत निर्माण पर चला हथौड़ा इसी तरह जोन-5 क्षेत्र में भी नगर निगम ने अनुमति के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर कार्रवाई की। कुशालपुर रिंग रोड नंबर-1 इलाके में निर्माणाधीन भवन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तोड़कर हटाया गया। यह कार्रवाई जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देश पर की गई, जिसमें कार्यपालन अभियंता लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश रामटेके और उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर मौजूद रहे। अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा अभियान नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या नियमों के खिलाफ निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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