Chhattisgarh

मेडिकल PG में MBBS छात्रों को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 50% संस्थागत आरक्षण को दी मंजूरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर अपने पहले के फैसले में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए प्रदेश के एमबीबीएस छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट (PG) कोर्स में मैरिट के आधार पर 50 प्रतिशत संस्थागत आरक्षण मिल सकेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था संवैधानिक रूप से वैध है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनाया। बेंच ने अपने पूर्व आदेश के उस हिस्से को हटा दिया, जिसमें राज्य सरकार को उम्मीदवारों के बीच श्रेणी के आधार पर भेदभाव न करने का निर्देश दिया गया था। इस बदलाव के साथ ही संस्थागत कोटा के तहत आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने छत्तीसगढ़ मेडिकल पीजी प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन नियमों के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही थी। इस पर 20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक करार दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। 18 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह छूट दी कि वह हाईकोर्ट से यह स्पष्ट कराए कि संस्थागत कोटे के तहत कितनी सीटों का आरक्षण उचित होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल की। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने दलील दी कि निवास आधारित आरक्षण समाप्त कर दिया गया है और अब केवल संस्थान आधारित प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर 2025 को नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत ओपन मेरिट के लिए निर्धारित कर दी गई हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि पीजी मेडिकल सीटों में निवास आधारित आरक्षण गलत है, लेकिन सीमित दायरे में संस्थागत प्राथमिकता दी जा सकती है। इस आदेश के बाद राज्य सरकार अब तन्वी बहल केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संस्थागत आरक्षण लागू कर सकेगी।

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अवैध शराब कारोबार पर पुलिस का शिकंजा: देसी व कच्ची शराब के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, बाइक जब्त

दुर्ग जिले की नगपुरा चौकी पुलिस ने अवैध शराब के परिवहन और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में देसी शराब और कच्ची महुआ शराब बरामद की है, साथ ही शराब ढोने में इस्तेमाल की जा रही बाइक भी जब्त की गई है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 73 हजार 650 रुपये आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 19 जनवरी को नगपुरा चौकी की टीम मालूद–नगपुरा के बीच चिखली रोड पर नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि दो व्यक्ति बाइक क्रमांक CG-07-CW-0849 से उरला भट्ठी की ओर से नगपुरा की दिशा में अवैध शराब लेकर आ रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध बाइक को रोककर तलाशी ली। देसी और कच्ची शराब बरामद तलाशी के दौरान आरोपी राजू पारधी के कब्जे से शोले मसाला मदिरा के 133 पौवा बरामद किए गए, जिसकी कुल मात्रा 23.940 बल्क लीटर है। बरामद देसी शराब की अनुमानित कीमत करीब 11 हजार 900 रुपये बताई गई है। वहीं दूसरे आरोपी रामधारी पारधी के पास से 7 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 1 हजार 750 रुपये आंकी गई है। पानी की बोतलों में करता था शराब की बिक्री पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब को पानी की बोतलों में भरकर बिक्री करता था, ताकि आसानी से किसी को शक न हो। इसके अलावा शराब की ढुलाई में प्रयुक्त बाइक, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 60 हजार रुपये है, को भी जब्त किया गया है। न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अवैध रूप से शराब के परिवहन और बिक्री में संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 49(1) के तहत मामला दर्ज कर विधिवत गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

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साहू समाज का बड़ा फैसला: प्री-वेडिंग शूट पर पूर्ण प्रतिबंध, तलाक रोकने पारिवारिक काउंसलिंग होगी शुरू

छत्तीसगढ़ में साहू समाज ने सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में अहम निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने प्री-वेडिंग शूट पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला समाज में बढ़ते दिखावे, अनावश्यक खर्च और बदलते संस्कारों पर नियंत्रण के उद्देश्य से लिया गया है। शनिवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू ने की। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए जिला अध्यक्षों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। दिखावे और फिजूलखर्ची पर रोक का प्रयास बैठक के दौरान समाज की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परंपराओं में आ रहे बदलाव और बढ़ती दिखावटी संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयुक्त सचिव प्रदीप साहू ने बताया कि लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्री-वेडिंग शूट को समाजहित में बंद करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश साहू संघ का मानना है कि साहू समाज की पहचान सादगी, संस्कार और सामाजिक सौहार्द से रही है, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति समाज की परंपरागत जड़ों को कमजोर कर रही है। इस निर्णय के जरिए समाज को अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। तलाक के मामलों पर चिंता, फैमिली काउंसलिंग की पहल बैठक में समाज के भीतर बढ़ते तलाक के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इस पर निर्णय लिया गया कि पारिवारिक विवादों को सुलझाने और रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए फैमिली काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना और दांपत्य जीवन में संतुलन बनाए रखना है। सामाजिक अनुशासन और एकता पर जोर प्रदेश स्तरीय बैठक में सामाजिक एकता, अनुशासन और संस्कार विकास को सशक्त करने के लिए संगठित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया। प्रदेश साहू संघ ने स्पष्ट किया कि जो परंपराएं समाज को कमजोर करती हैं, उन्हें आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ ने समाज के सभी सदस्यों से इन निर्णयों का पालन करने और समाजहित में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है।

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NEET PG कट-ऑफ विवाद: छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति से की NMC को भंग करने की मांग

देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। NEET PG परीक्षा का कट-ऑफ घटाकर ‘माइनस 40’ किए जाने के फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को तत्काल भंग करने की मांग की है। सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इस निर्णय को चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास का एक चिंताजनक अध्याय बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले न केवल योग्यता आधारित चयन प्रणाली को कमजोर करते हैं, बल्कि भविष्य में आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। योग्यता से समझौते का आरोप राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन हालिया नीतिगत निर्णय इसके उलट परिणाम दे रहे हैं। डॉ. सोलंकी का आरोप है कि कट-ऑफ को शून्य से नीचे ले जाना पेशे की गरिमा के साथ समझौता है और इससे कम योग्य डॉक्टरों के विशेषज्ञ बनने का रास्ता खुल सकता है। NMC पर गंभीर आरोप छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने केंद्र सरकार से NMC अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत आयोग को भंग करने की मांग की है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोग चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है। सोसाइटी ने सुझाव दिया है कि जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक ईमानदार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रख्यात शिक्षाविदों की एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नियुक्त की जाए, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सके। ब्रेन ड्रेन और सिस्टम फेल होने का आरोप ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि गलत नीतियों के चलते मेधावी छात्र विदेशों में पढ़ाई और करियर बनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे देश को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है। साथ ही, NMC पर बुनियादी ढांचे की कमी, फैकल्टी संकट और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। इस मांग के बाद अब चिकित्सा जगत और छात्रों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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रायपुर में क्रिप्टो और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 1.35 करोड़ की ठगी

6वीं पास युवक ने 26 लोगों को बनाया शिकार, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार रायपुर में क्रिप्टो करेंसी और शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप भतपहरी के रूप में हुई है, जिसने खुद को शेयर मार्केट एक्सपर्ट बताकर 26 लोगों से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपए से अधिक की ठगी की। मामला मोवा-पंडरी थाना क्षेत्र का है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ लिया। आरोपी की शैक्षणिक योग्यता महज 6वीं तक बताई जा रही है। ऐसे फंसाता था लोगों को पुलिस को दी गई शिकायत में पंडरी निवासी अमित दास ने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान उनकी पहचान देवपुरी निवासी कुलदीप भतपहरी से हुई थी। आरोपी खुद को शेयर मार्केट, IPO, NSE, MSEI और CDSL से जुड़ा निवेश सलाहकार बताता था। उसने “मासिक के.बी. प्लान” के नाम से निवेश योजना बताकर अमित दास और उसके भाई से ऑनलाइन और नकद माध्यम से करीब 15.60 लाख रुपए ले लिए। शुरुआत में कुछ महीनों तक नियमित ब्याज की रकम दी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद कई अन्य लोग भी आरोपी के जाल में फंसते चले गए। दिसंबर 2024 में हुआ फरार दिसंबर 2024 में आरोपी अचानक संपर्क से बाहर हो गया। जब निवेशकों को पैसे वापस नहीं मिले, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पंडरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और लगातार दबिश के जरिए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को एसीसीयू और पंडरी थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने इसी तरीके से कुल 26 लोगों से 1.35 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी से जुड़े लेन-देन और संपर्क के लिए किया जा रहा था। पहले भी जा चुका है जेल पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी कुलदीप भतपहरी इससे पहले भी इसी तरह के ठगी के मामले में थाना टिकरापारा से जेल जा चुका है। पुलिस को आशंका है कि ठगी का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

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बलौदाबाजार में स्कॉर्पियो-ट्रेलर की भीषण भिड़ंत, 6 लोग घायल

रायपुर सत्संग में शामिल होने जा रहा था परिवार, टायर फटने से हुआ हादसा बलौदाबाजार जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहां स्कॉर्पियो और ट्रेलर की आमने-सामने टक्कर में 6 लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना में 2 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा बलौदाबाजार–रायपुर मुख्य मार्ग पर मल्लिन नाला के पास डोटोपाड इलाके में हुआ। मामला लवन थाना क्षेत्र का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कसडोल नगर के वार्ड क्रमांक 8 के रहने वाले पांच पुरुष और एक महिला स्कॉर्पियो वाहन में सवार होकर रायपुर में आयोजित एक सत्संग कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। सुबह करीब 8 बजे मल्लिन नाला के पास पहुंचते ही स्कॉर्पियो का अगला बायां टायर अचानक फट गया, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। नियंत्रण बिगड़ने के बाद स्कॉर्पियो सामने से आ रहे एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चालक वाहन में फंसा, ग्रामीणों ने की मदद हादसे के बाद स्कॉर्पियो का चालक वाहन के अंदर फंस गया था। मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए चालक को बाहर निकाला। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को दी गई। सूचना मिलते ही लवन थाना पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी सभी 6 घायलों को तुरंत बलौदाबाजार जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 2 लोगों को बेहतर इलाज के लिए लवन स्थित उन्नत चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। अन्य 4 घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

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रायपुर में गांजा तस्करी मामले में 6 दोषियों को 10-10 साल की सजा

कालीबाड़ी चौक से 10 किलो गांजा बरामद, एनडीपीएस कोर्ट का सख्त फैसला रायपुर की एनडीपीएस कोर्ट ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 6 आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2024 का है, जब रायपुर पुलिस ने कालीबाड़ी चौक इलाके से गांजा बेचते हुए तीन युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कुल 10 किलो गांजा बरामद किया गया था। तलाशी के समय किसी भी आरोपी के पास गांजा रखने या बेचने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए गए थे। कैसे हुआ खुलासा विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत ने यह फैसला पुलिस द्वारा की गई ठोस विवेचना, बरामदगी और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर सुनाया। विशेष लोक अभियोजक भुवनलाल साहू के अनुसार, 7 दिसंबर 2024 को थाना कोतवाली रायपुर के सहायक उपनिरीक्षक को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कालीबाड़ी चौक क्षेत्र में तीन युवक बैग में गांजा रखकर ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। सूचना को रोजनामचा में दर्ज कर एनडीपीएस एक्ट के सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पुलिस टीम ने घेराबंदी की और तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया। इतनी मात्रा में मिला गांजा तलाशी के दौरान गणेश बागर्ती के पास से 4 किलो, विक्रम शाह से 4 किलो और अनिल उर्फ अली जुल्फेकार से 2 किलो गांजा बरामद हुआ। इस तरह कुल 10 किलो गांजा जब्त किया गया। तीनों के पास किसी प्रकार का वैध दस्तावेज नहीं था। जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क आरोपियों के मेमोरण्डम कथन के आधार पर पुलिस ने प्रियवंत कुम्हार को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से 6 किलो 800 ग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो गांजा तस्करी की पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ। पूछताछ में सामने आया कि रवि साहू इस अवैध नेटवर्क का मुख्य संचालक था। पुलिस ने रवि साहू के पास से 1 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद किया। वहीं संजय उर्फ लेंडी को गांजा सप्लाई और बिक्री में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एफएसएल रायपुर की रिपोर्ट में सभी जब्त नमूने गांजा पाए गए, जिसकी पुष्टि हुई। कोर्ट का सख्त निर्णय पुलिस ने सभी 6 आरोपियों के खिलाफ धारा 20(बी) और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने गणेश बागर्ती, विक्रम शाह, अनिल उर्फ अली जुल्फेकार, प्रियवंत कुम्हार, रवि साहू और संजय उर्फ लेंडी को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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रायपुर में सेप्टिक टैंक के खुले गड्ढे में गिरने से 5 साल की बच्ची की मौत

मकान मालिक पर FIR, 2025 में ऐसे हादसों में 3 बच्चों की जा चुकी है जान रायपुर में एक दर्दनाक हादसे में 5 साल की बच्ची की जान चली गई। बाथरूम में खोदे गए सेप्टिक टैंक के खुले गड्ढे में गिरने से बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे बाहर निकालकर निजी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला मोवा थाना क्षेत्र का है। मृत बच्ची की पहचान रिया महिलांग के रूप में हुई है। वह महासमुंद जिले के पटेवा गांव की रहने वाली थी और अपनी मौसी की गोदभराई कार्यक्रम में माता-पिता के साथ रायपुर आई थी। हादसे के वक्त वह टॉयलेट गई थी, जहां यह दुर्घटना हो गई। कैसे हुआ हादसा शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे रिया टॉयलेट गई थी। उस समय उसकी नानी भी पास में मौजूद थी, लेकिन पानी लाने के लिए बाहर चली गई। इसी दौरान बच्ची बाथरूम में पहुंची, जहां सेप्टिक टैंक के लिए खोदा गया गड्ढा बोरी से ढंका हुआ था। बच्ची का पैर बोरी में फंस गया और वह सीधे गड्ढे में गिर गई। आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया और तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लापरवाही का आरोप, मकान मालिक पर केस पुलिस के अनुसार, मकान मालिक जीवनलाल कुर्रे ने किराएदारों की शिकायत पर चार दिन पहले बाथरूम में टॉयलेट का गंदा पानी निकालने के लिए गड्ढा खुदवाया था। इसके बाद गड्ढे को सुरक्षित रूप से बंद करने के बजाय केवल एक बोरी से ढक दिया गया था। बाथरूम में दरवाजा भी नहीं था, जिससे जगह खुली हुई थी। परिजनों की शिकायत पर मकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मौके पर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बाथरूम के बाहर एक और गड्ढा खोदा गया था, जिसे बिना ढके छोड़ दिया गया था। 2025 में ऐसे हादसों में 3 बच्चों की मौत रायपुर में खुले गड्ढों की वजह से बच्चों की जान जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रशासन और सुरक्षा पर सवाल लगातार हो रही इन घटनाओं ने खुले गड्ढों और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कड़े नियमों की मांग कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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छत्तीसगढ़ में विवाह पंजीयन अनिवार्य: 7 दिन में मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट, बाल विवाह और फर्जी शादी पर लगेगी रोक

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में विवाह पंजीयन को अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में विधि-विधायी कार्य विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नए नियमों के तहत 29 जनवरी 2016 के बाद जिन दंपतियों का विवाह हुआ है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से विवाह का पंजीयन कराना होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से फर्जी, दिखावटी और अवैध शादियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर रोक लगेगी और महिलाओं के कानूनी अधिकारों को मजबूती मिलेगी। कहां और कैसे कराएं विवाह पंजीयन विवाह का पंजीयन नगर निगम, नगर पालिका, जनपद पंचायत या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कराया जा सकता है। नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले दंपतियों को संबंधित नगर निगम कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके अलावा चॉइस सेंटर के माध्यम से भी विवाह पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। विवाह की तारीख से एक महीने के भीतर पंजीयन कराने पर मात्र 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। यदि एक माह के बाद पंजीयन कराया जाता है तो इसके लिए 520 रुपये शुल्क देना होगा। मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवश्यक दस्तावेज मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले पति और पत्नी का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। साथ ही दोनों की उम्र भारतीय कानून के अनुसार निर्धारित सीमा में होनी चाहिए। विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है, हालांकि इसके बाद भी लेट फीस और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से आवेदन किया जा सकता है। यदि किसी आवेदक का पूर्व में विवाह हो चुका है और तलाक हो गया है, तो नए विवाह के पंजीयन के लिए तलाक का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। एक सप्ताह में जारी होगा सर्टिफिकेट रायपुर नगर निगम की विवाह रजिस्ट्रार तृप्ति पाणिग्रही के अनुसार, आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेज सही पाए जाने पर एक सप्ताह के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पति-पत्नी की उपस्थिति आवश्यक होती है। किन मामलों में नहीं बनेगा मैरिज सर्टिफिकेट भारतीय कानून के अनुसार विवाह के समय लड़की की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष तय है। यदि विवाह के समय इनमें से किसी की भी उम्र तय सीमा से कम पाई जाती है, तो वह विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा और ऐसे मामलों में मैरिज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।

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