Chhattisgarh

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर

जगदलपुर में बस्तर पंडुम का करेंगी शुभारंभ, प्रशासनिक तैयारियां तेज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पहुंचेंगी। अपने प्रस्तावित दौरे के दौरान राष्ट्रपति बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होकर इस सांस्कृतिक आयोजन का विधिवत शुभारंभ करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर राज्य प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों को लेकर हाल ही में मुख्य सचिव विकास शील ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर कलेक्टर को जगदलपुर में सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत सुरक्षा घेरा, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा रायपुर कलेक्टर को भी राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षित रहें।

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तेलीबांधा तालाब पर पार्किंग शुल्क को लेकर निगम का यू-टर्न

महापौर मीनल चौबे बोलीं– फिलहाल नहीं वसूला जाएगा चार्ज, चर्चा के बाद होगा अंतिम फैसला रायपुर के तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) पर पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बाद नगर निगम ने फिलहाल अपने फैसले पर रोक लगा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क पर पार्किंग शुल्क दर्शाने वाले बोर्ड लगाए जाने के बाद आम लोगों में भ्रम और नाराजगी देखी गई थी।इस पूरे मामले पर एक फरवरी की शाम महापौर मीनल चौबे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि, अभी तालाब किनारे किसी भी प्रकार का पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। महापौर ने माना कि सड़क पर खड़े वाहनों से शुल्क वसूलना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के पास तेलीबांधा तालाब के आसपास ऐसी कोई चिन्हित पार्किंग जगह नहीं है, जहां वाहनों को सुव्यवस्थित ढंग से खड़ा कराया जा सके। इसी वजह से अगले करीब 15 दिनों तक तालाब क्षेत्र में आने-जाने वालों और वाहनों की निगरानी की जाएगी। अव्यवस्था पर नियंत्रण यातायात पुलिस के हाथ महापौर मीनल चौबे ने यह भी बताया कि तालाब के दूसरी ओर सड़क किनारे कई बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। वहां आने वाले लोग अपने वाहन तालाब की ओर खड़े कर देते हैं, जिससे अव्यवस्था पैदा होती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर पार्किंग और यातायात व्यवस्था का अधिकार नगर निगम के बजाय यातायात पुलिस के पास है। इस मुद्दे पर निगम, यातायात समिति और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा। पहले भी उठ चुका है पार्किंग का मुद्दा महापौर ने बताया कि वर्ष 2021-22 में भी तेलीबांधा तालाब किनारे पार्किंग व्यवस्था को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उस समय कई विसंगतियों के चलते भाजपा संगठन और पार्षद दल ने ही इसका विरोध किया था।उन्होंने कहा कि वर्तमान निर्णय राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 के संकल्प के आधार पर लिया गया था, जिसमें पार्किंग शुल्क की दरें तय थीं। उसी आधार पर व्यवस्था लागू करने की कोशिश की गई। यातायात समिति से राय नहीं लेने का आरोप इधर, कांग्रेस और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पार्किंग शुल्क तय करने से पहले यातायात समिति से कोई चर्चा नहीं की गई। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे ने कहा कि बिना प्रक्रिया अपनाए सीधे बोर्ड लगाकर शुल्क घोषित करना गलत है और इससे जनता में भ्रम फैला। कांग्रेस का विरोध, निजीकरण का आरोप तेलीबांधा मरीन ड्राइव के कथित व्यवसायीकरण के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को जनविरोधी बताया।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जीई रोड शहर का प्रमुख सार्वजनिक मार्ग है और यहां पार्किंग ठेका देना नियमों के विपरीत है। उनका आरोप है कि वर्षों से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के लिए इस्तेमाल होने वाले इस सार्वजनिक स्थल को व्यावसायिक हितों के हवाले किया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन समेत अन्य नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पार्किंग शुल्क का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जबरन वसूली रोकने की मांग कांग्रेस ने मरीन ड्राइव में कथित जबरन पार्किंग शुल्क वसूली पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, रायपुर सांसद और शहर के चारों विधायकों को पत्र भेजा है।पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब पर्याप्त पार्किंग सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, तो शुल्क वसूली किस आधार पर की जा रही थी।

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लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी: दीपक बैज

कांग्रेस ने 15 दिन और धान खरीदी बढ़ाने की उठाई मांग छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी अपने तय लक्ष्य से काफी पीछे रह गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार ने 165 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य घोषित किया था, लेकिन वास्तविक खरीदी सिर्फ 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही हो सकी। इस तरह लक्ष्य से करीब 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा गया। दीपक बैज ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में भी इस बार 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम धान खरीदी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले 75 दिन धान खरीदी का आश्वासन दिया था, लेकिन केवल 53 दिनों में ही खरीदी बंद कर दी गई। 31 जनवरी अंतिम तिथि थी, पर शनिवार और रविवार पड़ने के कारण अंतिम दो दिनों में किसानों को धान बेचने का मौका ही नहीं मिला। पंजीयन और टोकन की गड़बड़ी से किसान वंचित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में करीब 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, लेकिन लगभग 2.5 लाख किसान धान नहीं बेच पाए। वहीं एग्रीस्टेक पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण करीब 5 लाख किसानों का पंजीयन ही नहीं हो सका।उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह किसानों से बिना सहमति के जबरन रकबा सरेंडर कराया गया और पहले से जारी टोकन भी रद्द कर दिए गए, जिससे हजारों किसान धान खरीदी से वंचित रह गए। 29 जिलों में घटी खरीदी, फिर भी सरकार का जश्न दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश के 29 जिलों में धान खरीदी में गिरावट दर्ज की गई, इसके बावजूद सरकार ने जश्न मनाया। जिलावार आंकड़े जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएमएस के जरिए बधाई दी गई कि किस जिले में कितनी कमी आई।उन्होंने सवाल उठाया कि जब लक्ष्य ही पूरा नहीं हुआ, तो बधाई किस बात की दी जा रही है। यह साफ दर्शाता है कि सरकार का इरादा शुरू से ही कम धान खरीदने का था। कुछ जिलों में गंभीर हालात कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि केवल नारायणपुर, बलरामपुर और बस्तर जिलों में ही पिछले साल के आसपास खरीदी हुई है। बाकी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।महासमुंद, कवर्धा और कोरबा जैसे जिलों में किसानों की परेशानी बढ़ी है। कुछ स्थानों पर किसानों द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटनाएं सामने आईं, वहीं एक मामले में किसान की मौत भी हुई। 15 दिन अतिरिक्त धान खरीदी की मांग दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार विशेष अभियान चलाकर कम से कम 15 दिनों के लिए धान खरीदी दोबारा शुरू करे, ताकि बचे हुए सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा सके।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ हुए इस अन्याय के लिए सरकार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

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रायपुर मरीन ड्राइव पर अब पार्किंग शुल्क: फैसले का विरोध, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

रायपुर।राजधानी रायपुर के तेलीबांधा तालाब स्थित मरीन ड्राइव पर घूमने आने वाले लोगों को अब पार्किंग के लिए शुल्क चुकाना होगा। नगर निगम द्वारा पार्किंग शुल्क लागू किए जाने के फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। कई लोगों का कहना है कि मरीन ड्राइव शहर का प्रमुख सार्वजनिक पर्यटन स्थल है, जहां पार्किंग शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। महापौर ने फैसले का किया बचाव इस मुद्दे पर महापौर ने नगर निगम के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि मरीन ड्राइव पर आने वाले कई लोग रेस्टोरेंट और होटलों में 5 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करते हैं। ऐसे लोगों को 10 या 20 रुपये का पार्किंग शुल्क देने में कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए।महापौर के अनुसार, रेस्टोरेंट और होटल में आने वाले लोग अपने वाहन अव्यवस्थित तरीके से खड़े कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था बिगड़ती है। इसी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क लागू किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मॉर्निंग वॉक करने वालों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा, हालांकि मॉर्निंग वॉक की समय-सीमा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल इस तरह लिया जा रहा है पार्किंग शुल्क नगर निगम प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में दोपहर 12 बजे के बाद ही पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। निगम का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल 15 दिनों के ट्रायल के तौर पर लागू की गई है। ट्रायल अवधि के बाद शुल्क और समय-सारिणी को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पहले भी हो चुका है विरोध गौरतलब है कि पूर्व महापौर एजाज ढेबर के कार्यकाल में भी तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में पार्किंग शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया था, जिसका उस समय भाजपा ने कड़ा विरोध किया था। बाद में उस फैसले को वापस ले लिया गया था। कांग्रेस ने लगाया राजस्व वसूली का आरोप इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने भी नगर निगम पर निशाना साधा है। PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने पार्किंग शुल्क को अनुचित बताते हुए कहा कि नगर निगम जनता से जबरन राजस्व वसूली कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रायपुर सहित प्रदेश के अन्य नगर निगमों के पास पर्याप्त बजट नहीं है, इसी वजह से आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

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एक्स-बॉयफ्रेंड की धमकी से दहशत: रायपुर में युवती के घर में जबरन घुसा युवक, शादी का दबाव

रायपुर।राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में एक युवती को उसके पूर्व प्रेमी द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोपी युवक ने रात के समय युवती के घर पहुंचकर जबरन प्रवेश किया, गाली-गलौच की और शादी के लिए दबाव बनाया। घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के अनुसार, उसका चंगोरा भाठा निवासी रितेश सिंह के साथ करीब तीन साल पहले प्रेम संबंध था। आपसी मतभेद और निजी कारणों के चलते उसने युवक से संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी युवक उसे लगातार परेशान करता रहा। रात में घर पहुंचकर किया हंगामा युवती ने पुलिस को बताया कि 30 जनवरी की रात करीब 9 बजे आरोपी उसके घर पहुंचा और जोर-जोर से दरवाजा खटखटाने लगा। दरवाजा खुलते ही वह जबरन घर में घुस गया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगा। इस दौरान उसने युवती पर शादी करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर जान से मारने की धमकी दी। यह पूरी घटना परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में हुई। अगले दिन दर्ज कराई शिकायत घटना के बाद युवती ने अपनी बड़ी बहन को इसकी जानकारी दी। रात अधिक होने के कारण वह तत्काल थाने नहीं जा सकी। इसके बाद 31 जनवरी 2026 को उसने डीडी नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शुरू की जांच डीडी नगर थाना पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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35 साल की शादी में तलाक के लिए ठोस सबूत जरूरी: पत्नी के अलग रहने पर भी हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि लंबे वैवाहिक संबंधों में तलाक के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि क्रूरता और परित्याग के ठोस व स्पष्ट प्रमाण आवश्यक हैं। कोर्ट ने 35 साल पुरानी शादी को खत्म करने की मांग वाली पति की याचिका खारिज कर दी। यह मामला उस पति से जुड़ा है, जिसने यह कहते हुए तलाक मांगा था कि उसकी पत्नी झगड़ालु है, मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है और पिछले करीब 14–15 वर्षों से उसे छोड़कर बेटी व दामाद के साथ रह रही है। पत्नी ने लगाए पलटवार में आरोप वहीं पत्नी ने पति की तलाक याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पति अक्सर उसके चरित्र पर शक करता था और गाली-गलौच करता था। उसने यह भी बताया कि वह बीपी और शुगर की मरीज है, लेकिन पति ने कभी उसके इलाज का खर्च नहीं उठाया। मजबूरी में उसे बेटी के घर रहना पड़ा। क्या है पूरा मामला बेमेतरा जिले के निवासी गिरधर दुबे ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की अर्जी दाखिल की थी। दंपती की शादी करीब 35 साल पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। पति पेशे से पुजारी है। पति का दावा था कि पत्नी के अलग रहने और मानसिक प्रताड़ना के कारण वैवाहिक जीवन समाप्त हो चुका है। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने 5 जुलाई 2023 को यह याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को ठहराया सही पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने की। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पत्नी का अलग रहना तलाक का आधार नहीं बन सकता। क्रूरता और परित्याग साबित करने के लिए स्पष्ट घटनाएं, ठोस आरोप और पुख्ता साक्ष्य जरूरी होते हैं। कोर्ट ने पाया कि पति की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान सामान्य और अस्पष्ट थे, जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं महिला प्रकोष्ठ की काउंसलिंग रिपोर्ट में पत्नी के आरोप अधिक विश्वसनीय पाए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि तलाक जैसे गंभीर मामले में केवल अंदाजों या सामान्य आरोपों के आधार पर विवाह विच्छेद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि फैमिली कोर्ट का निर्णय रिकॉर्ड के अनुरूप और सही है। इसी आधार पर पति की अपील को खारिज कर दिया गया।

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ट्रेन में यात्रियों से अवैध वसूली करते चार किन्नर हिरासत में, राजनांदगांव RPF की कार्रवाई

राजनांदगांव। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेल मदद ऐप पर प्राप्त शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए ट्रेन में यात्रियों से जबरन वसूली और अभद्र व्यवहार के आरोप में चार किन्नरों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के नागपुर मंडल के अंतर्गत की गई। घटना 29 जनवरी 2026 की है। गाड़ी संख्या 22816 (बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस) में यात्रा कर रहे यात्री रोमेश कुमार ने ‘रेल मदद’ ऐप पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि जनरल कोच में कुछ लोग यात्रियों से अभद्रता कर जबरन पैसे मांग रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी शिकायत मिलते ही RPF की टीम राजनांदगांव रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंची और संबंधित कोच की घेराबंदी की। इस दौरान मधु (27), सोनाली (42), काजल (35) और ढिल्लू (27) को हिरासत में लिया गया। सभी साईं नगर, उरला, जिला दुर्ग के निवासी बताए गए हैं। बिना टिकट यात्रा और रेलवे एक्ट के तहत मामला जांच में सामने आया कि पकड़े गए व्यक्तियों के पास यात्रा टिकट नहीं था। ड्यूटी पर तैनात टीटीई ने नियमानुसार उनसे जुर्माना वसूला। इसके अलावा यात्रियों को परेशान करने और अवैध वसूली के आरोप में रेलवे अधिनियम की धारा 145(B) के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यात्रियों से RPF की अपील रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार या सुरक्षा संबंधी समस्या होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 139 या ‘रेल मदद’ ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।

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दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचीं RPF डीजी सोनाली मिश्रा, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा; GRP-स्थानीय पुलिस समन्वय पर दिया जोर

दुर्ग। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महानिदेशक सोनाली मिश्रा शुक्रवार शाम दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचीं, जहां उन्होंने स्टेशन परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। इस दौरान दुर्ग रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य और दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल भी मौजूद रहे। दुर्ग रेलवे स्टेशन स्थित वीआईपी लाउंज में आयोजित समीक्षा बैठक में महानिदेशक ने रेल यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और संगठित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। RPF-GRP और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल पर जोर बैठक के दौरान रेलवे सुरक्षा बल, शासकीय रेल पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष रूप से जोर दिया गया। महानिदेशक ने कहा कि बेहतर तालमेल से ही अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सकता है। स्टेशन परिसर और RPF पोस्ट का किया निरीक्षण बैठक के बाद सोनाली मिश्रा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दुर्ग रेलवे स्टेशन परिसर और RPF पोस्ट दुर्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान प्लेटफार्मों पर लगे सीसीटीवी कैमरों, निगरानी व्यवस्था, ट्रेनों में सुरक्षा प्रबंध, यात्रियों की सुविधाओं और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों की जानकारी ली गई। अपराध के नए तरीकों से निपटने की तैयारी के निर्देश निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय और अपराध के नए तरीकों को देखते हुए RPF को तकनीकी रूप से सशक्त, आधुनिक और प्रशिक्षित बनाए रखना जरूरी है। सोनाली मिश्रा ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा RPF की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए GRP व स्थानीय पुलिस के साथ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई बेहद आवश्यक है, ताकि रेल यात्रियों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिल सके।

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दुर्ग में ग्राफिक्स डिजाइनर ने की आत्महत्या, फेसबुक पोस्ट में पत्नी पर गंभीर आरोप; पुलिस जांच में जुटी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक ग्राफिक्स डिजाइनर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले युवक ने फेसबुक पर एक टेक्स्ट पोस्ट साझा किया, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है। युवक ने पोस्ट में खुद को घरेलू हिंसा का शिकार बताते हुए अपनी गर्लफ्रेंड को बचाने के लिए यह कदम उठाने का दावा किया है। यह मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। मृतक की पहचान भोज नारायण (36 वर्ष) के रूप में हुई है, जो भिलाई स्थित रुंगटा कॉलेज में सीनियर ग्राफिक्स डिजाइनर के पद पर कार्यरत था। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए आरोप जानकारी के अनुसार, भोज नारायण ने 28 जनवरी को आत्महत्या की थी, लेकिन उसका फेसबुक पोस्ट और कथित सुसाइड नोट अब सामने आया है। पोस्ट में उसने लिखा है कि वह पत्नी से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है और इस मामले में उसके अन्य परिजनों की कोई भूमिका नहीं है। मृतक ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया है कि उसकी पत्नी ने उसकी गर्लफ्रेंड पर जादू-टोना कराए जाने का शक जताया और खुद को लंबे समय से मानसिक व घरेलू उत्पीड़न का शिकार बताया। फेसबुक पोस्ट के साथ भोज ने एक ड्राइव लिंक भी साझा किया था, जिसमें पत्नी और कुछ अन्य लोगों से संबंधित चैट के स्क्रीनशॉट होने का दावा किया गया है। क्या है पूरा मामला भोज नारायण मूल रूप से गरियाबंद जिले के राजिम का रहने वाला था और भिलाई में किराए के मकान में रह रहा था। वह शादीशुदा था और उसकी एक बेटी भी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसका एक महिला प्यून के साथ प्रेम संबंध था, जो स्वयं भी शादीशुदा थी। इस संबंध की जानकारी उसकी पत्नी को थी, जिसको लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले भोज अपनी गर्लफ्रेंड को बाहर लेकर गया था। बाद में लौटने पर घरेलू विवाद और बढ़ गया। पत्नी ने संबंध खत्म करने की बात कही, लेकिन भोज इसके लिए तैयार नहीं हुआ। 28 जनवरी को जब वह घर में अकेला था, उसी दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को नीचे उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। 29 जनवरी को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पहले दर्ज हुई थी गुमशुदगी रिपोर्ट पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या से कुछ दिन पहले भोज नारायण घर से लापता हो गया था, जिसके बाद उसकी पत्नी ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान उसके प्रेम संबंधों और आर्थिक तनाव की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि वह कर्ज के कारण भी मानसिक दबाव में था। पुलिस कर रही हर पहलू की जांच जामुल थाना प्रभारी रामेंद्र सिंह ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। फेसबुक पोस्ट, मोबाइल डेटा, ड्राइव लिंक और परिजनों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है। आत्महत्या के कारणों और लगाए गए आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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सोना-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव, शादी के सीजन में बिगड़ा बजट; रायपुर में सराफा कारोबार 30% तक सिमटा

रायपुर। सोना और चांदी की कीमतों में लगातार आ रहे तेज उतार-चढ़ाव ने रायपुर के सराफा बाजार को अस्थिर कर दिया है। जहां एक ओर निवेशक इस गिरावट-बढ़त को मुनाफे का मौका मान रहे हैं, वहीं शादी-विवाह के सीजन में आम खरीदारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। सराफा व्यापारियों के मुताबिक, भाव में रोजाना हो रहे बड़े बदलाव की वजह से रिटेल खरीदारी प्रभावित हुई है। मौजूदा हालात में बाजार का कारोबार सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक सिमट गया है। हालांकि निवेशक और स्टॉकिस्ट बाजार में सक्रिय बने हुए हैं। 25 साल में पहली बार देखी ऐसी अस्थिरता पिछले 25 वर्षों से सराफा कारोबार से जुड़े व्यापारी मोहित जैन ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में सोने-चांदी की कीमतों में ऐसी अस्थिरता पहली बार देखी है। पहले महीने भर में करीब 2 हजार रुपए का अंतर देखने को मिलता था, लेकिन अब रोजाना भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे ग्राहक असमंजस में हैं। गिरावट का फायदा उठा रहे निवेशक रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू के अनुसार, बाजार में इस समय निवेशक और ज्वेलरी खरीदने वाले दोनों तरह के ग्राहक आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन शुक्रवार को सोने-चांदी के दामों में आई गिरावट का निवेशकों ने फायदा उठाया। रेट में संशोधन के बाद यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफा वसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण देखने को मिली है। गोल्ड-सिल्वर मार्केट में बड़ा क्रैश 30 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर मार्केट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर प्रॉफिट बुकिंग के चलते चांदी करीब ₹1.10 लाख (27%) गिर गई। अब MCX पर चांदी ₹2.91 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि 29 जनवरी को इसका भाव ₹4.01 लाख प्रति किलो था। वहीं MCX पर सोने में करीब ₹20 हजार (12%) की गिरावट आई। 10 ग्राम सोना ₹1.49 लाख पर आ गया, जो एक दिन पहले ₹1.69 लाख था। गिरावट की मुख्य वजहें सराफा बाजार में भी सस्ता हुआ सोना-चांदी इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सराफा बाजार में चांदी ₹40,638 और सोना ₹9,545 सस्ता हुआ है।अब 1 किलो चांदी ₹3,39,350 और 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,65,795 पर आ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सराफा बाजार शाम 5 बजे बंद हो जाता है, जबकि वायदा बाजार रात 12 बजे तक चलता है। इसी वजह से फिजिकल बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई। बाजार का मिला-जुला असर सराफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से आम ग्राहक खरीदारी को लेकर दुविधा में है, जबकि निवेशक इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में सोना-चांदी की दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार और निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी।

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