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अफीम बीज सप्लायर जोधपुर से गिरफ्तार, दुर्ग पुलिस ने अवैध खेती मामले में चौथे आरोपी को पकड़ा

दुर्ग जिले में सामने आए अवैध अफीम खेती मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने चौथे आरोपी को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अफीम की खेती के लिए बीज बाहर से मंगाए गए थे और आरोपी छोटू राम इन्हें उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार आरोपी घटना के बाद राजस्थान भाग गया था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना मोबाइल फोन बंद रखकर छिपा हुआ था। 12 मार्च को पुलिस ने उसे जोधपुर से हिरासत में लिया। मामले में एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। इस केस में पुलिस पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक स्थानीय नेता समेत अन्य सहयोगी शामिल हैं। सभी आरोपियों को 7 मार्च को पकड़ा गया था और फिलहाल उनकी न्यायिक रिमांड समाप्त होने वाली है। पुलिस को आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की जरूरत पड़ सकती है। यह पूरा मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा, झेनझरी और सिरसा गांवों के बीच स्थित खेतों से जुड़ा है, जहां 6 मार्च को सूचना मिलने पर पुलिस ने छापा मारा था। जांच में मक्का की फसल के बीच छिपाकर अफीम के पौधे लगाए गए मिले। पुलिस ने करीब 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली फसल को जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई गई। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से नकद राशि और मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। इससे पहले की कार्रवाई में खेती में उपयोग किए गए ट्रैक्टर, जेसीबी, मोटरसाइकिल और अन्य उपकरण भी जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को जल्द पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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दुर्ग में ट्रैफिक सख्ती का असर, चालान 85% बढ़े तो सड़क हादसों में मौतें घटीं

दुर्ग जिले में यातायात पुलिस की कड़ी कार्रवाई का सकारात्मक असर अब सड़क सुरक्षा के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त चालानी कार्रवाई के चलते सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च के बीच सड़क हादसों में 89 लोगों की मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में इसी अवधि में यह संख्या घटकर 62 रह गई है। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 27 कम लोगों की जान गई है। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में जनवरी में 36, फरवरी में 23 और मार्च में 10 मार्च तक 3 लोगों की मौत दर्ज की गई। पुलिस का मानना है कि यह कमी लगातार चल रहे सघन जांच अभियान और नियमों के कड़ाई से पालन कराने का परिणाम है। चालानी कार्रवाई में भी इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च तक कुल 14,162 चालान काटे गए थे, जबकि 2026 में इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 26,234 हो गई है, जो लगभग 85 प्रतिशत अधिक है। यातायात पुलिस ने दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग, सेंट्रल एवेन्यू, सुपेला चौक, नेहरू नगर चौक और पावर हाउस जैसे व्यस्त क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया है। यहां हेलमेट जांच, ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग और तेज या लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस वाहन चालकों से हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने, शराब पीकर वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील कर रही है।

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दुर्ग-भिलाई में गैस सिलेंडर को लेकर असमंजस, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

Durg और Bhilai में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। जिला प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति सामान्य है, लेकिन कई उपभोक्ता दावा कर रहे हैं कि बुकिंग के बाद भी उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। कई गैस एजेंसियों में सर्वर की तकनीकी समस्या और बुकिंग में देरी के कारण उपभोक्ताओं को एजेंसी के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि नंबर लगने के बाद भी कई दिनों तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकी भिलाई में सबसे ज्यादा समस्या कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर को लेकर सामने आ रही है। होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद है। इससे उनके रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने लगा है। होटल कारोबारियों का कहना है कि यदि स्थिति कुछ दिन और ऐसी ही रही तो खाना बनाने और व्यवसाय चलाने में परेशानी बढ़ सकती है। वहीं अस्पताल, हॉस्टल और अन्य संस्थानों में भी गैस उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। सर्वर समस्या से बुकिंग प्रभावित भिलाई की एक गैस एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों से सर्वर बार-बार डाउन हो रहा है। सुबह कुछ समय तक सिस्टम काम करता है, लेकिन फिर बंद हो जाता है। इसके कारण बुकिंग पर्ची निकालने और होम डिलीवरी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे 10 से 15 दिनों से सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार सर्वर समस्या बताकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि कई दिन पहले बुकिंग करने के बाद भी उन्हें अभी तक सिलेंडर नहीं मिला। प्रशासन ने की समीक्षा बैठक इस स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर Abhijeet Singh ने कलेक्ट्रेट में ऑयल कंपनियों और गैस वितरकों के अधिकारियों के साथ बैठक कर गैस की उपलब्धता और सप्लाई व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि जिले में घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और रोजाना लगभग 9,750 सिलेंडरों की रिफिलिंग की जा रही है। जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। प्रशासन ने गैस एजेंसियों को सप्लाई और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न हो और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। जिला प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और जिन लोगों का ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है, वे जल्द ही इसे गैस एजेंसी में पूरा करा लें। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3555 जारी किया गया है।

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दुर्ग: अफीम की खेती का खुलासा करने वाले सरपंच ने मांगी सुरक्षा, जान को खतरे की जताई आशंका

छत्तीसगढ़ के Durg जिले के ग्राम समोदा में अवैध अफीम की खेती सामने आने के बाद प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसी बीच मामले की शिकायत करने वाले सरपंच ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ग्राम समोदा के सरपंच अरुण गौतम ने पुलिस को लिखित आवेदन देकर कहा है कि उन्हें जान का खतरा है और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा सकती है। पुलिस से सुरक्षा की मांग सरपंच ने चौकी जेवरा-सिरसा और थाना पुलगांव में शिकायत देकर बताया कि उन्होंने गांव के ही कुछ लोगों के खिलाफ अवैध अफीम की खेती की जानकारी पुलिस और सतर्कता विभाग को दी थी। जांच के बाद खेत में प्रतिबंधित मादक पदार्थ अफीम की खेती होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए फसल जब्त की और आरोपी विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। संदिग्ध लोगों की आवाजाही से बढ़ी चिंता सरपंच अरुण गौतम का कहना है कि शिकायत के बाद से वे लगातार डर के माहौल में हैं। उनके अनुसार 7 मार्च की रात कुछ अज्ञात लोग गांव में संदिग्ध तरीके से घूमते दिखाई दिए, जो स्थानीय निवासी नहीं थे। वे उनके घर के आसपास और गलियों में घूम रहे थे, जिससे उन्हें किसी साजिश की आशंका हो रही है। जनदर्शन में भी उठाया मुद्दा सरपंच ने कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में भी शिकायत पत्र देकर गांव में अवैध कब्जे का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, वे उन्हें या उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रशासन ने हटवाया रास्ते का बैरियर उधर प्रशासन ने गांव से शिवनाथ नदी तक जाने वाले रास्ते पर लगाया गया लोहे का बैरियर हटवा दिया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आरआई व पटवारी की मौजूदगी में रास्ता आम लोगों के लिए खोल दिया। बताया गया कि रास्ते के आगे के हिस्से में मछली पालन के कारण बैरियर लगाया गया था, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। अब बैरियर हटने के बाद गांव के लोग आसानी से नदी तक आ-जा सकेंगे।

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भिलाई में किराए के मकान से सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, बंगाल समेत कई जगहों से लाई गई थीं युवतियां

दुर्ग/भिलाई: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में पुलिस ने एक पॉश कॉलोनी में चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। नेहरू नगर क्षेत्र के विद्या विहार कॉलोनी में किराए के मकान में यह अवैध कारोबार पिछले करीब तीन महीनों से संचालित किया जा रहा था। पुलिस की रेड के दौरान कमरे से 8 युवतियां बरामद हुई हैं। जानकारी के अनुसार, स्मृति नगर चौकी पुलिस और महिला रक्षा टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मंगलवार रात को इस रैकेट का खुलासा किया। पुलिस ने पहले एक प्वाइंटर को ग्राहक बनाकर भेजा, जिसके बाद पूरी योजना के साथ मकान पर छापा मारा गया। सरगना महिला और एक ग्राहक गिरफ्तार पुलिस जांच में सामने आया कि मकान नंबर 146/8 को धनवंती रावत उर्फ रीना सिंह रावत (35) ने किराए पर लिया था। इसी मकान में बाहर से लड़कियों को बुलाकर देह व्यापार कराया जा रहा था। छापेमारी के दौरान एक ग्राहक को भी आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया। पुलिस ने रैकेट संचालित करने वाली महिला धनवंती रावत और दुर्ग निवासी ग्राहक अमन शेख को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मौके से मिली युवतियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट के निर्देशानुसार छोड़ दिया गया। बंगाल और छत्तीसगढ़ के कई जिलों से लाई गई थीं लड़कियां पुलिस के मुताबिक, पकड़ी गई युवतियों में ज्यादातर पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की लड़कियां भी शामिल हैं। आरोप है कि संचालिका उन्हें ग्राहकों के पास दो से तीन दिनों के लिए भेजती थी। अलग-अलग जगहों पर भी भेजी जाती थीं युवतियां सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि आरोपी महिला बाहर से युवतियों को बुलाकर इस मकान में रखती थी। ग्राहक मिलने के बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। मौके से मोबाइल, बाइक और आपत्तिजनक सामग्री जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से एक पल्सर बाइक, 12 मोबाइल फोन, 5,500 रुपए नकद और देह व्यापार से जुड़ी सामग्री जब्त की है। कमरे से हुक्का भी बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह अवैध कारोबार करीब दो से तीन महीने से चल रहा था। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।

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दुर्ग में अवैध अफीम खेती मामला: आरोपी ने YouTube से सीखी तकनीक, अब सभी फॉर्महाउस की होगी जांच

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम खेती मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी विकास विश्नोई ने अफीम की खेती करने की तकनीक YouTube से सीखी थी। उसके मोबाइल फोन से अफीम की खेती से जुड़े सैकड़ों वीडियो भी मिले हैं, जिनके आधार पर वह खेती की पूरी प्रक्रिया समझ रहा था। पुलिस के अनुसार विकास विश्नोई पिछले करीब छह साल से दुर्ग में रह रहा था। वह Vinayak Tamrakar के कपास के फार्महाउस में अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। 3 मार्च को खेत में लगी अफीम की फसल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उसने अपनी पत्नी को दुर्ग से राजस्थान भेज दिया था। इस मामले में पुलिस ने Vinayak Tamrakar, विकास विश्नोई और मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां पहले रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने दोबारा पूछताछ के लिए रिमांड मांगा। अदालत ने तीनों आरोपियों को दो दिन के लिए फिर से पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब पुलिस उनसे इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए Abhijeet Singh ने जिले में संचालित सभी फॉर्महाउस की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सभी तहसीलदारों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के फार्महाउस का निरीक्षण कर रिपोर्ट सीधे कलेक्टर कार्यालय को सौंपें। साथ ही जमीन का सर्वे करने वाले कर्मचारी शशिकांत साहू और पटवारी अनीता साहू को भी शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। पुलिस कार्रवाई के दौरान अफीम की खेती से जुड़ी बड़ी मात्रा में सामग्री भी जब्त की गई है। इनमें दो ट्रैक्टर, दो जेसीबी मशीन, एक हार्वेस्टर, दो बाइक, सात बोरी डोडा और खेती में इस्तेमाल होने वाले कई कृषि उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा खेत में सिंचाई के लिए उपयोग हो रहे दो मोटर पंप, स्प्रिंकलर सिस्टम और निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी जब्त किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि ग्राम समोदा और झेनझरी के बीच स्थित फार्महाउस में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी। यहां से लगभग 14 लाख 30 हजार अफीम के पौधे बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7.88 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस अब जमीन मालिक मुधमति बाला और प्रीति बाला से भी पूछताछ करेगी। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि फार्महाउस में राजस्थान के मजदूर काम कर रहे थे और सुरक्षा के लिए बाउंसर भी तैनात किए गए थे। डिजिटल सर्वे में खेत में गेहूं और मक्का की खेती दर्ज थी, जबकि उसी की आड़ में अवैध रूप से अफीम उगाई जा रही थी।

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दुर्ग अफीम खेती मामला: कांग्रेस का ऐलान, 12 मार्च को प्रदेशभर में भाजपा कार्यालयों का करेगी घेराव

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 12 मार्च को पूरे प्रदेश में भाजपा जिला कार्यालयों के घेराव का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार को भाजपा नेताओं का संरक्षण मिल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर की भूमिका संदिग्ध है, लेकिन उन्हें मुख्य आरोपी बनाने के बजाय सह-अभियुक्त बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि केवल निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाना चाहिए। बच्चों को मिला अफीम का पौधा, खुला मामला जानकारी के मुताबिक, समोदा गांव में पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब 6 मार्च 2026 को गांव के कुछ बच्चों ने खेत में अजीब तरह के पौधे देखे। बच्चों ने उसकी तस्वीर इंटरनेट पर खोजी तो पता चला कि वह अफीम का पौधा है। इसके बाद मामला गांव में फैल गया और प्रशासन तक पहुंच गया। पुलिस ने जब्त किए करोड़ों के पौधे सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खेत से करीब 8 करोड़ रुपए कीमत के अफीम के पौधे बरामद किए। इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। ग्रामीणों ने लगाए दबदबे के आरोप गांव के लोगों का कहना है कि आरोपी का इलाके में काफी दबदबा था। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी उसके खेतों के आसपास जाने की हिम्मत नहीं करता था। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव के कई सार्वजनिक स्थानों, जैसे शौचालय और जल स्रोतों पर भी उसका कब्जा था। चारों तरफ से बंद था फार्महाउस ग्रामीणों के मुताबिक, जिस जगह अफीम की खेती हो रही थी वहां चारों ओर गेट लगाए गए थे। इससे आम लोगों का उस इलाके में जाना लगभग नामुमकिन था। इसी वजह से लंबे समय तक इतनी बड़ी खेती का किसी को पता नहीं चल पाया। लीज पर ली गई जमीन पर हो रही थी खेती पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस जमीन पर अफीम उगाई जा रही थी वह जमीन राजस्थान के जोधपुर निवासी आचल दास ने लीज पर ली थी। गिरफ्तार आरोपी विकास विश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वह करीब चार साल से गांव में रहकर ताम्रकर की लगभग 13 एकड़ जमीन पर खेती कर रहा था। मामले को लेकर बढ़ा विरोध अफीम खेती के खुलासे के बाद गांव में विरोध भी तेज हो गया है। ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कांग्रेस ने कहा है कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो 12 मार्च को प्रदेशभर में भाजपा जिला कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा।

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NDPS मामलों में सख्त फैसला, तीन आरोपियों को 10-10 साल की सजा

नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। रायपुर और गरियाबंद में दर्ज इन मामलों में आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाया गया। टिकरापारा क्षेत्र से 320 नशीली टैबलेट के साथ पकड़ा गया आरोपी पहला मामला रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। 23 दिसंबर 2023 को पुलिस को सूचना मिली थी कि बोरियाखुर्द शमशान घाट के पास एक युवक प्रतिबंधित नशीली दवाओं के साथ मौजूद है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शेख अजहर उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से पीले रंग के कैरी बैग में रखी स्पास ट्रैनकैन प्लस की 40 पत्तियां बरामद की गईं। प्रत्येक पत्ती में 8-8 टैबलेट थीं, इस तरह कुल 320 टैबलेट जब्त की गईं। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से तौलने पर इनका कुल वजन 163.2 ग्राम पाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाहों के बयान पेश किए गए। सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। मैनपुर में 22.4 किलो गांजे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार दूसरा मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 2 जून 2021 को पुलिस को सूचना मिली थी कि एनएच-130सी पर स्थित मां अंबे पेट्रोल पंप के पास दो व्यक्ति बैग में अवैध गांजा लेकर खड़े हैं। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और त्रिनाथ मेहर तथा इंद्रभूषण मेहर को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान दोनों के बैग से प्लास्टिक में पैक गांजा बरामद हुआ। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने पर त्रिनाथ मेहर के पास से 11 किलो 300 ग्राम और इंद्रभूषण मेहर के पास से 11 किलो 100 ग्राम गांजा मिला। इस तरह कुल 22 किलो 400 ग्राम गांजा जब्त किया गया। पुलिस ने जब्त गांजे का सैंपल तैयार कर जांच के लिए एफएसएल रायपुर भेजा और मामले में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद एनडीपीएस एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट: बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। पिछले लगभग पांच वर्षों से राज्य लगातार इस सूची के टॉप-10 राज्यों में बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कुल 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 बच्चों को पुलिस और प्रशासन ने खोज लिया है, जबकि 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राज्य के कुछ जिलों में बच्चों के गायब होने के मामले अधिक सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा इस सूची में पहले स्थान पर है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों का नाम शामिल है। लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 559 बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। बरामद किए गए बच्चों में सबसे अधिक संख्या जांजगीर-चांपा जिले की बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक है। कई बार उनके बच्चे परिवार से बिछड़ जाते हैं या बिना जानकारी दिए अन्य शहरों की ओर चले जाते हैं। इसके अलावा मानव तस्करी के गिरोह भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तस्कर बच्चों को बड़े शहरों में अधिक पैसे या अन्य लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों से पूछताछ में ऐसे मामलों का खुलासा भी हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। इनमें से 7,777 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जबकि बाकी बच्चों को खोज लिया गया है। वहीं कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर एवं नगर हवेली में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार लापता बच्चों में 14 से 17 वर्ष की आयु के किशोर-किशोरियों की संख्या अधिक है और इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा पाई गई है।

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दुर्ग में 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अफीम की अवैध खेती का खुलासा, भाजपा नेता विनायक ताम्रकार समेत तीन गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा नेता और पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष विनायक ताम्रकार सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। समोदा और झेनझरी गांव के बीच स्थित फार्महाउस से करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में उगाए गए अफीम के पौधे जब्त किए गए हैं। पुलिस जांच में खेत से करीब 14 लाख 30 हजार अफीम के पौधे बरामद हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार जब्त पौधों की कीमत लगभग 7.88 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह पूरा मामला जेवरा सिरसा पुलिस चौकी क्षेत्र का बताया जा रहा है। डिजिटल सर्वे में गेहूं और मक्का की खेती दिखाई गई जांच में सामने आया कि फार्महाउस के रिकॉर्ड में डिजिटल सर्वे के दौरान गेहूं और मक्का की खेती दर्ज कराई गई थी, लेकिन उन्हीं फसलों की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने खेती को छिपाने के लिए यह तरीका अपनाया था। सुरक्षा के लिए लगाए गए थे बाउंसर और गेट बताया जा रहा है कि फार्महाउस की सुरक्षा के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे और चारों तरफ गेट लगाए गए थे। इस कारण आम लोगों का फार्महाउस के अंदर जाना लगभग असंभव था। इसी वजह से गांव के लोगों को लंबे समय तक इस अवैध खेती की जानकारी नहीं हो पाई। राजस्थान से बुलाए गए थे मजदूर पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि खेती के काम के लिए राजस्थान के जयपुर क्षेत्र से मजदूर बुलाए गए थे। आरोपी विकास बिश्नोई और उसका भाई श्रवण बिश्नोई पहले यहां कपास की खेती करने आए थे, लेकिन बाद में अफीम की खेती शुरू कर दी गई। पूछताछ में विकास बिश्नोई ने बताया कि वह पिछले करीब चार साल से विनायक ताम्रकार के संरक्षण में इस काम में लगा हुआ था। फार्महाउस में मजदूरों के रहने के लिए मकान और अन्य सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई थी। दो आरोपी फरार, राजस्थान में तलाश कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में विनायक ताम्रकार, विकास बिश्नोई और फार्महाउस के मुंशी मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है। वहीं दो अन्य आरोपी आंचला राम और श्रवण बिश्नोई फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस की टीम राजस्थान भेजी गई है। जमीन के मालिकों से भी होगी पूछताछ अधिकारियों के अनुसार जिस जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी, वह मुधमति बाला और प्रीति बाला के नाम दर्ज है। पुलिस अब दोनों से भी पूछताछ करेगी और उनकी भूमिका की जांच की जाएगी। अगर जांच में उनकी संलिप्तता सामने आती है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों की भीड़ शनिवार को जब पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर कार्रवाई के लिए पहुंची, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण भी वहां इकट्ठा हो गए। कुछ लोगों ने फार्महाउस के अंदर जाने की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। राजनीति भी हुई तेज इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि अफीम की इस अवैध खेती से जुड़े सभी लोगों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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