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रायपुर समाचार: सेंट्रल जेल में कैदी ने की आत्महत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर। राजधानी रायपुर के सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जेल में बंद एक कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक कैदी की पहचान ओमप्रकाश के रूप में हुई है। वह अपने बैरक में फंदे पर लटका हुआ पाया गया। यह घटना जेल प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा कर रही है, क्योंकि इससे जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की खामियां उजागर हुई हैं। फिलहाल जेल प्रशासन और पुलिस घटना की जांच में जुटे हुए हैं। आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी रायपुर सेंट्रल जेल में आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। इसी साल जनवरी माह में एक अफ्रीकी ड्रग्स डीलर ने भी अपने सेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। वह वर्ष 2021 में गिरफ्तार किया गया था। सिर्फ आत्महत्या ही नहीं, नवंबर 2024 में जेल परिसर में फायरिंग की भी एक बड़ी घटना घटित हुई थी, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इन लगातार होती घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और जेल प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की गहन जांच कर रहे हैं और आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटे हैं।

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CG News: वक्फ अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के दबाव में केंद्र सरकार फिर बैकफुट पर, पहले भी देशद्रोह और 370 पर झुकी

वक्फ से पहले देशद्रोह, 370 पर भी सुप्रीम कोर्ट में झुक चुकी है सरकार केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। गुरुवार को हुई सुनवाई में जब सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे, ने “वक्फ बाय यूज” के संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाया, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि इन प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा और राज्यों को गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति की अनुमति नहीं दी जाएगी। मझौता (सितंबर 2023) 370 हटाने के मामले में जब कोर्ट ने पूछा कि क्या संसद को किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का अधिकार है, तब केंद्र ने आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जिससे कोर्ट ने संवैधानिक सवाल पर फैसला देने से परहेज किया। दिल्ली दंगे और साफूरा जरगर की रिहाई (जून 2020) दिल्ली दंगों में आरोपी साफूरा जरगर की जमानत पर केंद्र ने कोर्ट में मानवीय आधार पर विरोध न करने की बात कही, जो सरकार की रणनीतिक नरमी का संकेत था। न्यायिक दबाव में रणनीतिक नरमी इन सभी मामलों में स्पष्ट है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के उल्लंघन या अधिकारों के हनन की आशंका जताई, तो केंद्र सरकार ने संभावित प्रतिकूल फैसलों से बचने के लिए रणनीतिक रूप से अपने रुख में नरमी बरती। यह प्रवृत्ति जहां सरकार की कानूनी रणनीति को दर्शाती है, वहीं सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक निगरानी की शक्ति को भी रेखांकित करती है।

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बिरगांव के नागेश्वर नगर में दिल दहला देने वाली वारदात: युवक ने माँ की हत्या की, पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

रायपुर। बिरगांव के नागेश्वर नगर से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है। यहां एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपनी माँ की हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी और अपनी पत्नी को भी बेरहमी से घायल कर दिया। घटना 18 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे की है। बताया जा रहा है कि युवक ऑटो चलाता था और उसने घर पर पालतू कुत्ते खरीदने के लिए पैसे की मांग की थी। इस बात को लेकर घरवालों से कहासुनी हो गई। युवक नशे की हालत में था, और विवाद बढ़ने पर उसने गुस्से में आकर अपनी मां पर हथौड़े से हमला कर दिया, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद युवक ने अपनी पत्नी पर भी हमला किया। गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल उरकुरा के सिद्घि विनायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। घटना के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया है। पुलिस ने मृत महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी की तलाश में जुट गई है। पूरे मामले की जांच उरला पुलिस कर रही है। स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद डर और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का भरोसा दिलाया है।

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राजस्थान में बिजली महंगी होने की आशंका, डिस्कॉम ने SERC के सामने पेश की टैरिफ याचिका

प्रमुख बदलाव और प्रभाव: उपभोक्ताओं पर प्रभाव:घरेलू उपभोक्ता: उद्योगों के लिए बड़े बदलाव: कृषि उपभोक्ता: पीक आवर्स प्राइसिंग:10 kW से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए: आगे की प्रक्रिया:SERC ने जनता से आपत्तियां/सुझाव आमंत्रित किए हैं। डिस्कॉम का दावा है कि यह बदलाव अंततः अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगा, क्योंकि: यह प्रस्ताव डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने और समय-आधारित टैरिफ के माध्यम से बिजली की खपत को नियंत्रित करने का प्रयास है। वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है।

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धूल भरी आंधी ने दिल्ली-एनसीआर को घेरा, यातायात बाधित…….

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार दूसरे दिन धूल भरी आंधी ने दस्तक दी, जिससे सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हुआ। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कुछ घंटों के लिए दिल्ली और आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया था। मौसम का अचानक बदलाव प्रभाव धूल भरी आंधी ने दिल्लीवासियों को गर्मी से राहत दिलाई, लेकिन इसने यातायात को भी प्रभावित किया। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है।

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WhatsApp और UPI सेवाओं में बड़ा व्यवधान, उपयोगकर्ताओं को परेशानी

गुरुवार शाम को दुनिया भर के लाखों व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं ने मैसेज भेजने में समस्याओं का सामना किया। डाउनडिटेक्टर वेबसाइट के अनुसार, शाम लगभग 5:30 बजे 460 से अधिक समस्याओं की रिपोर्ट दर्ज की गई, जिनमें से 81% मामलों में संदेश भेजने में दिक्कतें आईं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने बताया कि वे अपनी स्टेटस अपडेट नहीं कर पा रहे थे या स्टोरीज नहीं जोड़ पा रहे थे, जबकि कुछ को तो ऐप में लॉग इन करने में भी परेशानी हुई। व्हाट्सएप की तरफ से अभी तक इस व्यवधान पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इससे पहले 28 फरवरी को भी व्हाट्सएप की सेवाएं प्रभावित हुई थीं, जब दुनिया भर में 5,000 से अधिक समस्याओं की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। भारत में 53 करोड़ से अधिक लोग व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं, जबकि विश्व स्तर पर इसके 3 अरब से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं। UPI सेवाओं में भी गड़बड़ीइसी दिन, व्हाट्सएप के अलावा, भारत में UPI प्लेटफॉर्म्स पर भी तकनीकी समस्याएं आईं, जिससे कई उपयोगकर्ताओं को असुविधा हुई। यह पिछले 30 दिनों में UPI सेवाओं का तीसरा बड़ा व्यवधान था। एनपीसीआई ने ट्विटर पर बताया कि “कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण UPI लेनदेन में आंशिक गिरावट आई थी”। गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे डिजिटल भुगतान ऐप्स पर लेनदेन प्रभावित हुए, जिससे व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों को परेशानी हुई। हालांकि, शाम 5 बजे के बाद सेवाएं सामान्य हो गईं। इससे पहले 2 अप्रैल को भी UPI सेवाएं प्रभावित हुई थीं, जिससे सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं ने अपनी निराशा जाहिर की थी।

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बीजेपी नेता ने ममता बनर्जी को ‘आधुनिक जिन्ना’ बताया, मुर्शिदाबाद हिंसा पर तीखा हमला

भारतीय जनता पार्टी के नेता तरुण चुघ ने वक्फ बिल को लेकर मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना से की। चुघ ने आरोप लगाया कि “ममता बनर्जी आज एक आधुनिक जिन्ना के रूप में स्थापित हो चुकी हैं और उनकी पार्टी मुस्लिम लीग जैसा काम कर रही है। जिन्ना ने जो किया वही आज ममता कर रही हैं। 1940 के दशक की मुस्लिम लीग की कार्रवाइयों की याद दिलाती हैं आज की घटनाएं।” उन्होंने हिंसा में तीन लोगों की मौत पर ममता की चुप्पी को “शर्मनाक, निंदनीय और दर्दनाक” बताते हुए कहा कि “तृणमूल सरकार अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के नाम पर हिंदुओं की सुरक्षा से समझौता कर रही है।” सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: बीजेपी प्रवक्ता शेजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि “बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ राज्य प्रायोजित हिंसा हो रही है। मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, भगवा झंडे उतारे जा रहे हैं और हिंदुओं को घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद की इस धरती पर ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है।” इस बीच, ममता बनर्जी ने शांति का आह्वान करते हुए आश्वासन दिया कि विवादास्पद कानून को राज्य में लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई की जरूरत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आगामी चुनावों को देखते हुए बढ़ते ध्रुवीकरण को दर्शाता है। बीजेपी तृणमूल को हिंदू विरोधी साबित करने में जुटी है, जबकि शासक दल इन आरोपों को निराशाजनक राजनीतिक हथकंडा बता रहा है।

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विराट कोहली का मैच के दौरान हार्टबीट चेक, फैंस हुए परेशान

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के बीच जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले गए मैच के दौरान विराट कोहली ने एक अजीबोगरीब हरकत की, जिससे उनके फैंस चिंतित हो गए। 15वें ओवर के दौरान जब कोहली ने एक सिंगल लिया, तो उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन से अपनी हार्टबीट चेक करने को कहा। स्टंप माइक ने कोहली के ये शब्द रिकॉर्ड किए – “हार्टबीट चेक करो”। क्या कोहली को सांस लेने में तकलीफ हुई?ऐसा माना जा रहा है कि कोहली को दौड़ते समय सांस लेने में परेशानी हो रही थी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने शानदार 45 गेंदों पर 62 रनों की नाबाद पारी खेली और RCB को 9 विकेट से जीत दिलाई। इस पारी के साथ ही कोहली ने T20 क्रिकेट में 100 अर्धशतक पूरे करने का कारनामा कर दिया, जो इस फॉर्मेट में केवल डेविड वॉर्नर ही कर पाए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियोमैच के दौरान का यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें #KohliHealth ट्रेंड कर रहा है। फैंस कोहली की सेहत को लेकर चिंता जता रहे हैं। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मैच के बीच में इस तरह का हार्टबीट चेक कराना बेहद असामान्य है, खासकर जब यह ऑपोजिशन के खिलाड़ी से करवाया जाए। आगे क्या?IPL 2025 का सीजन अभी शुरू ही हुआ है और कोहली की फिटनेस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। RCB की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फैंस को उम्मीद है कि उनका यह चहेता खिलाड़ी जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो जाएगा और टूर्नामेंट में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखेगा।

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रायपुर में नगर निगम की लापरवाही से बच्चे की दर्दनाक मौत, गड्ढे में गिरने से हादसा

रायपुर में नगर निगम की लापरवाही के चलते दो अलग-अलग हादसों में चार बच्चे गहरे गड्ढों में गिर गए, जिसमें एक मासूम की जान चली गई। पहला मामला शीतला मंदिर के पास सामने आया, जहां एक बच्चा खेलते समय निगम द्वारा खोदे गए खुले गड्ढे में गिर गया। सौभाग्य से एक सजग राहगीर ने उसे बचा लिया। वहीं, दूसरी घटना गुलमोहर पार्क कॉलोनी में हुई, जहां सीवरेज टैंक के लिए बनाए गए गड्ढे में तीन बच्चे डूब गए। हालांकि दो बच्चों को बचा लिया गया, लेकिन दिव्यांश नामक एक बच्चे की मौत हो गई। स्थानीय लोगों में गुस्साआक्रोशित निवासियों का आरोप है कि निगम ने गड्ढों को न तो ढका और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया। शीतला मंदिर क्षेत्र में यह गड्ढा गंदे पानी की शिकायत के बाद खोदा गया था, लेकिन महीनों से खुला छोड़ दिया गया था। सीसीटीवी फुटेज में हादसे की पूरी घटना कैद हो गई है। लोगों का कहना है कि वे पहले से ही निगम को इस खतरनाक गड्ढे को बंद करने के लिए कह रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिवार की तकलीफदिव्यांश के परिजन सदमे में हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। निगम ने अब गड्ढों को ढकने का काम शुरू कर दिया है और जांच का वादा किया है, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सिर्फ गड्ढा ढकने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह घटना नगर निगम की कामकाजी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और शहर में सार्वजनिक सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

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भिलाई में बुलडोजर कार्रवाई पर बवाल, 60 से ज्यादा घर जमींदोज

भिलाई, छत्तीसगढ़: भिलाई के खुर्सीपार क्षेत्र स्थित गौतम नगर में सोमवार सुबह नगर निगम की ओर से किए गए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने तूल पकड़ लिया है। सीवरेज लाइन निर्माण के तहत निगम की टीम ने 60 से अधिक मकानों पर बुलडोजर चला दिया, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। मकानों के टूटने से प्रभावित लोगों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले न तो कोई मुनादी की गई और न ही उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई। अचानक सुबह 6 बजे निगम की टीम पहुंची और मकान तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इससे कई लोग बेघर हो गए और अपना सामान तक नहीं निकाल सके। विधायक देवेंद्र यादव का विरोध: घटना की जानकारी मिलते ही भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव मौके पर पहुंचे और निगम अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “ये गुंडागर्दी नहीं चलेगी। लोगों को समय दिए बिना, बिना मुनादी कराए, अचानक मकान तोड़ना अमानवीय है। पहले प्रभावितों को वैकल्पिक व्यवस्था मिलनी चाहिए, फिर ही कोई कार्रवाई होनी चाहिए।” विधायक ने कहा कि खुद कलेक्टर ने उन्हें जानकारी दी है कि केवल 4-5 मकान ही पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में 60 से अधिक घर तोड़ना अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोगों को अन्यत्र शिफ्ट किया जा रहा है तो उन्हें अलॉटमेंट के कागज क्यों नहीं दिए गए? जनता का समर्थन: स्थानीय लोगों ने भी विधायक का समर्थन करते हुए बताया कि वे स्थानांतरित होने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कोई विकल्प नहीं दिया। लोगों का कहना है कि उन्हें इतना भी समय नहीं दिया गया कि वे अपने घरों से सामान निकाल सकें। निगम की सफाई: नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सीवरेज लाइन प्रोजेक्ट के चलते ये कार्रवाई जरूरी थी और इसकी पहले से योजना बनाई गई थी। हालांकि, भारी विरोध के चलते फिलहाल आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की संभावना जताई जा रही है। स्थिति तनावपूर्ण: घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। विधायक ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रभावित लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक एक भी मकान नहीं टूटेगा। यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, और अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले का समाधान किस तरह से किया जाता है।

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