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उत्तरी क्षेत्रों में बारिश-गरज की संभावना, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में नमी बनी रहेगी

महाराष्ट्र निर्माण कार्यों में एम-सैंड को बढ़ावा देगा, प्राकृतिक रेत की कमी को दूर करने के लिए तीन साल में अनिवार्य किया जाएगा मुंबई: प्राकृतिक या नदी रेत की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कृत्रिम रेत (एम-सैंड) को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। अगले तीन वर्षों में राज्य सरकार द्वारा किए जाने वाले सभी निर्माण कार्यों में एम-सैंड के उपयोग को अनिवार्य बनाकर इसे प्रोत्साहित किया जाएगा। इस नीति को अगले सप्ताह होने वाली राज्य कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। एम-सैंड एक कृत्रिम रेत है जो कठोर चट्टानों (आमतौर पर ग्रेनाइट) को कुचलकर बनाई जाती है। इसे निर्माण कार्यों में नदी रेत के स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पुष्टि की, “प्राकृतिक रेत के पर्यावरणीय महत्व और इसकी कमी को देखते हुए कृत्रिम रेत को बढ़ावा दिया जाएगा। शुरुआत में विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी निर्माण परियोजनाओं में 20% कृत्रिम रेत के उपयोग को अनिवार्य किया जाएगा। अगले तीन वर्षों में इन सभी निर्माण कार्यों में कृत्रिम रेत का उपयोग अनिवार्य हो जाएगा।” उन्होंने बताया कि सरकार प्रत्येक जिले में 50 से 60 क्रशर इकाइयों की स्थापना की अनुमति देगी, जो एम-सैंड का उत्पादन करेंगी। इन इकाइयों को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सभी लाभ प्रदान किए जाएंगे। बावनकुले ने स्पष्ट किया कि सरकार पत्थर खदानों को हटाने की योजना नहीं बना रही है। उन्होंने समझाया, “यदि हम एक चट्टानी इलाके को खोदकर गहरा करते हैं, तो एक तालाब बनाया जा सकता है और साथ ही, निकले हुए पत्थरों को क्रशर की मदद से एम-सैंड बनाने में उपयोग किया जा सकता है।” राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह नीति न केवल रेत की कमी को दूर करने में मदद करेगी, बल्कि रेत माफिया के खतरे को भी कम करेगी, जो अवैध रेत खनन में शामिल है और पर्यावरण, जल सुरक्षा तथा उन लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है जो उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। यह माफिया अक्सर राजनेताओं, प्रशासन और रेत खननकर्ताओं के गठजोड़ के माध्यम से काम करती है। यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार रेत नीति ला रही है। पिछले चार वर्षों में उसने दो रेत नीतियां पेश की थीं, लेकिन वे वांछित परिणाम नहीं दे पाईं। मंगलवार को, उसने रेत खनन के लिए तीसरी नीति पेश की, जो नदी तल की रेत के लिए जिले के प्रत्येक उप-विभागीय अधिकारी के क्षेत्राधिकार में सभी रेत समूहों के लिए एकल ई-नीलामी की सुविधा प्रदान करती है। यह ई-नीलामी दो वर्षों के लिए होगी। इसी तरह, ज्वारीय क्षेत्रों में रेत समूहों के लिए, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) द्वारा निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार ई-नीलामी प्रक्रियाएं आयोजित की जाएंगी। इन समूहों के लिए नीलामी की अवधि तीन वर्ष होगी।

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केपी, पंजाब और उत्तरी इलाकों में बारिश और गरज के आसार, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम बना रहेगा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (PMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में गर्म और शुष्क मौसम रहने का अनुमान जताया है, हालांकि उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। मौसम का विवरण तापमान का हाल केपी के प्रभावित जिले चित्राल, दीर, स्वात, शांगला, बुनेर, मलाकंद, बाजौर, एबटाबाद, मानसेहरा, हरिपुर, बट्टाग्राम, कोहिस्तान, तोरघर, कुर्रम, खैबर, ओरकजई, मोहमंड, मर्दन और स्वाबी जिलों में बारिश के साथ गरज और तेज हवाओं की संभावना है। गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर इन क्षेत्रों में भी इसी तरह का अस्थिर मौसम रहने का अनुमान है, जबकि सिंध में भीषण गर्मी जारी रहेगी। मौसम विभाग ने उत्तरी क्षेत्रों के निवासियों से अचानक मौसम परिवर्तन, तेज हवाओं और संभावित ओलावृष्टि के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने किया मौन विरोध, गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग

रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और हाल ही में हुई दर्दनाक घटनाओं के विरोध में मौन प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाया और गृहमंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। मासूम बच्ची को श्रद्धांजलि, काले झंडे से विरोध राजधानी के गांधी मैदान स्थित कांग्रेस भवन के सामने कार्यकर्ताओं ने दुर्ग जिले में एक 6 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के विरोध में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शनकारियों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर सरकार को जिम्मेदार ठहराया। “भाजपा सरकार में बिगड़ी कानून-व्यवस्था” जिला कांग्रेस के शहर अध्यक्ष गिरीश दुबे ने कहा, “भाजपा सरकार आने के बाद से राज्य में अपराध बढ़ते जा रहे हैं। दुर्ग की मासूम बच्ची की हत्या, गरियाबंद में आदिवासी युवक की पुलिसिया प्रताड़ना और फिंगेश्वर में नाबालिग के साथ यातनाएं—ये सब नशा माफिया और अराजक तत्वों के बढ़ते प्रभाव का नतीजा हैं। अगर गृहमंत्री पुलिस पर नियंत्रण नहीं रख सकते, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।” बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी इस प्रदर्शन में प्रमुख कांग्रेस नेताओं सहित उधोराम वर्मा, मदन तालेड़ा, नीलिमा सिंह, मोहसिन खान और देवेंद्र यादव जैसे कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधारने में कोताही बरती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह प्रदर्शन राज्य में बढ़ते अपराधों और पुलिसिया ज्यादतियों के खिलाफ कांग्रेस की बढ़ती आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।

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छत्तीसगढ़ के गाँव का नाम बदलने की मांग: “हम सुंदर हैं, ‘चुड़ैल’ नहीं…”

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के चुड़ैलझरिया गाँव के लोगों ने अपने गाँव के नाम से होने वाली शर्मिंदगी और मज़ाक को अब सहन करने से इनकार कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके गाँव का नाम बदलकर सुंदरझरिया कर दिया जाए। क्यों बदलना चाहते हैं नाम? पत्थलगाँव तहसील के अंतर्गत आने वाले इस गाँव के नाम में “चुड़ैल” शब्द होने के कारण लोगों को अक्सर ताने सुनने पड़ते हैं। विशेषकर गाँव की बेटियों को शादी के बाद दूसरे गाँवों में “चुड़ैलझरिया वाली” कहकर चिढ़ाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह नाम उनकी पहचान को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। कैसे पड़ा यह डरावना नाम? स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कई साल पहले इस इलाके के जंगलों से अजीबोगरीब आवाज़ें आती थीं, जिससे लोगों को लगा कि यहाँ चुड़ैलें रहती हैं। इसी अंधविश्वास के चलते गाँव का नाम चुड़ैलझरिया पड़ गया। हालाँकि, अब गाँव वाले इस पुरानी मानसिकता को छोड़कर एक नई पहचान चाहते हैं। “सुंदरझरिया” बनने की चाह गाँव के लोगों का कहना है कि उनका गाँव प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, लेकिन उसका नाम उनकी छवि को धूमिल करता है। इसलिए वे चाहते हैं कि अब उनके गाँव को एक सुंदर और गौरवपूर्ण नाम मिले। यह मामला दिखाता है कि किसी स्थान का नाम वहाँ के निवासियों के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को कैसे प्रभावित करता है। ग्रामीणों की यह मांग सिर्फ एक नाम बदलने तक ही सीमित नहीं, बल्कि अपनी पहचान को नए सिरे से गढ़ने की एक कोशिश है।

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गरियाबंद: पंचायत चुनाव हारने पर महिलाओं को गाली देने वाले युवक को महिलाओं ने ठोकर पीटकर सबक सिखाया

गरियाबंद (छत्तीसगढ़): इंदागांव थाना क्षेत्र के धुरुवागुड़ी गांव में एक युवक को महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से जमकर पीटा। यह घटना तब हुई जब वह पंचायत चुनाव हारने के बाद विजयी महिला प्रत्याशी और उनके समर्थकों को लगातार गाली-गलौज कर रहा था। घटना की जानकारी: पुलिस की कार्रवाई: क्या कहती है पुलिस? इंदागांव थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार ने कहा कि मामला सुलझा लिया गया है, लेकिन युवक को चेतावनी दी गई है कि अगर वह फिर किसी को परेशान करेगा, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निष्कर्ष: इस घटना से साफ है कि महिलाएँ अब गाली-गलौज और अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगी। समाज में ऐसे लोगों के खिलाफ एकजुट होकर सख्त जवाब दिया जाएगा।

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जांजगीर-चांपा जिले के जांजगीर-नैला नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। 

जांजगीर-चांपा जिले के जांजगीर-नैला नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। आठ साल पहले 35 करोड़ रुपये की जल आपूर्ति योजना बनाई गई थी, लेकिन आज भी नगरवासियों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मुख्य बिंदु: योजना की विफलता:हसदेव नदी से पानी लाने के लिए बनाई गई योजना दो बार विफल हो चुकी है। पहली बार पाइपलाइन फटने के कारण और दूसरी बार ठेकेदार के काम छोड़कर भाग जाने से। विधायक ब्यास कश्यप ने इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। नगरवासियों की पीड़ा:स्थानीय निवासी बताते हैं कि उन्हें प्रतिदिन पानी के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कई परिवारों को निजी टैंकर से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है। नगर पालिका प्रशासन ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया:विधायक ब्यास कश्यप ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि योजना के पैसों का सही उपयोग नहीं हुआ और भ्रष्टाचार के कारण जनता को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साली से दुष्कर्म के मामले में जीजा को 20 साल की सजा सुनाई

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जहां 13 साल की नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म करने वाले जीजा (मौसी का दामाद) को 20 साल की कैद की सजा दी गई है। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन पीड़िता और गवाहों के विश्वसनीय बयान के आधार पर यह सजा सुनाई गई। मामले की पृष्ठभूमि: कोर्ट का निर्णय: महत्वपूर्ण तथ्य: ✔ मेडिकल रिपोर्ट नकारात्मक होने के बावजूद पीड़िता के बयान पर भरोसा।✔ POCSO एक्ट के तहत कड़ी सजा, जो नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में दी जाती है।✔ हाईकोर्ट ने कहा – “नाबालिग पीड़िता का बयान ही सबसे मजबूत सबूत है।” निष्कर्ष: यह फैसला न्यायिक प्रणाली में पीड़िता के बयान के महत्व को रेखांकित करता है, खासकर बाल यौन शोषण के मामलों में। इससे POCSO कानून के तहत सख्त कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है।

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बिलासपुर: ज्वैलरी दुकान से लाखों की चोरी करने वाले गैंग का पर्दाफाश, 3 बहनों समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर पुलिस ने एक सराफा दुकान से 23 तोला सोना, 1.6 किलो चांदी और 4.47 लाख रुपये नकद चोरी करने वाले गैंग को धर दबोचा है। आरोपियों में तीन बहनें और एक पुरुष शामिल हैं, जो पिछले 2-3 साल से खरीदारी के बहाने दुकान में आकर चोरी कर रहे थे। मामले का विवरण: चोरी की तरीका: आरोपी महिलाएं खरीदारी का नाटक करती थीं और मौका मिलते ही जेवर अपने साथियों को पकड़ा देती थीं। पुलिस ने मुखबिर की मदद से उन्हें पकड़ा और सभी ने अपने अपराध कबूल किए। अगले कदम: सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस जांच जारी रखते हुए अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।

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छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस ने मंगलवार को मिशन अमृत 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए परियोजना में हुई देरी और लापरवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। 

छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस ने मंगलवार को मिशन अमृत 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए परियोजना में हुई देरी और लापरवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। राजधानी रायपुर में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाते हुए मानसून से पहले सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए। इस अवसर पर सचिव ने बताया कि मिशन अमृत 2.0 के तहत प्रदेश के 36 नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति से संबंधित महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 29 को कार्यादेश जारी किया जा चुका है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्य की गति निराशाजनक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होगी, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा। डॉ. बसवराजु ने राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से मैदानी निरीक्षण करके कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति सुनिश्चित करें। साथ ही, उन्होंने निर्माण एजेंसियों को कुशल कार्यबल की तैनाती, तकनीकी डिजाइनों और सर्वेक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना को मार्च 2026 तक पूरा करना है और यह केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है। बैठक में यह भी उजागर हुआ कि जनवरी 2024 से अब तक परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं, फिर भी कार्य प्रगति संतोषजनक नहीं है। सचिव ने इस संदर्भ में सभी हितधारकों से अधिक गंभीरता और जवाबदेही के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आगामी समीक्षा बैठक में भौतिक प्रगति और समयसीमा की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस कार्यक्रम में नोडल अधिकारियों, अभियंताओं और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस ने मंगलवार को मिशन अमृत 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए परियोजना में हुई देरी और लापरवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया।  Read Post »

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कन्या भोज के लिए गई 6 साल की बच्ची का मर्डर हुआ है।

बच्ची पर सेक्सुअल असॉल्ट, प्राइवेट पार्ट को सिगरेट से दागा, लाइटर से जलाया, फिर इलेक्ट्रिक शॉक देकर मारा है। इसके बाद लाश को कार की डिक्की में छिपाई। मिली जानकारी के मुताबिक कार की डिक्की में बच्ची के हाथ अकड़े हुए थे। चेहरे पर खरोंच के निशान हैं। होंठ और नाक से खून निकल रहा था। परिजन ने रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया है। वारदात के बाद भीड़ उग्र हो गई। संदेही युवक के घर और कार में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। मृत बच्ची की मां ने बताया कि मेरी बेटी के प्राइवेट पार्ट को दागा है। दोनों तरफ से शरीर के हिस्से को फाड़ दिया है। ऐसा कौन करता है। जानवरों की तरह नोचा है। राक्षसों के जैसे मारा है। आरोपियों को फांसी पर लटकाया जाए। वहीं पुलिस पर मृत बच्ची के चाचा कि बेटी को भी पीटने का आरोप है। बच्ची कह रही है कि मेरे को पुलिस अंकल पीटे हैं। बोल रहे थे तेरे को यहीं सुला देंगे। बच्ची रो-रोकर पुलिसकर्मियों की पिटाई की बात बता रही है। बताया जा रहा है कि केस को दबाने के लिए राजनीतिक दबाव की बात भी सामने आ रही है। अब जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, बच्ची रविवार सुबह 9 बजे बच्ची पास के मंदिर में अन्य बच्चियों के साथ कन्या भोज के लिए गई थी। जब वह घर नहीं लौटी तो परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। दिनभर तलाश के बावजूद मासूम का पता नहीं चला। परिजन लगातार बच्ची की तलाश कर रहे थे। इसी बीच संदेही बादल (28) ने बताया कि बच्ची की लाश कार की डिक्की में है। परिजन मौके पर पहुंचकर लाश को डिक्की से बाहर निकाला। इस दौरान बच्ची खून से लहूलुहान मिली। बच्ची बहुत बुरी हालत में कार के अंदर सीट के नीचे पड़ी थी, उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान थे, चमड़ी उधड़ी हुई थी। परिजन बच्ची को लेकर दुर्ग जिला अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने शुरुआती जांच में बच्ची की मौत इलेक्ट्रिक शॉक लगने से होना बताया है। संदेही बादल के घर भीड़ ने लगाई आग वारदात के बाद परिजनों ने देर रात संदेही बादल के घर जाकर आग लगा दी। बड़ी मुश्किल में घर के लोगों ने अपनी जान बचाई। आग लगने से घर के बाहर खड़ी बाइक पूरी जल गई। संदेही के परिजन घर में ताला लगाकर दूसरी जगह चले गए थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं बच्ची की मां ने बताया कि उसकी बच्ची रामनवमी पर सुबह-सुबह हंसते हुए कन्या भोज खाने गई थी, लेकिन लाश मिली। आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग रही है। संदेहियों का ब्लड और सीमन टेस्ट होगा पुलिस ने बादल समेत 5 संदेहियों को हिरासत में लिया था। इनमें बच्ची के करीबी भी बताए जा रहे हैं। इसके चलते सभी के नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। हालांकि इसके पीछे राजनीतिक दबाव की भी बात वहां के लोग कर रहे हैं। वहीं, संदेही बादल के पिता और दादा को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। इसके अलावा बाकी आरोपियों के ब्लड और सीमन टेस्ट के लिए अस्पताल ले जाया गया है

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