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महवश अमु: रेडियो जॉकी से लेकर लेखिका तक, महिलाओं के सशक्तिकरण की आवाज़

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में युजवेंद्र चहल के साथ वायरल तस्वीरों से लेकर, सोशल मीडिया और किताबों तक, महवश ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। महवश अमु: रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर और लेखिका की सफलता की कहानी महवश अमु, जिनका नाम आजकल हर जगह सुर्खियों में है, एक प्रसिद्ध रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर, होस्ट और लेखिका हैं। दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली महवश का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उनकी शिक्षा से लेकर करियर तक, हर मोड़ पर उन्होंने खुद को साबित किया है। इस विश्वविद्यालय से शाहरुख खान, बरखा दत्त और कबीर खान जैसे मशहूर व्यक्तित्व भी पढ़ चुके हैं। 9 मार्च को, महवश को क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल मैच में देखा गया, जिसके बाद उनकी और चहल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई है, और फैंस का उत्साह चरम पर है। महवश ने 2019 से 2021 तक रेडियो मिर्ची 98.3 एफएम के साथ रेडियो जॉकी के रूप में काम किया, जहां उनकी प्रैंक कॉल्स और रेडियो शो श्रोताओं के बीच बेहद पॉपुलर रहे। सोशल मीडिया पर भी उनकी एक मजबूत पहचान बन चुकी है, खासकर इंस्टाग्राम पर, जहां उनके 1.6 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। महवश ने अपनी लेखनी से भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने दो किताबें लिखी हैं – “Wandering Souls” और “The Bleeding Hearts”, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर आधारित हैं। इसके अलावा, उन्हें बिग बॉस 14, बॉलीवुड फिल्मों और नेटफ्लिक्स सीरीज़ से भी ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक बदलाव के प्रति अपने समर्पण को प्राथमिकता दी और इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया। महवश सोशल मीडिया का उपयोग समाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए भी करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर और अस्पताल के बिस्तरों की उपलब्धता के बारे में जानकारी साझा की, जिससे उन्हें समाज में एक मजबूत आवाज़ के रूप में पहचाना गया। वित्तीय दृष्टिकोण से भी महवश का करियर शानदार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 35 लाख रुपये है, और उनकी मासिक आय 70,000 से 80,000 रुपये के बीच है। उनकी वार्षिक आय लगभग 8 से 9 लाख रुपये बताई जाती है। महवश अमु न केवल एक स्टार रेडियो जॉकी और लेखिका हैं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा भी हैं, जिन्होंने हमेशा समाज को बेहतर बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। उनके जीवन और कार्यों से हमें सिखने को मिलता है कि सफलता सिर्फ करियर तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी होती है।

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दुबई से भारत लाने पर गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी: जानें कितना गोल्ड बिना कस्टम ड्यूटी के लाया जा सकता है

दुबई से भारत आने वाले यात्रियों के लिए गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी की सीमाएं, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग नियम! दुबई से भारत आने वाले भारतीय यात्रियों के लिए गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी की सीमा में काफी भिन्नताएं हैं। यह नियम यात्रियों के लिंग, उम्र और यात्रा की अवधि के आधार पर तय होते हैं। भारत में गोल्ड की बढ़ती मांग और दुबई में इसे सस्ते में मिलने के कारण, भारतीय यात्रियों के लिए यह जानकारी बेहद अहम है। दुबई से भारत लाने पर गोल्ड की सीमा:केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अनुसार, भारतीय यात्री दुबई से 1 किलोग्राम तक गोल्ड बिना कस्टम ड्यूटी के ला सकते हैं, यदि उन्होंने वहां 6 महीने से अधिक समय तक ठहराव किया हो। गोल्ड की यह सीमा मुख्य रूप से गोल्ड की मुद्रा के रूप में होती है, जैसे गोल्ड बार और गोल्ड सिक्के। इसके अलावा, निर्धारित सीमा से अधिक गोल्ड लाने पर यात्री को अपनी “ड्यूटेबल” गोल्ड की घोषणा करनी होती है और लाल चैनल से कस्टम अधिकारियों को इसे दिखाना होता है। कस्टम ड्यूटी के बिना गोल्ड की सीमा: कस्टम ड्यूटी की दर:यदि गोल्ड की सीमा से अधिक गोल्ड लाया जाता है, तो कस्टम ड्यूटी का शुल्क लागू होता है। गोल्ड लाने पर दस्तावेजों की आवश्यकता:कस्टम अधिकारियों द्वारा गोल्ड के सत्यापन के लिए, यात्रियों को सही दस्तावेज़ प्रदान करने होंगे जो यह प्रमाणित करें कि गोल्ड वैध रूप से खरीदी गई है। बच्चों को उनके माता-पिता के साथ रिश्ते का पहचान पत्र भी दिखाना होगा।

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