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पाकिस्तान देगा मसूद अजहर को 14 करोड़ रुपये, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारे गए परिजनों के नाम पर हर्जाना!

भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार उसे 14 करोड़ रुपये की बड़ी राशि देने वाली है। यह रकम भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारे गए मसूद के परिजनों की मौत के हर्जाने के तौर पर दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य अड्डे बहावलपुर में कार्रवाई की थी, जिसमें मसूद अजहर के परिवार के करीब 14 सदस्य मारे गए थे। अब पाकिस्तान सरकार हर मृतक के नाम पर 1 करोड़ रुपये के हिसाब से कुल 14 करोड़ रुपये का मुआवजा देने जा रही है। हालांकि पाकिस्तान अक्सर ये दावा करता है कि उसे मसूद अजहर की लोकेशन की जानकारी नहीं है, लेकिन इस मुआवजे से साफ है कि मसूद पाकिस्तान में ही मौजूद है और वहां की सरकार उसे संरक्षण दे रही है। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी हुई है क्योंकि यह आशंका जताई जा रही है कि मसूद इस राशि का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को फिर से खड़ा करने, हथियार जुटाने और नए आतंकियों की भर्ती व ट्रेनिंग में कर सकता है। पाकिस्तान सरकार के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकने और आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने के रूप में देखा जा रहा है।

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शामली का युवक निकला पाकिस्तानी जासूस, सुरक्षा एजेंसियों को मिली बड़ी सफलता

हरियाणा के पानीपत में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नौमान इलाही नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जो पाकिस्तान को भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भेज रहा था। गिरफ्तार किया गया युवक उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना कस्बे के बेगमपुरा इलाके का रहने वाला है और पानीपत की एक फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहा था। सूत्रों के अनुसार, नौमान पाकिस्तान के आतंकी इकबाल के संपर्क में था और लगातार सेना की गतिविधियों और अन्य खुफिया सूचनाओं को साझा कर रहा था। पुलिस ने उसे मोबाइल नंबर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के बाद हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि नौमान अपनी बहन के साथ पानीपत की हॉली कॉलोनी में रह रहा था। उसकी बहन की शादी पानीपत में ही हुई है। इस कार्रवाई को “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद की गई सतर्कता का नतीजा बताया जा रहा है। 6-7 मई की रात भारत द्वारा पाकिस्तान में किए गए इस ऑपरेशन के बाद से एजेंसियां लगातार संभावित खतरों और संदिग्ध लोगों की निगरानी कर रही थीं। इसी दौरान नौमान के फोन से पाकिस्तान में संपर्क के प्रमाण मिले। हरियाणा के एडीजी (क्राइम) कुलदीप यादव ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह लंबे समय से पाकिस्तान के एक शख्स के निर्देशों पर काम कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। फिलहाल आरोपी से सीआईए यूनिट गहन पूछताछ कर रही है और यह भी जांचा जा रहा है कि उसने किन सरकारी संस्थानों या सुरक्षा स्थलों की जानकारी लीक की है। शुरुआती जांच से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि वह किसी बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मंत्री विजय शाह पर शाम 6 बजे तक एफआईआर दर्ज करने के निर्देश, कर्नल सोफिया पर की गई टिप्पणी बनी मुसीबत

मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी अब उनके लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार को शाम 6 बजे तक उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने चार घंटे के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट का यह फैसला उस समय आया है जब देशभर में मंत्री के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इंदौर के समीप महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने पाकिस्तान के खिलाफ बोलते-बोलते आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कर्नल सोफिया के संदर्भ में विवादित टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने कहा था कि “हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़ने वालों को हमने उनकी ही बहन से बदला दिलवाया”, जो कि न सिर्फ असंवेदनशील थी, बल्कि सामाजिक और सैन्य मर्यादाओं के भी खिलाफ मानी गई। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर आलोचना का तूफान आ गया। चौतरफा घिरने के बाद मंत्री शाह ने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए सफाई दी कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। बावजूद इसके, बीजेपी को मामले को संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद विजय शाह से स्पष्टीकरण मांगा, वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने परिवार से मिलकर क्षमा याचना भी की। पार्टी के पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह खुद कर्नल सोफिया के छतरपुर स्थित निवास पहुंचे और परिजनों से माफी मांगी। कांग्रेस इस मुद्दे पर हमलावर है और विजय शाह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग कर रही है। हाईकोर्ट का यह कड़ा रुख इस मामले में सरकार पर दबाव और बढ़ा सकता है।

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तुर्की की पोल खुली: पाकिस्तान को भारत पर हमले में दी थी बड़ी मदद, एयरस्ट्राइक में मारे गए तुर्की ऑपरेटर्स

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस एयरस्ट्राइक में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। जवाबी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को ड्रोन्स और मिसाइलों से निशाना बनाया, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए तुर्की से मदद ली थी। सूत्रों के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन उपलब्ध कराए और उन्हें ऑपरेट करने के लिए अपने सैन्य विशेषज्ञ भी भेजे। ड्रोन अटैक की योजना और क्रियान्वयन में तुर्की के सैन्य सलाहकारों की सीधी भागीदारी थी। पाकिस्तानी कार्रवाई से पहले तुर्की का एक युद्धपोत कराची बंदरगाह पर भी पहुंचा था, जिसे लेकर पाक मीडिया ने दावा किया कि उसमें हथियार थे। हालांकि, तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इसे झूठा बताया था। अब ताजा रिपोर्ट्स से यह पुष्टि हो गई है कि तुर्की ने पाकिस्तान को हथियार और सैन्य सहायता प्रदान की थी। भारत की जवाबी कार्रवाई में सिर्फ पाकिस्तानी सैनिक ही नहीं, बल्कि तुर्की के दो ड्रोन ऑपरेटर्स भी मारे गए। इसके अलावा पाकिस्तान के कई सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच एक और गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। भारत की एयरस्ट्राइक से पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुशाफ एयरबेस और किराना हिल्स इलाके में परमाणु विकिरण फैलने की खबरें हैं। किराना हिल्स में ही पाकिस्तान की परमाणु हथियार भंडारण सुविधा मौजूद है। विकिरण खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने ऊर्जा विभाग की परमाणु आपातकालीन टीम का विमान मौके पर भेजा है, ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके अलावा मिस्र ने भी बोरोन नामक रसायन, जो रेडिएशन को कम करने में इस्तेमाल होता है, विमान से पाकिस्तान भेजा है। हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर न ही पाकिस्तान और न ही अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है।

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भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर AAP-BJP के बीच सियासी घमासान, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर फिर मांगे गए सबूत

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी सियासी बयानबाज़ी छिड़ गई है। दिल्ली की कालकाजी सीट से विधायक और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर सवाल उठाए, जिसके बाद बीजेपी ने उन्हें और उनकी पार्टी को पाकिस्तान समर्थक करार देते हुए निशाने पर ले लिया। आतिशी ने पीएम मोदी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने ‘हाथ जोड़कर’ भारत से सीजफायर की गुहार लगाई थी। आतिशी ने पूछा कि यदि ऐसा था, तो इसकी घोषणा भारत की बजाय अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों की? उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर पाकिस्तान ने वाकई हार मानी थी तो उसने दुनिया के सामने यह बात स्वीकार क्यों नहीं की? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या पाकिस्तान ने आतंकियों को भारत को सौंपा या कोई लिखित समझौता किया? इन सवालों के बाद बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि आतिशी एक बार फिर उसी ‘सबूत मांगने वाले गैंग’ का हिस्सा बन गई हैं, जिसने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भी सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। पूनावाला ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी बार-बार पाकिस्तान के नैरेटिव को बढ़ावा दे रही है और भारतीय सेना के मनोबल को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “पहले इन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे, अब ऑपरेशन सिंदूर पर भी वही रवैया अपना रहे हैं। ये लोग हमारी सेना की ताकत पर भरोसा नहीं करते बल्कि पाकिस्तान की खामोशी को सबूत मानते हैं। आम आदमी पार्टी और पाकिस्तान अब ‘दो शरीर, एक जान’ जैसे हो गए हैं।” पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि आतिशी के माता-पिता कभी अफजल गुरु का समर्थन करते थे, और अब आतिशी खुद भी उसी मानसिकता को बढ़ावा दे रही हैं। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की सेना ने आतंकवाद के ढांचे को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया, जिससे घबराकर पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य अधिकारियों से संपर्क कर संघर्षविराम की मांग की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत की राजनीति में सुरक्षा और सेना जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी राजनीतिक खाई को उजागर कर दिया है।

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Political

भारतीय टेस्ट टीम के नए कप्तान को लेकर बढ़ी सरगर्मी, केएल राहुल की दावेदारी ने मचाया हलचल

रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भारतीय टीम के अगले टेस्ट कप्तान को लेकर बहस तेज हो गई है। इंग्लैंड दौरे से पहले चयन समिति के अध्यक्ष अजित अगरकर के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। जहां एक ओर शुभमन गिल और ऋषभ पंत के नाम की चर्चा हो रही थी, वहीं अब इस रेस में एक नया नाम भी सामने आ गया है — केएल राहुल। पूर्व चयनकर्ता कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने गिल की जगह पर सवाल उठाते हुए राहुल को कप्तानी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बताया है। उन्होंने कहा कि गिल की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की नहीं है, ऐसे में उन्हें कप्तान बनाना जोखिम भरा हो सकता है। श्रीकांत का मानना है कि यदि बुमराह अनुपलब्ध रहते हैं, तो राहुल या पंत को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने राहुल को टेस्ट टीम में नंबर-4 की भूमिका निभाने के लिए भी उपयुक्त करार दिया। दूसरी ओर, महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने जसप्रीत बुमराह को ही टेस्ट टीम का अगला कप्तान बनाने की वकालत की है। उनका मानना है कि बुमराह खुद अपने वर्कलोड को सबसे बेहतर समझते हैं और यदि कोई और कप्तान बना तो वह शायद बुमराह से ज्यादा गेंदबाजी करवा सकता है, जो उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस बहस में पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर आश्चर्य जताया कि बुमराह जैसे अनुभवी और प्रभावशाली खिलाड़ी की मौजूदगी में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि बुमराह की फिटनेस को लेकर चिंताएं हैं, तो उपकप्तान का चयन सावधानीपूर्वक करना चाहिए, लेकिन कप्तान वही बनना चाहिए। इस बीच रविचंद्रन अश्विन ने भी बुमराह के पक्ष में अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड दौरे के लिए जो टीम जाएगी, उसमें बुमराह सबसे अनुभवी खिलाड़ी होंगे और ऐसे में उन्हें ही कप्तानी सौंपी जानी चाहिए। हालांकि, अंतिम फैसला चयनकर्ताओं द्वारा बुमराह की फिटनेस को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। क्या आपको लगता है कि बुमराह की फिटनेस कप्तानी में बाधा बन सकती है?

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Sports

ऑपरेशन सिंदूर के बाद गृह मंत्रालय अलर्ट मोड में, अर्धसैनिक बलों की छुट्टियाँ रद्द, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालातों के बीच, केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना द्वारा की गई कार्रवाई – ऑपरेशन सिंदूर – के बाद उत्पन्न स्थिति को देखते हुए गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। साथ ही, सभी अर्धसैनिक बलों की छुट्टियाँ तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, जवानों को ड्यूटी पर तुरंत लौटने का आदेश दिया गया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, मेट्रो स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की पुलिस को चौकन्ना रहने और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके के आतंकी अड्डों पर किए गए हमलों के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया है। गृह मंत्रालय ने यह कदम किसी भी संभावित खतरे या आतंकी जवाबी कार्रवाई को रोकने के उद्देश्य से उठाया है। इस फैसले की व्यापक चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है, जहां कई यूजर्स ने इसे भारत की सख्त और निर्णायक सुरक्षा नीति का प्रतीक बताया है। केंद्र सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर बनी रहेंगी।

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बिरगांव में फुटपाथ व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन, नगर निगम पर भेदभाव का आरोप

रायपुर, बिरगांव 6 मई:बिरगांव क्षेत्र में वर्षों से फुटपाथ पर व्यापार कर रहे छोटे दुकानदारों ने आज नगर निगम बिरगांव के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और निगम कार्यालय का घेराव किया। इन व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले 8 से 18 सालों से बिजली विभाग के पास कपड़े, जूते-चप्पल आदि बेचकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन अब नगर निगम उन्हें हटाकर वहां फूड ज़ोन स्थापित करने की योजना बना रहा है। प्रदर्शन के दौरान नाराज व्यापारियों ने “महापौर मुर्दाबाद”, “नगर निगम मुर्दाबाद”, और “छोटे व्यापारियों का हक मत छीनो” जैसे तीखे नारे लगाए। उन्होंने अपना सामान निगम कार्यालय के सामने रखकर यह सवाल खड़ा किया — “अब हम कहां जाएं और अपना माल कहां बेचें?” व्यापारियों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें दुकान लगाने से रोका जा रहा है, जिससे उनके परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। आज जब कुछ प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से बात की, तो उन्हें एक और महीने का समय देने की बात कही गई — जिसे व्यापारियों ने खोखला आश्वासन बताया। अब तक लगभग 15 दुकानों को हटा दिया गया है, और शेष दुकानदारों को भी डर सता रहा है कि वे भी जल्द उजाड़ दिए जाएंगे। लगातार दुकानें बंद रहने से इन छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में बिरगांव के पार्षद खेमलाल साहू, वेदराम देवांगन और सामाजिक कार्यकर्ता डोमेश देवांगन भी शामिल हुए। उन्होंने व्यापारियों के हक में आवाज़ उठाई और नगर निगम से उचित समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि या तो उन्हें वहीं व्यापार की अनुमति दी जाए या फिर वैकल्पिक स्थान की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपनी रोज़ी-रोटी जारी रख सकें।

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बिरगांव में कांग्रेस ने बिजली समस्या को लेकर बिजली कार्यालय का घेराव किया

रायपुर, बिरगांव | 6 मई:बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती, खराब मरम्मत व्यवस्था और भीषण गर्मी में आम जनता को हो रही परेशानी को लेकर आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव द्वारा बिजली कार्यालय भानपुरी (CSPDCL) का घेराव किया गया। यह प्रदर्शन व्यास तालाब चौक से प्रारंभ होकर बिजली कार्यालय तक पहुंचा, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जनसेवक पंकज शर्मा (रायपुर ग्रामीण) और ब्लॉक अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी ने किया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में बिजली कटौती पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसके साथ ही बिजली कार्यालय के लापरवाह कर्मचारियों को हटाने की मांग भी की गई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताहों से बिरगांव क्षेत्र में बिना पूर्व सूचना के बार-बार बिजली काटी जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियों और घरेलू जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि आम जनता की समस्या को नज़रअंदाज़ करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द से जल्द स्थायी समाधान की मांग की गई

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मऊगंज में भाईचारे पर हमला: परिवार के चार सदस्य पर जानलेवा हमले का आरोप, प्रशासन मौन

मऊगंज थाना क्षेत्र के अमोखर गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों — केसरी चौबे, नीलेश चौबे, विभा चौबे और सुषमा चौबे — पर अपने ही बड़े भाई पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि इन चारों ने मिलकर धारदार हथियार और लाठी-डंडों से गंभीर रूप से मारपीट की। यह हमला पुरानी रंजिश के चलते किया गया, और इससे पहले भी इन्हीं लोगों द्वारा एक साल पहले जान से मारने की कोशिश की गई थी, जिसकी रिपोर्ट मऊगंज थाने में दर्ज है और मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है। पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते यह चौथी बार हमला हुआ है। बुजुर्ग पीड़ित गांव में अकेले रहते हैं, जिससे उन्हें हमेशा अपनी जान का खतरा बना रहता है। पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के चलते पीड़ित परिवार अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगा रहा है। सवाल यह है कि कब होगी प्रशासन की नींद खुली, और कब मिलेगा पीड़ित को इंसाफ

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