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डॉक्टर दंपति की रहस्यमयी मौत का राज फाश – 8 साल बाद ड्राइवर निकला हत्यारा!

कवर्धा, 6 जुलाई 2025कवर्धा में आठ साल पुराने डॉक्टर दंपति हत्याकांड की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। साल 2017 में हुई इस रहस्यमयी मौत को पहले आत्महत्या माना जा रहा था, लेकिन अब जांच में यह साबित हो गया है कि यह सुनियोजित हत्या थी – और वो भी किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि खुद दंपति के चालक द्वारा। आखिर क्या है पूरा मामला? 2017 में डॉ. गणेश सूर्यवंशी और उनकी पत्नी ऊषा सूर्यवंशी अपने घर में मृत पाए गए थे। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला मान लिया गया था, लेकिन घटनास्थल से मिले साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हत्या की आशंका के आधार पर दोबारा जांच शुरू की। 8 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद बड़ा खुलासा मामले की जांच में सालों लग गए क्योंकि मुख्य संदिग्ध घटना के बाद से ही फरार था। कई बार जांच ठहर सी गई, लेकिन पुलिस ने लगातार प्रयास जारी रखे और अब सामने आया है कि इस हत्या के पीछे डॉक्टर दंपति का निजी ड्राइवर सत्यप्रकाश साहू था। घटना के तुरंत बाद से वह भूमिगत है और अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आरोपी की तलाश में इनाम की घोषणा कबीरधाम के एसपी धर्मेन्द्र सिंह ने आरोपी की जानकारी देने पर ₹10,000 का इनाम घोषित किया है, जबकि रायपुर रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने ₹30,000 की अतिरिक्त राशि घोषित की है। यानी कुल ₹40,000 इनाम उस व्यक्ति को दिया जाएगा, जो सत्यप्रकाश साहू के बारे में सटीक जानकारी देगा। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल: कब होगी गिरफ्तारी? हत्याकांड का पर्दाफाश भले ही हो गया हो, लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। अब देखना होगा कि क्या पुलिस उसे जल्द सलाखों के पीछे पहुंचा पाएगी। 🔍 प्रमुख तथ्य: 📢 नागरिकों से अपील: यदि आपके पास सत्यप्रकाश साहू या इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या कंट्रोल रूम को सूचित करें। आपकी एक जानकारी न्याय की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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Birgaon: Acholi दर्री तालाब की बदहाली से नाराज ग्रामीण, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर जताया आक्रोश

रायपुर |बिरगांव नगर निगम क्षेत्र के अछोली गांव में स्थित दर्री तालाब की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है। तालाब चारों ओर से गंदगी से घिरा है, और उसका पानी हरा पड़ चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम और जनप्रतिनिधि तालाब की हालत सुधारने को लेकर पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। विधायक और पार्षद के आश्वासन रह गए अधूरे ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय विधायक मोतीलाल साहू ने छह महीने पहले तालाब की सफाई कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, नगर निगम पार्षद राजवती निषाद पर भी लोगों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। नालियों का पानी और गंदगी पहुंच रही तालाब में तालाब अछोली गांव के लोगों के लिए स्नान और दैनिक उपयोग का प्रमुख स्रोत है। लेकिन इसमें अब आसपास के घरों का गंदा पानी, नालियों की गंदगी और कचरा जाकर मिल रहा है। इससे न केवल तालाब की सुंदरता नष्ट हो रही है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अधूरी पड़ी लाइटिंग व्यवस्था तालाब के किनारों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना छह महीने पहले बनाई गई थी। खंभे लाने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन अब तक न तो पोल लगाए गए और न ही लाइटें लगाई गईं। इसके चलते रात में अंधेरा छाया रहता है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। बुनियादी सुविधाओं का टोटा ग्रामीणों ने बताया कि भले ही अछोली गांव बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में आता है, लेकिन यहां की स्थिति किसी उपेक्षित गांव से कम नहीं है। साफ-सफाई, जल निकासी और प्रकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। ग्रामीणों की मांग गांववासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वे चाहते हैं कि: ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं।

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एअर इंडिया का बड़ा निर्णय: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 15% कटौती, सुरक्षा जांच होगी सख्त

अहमदाबाद में हुए हालिया विमान हादसे के बाद एअर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। टाटा समूह के स्वामित्व वाली इस एयरलाइन ने ऐलान किया है कि जुलाई मध्य तक बड़े विमानों की इंटरनेशनल उड़ानों में 15% की कटौती की जाएगी। कंपनी ने यह फैसला अतिरिक्त सावधानी के तौर पर लिया है। एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों की गहन सुरक्षा जांच कराई जाएगी। पिछले कुछ दिनों से एअर इंडिया को तकनीकी व संचालन संबंधी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, बीते छह दिनों में एयरलाइन ने अपनी कम से कम 83 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द किया है। उड़ानों की अचानक रद्दीकरण से यात्री परेशान बुधवार को एअर इंडिया की मुंबई से लखनऊ जाने वाली फ्लाइट अचानक रद्द कर दी गई। बताया गया कि दिल्ली में भारी बारिश के कारण डायवर्जन हुआ, जिससे उड़ान प्रभावित हुई। इसके अलावा, एयरलाइन ने रखरखाव और तकनीकी कारणों से तीन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया। इनमें दो उड़ानों को उस समय रद्द किया गया, जब यात्री विमान में सवार हो चुके थे। एयर इंडिया ने एक बयान में बताया कि 18 जून को टोरंटो से दिल्ली आने वाली फ्लाइट AI188 को ऑपरेशनल और मेंटेनेंस मानकों के तहत रद्द करना पड़ा। यात्रियों को विमान से उतारा गया और वैकल्पिक इंतज़ाम किए गए। इसी प्रकार, दुबई से दिल्ली आने वाली फ्लाइट AI996 को भी तकनीकी खामी के कारण उड़ान भरने से पहले ही रोक दिया गया। कर्मचारी बरत रहे हैं अतिरिक्त सावधानी एअर इंडिया के अनुसार, कंपनी का इंजीनियरिंग स्टाफ और पायलट फिलहाल अतिरिक्त सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। भविष्य में किसी भी दुर्घटना को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए व्यापक स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं।

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एयर इंडिया हादसा: ब्लैक बॉक्स से जांच शुरू, 270 की मौत के पीछे की वजह पता लगाने में जुटे जांचकर्ता

भारत में विमान हादसे की जांच कर रही एजेंसियां उस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण कर रही हैं, जो पिछले हफ्ते दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कम से कम 270 लोगों की मौत हो गई। विमान के मलबे से बरामद ब्लैक बॉक्स में मौजूद डेटा हादसे की असली वजह जानने में मदद करेगा। यह विमान अहमदाबाद से लंदन जा रहा था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद यह एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिर गया। हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए, जबकि जमीन पर मौजूद 29 लोगों की भी मौत हो गई। केवल एक यात्री इस भयानक दुर्घटना में जीवित बचा। भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की जांच कर रही है, जिसमें ब्रिटेन, अमेरिका और विमान निर्माता कंपनी बोइंग के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। ब्लैक बॉक्स क्यों है अहम पूर्व पायलट और विमानन विशेषज्ञ अमित सिंह के अनुसार, ब्लैक बॉक्स में दो डिवाइस होती हैं—कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, जो पायलटों की बातचीत, चेतावनी अलार्म और आपातकालीन संदेश रिकॉर्ड करता है; और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जो इंजन और नियंत्रण प्रणालियों की तकनीकी जानकारी सहेजता है। ये उपकरण इस तरह बनाए जाते हैं कि वे किसी भी हादसे के बाद भी सुरक्षित रह सकें। सिंह ने बताया कि इन रिकॉर्डिंग्स की मदद से दुर्घटना के क्षणों को क्रमवार समझा जा सकेगा। इसके अलावा पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच हुई बातचीत भी इससे स्पष्ट हो सकेगी। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण पहले ही पुष्टि कर चुका है कि हादसे से पहले विमान ने ‘मेडे कॉल’ (आपातकालीन संदेश) दिया था। जांच के कई पहलू सिंह ने कहा कि ब्लैक बॉक्स के अलावा जांच अधिकारी आसपास के सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान भी खंगालेंगे। पायलट की ट्रेनिंग, विमान की भार क्षमता, इंजन की स्थिति, और विमान के पिछले प्रदर्शन और रखरखाव रिकॉर्ड को भी जांच में शामिल किया जाएगा। जांच में लग सकता है समय एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के पूर्व महानिदेशक, औरबिंदो हांडा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान हादसों की जांच संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज “DOC 9756” के अनुसार होती है, जिसमें हर पहलू की जांच के लिए विस्तृत प्रक्रिया बताई गई है। उन्होंने बताया कि चूंकि यह विमान दुर्घटना बेहद गंभीर थी और विमान बुरी तरह जल चुका है, इसलिए जांच में समय लग सकता है। सबसे पहले यह जांचा जाएगा कि ब्लैक बॉक्स कितनी स्थिति में सुरक्षित हैं, क्योंकि दुर्घटना से पैदा हुई गर्मी उनके सहनशीलता स्तर से अधिक हो सकती है। सरकारी समिति और फ्लाइट्स की जांच भारत सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो हादसे की वजहों का विश्लेषण करेगी और भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के उपाय बताएगी। यह समिति तीन महीनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही, एयर इंडिया के पूरे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े की अतिरिक्त जांच और रखरखाव शुरू कर दिया गया है। एयर इंडिया के पास वर्तमान में कुल 33 ड्रीमलाइनर विमान हैं।

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पुतिन की पहल: ईरान-इस्राइल के बीच शांति वार्ता को तैयार रूस, मध्यस्थता का प्रस्ताव अमेरिका को भी भेजा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष को शांतिपूर्वक सुलझाने की पेशकश की है। सेंट पीटर्सबर्ग में इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान मीडिया से बातचीत में पुतिन ने कहा कि रूस के ईरान के साथ लंबे समय से मजबूत रिश्ते हैं, और उन्होंने यह विश्वास जताया कि मॉस्को इस टकराव को सुलझाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। पुतिन ने बताया कि रूस ने ईरान के बुशेहर में पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना में मदद की थी, और इस समय वहां दो अन्य प्लांट्स के निर्माण में करीब 200 रूसी विशेषज्ञ सहायता दे रहे हैं। पुतिन ने सुझाव दिया कि अगर दोनों पक्ष राज़ी हों, तो रूस एक ऐसा समझौता करवा सकता है जिससे ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रख सके और इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को भी समाधान मिल सके। उन्होंने इसे एक “संवेदनशील लेकिन सुलझाया जा सकने वाला मसला” बताया। रूस ने यह मध्यस्थता प्रस्ताव न केवल ईरान और इस्राइल, बल्कि अमेरिका को भी भेजा है। पुतिन ने साफ कहा कि रूस किसी पर अपनी राय थोपना नहीं चाहता, बस सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। पुतिन ने यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की थी और पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाओं पर चर्चा की थी। हालांकि, ट्रंप ने पुतिन को सलाह दी कि वे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम पर ध्यान दें। पुतिन ने ट्रंप की कूटनीतिक सोच की सराहना की और कहा कि अगर ट्रंप 2022 में राष्ट्रपति होते तो शायद रूस-यूक्रेन युद्ध हुआ ही नहीं होता। उन्होंने एक बार फिर शांति वार्ता के लिए यूक्रेन से बातचीत की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की संवैधानिक वैधता पर सवाल भी उठाए, यह कहते हुए कि उनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है।

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Bijnor: बीच रास्ते बिगड़ी ट्रेन चालक की तबीयत, सहायक ने दिखाई सूझबूझ……….यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाया कोटद्वार

आनंद विहार टर्मिनल से कोटद्वार जा रही एक्सप्रेस ट्रेन (14089) में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब नजीबाबाद के स्नेह रोड स्टेशन के पास ट्रेन चालक बाबूराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। हालात को समझते हुए सहायक चालक ने सूझबूझ से काम लिया और ट्रेन को सुरक्षित रूप से कोटद्वार स्टेशन तक पहुंचाया। घटना के कारण कई पैसेंजर ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और समय-सारणी गड़बड़ा गई। जानकारी के अनुसार, यह ट्रेन सामान्य रूप से रात 2:55 बजे नजीबाबाद से चलती है, लेकिन गुरुवार को यह 3:15 बजे रवाना हुई। ट्रेन का खाली रैक सुबह 5 बजे तक नजीबाबाद लौटना था, मगर इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण इसमें देर हो गई। स्थिति को संभालने के लिए लक्सर से एक अन्य चालक को बुलाया गया, जिसने ट्रेन को दोबारा संचालित किया और ट्रेन लगभग 11 बजे नजीबाबाद पहुंची। इस घटना का असर नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच चलने वाली अन्य ट्रेनों पर भी पड़ा। सुबह 8:45 पर चलने वाली एक पैसेंजर ट्रेन 46 मिनट की देरी से रवाना हुई, वहीं एक अन्य पैसेंजर ट्रेन भी लेट रही। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ यात्रियों ने सड़क मार्ग से कोटद्वार जाने का फैसला किया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बीमार चालक की तबीयत में अब सुधार है और पूरी घटना की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।

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राजधानी में बांग्लादेशी घुसपैठ का नेटवर्क फैला, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आए छह घुसपैठियों और उनके एक सहयोगी को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि ये वही गिरोह है जिसके तीन सदस्य हाल ही में मुंबई में इराक भागने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे। हालांकि, अभी तक उन्हें भारत में पनाह देने और दस्तावेज बनवाने में सहायता करने वाले लोग पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। स्थानीय मददगारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहींपुलिस की जांच में सामने आया है कि रायपुर में करीब एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। लेकिन इन अवैध गतिविधियों में शामिल स्थानीय लोगों, खासकर दलालों और जनप्रतिनिधियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। अस्थायी डिटेंशन सेंटर बना थानाराज्य में डिटेंशन सेंटर न होने के चलते टिकरापारा थाने को फिलहाल अस्थायी डिटेंशन सेंटर बना दिया गया है, जहां हाल ही में पकड़े गए 10 बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। ‘अनलिमिटेड अंडा योजना’ के पीछे संदिग्ध मंशागिरफ्तार दिलावर खान ने लोगों से संपर्क बनाने के लिए एक अनोखी योजना शुरू की थी— “निश्चित राशि में अनलिमिटेड अंडा रेसिपी”। उसके अंडे के ठेले के जरिए वह धीरे-धीरे अपना नेटवर्क बढ़ाता गया। अब पुलिस को शक है कि इस योजना के पीछे कुछ और ही मकसद छिपा था। पार्षदों की भूमिका पर सवालतीन अलग-अलग मामलों में यह बात सामने आई है कि कुछ पूर्व पार्षदों ने घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेज बनवाने, आवास दिलवाने और पहचान छिपाने में मदद की। बावजूद इसके, इन नेताओं के खिलाफ अभी तक जांच शुरू नहीं हुई है। रीवा से नहीं मिला कोई पुख्ता प्रमाणगिरफ्तार बांग्लादेशी दंपति ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने मध्यप्रदेश के रीवा जिले के चाकघाटा इलाके से आठवीं कक्षा की फर्जी अंकसूची बनवाई थी। टिकरापारा थाना पुलिस वहां जांच करने गई, लेकिन किसी पक्के सबूत का पता नहीं चल सका। फर्जी दस्तावेज बनाने में कर्मचारी की भूमिकादिलावर खान के अंडा ठेले में काम करने वाला उसका कर्मचारी भी फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में सहयोगी था। इसी की मदद से दिलावर ने फर्जी अंकसूची हासिल की थी। पूरे मामले में पुलिस को अभी और खुलासों की उम्मीद है, लेकिन अब तक असली मास्टरमाइंड और दस्तावेज तैयार करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

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फर्जी अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाला हसन आबिदी गिरफ्तार, महिला पटवारी के पति से ठगे थे 1 करोड़ रुपये

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खुद को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो), ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) और ईडी का अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाला हसन आबिदी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। टिकरापारा थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया है। कैसे करता था ठगी का खेल:हसन खुद को जांच एजेंसियों का अफसर बताकर जमीन कारोबारियों और सरकारी कर्मचारियों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देता था। वह नेताओं के साथ खिंचवाए गए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खुद को रसूखदार साबित करता और इसी डर से लोग चुप रहते थे। एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला आया सामनेमहिला पटवारी के पति राजेश सोनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि हसन ने पिछले एक साल में किस्तों में उससे एक करोड़ रुपये वसूले। वह बार-बार और पैसे मांग रहा था और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहा था। मजबूरी में शिकायतकर्ता ने कर्ज लेकर और पत्नी के गहने बेचकर पैसे दिए। लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी के बाद उसने पुलिस की मदद ली। जमीन कारोबारियों को बनाता था निशानाजांच में पता चला है कि हसन मुख्य रूप से जमीन और प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोगों को टारगेट करता था। वह उनकी जमीन को विवादित बताकर कानूनी कार्रवाई की धमकी देता और बड़ी रकम वसूलता था। नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाकर बनाता था रौबहसन पिछले पांच साल से इस तरह की ठगी में शामिल था। वह नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालता था, ताकि लोग उसे प्रभावशाली समझें और डर के मारे शिकायत ना करें। पुलिस को शक है कि हसन ने और भी कई लोगों को अपने जाल में फंसाया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और जल्द ही प्रेस कांफ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करने वाली है।

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बिरगांव की मिनी आंगनबाड़ियों की बदहाली उजागर: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं शौचालय, ना ही पर्याप्त जगह

बिरगांव (रायपुर)। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे बिरगांव क्षेत्र में मिनी आंगनबाड़ियों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वार्डों में संचालित अधिकांश मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे छोटे बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, बिरगांव के हर वार्ड में न्यूनतम 3 से 4 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक केंद्र में 0 से 3 वर्ष के करीब 20 बच्चे और 3 से 6 वर्ष तक के 25 से 30 बच्चे नियमित रूप से आते हैं। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र में गर्भवती महिलाओं की संख्या भी 8 से 14 के बीच होती है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इन केंद्रों में न तो बच्चों के लिए पर्याप्त स्थान है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा। 300 वर्गमीटर के मानक की जगह सिर्फ 150-200 वर्गफुट में चल रही हैं आंगनबाड़ियां छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार, एक मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का कुल क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर होना चाहिए, जिसमें एक कमरा, बरामदा, खेल का मैदान और शौचालय होना अनिवार्य है। लेकिन बिरगांव के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ 150 से 200 वर्गफुट क्षेत्रफल में ही संचालित हो रहे हैं। बच्चों को खुले में शौच जाने की मजबूरी सबसे गंभीर समस्या इन केंद्रों में शौचालय की अनुपस्थिति है। बच्चों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है, जिससे उनकी स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में सीखी गई आदतें ही भविष्य में व्यवहार बनती हैं। ऐसे में स्वच्छता की बुनियादी शिक्षा और संसाधनों का अभाव बच्चों की जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है। केंद्रों की जमीनी हकीकत पोषण की व्यवस्था बेहतर, लेकिन जगह और स्वच्छता चिंता का विषय सभी केंद्रों में पोषण योजना के तहत बच्चों को Ready-to-Eat नाश्ता और दोपहर में दाल-चावल, सब्जी, रोटी जैसे भोजन नियमित रूप से दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी पोषक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन केंद्र की सीमित जगह में भोजन बनाना, बच्चों की पढ़ाई और खेल गतिविधियां सब कुछ एक ही स्थान पर करना पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। जिम्मेदारों से जवाबदेही तय करने की मांग स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि केंद्रों की भौतिक स्थिति का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और पर्याप्त स्थान जरूरी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक केंद्र में शौचालय की सुविधा हो और बच्चों को साफ-सुथरा माहौल मिले। यह मुद्दा न केवल बाल विकास बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा से भी जुड़ा है। प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों को इस पर त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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Raipur

रायपुर के उरला गुमा में डामर फैक्‍ट्री में भीषण आग, 5 किलोमीटर दूर तक दिखीं लपटें – बड़ा हादसा टला

रायपुर, 14 जून। राजधानी रायपुर के उरला गुमा, औद्योगिक क्षेत्र स्थित Western Tar Production Pvt. Ltd. नामक डामर निर्माण इकाई में शनिवार सुबह भीषण आग लग गई। सुबह करीब 11:30 बजे लगी आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपटें 5 किलोमीटर दूर तक साफ दिखाई दे रही थीं। इस घटना के चलते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों के अनुसार, कंपनी छोटी इकाई है, जहां न तो फायर सेफ्टी गार्ड तैनात था और न ही अंदरूनी स्तर पर आग बुझाने के कोई समुचित इंतजाम थे। आग लगते ही आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों ने तत्परता दिखाई और अपनी दमकल गाड़ियाँ मौके पर भेजीं। इससे स्थिति पर शुरुआती स्तर पर कुछ हद तक काबू पाया जा सका। घटना की सूचना मिलने के कुछ समय बाद 112 इमरजेंसी सेवा की टीम भी मौके पर पहुँच गई। इसके साथ ही इलाके की सभी उपलब्ध दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया, लेकिन तब तक फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा जल चुका था। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि आग फैक्ट्री के ऑयल टैंक में लगी थी, जिससे तेजी से पूरी यूनिट चपेट में आ गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई भी कर्मचारी हताहत नहीं हुआ और किसी प्रकार की जनहानि की खबर नहीं है। इस दुर्घटना ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है – जब यह इलाका एक मान्यता प्राप्त औद्योगिक क्षेत्र है, तो फिर इन फैक्ट्रियों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं? यदि समय रहते आग पर काबू न पाया जाता, तो यह घटना एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी का रूप ले सकती थी। अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिला प्रशासन और उद्योग विभाग इस मामले को गंभीरता से लेंगे और भविष्य में इस तरह की लापरवाह फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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