May 2026

रायपुर डबल मर्डर: बाउंसर ने ससुराल में घुसकर दो सालियों को मारी गोली, पत्नी से विवाद बना वजह

रायपुर के मोवा इलाके में मंगलवार देर रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जहां एक बाउंसर ने अपनी दो सालियों की गोली मारकर हत्या कर दी। आरोपी जितेंद्र वर्मा उर्फ जित्तू अपनी पत्नी पर शक करता था, जिसको लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। मंगलवार को भी विवाद के बाद उसकी पत्नी अपने बच्चे को लेकर मायके चली गई थी। पत्नी से संपर्क नहीं हो पाने पर आरोपी रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच लाइसेंसी पिस्टल लेकर ससुराल पहुंच गया और बच्चे से मिलने की जिद करने लगा। इस दौरान उसकी साली गीतांजलि (26) और दुर्गेश्वरी (24) उसे समझाने बाहर आईं और वापस जाने को कहा। इसी बात से नाराज होकर आरोपी ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से गीतांजलि की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दुर्गेश्वरी गंभीर रूप से घायल हो गईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से भागा नहीं, बल्कि बाहर आकर सड़क पर हवाई फायरिंग की और फिर खुद थाने जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था, जिस कारण उनके बीच अक्सर विवाद होता रहता था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसकी लाइसेंसी पिस्टल जब्त कर ली है और मामले की जांच जारी है।

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खमतराई ब्रिज के पास पानी चोरी पर निगम की सख्त कार्रवाई, अवैध कनेक्शन काटे

रायपुर में खमतराई ब्रिज के पास पानी की चोरी के मामले में नगर निगम ने कड़ी कार्रवाई की है। महापौर मीनल चौबे, जल कार्य विभाग अध्यक्ष संतोष सीमा साहू और आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जल कार्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध नल कनेक्शनों को हटाया। यह कार्रवाई रावणभाठा फिल्टर प्लांट की टीम और नगर निगम जोन क्रमांक 2 के अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से की गई। जांच के दौरान पाया गया कि राइजिंग मेन पाइप लाइन से गैरकानूनी तरीके से पानी लिया जा रहा था, जिसे तत्काल प्रभाव से बंद किया गया। कार्रवाई के दौरान जोन 2 के जोन कमिश्नर संतोष पाण्डेय, कार्यपालन अभियंता नर सिंह फरेन्द्र, पी.डी. धृतलहरे, सहायक अभियंता योगेन्द्र कुमार देवांगन सहित जल विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। निगम ने साफ किया है कि पानी चोरी के मामलों में आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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छत्तीसगढ़ में नकली मसाले का खुलासा, एवरेस्ट मसाला के नाम पर बेचा जा रहा संदिग्ध माल

छत्तीसगढ़ में मशहूर ब्रांड Everest मसाला के नाम पर नकली उत्पाद बेचे जाने का मामला सामने आया है। कंपनी की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक गोदाम पर छापा मारा, जहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध मसाला बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार, व्यापार विहार स्थित श्री बालाजी कार्गो मूवर्स के गोदाम में छापेमारी की गई। इस दौरान लाखों रुपये कीमत का मसाला जब्त किया गया, जिसे प्रथम दृष्टया नकली होने की आशंका जताई जा रही है। मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को भी बुलाया गया, जिसने मसालों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया है। इस कार्रवाई के दौरान संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। गोदाम संचालक का कहना है कि जब्त किया गया मसाला किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वहां रखा गया था और उनका इससे सीधा संबंध नहीं है। फिलहाल, खाद्य विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मसाला पूरी तरह नकली है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को बाजार में मसाले खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल विश्वसनीय दुकानों से ही सामान लेना चाहिए।

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रायपुर में 136 पुलिसकर्मियों के तबादले, 2 SI समेत ASI और जवानों की बड़े स्तर पर बदली

Raipur पुलिस कमिश्नरेट में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। पुलिस कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत कुल 136 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। जारी सूची के अनुसार, इस तबादला आदेश में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। सभी को अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पुलिस विभाग के अनुसार, यह फेरबदल कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है। आदेश जारी होते ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस बड़े पैमाने के तबादले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और नए पदस्थापना के अनुसार जिम्मेदारियां संभालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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झारखंड शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित झारखंड शराब घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी Anil Tuteja को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि वे जांच में बाधा डालते हैं, तो जांच एजेंसी उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि, इस राहत के बावजूद टुटेजा का जेल से बाहर आना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120B के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब कारोबार के लिए एक सिंडिकेट तैयार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये का कमीशन अर्जित किया। टुटेजा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में फंसाकर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड पुलिस ने इस मामले में उन्हें आरोपी तक नहीं बनाया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में उनके पास से कोई अवैध संपत्ति बरामद नहीं हुई और न ही कोई ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य मिला है। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए टुटेजा को कई घोटालों का मास्टरमाइंड बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने रायपुर में बैठकर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि टुटेजा पिछले दो वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने इस मामले में उनसे पूछताछ के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया। साथ ही, झारखंड पुलिस द्वारा उन्हें आरोपी न बनाए जाने और अन्य आरोपियों को जमानत मिलने जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दी, लेकिन स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

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पश्चिम बंगाल जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बड़ी भूमिका, 56 सीटों पर माइक्रो प्लानिंग से बदला समीकरण

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर हो रही है। भाजपा की जीत के साथ अब चुनावी रणनीति पर भी फोकस बढ़ गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव के दौरान बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्हें 56 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर माइक्रो लेवल प्लानिंग तक का काम दिया गया था। कई सीटों पर उन्हें पूरी चुनावी कमान भी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और वोटिंग पैटर्न को साधने में काम किया। छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को इन 56 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कार्य सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत बनाना था। चुनाव के दौरान उनकी रणनीति को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। दुर्गापुर जिले के बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की कमान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को सौंपी गई थी। उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी भूपेंद्र सवन्नी को दी गई थी। अन्य नेताओं में नीलू शर्मा, अनुराग सिंहदेव, हरपाल सिंह भाम्भरा और विश्व विजय सिंह तोमर को भी अलग-अलग सीटों पर तैनात किया गया था। इन सभी को चुनावी प्लानिंग, कैंपेनिंग और बूथ मैनेजमेंट के लिए माइक्रो स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। कोलकाता क्लस्टर में पार्टी ने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए विशेष टीम बनाई थी। इस टीम में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को शामिल किया गया और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया। इस टीम का नेतृत्व प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह कर रहे थे। रणनीति के तहत व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, मजदूर, रिक्शा चालक और मछली विक्रेताओं सहित विभिन्न वर्गों तक अलग-अलग तरीके से संपर्क किया गया। इसके साथ ही उन स्थानीय नेताओं को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई, जो पहले चुनाव हार चुके थे, लेकिन जिनका जनाधार अभी भी मौजूद था। चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई थी। इसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा शामिल थे, जिन्होंने रैली प्रबंधन और स्थानीय समन्वय का काम संभाला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई यह जिम्मेदारी संगठन में उनकी बढ़ती पकड़ और भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उन्हें बूथ से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें चुनावी प्रबंधन के लिए सक्षम माना गया।

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रायपुर में फर्जी नौकरी के नाम पर 1.5 करोड़ की ठगी, सरकारी शिक्षक समेत दो आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फर्जी सरकारी नौकरी का लालच देकर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। रायपुर ग्रामीण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने नकली नियुक्ति आदेश के जरिए 34 बेरोजगार युवाओं से करीब 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डोंगरगढ़ निवासी राजेश शर्मा और मनोज कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किया था। इसमें परिवहन, राजस्व, वन, पंचायत और स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का उल्लेख किया गया था। आदेश को असली दिखाने के लिए सचिव और उप-सचिव के डिजिटल हस्ताक्षरों का भी दुरुपयोग किया गया। आरोपियों ने इस फर्जी आदेश को सोशल मीडिया, विशेष रूप से व्हाट्सऐप के माध्यम से वायरल किया और बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली। शिकायत मिलने के बाद राखी थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल डेटा के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। दोनों आरोपी डोंगरगढ़ के रहने वाले हैं। इनमें से राजेश शर्मा एक शासकीय शिक्षक है, जबकि मनोज कुमार श्रीवास्तव निजी स्कूल में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। पुलिस टीम ने राजनांदगांव जिले में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आर्थिक तंगी और कर्ज के चलते उन्होंने इस ठगी की योजना बनाई थी। वे कंप्यूटर के जरिए फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार कर मोबाइल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों से सावधान रहें। सीएसपी नया रायपुर तुलसीराम लेकाम ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के आधार पर राजनांदगांव में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा गया। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने कुल कितने लोगों से ठगी की है।

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बालोद में रिसॉर्ट में महिला शिक्षिका के साथ भाजपा पदाधिकारी मिलने का मामला, पति ने लगाए गंभीर आरोप, पत्नी ने बताया झूठ

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक शिक्षिका और भाजपा से जुड़े एक पदाधिकारी को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। महिला के पति ने पुलिस की मौजूदगी में एक रिसॉर्ट पहुंचकर दोनों को एक साथ होने का दावा किया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पति का आरोप है कि उसकी पत्नी के कई लोगों के साथ अवैध संबंध हैं। उसने यह भी कहा कि विरोध करने पर पत्नी उसे और बच्चों को प्रताड़ित करती है, मारपीट करती है और यहां तक कि जहर देने की धमकी भी देती है। मामले के बाद पति ने एसपी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के मुताबिक, बालोद के टिकरापारा वार्ड नंबर-04 निवासी अब्दुल ताहिर ने अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उसने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2006 में बागबाहरा में हुई थी। उनकी पत्नी प्राथमिक शाला में प्रधान पाठिका है और उनके दो बच्चे हैं। पति के अनुसार, करीब 17 साल तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन पिछले दो वर्षों से पत्नी का व्यवहार बदल गया है। पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी बच्चों के साथ गाली-गलौज और मारपीट करती है। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी ने कई बार बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। संदेह होने पर जब उसने जांच की, तो उसे एक व्यक्ति के साथ पत्नी के संबंध होने की जानकारी मिली। पति के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 को उसे सूचना मिली कि उसकी पत्नी एक भाजपा पदाधिकारी के साथ ग्राम डंगनिया के एक रिसॉर्ट में मौजूद है। इसके बाद वह अपने परिचित के साथ मौके पर पहुंचा और किसी विवाद से बचने के लिए पुलिस को भी साथ ले गया। रिसॉर्ट पहुंचने पर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर बाद पहले संबंधित व्यक्ति बाहर आया और कुछ समय बाद महिला भी बाहर निकली। इस दौरान पति ने वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में सभी को थाने ले जाया गया, जहां पूछताछ की गई। दूसरी ओर, महिला ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए पति पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि उसका पति नशे का आदी है और लंबे समय से उसके साथ मारपीट करता रहा है। महिला के अनुसार, वह मानसिक रूप से परेशान होकर दो बार आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी है। महिला ने यह भी कहा कि उसे जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उसने अपने ससुराल पक्ष की जिम्मेदारियां निभाने और आर्थिक सहयोग करने की बात भी कही। रिसॉर्ट में मौजूद होने को लेकर महिला ने कहा कि वह अपनी मर्जी से वहां गई थी और पति द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के आरोपों की पुष्टि की जा रही है।

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संगीता सिन्हा बनीं छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की प्रभारी अध्यक्ष, स्थायी नियुक्ति तक संभालेंगी जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति के बीच संजारी बालोद से विधायक संगीता सिन्हा को प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस संबंध में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की ओर से आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर पहले संगीता सिन्हा और छन्नी साहू के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी। संगठन के भीतर दोनों नेताओं को लेकर अलग-अलग मत थे, जिसके चलते फैसला लंबित था। ऐसे में फिलहाल संगठन ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर संगीता सिन्हा को प्रभारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। वे स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक पद संभालेंगी। बताया जाता है कि जनवरी में दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी की गई थी। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा की मौजूदगी में अनिला भेड़िया, संगीता सिन्हा, छन्नी साहू, ममता चंद्राकर और तुलिका कर्मा ने अपनी दावेदारी रखी थी। स्थायी अध्यक्ष पद के लिए मुख्य प्रतिस्पर्धा संगीता सिन्हा और छन्नी साहू के बीच मानी जा रही थी। संगठन के एक वर्ग का समर्थन छन्नी साहू को मिल रहा था, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने के कारण संगीता सिन्हा की स्थिति भी मजबूत थी। अंततः फिलहाल उनके नाम पर प्रभारी अध्यक्ष के रूप में सहमति बन गई है। संगीता सिन्हा संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है और धमतरी के शासकीय महाविद्यालय से पढ़ाई की है। उन्हें छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का सदस्य भी बनाया जा चुका है। साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

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“सपनों को लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत ही सफलता की कुंजी” — मेधावी छात्रों को CM साय की सीख

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। Balrampur-Ramanujganj जिले के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने छात्रों से बातचीत के दौरान उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जाना। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा जताई, जबकि कुछ ने प्रशासनिक सेवा और न्यायिक क्षेत्र में जाने का लक्ष्य रखा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए बड़े सपने देखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उन्हें लक्ष्य में बदलकर लगातार मेहनत करना। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने की सलाह दी और कहा कि दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता के लिए उनके माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को भी सराहा। कार्यक्रम में जिले के कई मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला, जिससे उनमें आगे बढ़ने का उत्साह और भी बढ़ गया।

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