April 2026

रायपुर में 22 किलो गांजे के साथ 7 गिरफ्तार: दो महिलाएं और एक नाबालिग भी शामिल

रायपुर पुलिस ने गांजा तस्करी के अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ओडिशा से गांजा लेकर मध्यप्रदेश ले जाने की फिराक में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 2 महिलाएं और एक नाबालिग भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से कुल 22.450 किलो गांजा जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 11.22 लाख रुपए है। गिरफ्तार लोगों में ओडिशा निवासी शांतनु मलिक, रोमियो मलिक, जुलियत मलिक, राहुल मलिक, रश्मिता दीगल और दीपा दीगल शामिल हैं। पुलिस को 2 अप्रैल को सूचना मिली कि गंज थाना क्षेत्र के तेलघानी नाका के पास कुछ लोग बैग में गांजा लेकर खड़े हैं। मौके पर पहुंची टीम ने घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान सभी के बैग से गांजा बरामद हुआ। पूछताछ में पता चला कि आरोपी ओडिशा और मध्यप्रदेश में तस्करी करने की योजना बना रहे थे। सभी आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि इस तस्करी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। क्राइम और साइबर पुलिस उपायुक्त स्मृतिक राजनाला ने बताया कि नशे के कारोबार में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

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रायपुर में बुजुर्ग किसान से साइबर ठगी, मोबाइल हैक कर 2.78 लाख रुपए उड़ाए

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग किसान का मोबाइल हैक कर उनके बैंक खाते से 2.78 लाख रुपए निकाल लिए। यह घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है, जिसने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित किसान चोला राम मरकाम (74) ने बताया कि उनका खाता दुर्ग जिले की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रानीतराई शाखा में है। 20 मार्च 2026 की शाम उन्हें मोबाइल पर 1000 रुपए कटने का मैसेज मिला, जिसके बाद उन्हें कुछ गड़बड़ी का शक हुआ। हालांकि, जब 23 मार्च को उन्होंने बैंक जाकर पासबुक अपडेट करवाई, तब असली नुकसान का पता चला। बैंक स्टेटमेंट में सामने आया कि 19 से 22 मार्च के बीच ठगों ने उनके खाते से कुल 2.78 लाख रुपए 12 अलग-अलग किश्तों में निकाल लिए। इस सुनियोजित तरीके से की गई ठगी ने किसान को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शुरुआती जांच में पता चला है कि ठगी की रकम का एक हिस्सा एयरटेल पेमेंट्स बैंक के एक संदिग्ध खाते में ट्रांसफर किया गया है, जबकि बाकी रकम किन खातों में गई, इसकी जांच जारी है। टिकरापारा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा। साइबर ठगी से बचाव के लिए सावधानियां:

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: एथलेटिक्स में ओडिशा का दबदबा, छत्तीसगढ़ पांचवें स्थान पर

जगदलपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में तीसरे दिन तक ओडिशा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते मुकाबले बेहद रोमांचक हो गए हैं और हर राज्य के प्रतिभागी अपनी पूरी ताकत झोंकते नजर आ रहे हैं। धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में चल रही प्रतियोगिता में ओडिशा ने अब तक 7 स्वर्ण, 6 रजत और 6 कांस्य पदक जीतकर अपनी मजबूत स्थिति बनाई हुई है। इस प्रदर्शन के साथ ओडिशा खिताब का सबसे बड़ा दावेदार बनकर उभरा है। वहीं झारखंड ने भी बेहतरीन खेल दिखाते हुए 5 स्वर्ण पदकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। गुजरात 3 स्वर्ण सहित कुल 9 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। कर्नाटक की टीम भी 3 स्वर्ण पदकों के साथ गुजरात को कड़ी चुनौती दे रही है, जिससे शीर्ष स्थानों की दौड़ और दिलचस्प हो गई है। मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए तीसरा दिन मिश्रित परिणाम लेकर आया। घरेलू दर्शकों के उत्साह के बीच टीम ने 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीते, जिसके चलते वह पांचवें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि, आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र ने 1 स्वर्ण सहित कुल 4 पदक अपने नाम किए हैं, जबकि असम ने 1 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। केरल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने अभी तक स्वर्ण पदक नहीं जीता है, लेकिन उन्होंने रजत और कांस्य पदकों के जरिए अपनी चुनौती बनाए रखी है। तीसरे दिन कुल 24 स्वर्ण, 24 रजत और 24 कांस्य पदकों का वितरण हुआ। प्रतियोगिता अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है, जहां आने वाले दिनों में मुकाबले और भी ज्यादा रोमांचक होने की संभावना है।

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कोरबा में मेडिकल स्टोर्स पर सख्त कार्रवाई, 3 के लाइसेंस सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। जांच के दौरान इन दुकानों में बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित और नशीली दवाइयों की बिक्री समेत कई अनियमितताएं पाई गई थीं। कार्रवाई के तहत हरदी बाजार स्थित अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर्स, पाली के जीके मेडिकल स्टोर्स और सोहागपुर के गर्वित मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं। विभाग ने पहले इन दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। निलंबन अवधि के दौरान ये दुकानें किसी भी प्रकार की दवाइयों का क्रय-विक्रय नहीं कर सकेंगी। इसके अलावा, औषधि विभाग ने हाल ही में जिले के कई अन्य मेडिकल स्टोर्स की भी जांच की थी। इनमें बालको के मिश्रा मेडिकल स्टोर्स, ओम सांई मेडिकल, भैसमा के मेनन मेडिकल, जायसवाल मेडिकल, मोनिशा मेडिकल, प्रिशा मेडिकल (ढेलवाडीह) और छुरी के मारुति मेडिकल स्टोर्स शामिल हैं। इन दुकानों में भी खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ियां मिलने पर नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि नशीली दवाओं का बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री करना कानूनन अपराध है। इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जिलेभर में अभियान चलाएगी। वहीं, निरीक्षण के दौरान कुछ मेडिकल स्टोर्स से दवाइयों के नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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फर्जी CBI अधिकारी बनकर रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पीड़ित से अलग-अलग खातों में कई किश्तों में रकम ट्रांसफर करवाई। मामला पुसौर थाना क्षेत्र का है। ग्राम जतरी निवासी 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक को अक्टूबर 2025 में अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर मुंबई में फर्जी खाता खुला है और वे जांच के दायरे में हैं। साथ ही उन्हें गोपनीयता बनाए रखने और सहयोग करने के लिए कहा गया, नहीं तो गिरफ्तारी की धमकी दी गई। ठगों की बातों में आकर शिक्षक ने 25 से 29 अक्टूबर के बीच UPI, RTGS और अन्य माध्यमों से 12 किश्तों में कुल 23.28 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए और धमकियां दीं, जिससे पीड़ित घबरा गए और 30 अक्टूबर को अपने बेटे को पूरी जानकारी दी। इसके बाद बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और संदिग्ध बैंक खातों व मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई। जांच के दौरान आरोपियों का लोकेशन कर्नाटक के बेंगलुरु में मिला। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से विग्नेश प्रकाश (29) और स्टीफन थॉमस (54) को गिरफ्तार किया। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह कर्नाटक के साथ-साथ दुबई से भी संचालित हो रहा था। मास्टरमाइंड फिरोज खान उर्फ डॉम्निक फिलहाल फरार है। वह फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को गिरोह से जोड़ता था और डिजिटल अरेस्ट, आधार-सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए देशभर में ठगी करता था। पुलिस ने आरोपियों के खातों में जमा 17 लाख रुपए से अधिक की रकम होल्ड कर दी है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है।

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बिलासपुर का श्री बजरंग पंचायत मंदिर: जहां आस्था के साथ मिलता था न्याय

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित श्री बजरंग पंचायत मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की अनोखी परंपरा का प्रतीक भी रहा है। यहां वर्षों से हनुमानजी को साक्षी मानकर पंचायत लगाई जाती थी, जिसमें हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होकर फैसलों को स्वीकार करते थे। मगरपारा-तालापारा इलाके में स्थित इस मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना बताया जाता है। उस दौर में जब अदालतों तक पहुंच आसान नहीं थी, तब लोग अपने विवाद लेकर यहां आते थे और पंचायत द्वारा दिए गए निर्णय को अंतिम मानते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा अंग्रेजी शासनकाल में शुरू हुई थी। उस समय मंदिर का वर्तमान ढांचा नहीं था, बल्कि खुले स्थान पर ही हनुमानजी की स्थापना थी। वहीं पर समाज के बुजुर्ग और प्रमुख लोग बैठकर पंचायत करते थे और भगवान को साक्षी मानकर निष्पक्ष फैसला सुनाते थे। समय के साथ यह स्थान “बजरंग पंचायत मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध हो गया, क्योंकि यहां आस्था के साथ न्याय भी मिलता था। खास बात यह थी कि इस पंचायत में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदाय के लोग शामिल होते थे और बिना किसी भेदभाव के निर्णय लिए जाते थे। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय शहर में केवल सिटी कोतवाली थाना ही था, लेकिन लोग पुलिस या अदालत जाने के बजाय इस पंचायत पर अधिक भरोसा करते थे। यहां दिए गए फैसले को सभी समुदायों द्वारा सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाता था। आज भी यह मंदिर आपसी भाईचारे, विश्वास और निष्पक्ष न्याय की उस परंपरा की याद दिलाता है, जिसने समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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BALRAMPUR, Chhattisghar

दुर्ग में ऑनलाइन सट्टा गिरोह पर बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अतिरिक्त आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी पहले पकड़े गए सात आरोपियों के साथ मिलकर संगठित तरीके से सट्टा संचालन कर रहे थे। जामुल थाना क्षेत्र में सक्रिय इस गिरोह का खुलासा पहले हुई छापेमारी में हुआ था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल डेटा के आधार पर भिलाई और रायपुर के अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर परमेश गेडाम, शिवा वैष्णव उर्फ समीर, मोहम्मद असलम और सत्यपाल पासवान को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी सट्टा खेलने के लिए आईडी उपलब्ध कराने, पैसों के लेन-देन का हिसाब रखने और तकनीकी सहायता देने जैसे काम कर रहे थे। गिरोह सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पुलिस से बचते हुए अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन और 65 हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, DURG-RAIPUR

छत्तीसगढ़ में युवक ने दो लड़कियों से एक साथ शादी, आदिवासी समाज ने जताया विरोध

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक विवादित मामला सामने आया है, जहां हितेश यादव नामक युवक ने एक ही समारोह में दो लड़कियों से शादी की। युवक ने दोनों दुल्हनों के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए और जीवन भर साथ रहने की कसमें खाईं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तेजी से ध्यान खींचा और आदिवासी समाज में विरोध की लहर पैदा कर दी। आदिवासी समाज ने कहा कि यह विवाह उनकी परंपराओं और सामाजिक नियमों के विपरीत है। समाज के नेताओं का आरोप है कि युवक ने दोनों लड़कियों को बहला-फुसलाकर शादी के लिए राजी किया। उन्होंने प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन समय रहते कदम नहीं उठाता है, तो वे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं। शादी की पूरी रस्में पारंपरिक तरीके से हुईं जानकारी के अनुसार, हितेश यादव एक कृषक हैं। उनकी पहली पत्नी फुलबती शंकरपुर की रहने वाली हैं और दूसरी पत्नी यामिनी बनियागांव की निवासी हैं। दूल्हे ने बताया कि शुरुआत में पहली लड़की ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था, जबकि दूसरी ने तुरंत हां कह दी। इसके बाद पहली लड़की ने भी सहमति दे दी। शादी की सभी रस्में विधिपूर्वक हुईं। 23 मार्च 2026 को हल्दी और मंडपाच्छादन की रस्में संपन्न हुईं, जबकि 24 मार्च को पाणिग्रहण, लग्न और आशीर्वाद समारोह आयोजित किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों परिवारों की सहमति और समाज के बुजुर्गों के आशीर्वाद से यह विवाह हुआ, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। आदिवासी समाज का विरोध सर्व आदिवासी समाज, ब्लॉक फरसगांव के अध्यक्ष ईश्वर कोर्राम और अन्य पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आदिवासी समाज इस विवाह का समर्थन नहीं करता। उन्होंने इसे नैतिक और सामाजिक दृष्टि से अनुचित बताया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि युवक ने दोनों युवतियों को बहला-फुसलाकर शादी की है और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। अधिवक्ता निपेंद्र मिश्रा ने बताया कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकता, जब तक कि पहली पत्नी से विधिवत तलाक न लिया गया हो। हालांकि, आदिवासी समाज में कभी-कभी एक से अधिक विवाह की परंपरा देखी जाती है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: आबकारी अधिकारी समेत 59 लोगों की ED कोर्ट में पेशी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जांच में आज ईडी (Enforcement Directorate) की विशेष अदालत में कुल 59 लोग पेश हुए। इन लोगों में आबकारी विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। सुबह से ही कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जमा रही। इससे पहले पिछले तीन दिनों में EOW (Economic Offences Wing) ने दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके ट्रक जब्त किए थे। वहीं, कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में काम करने वाले अकाउंटेंट समेत चार कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए EOW दफ्तर तलब किया गया था। शराब घोटाले की जांच कर रही एजेंसियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की तलाश कर रही हैं, जो कई सालों से फरार हैं। एजेंसियों का मानना है कि उनके दस्तावेज और भूमिका मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। मामला क्या है? EOW ने इस मामले में ACB (Anti-Corruption Bureau) में FIR दर्ज की है। FIR में लगभग 3200 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र है। इसमें राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। ED की जांच में सामने आया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व में सिंडिकेट के जरिए यह घोटाला किया गया। घोटाले की रणनीति घोटाले को तीन श्रेणियों में बांटा गया: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद में 100 रुपए कमीशन लिया गया। इसके लिए शराब की कीमत बढ़ाई गई और ओवर बिलिंग की अनुमति दी गई। B: नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्रीसिंडिकेट ने सरकारी दुकानों में नकली होलोग्राम वाली शराब बेची। इसके लिए खाली बोतलें डिस्टलरी तक पहुंचाने और परिवहन की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उनके भतीजे अमित सिंह को दी गई। शराब बिक्री के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया और दुकानों में बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किया गया। शुरुआत में प्रति पेटी की कीमत 2880 रुपए थी, बाद में इसे 3840 रुपए कर दिया गया। C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया में बदलावदेशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज के क्षेत्र को आठ जोन में बांटा गया। सिंडिकेट ने ज़ोन के आधार पर कमीशन वसूला। तीन वित्तीय वर्षों में डिस्टलरीज ने लगभग 52 करोड़ रुपए C पार्ट के रूप में सिंडिकेट को दिए। अधिकारियों का मानना है कि अब तक मिले साक्ष्य इस घोटाले की गंभीरता को साबित करते हैं और आगे और बड़े खुलासे संभव हैं।

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छत्तीसगढ़: कोरबा में दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर मिली, पुलिस जांच में

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम बेलाकछार में गुरुवार सुबह दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर लटकी मिली। मृतकों की पहचान प्रमोद कंवर (27) और अमित माथुर (28) के रूप में हुई है। दोनों शादीशुदा थे और इसी गांव में रहते थे। ये दोनों बालको पावर प्लांट में ठेका कर्मी के रूप में काम करते थे। पुलिस फिलहाल मामले की सुसाइड और मर्डर दोनों एंगल से जांच कर रही है। घटना से पहले की स्थिति जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से प्रमोद और अमित काम पर नहीं जा रहे थे। बुधवार दोपहर करीब 1 बजे प्रमोद अमित के घर पहुंचे। इसके बाद दोनों घूमने जाने की बात कहकर घर से निकले, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। परिजन उनकी खोजबीन में जुट गए, कॉल करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। पहले उन्हें लगा कि दोनों दोस्त आसपास होंगे, लेकिन समय बीतने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला। ग्रामीणों ने देखा शव गुरुवार सुबह कुछ ग्रामीण जंगल की ओर जा रहे थे, तभी उनकी नजर पेड़ पर लटके हुए युवकों पर पड़ी। तुरंत ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस और मृतकों के परिजन मौके पर पहुंचे और शवों का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। बालको थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों व ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है।कपड़ों से लटके शव, मर्ग कायम पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों की लाश कपड़ों से लटकी मिली। मामले की गहनता को देखते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। आगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हुई थी ऐसी घटना याद दिला दें कि करीब एक महीने पहले, रायगढ़ जिले में भी दो दोस्तों की लाश एक ही फंदे पर लटकी मिली थी। मामला पुसौर थाना क्षेत्र के चिखली गांव का था। दोनों ने एक दिन पहले जन्मदिन मनाया था और शराब पी थी। अगले दिन सुबह उन्हें एक ही फंदे पर लटका पाया गया। तब भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह खुदकुशी थी या हत्या।

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