February 2026

5 दिन में सुधार का वादा, 42 दिन बाद भी हालात जस के तस: खारुन नदी में मिल रहा गंदा पानी

Raipur की जीवनदायिनी Kharun River में गंदे पानी का प्रवाह अब भी जारी है। 4 जनवरी को निरीक्षण के दौरान 5 दिन में सुधार का दावा किया गया था, लेकिन 42 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। 261 करोड़ के एसटीपी बेअसर? शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले सीवेज को रोकने के लिए 261 करोड़ रुपये की लागत से तीन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए गए थे। उद्देश्य था कि गंदा पानी सीधे खारुन नदी में न पहुंचे।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चिंगरी नाला समेत अन्य स्थानों से गंदा पानी अब भी सीधे नदी में मिल रहा है। निरीक्षण में जताई गई थी नाराजगी 4 जनवरी को स्थानीय विधायक Rajesh Munat, महापौर Meenal Choubey और निगम आयुक्त Vishwadeep अधिकारियों के साथ चिंगरी नाला और चंदनीडीह एसटीपी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नदी में मिलते गंदे पानी को देखकर नाराजगी जताई गई और 5 दिन में व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया था। सफाई और स्क्रीनिंग रॉड तक सीमित कार्रवाई निर्देश के बाद चिंगरी नाले की सफाई कराई गई और स्क्रीनिंग रॉड लगा दी गई। अधिकारियों का दावा है कि इससे कचरा रुकता है और पानी एसटीपी की ओर जाता है। हालांकि स्थानीय स्तर पर अब भी नाले का गंदा पानी सीधे खारुन में मिलते देखा जा रहा है। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि? विधायक राजेश मूणत का कहना है कि खारुन शहर की लाइफलाइन है और इसे स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि पिछली सरकार ने बिना ठोस प्लानिंग के प्लांट तैयार किया था। उन्होंने सुधार के लिए आवश्यक फंड देने की बात कही है। महापौर मीनल चौबे ने बताया कि पाइपलाइन पर वॉल्व चैंबर बनाना जरूरी है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और मॉनिटरिंग की जा रही है। निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, चैंबर वॉल्व निर्माण के प्रस्ताव पर स्टेट टीम सर्वे कर चुकी है और लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। सवाल अब भी कायम खारुन नदी शहर की पहचान और जलस्रोत दोनों है। ऐसे में इसका प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है।

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अंबिकापुर-बनारस स्टेट हाईवे पर बर्थडे पार्टी बनी मुसीबत, सड़क जाम कर जश्न; 7 पर मामला दर्ज

सरगुजा–सूरजपुर जिले की सीमा पर स्थित अंबिकापुर-बनारस स्टेट हाईवे पर कुछ युवकों का जन्मदिन मनाने का तरीका आम लोगों के लिए परेशानी बन गया। युवकों ने हाईवे के बीचों-बीच गाड़ियां खड़ी कर यातायात रोक दिया, आतिशबाजी की और कार की बोनट पर केक काटा। करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रही, जिससे दोनों ओर लगभग एक किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई। जाम में एक एम्बुलेंस भी फंसी नजर आई। यह मामला जयनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लटोरी पुलिस चौकी इलाके का है। जानकारी के मुताबिक 16 फरवरी की रात अंबिकापुर के कुछ युवक सरगुजा–सूरजपुर सीमा के चठिरमा क्षेत्र स्थित एक ढाबे में जन्मदिन समारोह मनाने पहुंचे थे। ढाबे में पार्टी के बाद वे हाईवे पर आ गए और चारपहिया वाहन सड़क के बीच खड़े कर दोनों तरफ से ट्रैफिक रोक दिया। इसके बाद युवकों ने पटाखे फोड़े और सड़क पर ही जश्न मनाया। इस दौरान हाईवे पर आवाजाही पूरी तरह बाधित रही। वायरल वीडियो में एम्बुलेंस भी जाम में फंसी दिखाई दे रही है, हालांकि उसमें मरीज था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। करीब 30 मिनट बाद युवक वहां से हटे, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका। वीडियो वायरल होने पर पुलिस सक्रिय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने संज्ञान लिया। लटोरी पुलिस चौकी प्रभारी अरुण गुप्ता ने बताया कि वायरल फुटेज के आधार पर 7 अज्ञात युवकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 285 और 126(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक मार्ग पर इस तरह का अवैध जश्न और यातायात अवरोध गंभीर अपराध है। वीडियो की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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राज्य में पहली बार व्यवस्थित गणना: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब तक 6 बाघों की पुष्टि

बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इस बार बाघों की गणना नियमानुसार और व्यापक स्तर पर की जा रही है। वन विभाग के अनुसार अब तक यहां 6 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। गणना का यह अभियान अप्रैल तक जारी रहेगा और अधिकारियों को उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट में संख्या और बढ़ सकती है। करीब 2799 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व वर्ष 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। घने साल व मिश्रित वन, इंद्रावती नदी का विस्तृत क्षेत्र और समृद्ध जैव विविधता इसे देश के महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में शामिल करते हैं। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, जंगली कुत्ता (ढोल), गौर, भालू, सांभर, चीतल और वन भैंसा जैसी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। नक्सली प्रभाव के बाद बदले हालात पिछले वर्षों में क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के कारण कई कोर एरिया वनकर्मियों के लिए जोखिमभरे रहे। ट्रैप कैमरे लगाने और नियमित मॉनिटरिंग में कठिनाई आती थी, जिससे सटीक गणना संभव नहीं हो पाती थी। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद पहली बार नेशनल पार्क क्षेत्र में निर्भय होकर बड़े पैमाने पर सर्वे किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक से हो रही पहचान वन विभाग ने कोर और बफर जोन में बड़ी संख्या में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। पगमार्क विश्लेषण, कैमरा ट्रैप तस्वीरों और डीएनए सैंपलिंग के आधार पर बाघों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक पहले यहां पांच बाघों की पुष्टि थी, जबकि इस बार अब तक छह बाघ चिन्हित किए जा चुके हैं। यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। देशव्यापी आकलन में इंद्रावती की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप का अहम हिस्सा है। संरक्षण पर बढ़ा फोकस वन विभाग ने गश्त बढ़ाने, अवैध शिकार पर सख्ती और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए हैं। ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी मिल सके। वाइल्डलाइफ सीसीएफ स्टाइलो मंडावी ने कहा कि अप्रैल में अंतिम आंकड़े जारी किए जाएंगे, लेकिन शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं। यदि सुरक्षा और संरक्षण के प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में इंद्रावती टाइगर रिजर्व फिर से मजबूत बाघ आबादी वाला क्षेत्र बन सकता है।

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दो साल का रिपोर्ट कार्ड: पीक आवर्स में बिजली बचाने पर मिलेगी छूट, रायपुर-बिलासपुर में लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

राज्य के ऊर्जा विभाग ने अपने दो साल के कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए बिजली प्रबंधन से जुड़ी कई अहम योजनाओं की जानकारी दी। विभाग के अनुसार सुबह 5 से 8 बजे और शाम 5 से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। इन पीक आवर्स में आपूर्ति का दबाव बढ़ने से पावर कंपनियों को निजी स्रोतों से 8–10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि इस अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए “टाइम ऑफ डे (TOD)” मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को पीक समय में खपत कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि उपभोक्ता निर्धारित समय में उपयोग घटाते हैं तो उन्हें मासिक बिल में 2 से 3 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। विभाग उपभोक्ताओं को मैसेज और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भारी खपत वाले उपकरण—जैसे वॉशिंग मशीन और प्रेस—का उपयोग पीक समय में टालने की सलाह देगा। सौर ऊर्जा उत्पादन सुबह-शाम कम होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है। इसी को संतुलित करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनसे हर आधे घंटे और प्रतिदिन की खपत की जानकारी मिल रही है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप के जरिए अपनी बिजली खपत की निगरानी कर सकते हैं और अनावश्यक उपयोग कम कर सकते हैं। रायपुर और बिलासपुर में अंडरग्राउंड होंगी बिजली लाइनें राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में बिजली लाइनों को भूमिगत करने की बड़ी योजना बनाई गई है। रायपुर में 5394 किमी लाइन को अंडरग्राउंड करने पर लगभग 7600 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिलासपुर में 2150 किमी लाइन को करीब 3100 करोड़ रुपये में भूमिगत किया जाएगा। रायपुर के नयापारा में 18 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला जीआईएस आधारित 33 केवी सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा। साथ ही 2027-28 तक 2000 मेगावॉट क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना है, जिसमें से 1260 मेगावॉट के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। इससे दिन में सौर ऊर्जा से बनी बिजली का उपयोग रात में किया जा सकेगा। 524 गांवों में ग्रिड विस्तार के जरिए बिजली पहुंचाई जाएगी। कोरबा में राखड़ बांध पर 32 मेगावॉट की सौर परियोजना (बैटरी स्टोरेज सहित) स्थापित करने की भी तैयारी है। एनटीपीसी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं ऊर्जा विभाग ने बताया कि करीब 2000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए NTPC Green Energy Limited और राज्य की पावर जनरेशन कंपनी के साथ संयुक्त कंपनी बनाई गई है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों के सहयोग से 32100 मेगावॉट क्षमता के बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए हैं। ऊर्जा सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विकसित करना लक्ष्य है। इस अवसर पर वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला और जनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, प्रो. मनोज दयाल बने कुलपति

छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए प्रोफेसर मनोज दयाल की कुलपति पद पर नियुक्ति की घोषणा की है। प्रोफेसर मनोज दयाल वर्तमान में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग से जुड़े हुए हैं। वे लंबे समय से मीडिया शिक्षा और अकादमिक प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके अनुभव और शैक्षणिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम 2004 तथा संशोधित अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति का कार्यकाल, सेवा शर्तें और अधिकार संबंधित अधिनियम के नियमों के अनुरूप होंगे। नई नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी और पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोध, प्रशिक्षण और मीडिया अध्ययन से जुड़ी गतिविधियों में भी नई ऊर्जा आने की संभावना जताई जा रही है।

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वेतन विसंगति पर KVK अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल तेज, वार्ता विफल; अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी और कर्मचारी वेतन विसंगति, सेवा-लाभ की बहाली और पिछले 18 महीनों से लंबित देयकों के मुद्दे पर हड़ताल पर डटे हुए हैं। पांच दिवसीय कामबंद आंदोलन का आज पांचवां दिन है। चौथे दिन कुलपति के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं। कुलपति से वार्ता में नहीं निकला समाधान धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा पहुंचे और कर्मचारियों से चर्चा की। उनके नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात की, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि बैठक में ठोस और समयबद्ध समाधान नहीं दिया गया। कभी मामले को राज्यपाल स्तर का बताया गया तो कभी वित्त विभाग और राज्य शासन का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल दी गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है। राजभवन के सामने धरने की चेतावनी फेडरेशन ने साफ कहा है कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर राजभवन (लोकभवन) के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। ICAR के नए निर्देशों से बढ़ी समस्या विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि KVK पूरी तरह से Indian Council of Agricultural Research (ICAR) से वित्त पोषित हैं। 20 अगस्त 2024 को जारी नए निर्देशों के बाद एनपीएस अंशदान, पेंशन अनुदान और अन्य भत्तों में कटौती कर दी गई। फिलहाल ICAR केवल मूल वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता ही जारी कर रहा है। देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं और नए नियमों के बाद सभी जगह पूर्ण वेतन भुगतान में कठिनाई आ रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिया गया वेतन कर्मचारियों की याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपने संसाधनों से 1.6 करोड़ रुपए खर्च कर कर्मचारियों को पूर्ववत वेतन दिया। राज्य शासन से 3.50 करोड़ की मांग विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसकी स्वयं की आय सीमित है। इसलिए 2025-26 के लिए राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता मांगी गई है, ताकि वेतन भुगतान नियमित हो सके। भविष्य में यदि ICAR या राज्य शासन से पूरी राशि मिलती है, तो कर्मचारियों को सभी भत्तों सहित वेतन दिया जाएगा। सेवानिवृत्ति आयु पर स्थिति स्पष्ट प्रशासन के अनुसार KVK कर्मचारी गैर-शिक्षकीय संवर्ग में आते हैं और उनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। विश्वविद्यालय में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु केवल शिक्षकों के लिए लागू है। परिसर में हड़ताल पर रोक विश्वविद्यालय ने परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक का कारण बताते हुए कहा कि यहां कन्या छात्रावास संचालित है और परीक्षाएं जारी हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

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महादेव घाट मंदिर में महिला की चेन चोरी, भीड़ का फायदा उठाकर वारदात

राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हटकेश्वर मंदिर परिसर में दर्शन करने पहुंची एक महिला के गले से सोने की चेन चोरी होने का मामला सामने आया है। मंदिर में उमड़ी भीड़ का फायदा उठाकर अज्ञात चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। दर्शन के दौरान टूटी चेन जानकारी के अनुसार, महिला गुरुवार को महादेव घाट मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए गई थीं। उन्होंने गले में सोने की चेन पहन रखी थी। मंदिर परिसर में अधिक भीड़ होने के दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी चेन तोड़ ली। घर लौटने के बाद महिला ने घटना की जानकारी अपने बेटे कोणाल देवरनकर को दी। इसके बाद बेटे ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया मामला मामले की सूचना मिलते ही डीडी नगर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी रविंद्र यादव ने बताया कि शिकायत के आधार पर विवेचना जारी है और आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लोगों को सतर्क रहने की अपील भी की गई है।

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रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव, पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर मंथन

छत्तीसगढ़ के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विषयों पर समन्वित चर्चा के लिए रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम 19 और 20 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड द्वारा आरएसबी कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन 10 जिलों के अधिकारी शामिल कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर विवेक शर्मा (सेवानिवृत्त) ने की। पहले दिन राज्य के दस जिलों—रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, जशपुर, अंबिकापुर, बैकुंठपुर, जगदलपुर और कांकेर—के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न जिलों में संचालित सैनिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आ रही समस्याओं, चुनौतियों और समाधान के प्रयासों को साझा किया। उद्देश्य यह है कि सभी जिलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो और कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके। लंबित मामलों पर होगी विशेष चर्चा कॉन्क्लेव के दूसरे दिन 20 फरवरी को पूर्व सैनिक संगठनों और संबंधित विभागों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान COSA, National Cadet Corps (NCC), Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS), Canteen Stores Department (CSD), स्टेशन मुख्यालय और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। बैठक में पूर्व सैनिकों की लंबित समस्याओं, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पूर्व सैनिकों को मिलेगा सीधा लाभ राज्य में पहली बार आयोजित यह कॉन्क्लेव पूर्व सैनिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह के समन्वित प्रयासों से योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

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रायपुर कलेक्टर ने धरसींवा में स्कूलों और योजनाओं का किया निरीक्षण, मध्यान्ह भोजन चखकर परखी गुणवत्ता

राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने धरसींवा विकासखंड का दौरा कर शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न विभागीय योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था, मत्स्य पालन केंद्र और पशुपालन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। स्कूल पहुंचकर बच्चों से की बातचीत कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला कांदुल में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ मध्यान्ह भोजन का स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता जांची। उन्होंने स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद शासकीय प्राथमिक शाला सेजबहार में बच्चों की कॉपियां देखीं और उनसे पढ़ाई के विषय में सवाल किए। उन्होंने बच्चों से पूछा कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है और मध्यान्ह भोजन में क्या-क्या परोसा जाता है। अधिकारियों को शिक्षा स्तर और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 17 टन मासिक उत्पादन सेजबहार में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत संचालित मत्स्य पालन केंद्र का निरीक्षण किया। यहां पांच नर्सरी और चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। नर्सरी में तैयार मछली बीज को तालाबों में छोड़ा जाता है। हितग्राहियों ने बताया कि इस केंद्र से हर महीने लगभग 17 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। कलेक्टर ने जल संरक्षण और अधिक पौधारोपण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र की समीक्षा डॉ. गौरव सिंह ने सेजबहार स्थित कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1047 गाय और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है, जिससे करीब 450 उच्च नस्ल के बछड़े-बछियों का जन्म हुआ है। कलेक्टर ने टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी ली और खुरहा-चपका बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।

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