January 2026

मुनाफे का झांसा, फर्जी ऐप का जाल: दुर्ग में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 24 लाख की साइबर ठगी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शेयर ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 24 लाख रुपये की साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में फर्जी शेयर-ट्रेडिंग ऐप के जरिए एक युवक से 13.90 लाख रुपये ठगे गए, जबकि दूसरे मामले में QR कोड और लिंक के माध्यम से 11.15 लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाना दुर्ग में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। व्हाट्सऐप लिंक से शुरू हुआ फर्जी ट्रेडिंग का खेल खुर्सीपार भिलाई निवासी मनीष कुमार गजपाल (39) ने बताया कि नवंबर 2025 में उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया। इसमें ट्रेडिंग ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने पर वे “Stock Flights D2” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े, जहां लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे थे। दिसंबर 2025 में ग्रुप के निर्देश पर उनसे GTSS LLC नामक ऐप इंस्टॉल कराया गया, जिसमें निवेश और कथित मुनाफा दिखाया जाता था। भरोसा दिलाने के लिए शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपये का एक बार विड्रॉल भी कराया गया। इसके बाद अलग-अलग तिथियों में कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। 31 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच पीड़ित से कुल 13.90 लाख रुपये जमा कराए गए। जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की, तो “आईपीओ पेंडिंग” बताकर और पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया। लगातार भुगतान के बावजूद रकम नहीं मिलने पर पीड़ित को ठगी का शक हुआ और उन्होंने 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। QR कोड और लिंक से दूसरी ठगी, GST के नाम पर मांग दूसरा मामला कोहका भिलाई क्षेत्र का है। पीड़ित शुभम जायसवाल (29) को 20 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “ब्रड सिक्योरिटी” कंपनी का प्रतिनिधि बताया और निवेश पर मोटे मुनाफे का ऑफर दिया। लिंक भेजकर QR कोड के जरिए ट्रांजेक्शन कराए गए। शुरुआत में 10 हजार रुपये निवेश पर 5 हजार रुपये का मुनाफा दिखाकर भरोसा दिलाया गया। इसके बाद 23 दिसंबर से 6 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों और QR कोड के माध्यम से 11.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इस दौरान कुछ रकम विड्रॉल भी कराई गई, जिससे ठगों पर भरोसा और बढ़ गया। 7 जनवरी 2026 को लिंक आईडी में करीब 16 लाख रुपये दिखने लगे। जब पीड़ित ने 5 लाख रुपये विड्रॉल करने की कोशिश की, तो 18% GST जमा करने का मैसेज आया। शक होने पर उन्होंने भुगतान नहीं किया। बाद में संपर्क करने पर एफआईआर की धमकी दी गई, जिससे ठगी का खुलासा हुआ। साइबर पुलिस कर रही जांच दोनों मामलों में साइबर थाना दुर्ग ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(2), 318(4) और 336(3) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ऐप्स, लिंक और डिजिटल ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संगठित साइबर ठग गिरोह की आशंका जताई जा रही है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Crime, State

कान में ब्लूटूथ, कपड़ों में डिवाइस: SSC परीक्षा में हाईटेक नकल करते राजस्थान का युवक गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में SSC द्वारा आयोजित दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल का मामला सामने आया है। सिम कार्ड से ऑपरेट होने वाले ब्लूटूथ डिवाइस को कान में छिपाकर और कपड़ों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर परीक्षा दे रहा राजस्थान का अभ्यर्थी रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी को परीक्षा केंद्र प्रभारी ने पुलिस के हवाले कर दिया। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। संदेह हुआ तो घबराया अभ्यर्थी शुक्रवार (9 जनवरी) को सीपत के फरहदा स्थित जीटीबी कॉलेज में SSC द्वारा आयोजित हेड कांस्टेबल (लिपिक) दिल्ली पुलिस भर्ती 2025 की परीक्षा चल रही थी। शाम 4:30 से 6:30 बजे की शिफ्ट के दौरान केंद्र प्रभारी विजय कुमार लहरे को एक अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब वह उसके नजदीक पहुंचे तो अभ्यर्थी घबरा गया। तलाशी लेने पर उसके कान से सिम-ऑपरेटेड ब्लूटूथ और कपड़ों में छिपाए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए, जिनकी मदद से वह प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर रहा था। राजस्थान का रहने वाला है आरोपी पकड़े गए युवक की पहचान मोहित मीना (25) के रूप में हुई है, जो राजस्थान के दौसा जिले के बसवा थाना क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में सामने आया है कि वह सभी डिवाइस राजस्थान से ही लेकर बिलासपुर पहुंचा था और उनका उपयोग कर परीक्षा में नकल कर रहा था। मामला दर्ज, न्यायिक रिमांड पर भेजा गया केंद्र प्रभारी की शिकायत पर सीपत पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बड़े नकल गिरोह की आशंका कड़ी सुरक्षा और जांच व्यवस्था के बावजूद आरोपी का परीक्षा केंद्र के भीतर डिवाइस ले जाना पुलिस के लिए भी सवाल बन गया है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के पीछे किसी संगठित नकल गिरोह की भूमिका हो सकती है। फिलहाल आरोपी के मोबाइल फोन और जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तकनीकी जांच की जा रही है।

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वीजा खत्म, फिर भी सालों से रायपुर में रह रहीं थीं विदेशी युवतियां: पुलिस हिरासत में, IB कर रही पूछताछ

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने दो विदेशी महिला नागरिकों को हिरासत में लिया है। दोनों महिलाएं उज़्बेकिस्तान की रहने वाली बताई जा रही हैं और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद लंबे समय से रायपुर में रह रही थीं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। फिलहाल पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम दोनों महिलाओं से पूछताछ कर रही है। उनके पास मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। IPS–CSP स्तर के अफसर कर रहे जांच पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तेलीबांधा इलाके में दो विदेशी महिलाओं के लंबे समय से रहने की जानकारी मिली थी, लेकिन उनके वीजा और वैध निवास को लेकर संदेह बना हुआ था। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में महिलाओं ने खुद को उज़्बेकिस्तान का नागरिक बताया है। वे किस उद्देश्य से भारत आई थीं, किस श्रेणी का वीजा था और वह वर्तमान में वैध है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। पासपोर्ट-वीजा जब्त, FRRO से संपर्क पुलिस ने दोनों महिलाओं के पासपोर्ट, वीजा और पहचान से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि के लिए विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRRO) और संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया गया है। जरूरत पड़ने पर इमिग्रेशन विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि वीजा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहले भी रायपुर में सामने आ चुका है ऐसा मामला गौरतलब है कि करीब 11 महीने पहले भी रायपुर में एक विदेशी युवती की गिरफ्तारी हुई थी। तब वह अपने साथी के साथ शराब के नशे में तेज रफ्तार कार चला रही थी और VIP रोड पर स्कूटी सवार युवकों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें एक की मौत हो गई थी। उस मामले की जांच के दौरान पुलिस को बड़े सेक्स रैकेट नेटवर्क के संकेत भी मिले थे। घटना 6 फरवरी 2025 की रात की थी, जब उज़्बेकिस्तान के ताशकंद की रहने वाली युवती भारत सरकार लिखी कार चला रही थी और हादसे के बाद मौके पर हंगामा भी किया था।

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कुत्ते के नाम में ‘राम’ विकल्प बना विवाद की जड़: चौथी के पेपर पर बवाल, प्रधान पाठक निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल ने प्रदेशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। प्रश्न में ‘मोना के कुत्ते का नाम’ पूछा गया था, जिसके विकल्पों में बाला, शेरू, कोई नहीं के साथ ‘राम’ नाम भी शामिल था। इस प्रश्न पत्र को रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में परीक्षा के दौरान वितरित किया गया। जैसे ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि कुत्ते के नाम के विकल्प में ‘राम’ लिखे जाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्न पत्र तैयार करने वाली प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है, जबकि मॉडरेटर शिक्षिका को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ‘रामू’ लिखना था, टाइपिंग में गलती हो गई जांच के दौरान दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी-अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित में माफी मांगी है।प्रधान पाठक शिखा सोनी ने स्पष्टीकरण में कहा कि उनका आशय ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग के दौरान ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई मानवीय भूल बताया। वहीं, मॉडरेटर नम्रता वर्मा ने कहा कि उन्हें जो प्रश्न पत्र का सेट मॉडरेशन के लिए मिला, उसमें विकल्प पहले से मौजूद थे और उनसे भी यह त्रुटि नजरअंदाज हो गई। धार्मिक भावनाएं आहत होने की पुष्टि रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति ने प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और अंतिम मुद्रण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की। समिति की रिपोर्ट में माना गया कि राम हिंदू धर्म के आराध्य देव हैं, ऐसे में विकल्प के रूप में यह नाम देना अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र का निर्माण शासकीय प्राथमिक स्कूल नकटी (खपरी), तिल्दा की प्रधान पाठक शिखा सोनी ने किया था और मॉडरेशन सेजेस उच्च माध्यमिक विद्यालय फाफाडीह, रायपुर की सहायक शिक्षक नम्रता वर्मा ने किया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद, राजनीति भी गरमाई 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र वायरल हुआ। इसके अगले दिन NSUI रायपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। DEO हिमांशु भारती ने इसे विभागीय चूक मानते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है, जो तय समय में रिपोर्ट देगी और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा कि उनके जिले में जानकारी मिलते ही विवादित विकल्प को हटाकर अन्य प्रश्न पत्र बांटे गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। प्रिंटिंग को लेकर अलग-अलग दावे प्रश्न पत्र की छपाई को लेकर शिक्षा विभाग और प्रिंटिंग प्रेस के बीच भी बयानबाजी सामने आई है। DEO का कहना है कि गलत सेट छप गया, जबकि प्रिंटिंग हाउस संचालक ने दावा किया कि वही सामग्री छापी गई, जो विभाग से भेजी गई थी। NSUI ने इसे सिर्फ तकनीकी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा है कि यदि जांच के नाम पर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो संगठन आंदोलन करेगा।

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कैशियर की चालबाज़ी! ओम हॉस्पिटल से 11.41 लाख की हेराफेरी, अकाउंटेंट पर FIR

रायपुर। राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र स्थित ओम हॉस्पिटल में आर्थिक गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के कैशियर ने कथित तौर पर अपनी सहयोगी कर्मचारी की मदद से करीब 11.41 लाख रुपये की रकम अस्पताल के खाते से निकालकर परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दी। अस्पताल संचालक की शिकायत पर पुलिस ने अकाउंटेंट ओम प्रकाश गिर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सहयोगी महिला कर्मचारी को फिलहाल छोड़ दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ओम हॉस्पिटल के संचालक विनोद कुमार अग्रवाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके अस्पताल में ओम प्रकाश गिर पिछले करीब ढाई साल से कैशियर के पद पर कार्यरत है। उसके साथ काव्या वर्मा असिस्टेंट के तौर पर काम करती थी। जब अस्पताल की बिलिंग और अकाउंट की नियमित जांच की गई, तो खाते में जमा राशि कम पाई गई। इस पर कैशियर ओम प्रकाश से पूछताछ की गई, तो उसने रसीद भूल जाने जैसे बहाने बनाकर बात को टाल दिया। इसके बाद जब असिस्टेंट काव्या वर्मा से पूछताछ की गई, तो उसने खुलासा किया कि 9 अप्रैल से 10 जनवरी 2026 के बीच, ओम प्रकाश के कहने पर उसने अस्पताल का पैसा पहले अपने खाते में और फिर उसके बताए गए अन्य खातों में ट्रांसफर किया। 10 महीनों में कई किश्तों में ट्रांसफर पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब 10 महीनों के भीतर अलग-अलग किश्तों में अस्पताल की रकम ट्रांसफर की। इस पूरी हेराफेरी से अस्पताल प्रबंधन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और पूरे लेन-देन की बैंकिंग जांच की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और व्यावसायिक दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जोन-9 और जोन-5 क्षेत्र में की गई। जोन-9 में 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन कराई गई मुक्त नगर निगम के नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन-9 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 में अभियान चलाकर करीब 3000 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जांच में सामने आया था कि यहां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान और मकान का निर्माण किया गया था। जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा सीनियर के निर्देश पर कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैय्यद जोहेब और उप अभियंता अतुल बंसल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से अवैध निर्माण को तोड़ा गया। जोन-5 में नियमों के विपरीत निर्माण पर चला हथौड़ा इसी तरह जोन-5 क्षेत्र में भी नगर निगम ने अनुमति के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर कार्रवाई की। कुशालपुर रिंग रोड नंबर-1 इलाके में निर्माणाधीन भवन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तोड़कर हटाया गया। यह कार्रवाई जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देश पर की गई, जिसमें कार्यपालन अभियंता लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश रामटेके और उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर मौजूद रहे। अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा अभियान नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या नियमों के खिलाफ निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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बिना चीर-फाड़ हार्ट सर्जरी से बुजुर्ग को मिला नया जीवन, स्टेंट से बनी ‘चिमनी’ ने बचाई जान

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में डॉक्टरों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी किए एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई। मरीज के हार्ट की बंद नसों में स्टेंट डालकर ‘चिमनी तकनीक’ अपनाई गई और ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन (TAVI) के जरिए नया वॉल्व लगाया गया। यह जटिल प्रोसीजर 2 जनवरी को किया गया, जिसकी अनुमानित लागत करीब 18 लाख रुपए है। यह संपूर्ण इलाज मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया है। ओपन हार्ट सर्जरी थी बेहद जोखिम भरी रायपुर निवासी बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वॉल्व पूरी तरह कैल्शियम से सख्त हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर सिर्फ 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती थी। ऐसे में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने बिना चीर-फाड़, पैर की नस के जरिए वॉल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। ‘चिमनी तकनीक’ से टला बड़ा खतरा मरीज की नसें पतली और कैल्शियम युक्त होने के कारण वॉल्व को हार्ट तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। इसके अलावा जन्मजात संरचनात्मक समस्या के चलते कोरोनरी धमनियां वॉल्व के बेहद करीब थीं, जिससे प्रोसीजर के दौरान धमनियों के बंद होने का खतरा बना हुआ था। डॉक्टरों ने एहतियातन दोनों कोरोनरी धमनियों में पहले स्टेंट डालकर ‘चिमनी स्ट्रक्चर’ तैयार किया, ताकि वॉल्व डालते समय ब्लड फ्लो बाधित न हो। अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में अचानक ब्लॉकेज हो गया, जिसे दाहिने पैर से तुरंत बलून एंजियोप्लास्टी कर ठीक किया गया। चार घंटे के ऑपरेशन के बाद चमत्कारी सुधार करीब 4 घंटे तक चली इस अत्यंत जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वॉल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया। वहीं हार्ट की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। हृदय की धड़कन स्थिर रही और दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य पाया गया। कार्डियोलॉजी विभाग की बड़ी उपलब्धि मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग में 2600 से अधिक जटिल हार्ट प्रोसीजर किए गए हैं। वर्ष 2009 में जहां यह विभाग मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ था, वहीं आज यह सालाना 2000 से अधिक हार्ट प्रोसीजर कर रहा है। प्रोसीजर टीम में ये रहे शामिल इस सफल सर्जरी में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, जूनियर रेजिडेंट डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव, डॉ. प्रिस, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. बालस्वरूप साहू, डॉ. संकल्प दीवान, कैथ लैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद, स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र और एमएसडब्ल्यू खोगेंद्र साहू शामिल रहे।

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9 माह की गर्भवती शिक्षिका से मारपीट का आरोप: प्राचार्य पर थप्पड़ और पेट में मुक्का मारने की शिकायत अंबिकापुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम बसकेपी स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कार्यरत एक 9 माह की गर्भवती शिक्षिका ने स्कूल के प्राचार्य पर थप्पड़ मारने और पेट में मुक्का मारने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित शिक्षिका ने इस घटना की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से करते हुए प्राचार्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। छुट्टी को लेकर हुआ विवाद शिक्षिका अनिमा लकड़ा के अनुसार, बलरामपुर जिले में पड़ रही अत्यधिक ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा छुट्टी घोषित की गई थी। इसी के तहत उन्होंने 6 जनवरी को ऑनलाइन माध्यम से अवकाश लिया था। अगले दिन 7 जनवरी को वह समय से पहले, सुबह 10 बजे से पूर्व स्कूल पहुंच गईं, इसके बावजूद प्राचार्य ने उन्हें उपस्थिति रजिस्टर में अनुपस्थित दर्ज कर दिया। जब शिक्षिका ने इसका कारण पूछा तो प्राचार्य मंगना राम ने कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू कर दी और फिर उनके साथ मारपीट की। शिक्षिका का आरोप है कि प्राचार्य ने उन्हें थप्पड़ मारे और पेट में भी मुक्का मारा, जबकि वह गर्भावस्था की अंतिम अवस्था में हैं। शिक्षक संघ का विरोध, निलंबन की मांग घटना की जानकारी सामने आते ही छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन ने मामले की कड़ी निंदा की है। संघ ने इसे महिला और गर्भवती शिक्षिका के सम्मान के खिलाफ बताते हुए प्राचार्य के तत्काल निलंबन की मांग की है। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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अंबिकापुर में सनसनीखेज हत्या: युवती की धमकी के बाद दो युवकों ने सीने में घोंपा चाकू, CCTV में कैद वारदात

अंबिकापुर शहर के गांधीनगर वार्ड क्रमांक 7 में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात सामने आई है। एक युवती और उसके साथ मौजूद दो युवकों ने मिलकर एक अधेड़ व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। शनिवार सुबह जब स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे शव देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। वार्ड पार्षद विपिन पांडेय की सूचना पर गांधीनगर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मृतक के सीने पर चाकू के गंभीर निशान पाए गए। CCTV में कैद युवती की धमकी पुलिस द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि वारदात से पहले युवती मृतक से कहती है—“तू मेरे को हाथ कैसे लगाया, तू जानता नहीं है कि मैं कौन हूं?”इसके तुरंत बाद उसके साथ मौजूद दो युवक चाकू से हमला कर देते हैं, जिससे मौके पर ही व्यक्ति की मौत हो जाती है। युवती गिरफ्तार, दो आरोपी फरार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि घटना में शामिल दोनों युवक फरार हैं। उनकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। मृतक की पहचान, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ गांधीनगर पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान बबलू मंडल (50 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सुभाषनगर वार्ड क्रमांक 2, बाबरा पेट्रोल पंप के सामने गली में रहता था। वह ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। मृतक के पुत्र दीप मंडल (24 वर्ष) ने पुलिस को बताया कि उसके पिता रात करीब 10:30 बजे तक घर के पास ही बैठे थे, इसके बाद वे घर नहीं लौटे। सुबह उनकी हत्या की खबर मिली। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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मुख्यमंत्री का अफसरों को सख्त संदेश: लापरवाही और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस पर आधारित है और योजनाओं में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बातें मुख्यमंत्री ने रायपुर के एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम के दौरान कहीं। इस अवसर पर जिला और विभाग स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और विभागों को सम्मानित किया गया। 10 पुरस्कार विजेताओं को किया सम्मानित कार्यक्रम में ई-गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नवाचारों के लिए जिला और विभागीय श्रेणी में कुल 10 पुरस्कार प्रदान किए गए। यह सम्मान सुशासन दिवस के अवसर पर घोषित किए गए। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारी, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, सीएस, एसीएस, सचिव, प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मौजूद रहे। इन जिलों और विभागों को मिला पुरस्कार जिला श्रेणी में बेहतर कार्य और नवाचार के लिए दंतेवाड़ा, जशपुर, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और नारायणपुर को सम्मानित किया गया।विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पुरस्कार मिला। सांसद-विधायकों के पत्रों पर समय पर जवाब देने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों का समय पर जवाब देना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवेदनों को गंभीरता से लें और उनका त्वरित निराकरण करें। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जनप्रतिनिधियों से नियमित फीडबैक लेने को भी कहा। सुशासन सिर्फ शब्द नहीं, काम की संस्कृति सीएम ने कहा कि सुशासन केवल एक नारा नहीं बल्कि हर नीति और निर्णय की आत्मा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में दो वर्षों में 400 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं।ई-ऑफिस व्यवस्था से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुई हैं और इसे जल्द ही संभाग व जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। भ्रष्टाचार पर सख्ती, तकनीक बनेगी हथियार मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं की राशि को भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। जेम पोर्टल से खरीदी को अनिवार्य किया गया है, फिर भी यदि कहीं गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।खनिज से जुड़े परमिट को ऑनलाइन कर पहले होने वाले भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाई गई है। अधिकारियों से फील्ड में जाने की अपील सीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका सही क्रियान्वयन होगा। इसके लिए अधिकारियों को फील्ड में जाकर लोगों की समस्याएं समझनी होंगी। उन्होंने नियमित समीक्षा, प्रेस कॉन्फ्रेंस और पारदर्शी कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर अधिकारी को अपने भीतर बदलाव लाना होगा, तभी विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

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