Vishnu Deo Sai

बिलासपुर गौधाम में अव्यवस्था: 10×26 शेड में 205 मवेशी, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के लाखासार स्थित गौधाम में गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। यहां महज 10×26 फीट के छोटे से शेड में 200 से अधिक मवेशियों को रखा गया है, जिससे उनके बैठने तक की जगह नहीं बची है। इस मामले को लेकर Chhattisgarh High Court ने राज्य सरकार से शपथपत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। जानकारी के अनुसार, इस गौधाम का उद्घाटन 14 मार्च को मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने किया था। करीब 25 एकड़ में बने इस परिसर में पशु संरक्षण और विकास के लिए कई घोषणाएं भी की गई थीं, जिनमें प्रशिक्षण भवन, काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस शामिल हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे से शेड में 205 मवेशियों को ठूंसकर रखा गया है, जबकि पशु चिकित्सकों के अनुसार एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट जगह आवश्यक होती है। इस स्थिति में पशुओं के बीमार होने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। गौधाम में चारा और पानी की भी कमी बताई जा रही है। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं है और पूरे परिसर की देखरेख केवल एक चौकीदार के भरोसे है, जिसे सीमित वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके अलावा, नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखने की बात भी सामने आई है, जो पशु कल्याण के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौधाम का उद्देश्य सड़कों से मवेशियों को हटाना था, लेकिन अब भी आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशी घूमते नजर आते हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ में हुई। अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।

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27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र, महिला आरक्षण मुद्दे पर सरकार लाएगी निंदा प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश करेगी। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे दुख के साथ यह बात रख रहे हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना पूरा नहीं हो सका। उन्होंने इसके लिए विपक्ष के रवैये को जिम्मेदार ठहराया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फैसले से देशभर की महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को लगभग 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी 20 प्रतिशत से अधिक महिला प्रतिनिधित्व है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि इस तरह की राजनीति से देश को नुकसान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर आगे भी सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे और जनता समय आने पर उचित निर्णय लेगी।

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सचिन तेंदुलकर का पहला बस्तर दौरा, CM साय का कार्यक्रम रद्द; अब सिर्फ छिंदनार में करेंगे बच्चों से मुलाकात

क्रिकेट के दिग्गज Sachin Tendulkar बुधवार को पहली बार बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। वे दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां स्थानीय बच्चों, खासकर खेल से जुड़े युवाओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai को भी शामिल होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते उनका दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया। सचिन तेंदुलकर के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले उनका दौरा छिंदनार के साथ-साथ गीदम के जावंगा और पनेड़ा मैदान तक प्रस्तावित था, लेकिन अब वे केवल छिंदनार में ही कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस बदलाव की वजह मौसम की अनिश्चितता बताई जा रही है। हाल ही में दंतेवाड़ा क्षेत्र में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा और फसलें भी प्रभावित हुईं। हालांकि, कुछ सूत्र सुरक्षा कारणों की भी चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित छिंदनार गांव में सचिन तेंदुलकर के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में उत्साह का माहौल है और बच्चे व ग्रामीण उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र के लिए यह दौरा एक सकारात्मक संकेत और नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जहां खेल और प्रेरणा के जरिए बदलाव की दिशा में कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

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साय कैबिनेट बैठक आज: बस्तर रोडमैप, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर बड़े फैसलों की तैयारी

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में आज 15 अप्रैल को मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित होने जा रही है। यह बैठक मंत्रालय स्थित महानदी भवन के मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी, जहां विभिन्न विभागों से आए प्रस्तावों और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जरूरत के अनुसार नई नीतियों और प्रस्तावों को मंजूरी भी दी जा सकती है। बैठक में बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर विशेष फोकस रहेगा। “बस्तर रोडमैप 2.0” के तहत सरकार नई कार्ययोजना पर विचार करेगी, जिसमें पुराने प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के साथ-साथ नए विकास प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बस्तर में सड़क, कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। खासतौर पर दूरस्थ इलाकों को जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्रों से जोड़ने के लिए नई सड़कों और पुलों के निर्माण पर चर्चा संभव है। साथ ही बिजली, पानी और संचार सेवाओं को बेहतर बनाने से जुड़े प्रोजेक्ट भी एजेंडे में शामिल रहेंगे। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, छोटे उद्योगों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से अवसर बढ़ाने पर विचार कर सकती है। लक्ष्य यह रहेगा कि बस्तर के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके। इसके अलावा, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग, वन उत्पाद और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर चर्चा होने की संभावना है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन और नई नीतियों पर भी विचार किया जा सकता है। कैबिनेट बैठक में निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़े अहम प्रस्तावों पर निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने, जमीन आवंटन प्रक्रिया को सरल करने और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज करने जैसे कदम उठा सकती है। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की जाएगी, जिसके आधार पर योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी तय है। दोपहर 1:30 बजे वे 515 पैक्स (नवीन सोसायटी) का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वे करीब 3:15 बजे रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित “नारी शक्ति वंदन” कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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महिला दिवस पर सीएम विष्णु देव साय ने साझा किए निजी अनुभव, कहा– पिता के निधन के बाद मां बनीं सबसे बड़ी ताकत

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपने जीवन के कई व्यक्तिगत पहलुओं और महिलाओं की भूमिका पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि बचपन में पिता के निधन के बाद उनकी मां ने परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाली और वही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह महज 10 साल के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया था। उस कठिन समय में उनकी मां ने पिता और मां दोनों की जिम्मेदारी निभाते हुए परिवार को संभाला और बच्चों की परवरिश की। उन्होंने कहा कि उनकी मां की मेहनत और संघर्ष से ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। सीएम साय ने बताया कि 26 वर्ष की उम्र में जब वह विधायक बने, तब उनकी पत्नी ने घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाल ली। इससे उन्हें राजनीति में पूरी तरह ध्यान देने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में किसी भी बड़े फैसले से पहले सभी की राय ली जाती है और घर की महिलाएं हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करती हैं। महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के समय में महिलाएं अधिकतर घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। स्व-सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में करीब 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 10 लाख तक पहुंचाना है। बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। सीएम साय ने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि पहले वह घर के सभी सदस्यों के कपड़े खुद खरीदते थे, लेकिन पिछले लगभग 10 वर्षों से व्यस्तता बढ़ने के कारण अब उनके ज्यादातर कपड़े उनकी पत्नी ही खरीदती हैं।

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राज्यपाल के अभिभाषण पर सीएम का पलटवार: कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, नक्सलवाद खत्म करने का दावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान “सिंडिकेट राज” चला और कोयला, शराब तथा डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) जैसे मामलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली होलोग्राम के जरिए शराब बिक्री, कोयला परिवहन में अनियमितता और विभिन्न योजनाओं में गड़बड़ी से प्रदेश की छवि प्रभावित हुई। “भाजपा विकास की, कांग्रेस विनाश की राजनीति करती है” सीएम साय ने कहा कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और कई मामलों में आरोपियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन और पारदर्शिता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, जबकि पिछली सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त रही। बस्तर को लेकर आरोप निराधार मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र को लेकर फैलाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं। सरकार कृषि, सिंचाई, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। होम-स्टे योजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम किया जा रहा है। 🔴 नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान सीएम ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा, विकास और सुशासन के त्रिस्तरीय एजेंडे पर काम कर रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि 31 मार्च तक प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जहां पहले स्कूलों को नुकसान पहुंचाया जाता था, वहीं अब शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। बस्तर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। 🏠 आवास, धान खरीदी और रोजगार पर जोर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले 10 महीनों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 5 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। किसानों से 21 क्विंटल तक 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी गई है और शेष अंतर राशि होली से पहले देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ‘जी राम जी योजना’ मनरेगा से बेहतर मॉडल के रूप में लागू की जा रही है, जिसमें 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। राजनीतिक गरमाहट तेज राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बजट सत्र के आगामी दिनों में भी इन मुद्दों पर सियासी बहस तेज रहने की संभावना है।

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छत्तीसगढ़ बजट 2026-27: पेशी से पहले मंदिर पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी, महिलाओं के लिए खास प्रावधान के संकेत

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी साय सरकार का तीसरा बजट सदन में प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश करने से पहले वे अपने सरकारी निवास स्थित मंदिर में पत्नी अदिति चौधरी के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचे। अदिति चौधरी ने कहा कि इस बार का बजट महिलाओं के लिए विशेष रहेगा। पूजा के बाद वित्त मंत्री राम मंदिर के लिए रवाना हुए और वहां से सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। बजट दोपहर 12:30 बजे पेश किया जाएगा। सीएम साय ने दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बजट को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि नवीन विधानसभा भवन में पेश हो रहा यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के विजन को मजबूती देगा। बड़े ऐलानों की संभावना इस बार के बजट में कई बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें जल बोर्ड गठन, ‘जी राम जी’ (Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) योजना के तहत ग्राम पंचायतों के विकास, स्टार्टअप और MSME को प्रोत्साहन, तथा राजधानी को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार गुड गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासनिक सुधारों पर भी फोकस कर सकती है। ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान संभव हैं। युवा, किसान और महिला वर्ग पर फोकस युवाओं के लिए रोजगार सृजन और स्टार्टअप नीति में नए प्रावधानों की घोषणा हो सकती है। MSME सेक्टर को निवेश प्रोत्साहन योजनाओं से मजबूती दी जा सकती है। किसानों के लिए समर्थन मूल्य, सिंचाई और कृषि अधोसंरचना में अतिरिक्त बजट का प्रावधान संभव है। महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूत करने के संकेत भी मिले हैं। आयुष्मान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपए तक का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजधानी और ग्रामीण विकास मुख्यमंत्री राजधानी विकास योजना के तहत राजधानी को आधुनिक सुविधाओं से लैस मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जी राम जी’ योजना के जरिए सड़क, नाली, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ा बजट रखा जा सकता है। खेल, संस्कृति और शिक्षा पर भी ध्यान शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में उनकी प्रतिमा स्थापना के लिए लगभग 1.86 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सारंगढ़ इंडोर स्टेडियम के नवीनीकरण और छोटे शहरों में खेल मैदान विकसित करने की योजना भी चर्चा में है। इसके अलावा जिलों में नालंदा लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए फंड जारी होने की संभावना है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर यह बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन साधने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजरें वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी हैं।

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CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का डिप्टी CM हाउस घेराव, 7 साल से भर्ती का इंतज़ार

13 दिनों से तूता में धरना, गृहमंत्री बोले – CM से चर्चा के बाद होगा फैसला छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) भर्ती 2018 के वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का सब्र अब जवाब दे चुका है। नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया। ये सभी उम्मीदवार पिछले 13 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपने परिवार के साथ आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, साल 2018 में CAF के 1786 पदों पर भर्ती निकली थी, जिसमें मेरिट लिस्ट के बाद 417 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। सात साल बीतने के बावजूद इन उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है, जबकि CAF में तीन हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। धरने के दौरान बिगड़ी बच्चे की तबीयत प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी के छह महीने के बच्चे की तबीयत खराब हो गई, जिससे आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच नाराज उम्मीदवारों ने डिप्टी सीएम के बंगले का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कैंडिडेट्स को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद पूरे मामले पर उनसे चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की। गृहमंत्री अमित शाह को भी लिखा पत्र CAF कैंडिडेट्स अपनी समस्या को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में अभ्यर्थियों ने यहां तक कहा था कि “अगर नक्सली होते तो शायद घर वापसी पर नौकरी और करियर दोनों मिल जाता।” इसके बाद राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गुरुवार को अलग-अलग जिलों से आए कैंडिडेट्स अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गृहमंत्री के बंगले पहुंचे थे। गृहमंत्री ने उनसे पुलिस मुख्यालय से नोटशीट लाने को कहा और हस्ताक्षर करने का भरोसा दिया, लेकिन उसके बाद वे दौरे पर निकल गए। मजदूरी कर चला रहे परिवार अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी न मिलने के कारण उन्हें मजदूरी कर परिवार का पेट पालना पड़ रहा है। एक कैंडिडेट के पिता गृहमंत्री आवास के बाहर हाथ जोड़कर मीडिया से मदद की गुहार लगाते नजर आए। आधे से ज्यादा कैंडिडेट हो चुके ओवरएज भर्ती के समय सभी अभ्यर्थियों की उम्र 28 से 32 वर्ष थी, लेकिन सात साल बीत जाने के कारण अब 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट 36 से 40 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वे अब किसी नई भर्ती के लिए भी योग्य नहीं रह गए हैं। मेरिट लिस्ट में चयनित कई उम्मीदवार मेडिकल में अनफिट हुए या नौकरी छोड़ दी, जिससे सीटें खाली हुईं। बावजूद इसके, वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स को मौका नहीं मिला। सरकार बदलने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। CAF और पुलिस बल में हजारों पद खाली छत्तीसगढ़ पुलिस बल में लंबे समय से भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश में कुल 83,259 स्वीकृत पदों में से केवल 65,439 जवान कार्यरत हैं। यानी करीब 17,820 पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में 13 IPS और 129 DSP अधिकारियों की कमी है। वहीं सूबेदार, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल के हजारों पद भी रिक्त हैं, जिससे अपराध जांच और कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। भर्ती प्रक्रिया भी अधर में अक्टूबर 2024 में पुलिस विभाग में 341 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन उसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। कॉन्स्टेबल भर्ती भी लंबे समय से अटकी हुई है। CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो अभी भी खाली पदों पर उनकी नियुक्ति की जा सकती है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री से होने वाली बैठक और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

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गुजरात में बस्तर की गूंज: एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, PM मोदी ने की सराहना

गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता परेड में इस बार छत्तीसगढ़ की झांकी ने सबका दिल जीत लिया। सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत की गई झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” थीम पर आधारित थी। परंपरा और विकास का संगम दर्शाती इस झांकी ने न सिर्फ दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखाया गया बस्तर नए भारत के समावेशी विकास की प्रेरणादायक झलक है। लोकसंस्कृति और विकास की अनोखी प्रस्तुतिझांकी के अग्रभाग में माड़िया जनजाति के कलाकारों ने पारंपरिक गौर नृत्य के माध्यम से बस्तर की लोकसंस्कृति और सामूहिकता की झलक प्रस्तुत की। वहीं, तुरही और नंदी की आकृतियों ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था और शिव भक्ति की परंपरा को जीवंत किया। “संघर्ष से विकास” की कहानी कहता मध्य भागझांकी के मध्य भाग में बस्तर की विकास यात्रा को दिखाया गया — जहां कभी नक्सलवाद का असर था, वहीं अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में प्रगति हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह क्षेत्र “बंदूक नहीं, विकास” की नई पहचान बना रहा है। महिलाओं की भूमिका और ढोकरा कला की छटाअंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा ने बस्तर की नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक प्रस्तुत किया। पूरी झांकी ढोकरा धातु कला से सजाई गई थी, जो बस्तर के पारंपरिक शिल्प की सुंदर झलक दिखाती है। आज का बस्तर अब केवल संस्कृति का प्रतीक नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मॉडल बन चुका है। गांवों में बिजली, इंटरनेट, शिक्षा और रोजगार अब आम दृश्य हैं। महिलाएं वनोपज और हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जबकि युवा “नए भारत” के सशक्त प्रतिनिधि के रूप में उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया झांकी का संदेश – “भय से विश्वास की ओर”मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि झांकी का मुख्य विषय “बदलता बस्तर: संघर्ष से विकास की ओर” है, जो बस्तर की नई दिशा और राज्य सरकार की विकासोन्मुख नीतियों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि झांकी के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि बस्तर अब शांति, प्रगति और समृद्धि की राह पर अग्रसर है। राष्ट्रीय स्तर पर हुआ चयनछत्तीसगढ़ की झांकी का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने किया। मौलिकता, सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक के आधार पर देशभर की झांकियों में इसे प्रमुख स्थान दिया गया। अंतिम सूची में एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियां भी शामिल थीं। छत्तीसगढ़ की “बदलता बस्तर” झांकी ने अपनी कलात्मकता और “नए बस्तर – नए भारत” के संदेश से पूरे देश में छाप छोड़ी।

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