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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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रायपुर में मुंशी 10 लाख लेकर फरार, कंपनी का कैश जमा कराने गया था बैंक

राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में एक कारोबारी के साथ विश्वासघात का मामला सामने आया है, जहां कंपनी का मुंशी 10 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़ित विजय गोयल देवेंद्र नगर के निवासी हैं और आयरन एंड स्टील ट्रेडिंग का व्यवसाय करते हैं। उनका कार्यालय स्टेशन रोड स्थित अरिहंत कॉम्प्लेक्स में संचालित होता है। कंपनी के लेन-देन से संबंधित नकदी इकट्ठा कर बैंक में जमा करने की जिम्मेदारी मुंशी अनिल साल्वे को सौंपी गई थी। बताया गया कि अनिल साल्वे विभिन्न पार्टियों से कंपनी के लगभग 10 लाख रुपये लेकर आया, लेकिन रकम बैंक में जमा कराने के बजाय वह फरार हो गया। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटा तो कारोबारी ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद विजय गोयल ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले को गंभीरता से लिया गया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है।

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खरोरा में पुलिस की कांबिंग गश्त, 17 संदिग्धों पर कार्रवाई, 2 वारंटी गिरफ्तार

रायपुर ग्रामीण पुलिस ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खरोरा थाना क्षेत्र में विशेष कांबिंग गश्त अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें गुंडा-बदमाश, फरार वारंटी और अवैध शराब से जुड़े आरोपी शामिल हैं। यह कार्रवाई रायपुर (ग्रामीण) की पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देश पर की गई। अभियान का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत शुक्ला और नगर पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में हुआ। खरोरा थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में सघन जांच और गश्त की। अभियान के दौरान पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की। वहीं दो फरार वारंटियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा अवैध शराब की बिक्री पर भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक ग्राम भैसा निवासी विजय कुमार सेन और खरोरा निवासी परदेशी यादव के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

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रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग के दौरान भाजपा नेता गिरफ्तार, पुलिस से बदसलूकी और आरक्षक की कॉलर पकड़ी

राजधानी रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस अभियान के दौरान एक भाजपा नेता द्वारा हंगामा करने का मामला सामने आया है। नशे की हालत में गाड़ी चला रहे आरोपी ने पुलिसकर्मियों से बदसलूकी की और ड्यूटी पर तैनात आरक्षक की कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की भी की। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम विकास शुक्ला है, जो खुद को भाजपा का मंडल अध्यक्ष बताकर पुलिसकर्मियों को धमका रहा था। यह मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग के दौरान हुआ विवाद पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 8 मार्च की रात तेलीबांधा थाना पुलिस द्वारा ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक कार (CG-07-DD-6532) को जांच के लिए रोका गया। कार चला रहे व्यक्ति की जब जांच की गई तो वह शराब के नशे में पाया गया। पुलिस द्वारा कार्रवाई की बात कहने पर वह भड़क गया और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से बहस करने लगा। TI को दी धमकी, आरक्षक से की धक्का-मुक्की बताया जा रहा है कि आरोपी ने खुद को भाजपा का मंडल अध्यक्ष बताते हुए ट्रैफिक टीआई को वर्दी उतरवा देने की धमकी दी। इसके अलावा उसने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने एक आरक्षक की कॉलर पकड़ ली और धक्का-मुक्की करते हुए उसकी वर्दी भी फाड़ दी। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, पुलिसकर्मियों से मारपीट और अभद्र व्यवहार समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ पुलिस की सख्ती पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों पर लगातार सख्ती बरती जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कोई भी हो। फिलहाल पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

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रायपुर में नहर से मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, जांच में जुटी पुलिस

राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मांडर भट्टी के पास नहर में एक व्यक्ति की लाश तैरती हुई देखी गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ की। पुलिस ने नहर से शव को बाहर निकलवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। करीब 45 वर्ष बताई जा रही मृतक की उम्र पुलिस के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 45 वर्ष के आसपास बताई जा रही है। फिलहाल उसकी पहचान नहीं हो पाई है। शव के पास कोई भी ऐसा दस्तावेज नहीं मिला है जिससे उसकी पहचान की जा सके। पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया शव पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मृतक की पहचान के लिए आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली जा रही है। मामले की जांच के लिए एफएसएल टीम भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

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बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने की पहल, हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी होगी प्रदर्शित

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों से संबंधित मामलों के निपटारे में पुलिस की प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य के सभी थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और बच्चों की आपातकालीन हेल्पलाइन 1098 की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की अनुशंसा की है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर सहित प्रदेश के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भेजे गए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। कई बार तो स्वयं पुलिसकर्मियों को भी यह जानकारी नहीं रहती। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारियों के स्थानांतरण के बाद कई बार नए बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी लंबे समय तक अपडेट नहीं हो पाती। इसके अलावा कुछ मामलों में जिला स्तर पर गठित विशेष किशोर पुलिस इकाई की जानकारी भी थानों में स्पष्ट नहीं रहती। बच्चों से जुड़े मामलों में नहीं हो पाता उचित व्यवहार आयोग के अनुसार इन कमियों के कारण बच्चों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई बार बाल-सुलभ प्रक्रिया का पालन नहीं हो पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए थानों में स्पष्ट और स्थायी डिस्प्ले व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पुलिसकर्मी और आम नागरिक दोनों को आवश्यक जानकारी आसानी से मिल सके। कानून में भी है स्पष्ट प्रावधान आयोग ने अपनी अनुशंसा में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कानून के तहत हर थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन अनिवार्य है। साथ ही बच्चों से जुड़े कानूनों के बारे में जनजागरूकता फैलाना भी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। इस तरह बनाया जाएगा डिस्प्ले बोर्ड आयोग के निर्देश के अनुसार प्रत्येक थाने में प्रमुख दीवार के साथ दो अन्य स्थानों पर आयताकार डिस्प्ले बोर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए दीवार पर काले रंग से पुताई की जाएगी और बॉर्डर स्लेट की तरह बनाई जाएगी ताकि यह बच्चों के लिए भी सहज और आकर्षक दिखाई दे। बोर्ड के अंदर सफेद रंग से जिले की विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी का पदनाम, थाने के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का पदनाम और बच्चों की हेल्पलाइन नंबर 1098 लिखा जाएगा। संबंधित अधिकारियों के नाम चॉक से लिखे जाएंगे, ताकि उनके स्थानांतरण होने पर आसानी से बदला जा सके। 31 मार्च तक पूरी करनी होगी व्यवस्था आयोग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि यह व्यवस्था 31 मार्च 2026 तक हर हाल में लागू कर दी जाए। साथ ही डिस्प्ले बोर्ड की तस्वीरों के साथ पालन प्रतिवेदन आयोग को भेजने को भी कहा गया है।

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NDPS मामलों में सख्त फैसला, तीन आरोपियों को 10-10 साल की सजा

नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। रायपुर और गरियाबंद में दर्ज इन मामलों में आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाया गया। टिकरापारा क्षेत्र से 320 नशीली टैबलेट के साथ पकड़ा गया आरोपी पहला मामला रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। 23 दिसंबर 2023 को पुलिस को सूचना मिली थी कि बोरियाखुर्द शमशान घाट के पास एक युवक प्रतिबंधित नशीली दवाओं के साथ मौजूद है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शेख अजहर उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से पीले रंग के कैरी बैग में रखी स्पास ट्रैनकैन प्लस की 40 पत्तियां बरामद की गईं। प्रत्येक पत्ती में 8-8 टैबलेट थीं, इस तरह कुल 320 टैबलेट जब्त की गईं। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से तौलने पर इनका कुल वजन 163.2 ग्राम पाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाहों के बयान पेश किए गए। सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। मैनपुर में 22.4 किलो गांजे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार दूसरा मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 2 जून 2021 को पुलिस को सूचना मिली थी कि एनएच-130सी पर स्थित मां अंबे पेट्रोल पंप के पास दो व्यक्ति बैग में अवैध गांजा लेकर खड़े हैं। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और त्रिनाथ मेहर तथा इंद्रभूषण मेहर को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान दोनों के बैग से प्लास्टिक में पैक गांजा बरामद हुआ। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने पर त्रिनाथ मेहर के पास से 11 किलो 300 ग्राम और इंद्रभूषण मेहर के पास से 11 किलो 100 ग्राम गांजा मिला। इस तरह कुल 22 किलो 400 ग्राम गांजा जब्त किया गया। पुलिस ने जब्त गांजे का सैंपल तैयार कर जांच के लिए एफएसएल रायपुर भेजा और मामले में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद एनडीपीएस एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट: बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। पिछले लगभग पांच वर्षों से राज्य लगातार इस सूची के टॉप-10 राज्यों में बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कुल 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 बच्चों को पुलिस और प्रशासन ने खोज लिया है, जबकि 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राज्य के कुछ जिलों में बच्चों के गायब होने के मामले अधिक सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा इस सूची में पहले स्थान पर है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों का नाम शामिल है। लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 559 बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। बरामद किए गए बच्चों में सबसे अधिक संख्या जांजगीर-चांपा जिले की बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक है। कई बार उनके बच्चे परिवार से बिछड़ जाते हैं या बिना जानकारी दिए अन्य शहरों की ओर चले जाते हैं। इसके अलावा मानव तस्करी के गिरोह भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तस्कर बच्चों को बड़े शहरों में अधिक पैसे या अन्य लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों से पूछताछ में ऐसे मामलों का खुलासा भी हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। इनमें से 7,777 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जबकि बाकी बच्चों को खोज लिया गया है। वहीं कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर एवं नगर हवेली में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार लापता बच्चों में 14 से 17 वर्ष की आयु के किशोर-किशोरियों की संख्या अधिक है और इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा पाई गई है।

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रायपुर में डॉग रेस्क्यू के नाम पर गुंडागर्दी का आरोप, गर्भवती महिला से मारपीट का मामला दर्ज

रायपुर में डॉग रेस्क्यू संस्था की आड़ में गुंडागर्दी करने का मामला सामने आया है। चार महीने की गर्भवती महिला के साथ मारपीट करने, उसका मोबाइल फोन और कुत्ता छीनने तथा धमकी देने के आरोप में पुलिस ने एक महिला सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक भाठागांव चौक निवासी गुरप्रीत कौर गिल ने पुरानी बस्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि डॉग रेस्क्यू का दावा करने वाली किरण घनश्याम आहूजा अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंची। किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपितों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान आरोपितों ने उसका मोबाइल फोन और उसका पालतू कुत्ता भी छीन लिया। साथ ही संस्था का नाम लेकर उसे धमकाया और वहां से चले गए। घटना के बाद महिला ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस ने किरण घनश्याम आहूजा सहित अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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रायपुर में युवती के फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी, 5 लाख की मांग; आरोपी के खिलाफ केस दर्ज

रायपुर में एक युवती के कथित अश्लील फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने युवती की मां से 5 लाख रुपए की मांग की और पैसे नहीं देने पर परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। पीड़िता की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना शहर के टैगोर नगर क्षेत्र की बताई जा रही है। यहां एक निजी अपार्टमेंट में रहने वाली महिला ने पुलिस को बताया कि 5 मार्च की रात करीब 10 बजे वह पुजारी पार्क के पीछे अपने पालतू कुत्ते को टहलाने गई थीं। इसी दौरान बैजनाथपारा निवासी हार्दिक जैन वहां पहुंचा और उनसे बातचीत करते हुए धमकाने लगा। महिला के अनुसार आरोपी ने दावा किया कि उसके पास उनकी बेटी के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो हैं। उसने कहा कि अगर परिवार की भलाई चाहती हैं तो 5 लाख रुपए दे दें, नहीं तो वह इन तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। अचानक मिली इस धमकी से महिला घबरा गईं। उन्होंने उससे सवाल किए तो आसपास कुछ लोग इकट्ठा हो गए, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। पीड़िता ने यह भी बताया कि अगले दिन 6 मार्च की दोपहर करीब 4 बजे आरोपी ने उन्हें फोन कर दोबारा धमकी दी। इस बार उसने पैसे नहीं देने पर उनके पति को चाकू मारने और उनकी बेटी को घर से उठाने की धमकी दी। लगातार मिल रही धमकियों से महिला और उनका परिवार काफी डरे हुए हैं। इसके बाद उन्होंने सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में कोतवाली थाना प्रभारी सतीश ठाकुर ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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