NIA Court

रायपुर में नक्सल नेटवर्क पर एक और वार

कोरबा खदान में मजदूरी करने वाला नक्सली पकड़ा गया भाठागांव से रामा किचाम गिरफ़्तार, नक्सली दंपती के संपर्क में था; कोर्ट ने भेजा जेल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुरक्षा एजेंसियों ने फिर से नक्सलियों पर कार्रवाई की है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने भाठागांव क्षेत्र से रामा किचाम को पकड़ा है। रामा कोरबा की एक कोयला खदान में मज़दूरी करता था, लेकिन जांच में पता चला है कि उसका हाल में गिरफ्तार किए गए नक्सली पति-पत्नी जग्गू और कमला से गहरा संबंध था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के पास से नकदी और सोना भी बरामद किया गया है। NIA कोर्ट में पेश करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस इस मामले में आधिकारिक बयान देने से बच रही है। गौरतलब है कि 24 सितंबर को चंगोराभाठा इलाके से जग्गू और उसकी पत्नी कमला को पकड़ा गया था। दोनों लंबे समय से अलग-अलग इलाकों में मजदूर बनकर रह रहे थे और कॉल इंटरसेप्शन के जरिये पकड़ में आए। उनके ठिकाने से गोल्ड बिस्किट और करीब एक लाख रुपये नकद मिले थे।

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Chhattisgarh, Crime, Raipur

बिलासपुर NIA कोर्ट से ननों को सशर्त जमानत: धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में हुई थी गिरफ्तारी

बिलासपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने केरल की दो ननों और एक पुरुष आरोपी को शनिवार को सशर्त जमानत दे दी है। इन तीनों पर नारायणपुर की युवतियों को कथित रूप से बहला-फुसलाकर धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप लगे थे। उन्हें 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन से आरपीएफ ने बजरंग दल की शिकायत पर पकड़ा था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नन प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और सुकमन मंडावी शामिल हैं। इनकी जमानत याचिका पहले दुर्ग की सत्र अदालत में दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर सुनवाई से इंकार कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने अपने वकील अमृतो दास के माध्यम से एनआईए कोर्ट, बिलासपुर में याचिका दाखिल की। आरोपियों की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि जिन युवतियों के साथ वे यात्रा कर रहे थे, वे बालिग हैं और पहले से ही ईसाई धर्म अपना चुकी हैं। वे अपनी मर्जी से नौकरी के लिए जा रही थीं, ऐसे में न तो धर्मांतरण का आरोप बनता है और न ही मानव तस्करी का। सरकारी पक्ष की ओर से वकील दाऊराम चंद्रवंशी ने अदालत को बताया कि मामला अभी जांच के प्रारंभिक दौर में है और इस समय जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रखा था। शनिवार को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने तीनों को 50-50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दी। शर्तों के तहत उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी, पासपोर्ट अदालत में जमा रहेगा और पुलिस बुलाने पर उन्हें हाजिर होना पड़ेगा।

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Bilashpur, Chhattisgarh
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