Indian Railways news

बिलासपुर के पास कोयला लदी मालगाड़ी में लगी आग, रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उस समय हड़कंप मच गया, जब कोयले से भरी एक मालगाड़ी के वैगन में अचानक आग लग गई। यह घटना गतौरा रेलवे स्टेशन के पास की बताई जा रही है। आग लगने की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन और दमकल विभाग तुरंत हरकत में आ गया। जानकारी के अनुसार, मालगाड़ी बिलासपुर की ओर आ रही थी। इसी दौरान ट्रेन के एक वैगन से धुआं और आग की लपटें निकलती दिखाई दीं। स्थिति गंभीर होते देख रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल ट्रेन को गतौरा स्टेशन के पास रोक दिया और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश जारी रही। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि भीषण गर्मी और अत्यधिक तापमान के कारण कोयले में आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाने के लिए रेलवे प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना के चलते कुछ समय के लिए रेल परिचालन भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के ट्रैक और वैगनों की जांच की गई ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। गनीमत रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही परिचालन सामान्य कर दिया जाएगा। फिलहाल रेलवे प्रशासन आग लगने के कारणों और संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है।

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रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर शिफ्ट, यात्रियों को धूप में दौड़ना पड़ रहा

राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन पर अनारक्षित टिकट काउंटर को दूसरी बिल्डिंग में स्थानांतरित किए जाने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टिकट लेने के लिए अब यात्रियों को पहले रिजर्वेशन काउंटर वाली बिल्डिंग तक जाना पड़ता है और फिर वहां से वापस प्लेटफॉर्म तक लौटना पड़ता है। स्टेशन पर पहुंचने के बाद ही कई यात्रियों को इस बदलाव की जानकारी मिल रही है, जिससे उन्हें जल्दबाजी में भागदौड़ करनी पड़ रही है। तेज धूप में करीब 50 से 100 मीटर की दूरी तय करना उनके लिए परेशानी बढ़ा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी ट्रेन आने वाली होती है। स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि पूछताछ काउंटर अभी भी प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद है। ऐसे में टिकट लेने के बाद यात्रियों को ट्रेन का समय और प्लेटफॉर्म जानने के लिए फिर से वापस आना पड़ता है। हालांकि गेट नंबर-1 पर चार ऑटोमैटिक टिकट मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन तकनीकी जानकारी की कमी और ऑनलाइन पेमेंट की समझ न होने के कारण अधिकांश यात्री उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इनमें से एक मशीन बंद पाई गई, जबकि बाकी पर भीड़ लगी रही। रविवार दोपहर करीब 12:25 बजे स्टेशन पर यात्रियों की भागदौड़ साफ दिखाई दी। जानकारी मिलते ही लोग काउंटर की ओर दौड़ते नजर आए। ओडिशा जाने वाले एक यात्री का ऑनलाइन भुगतान फेल होने के कारण उसे मशीन से टिकट नहीं मिल पाया और उसे काउंटर पर जाना पड़ा। जबलपुर जा रहे यात्री अरुण गुप्ता ने बताया कि उन्हें काउंटर शिफ्ट होने की जानकारी पहले से नहीं थी, जिससे उन्हें धूप में लंबी दूरी तय करनी पड़ी और लाइन में लगना पड़ा। वहीं, ओडिशा जा रहे माधव राम ने कहा कि अधिकांश लोगों को मशीन चलाना नहीं आता, इसलिए काउंटर पर निर्भर रहना पड़ता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार स्टेशन पर विकास कार्य जारी है और पुरानी बिल्डिंग को तोड़ा जाना है। इसी कारण अनारक्षित टिकट काउंटर को अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है। डीआरएम दयानंद ने कहा कि यह कदम विकास कार्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि यात्रियों को पहले से इसकी जानकारी हो सके।

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टीटीई ने परिवार के लिए ट्रेन रोकी, 15 साल बाद हाईकोर्ट ने दी राहत; सजा, डिमोशन और वेतन कटौती के आदेश रद्द

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक अनोखा मामला सामने आया है। ट्रेन में चेन पुलिंग करने पर दोषी ठहराए गए एक टीटीई को 15 साल बाद हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।2012 में रेलवे ने दो बार चेन खींचने के आरोप में उस टीटीई की वेतनवृद्धि रोक दी थी, उसे पदावनत किया और दो साल के लिए वेतन कटौती की सजा दी थी। क्या था मामला आस्टिन हाइड, जो उस समय टीटीई थे, 15 जुलाई 2010 को बिलासपुर स्टेशन से यशवंतपुर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 2252) में बतौर यात्री यात्रा कर रहे थे।उन पर आरोप था कि उन्होंने ट्रेन को रोकने के लिए अलार्म चेन दो बार खींची ताकि उनका परिवार और सामान ट्रेन में चढ़ सके। रेलवे ने विभागीय जांच कराई, जिसमें आरपीएफ के दो जवान गवाह बने। उनके बयान के आधार पर 2012 में आस्टिन को दोषी ठहराते हुए डिमोशन, वेतनवृद्धि रोक और वेतन कटौती की सजा दी गई। कैट और विभागीय अपील में हार टीटीई ने इस फैसले के खिलाफ विभागीय अपील और पुनरीक्षण अपील की, लेकिन दोनों खारिज कर दी गईं। बाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) जबलपुर बेंच में भी मामला गया, जहां रेलवे की कार्रवाई को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट में जीत आखिरकार, आस्टिन हाइड ने 2024 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभागीय जांच और कैट के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 141 के अनुसार तब तक अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि बिना उचित कारण के चेन खींची गई थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल) ने पाया कि आरोप स्पष्ट नहीं थे और विभागीय जांच में यह साबित नहीं किया गया कि टीटीई ने बिना कारण चेन खींची। कोर्ट की टिप्पणी बेंच ने कहा कि सिर्फ चेन खींचना कदाचार नहीं है, जब तक यह सिद्ध न हो कि यह अनुचित कारण से किया गया। अनुशासनिक प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, पुनरीक्षण प्राधिकारी और कैट—सभी ने गंभीर त्रुटि की और अस्पष्ट आरोपों पर सजा दी। कोर्ट ने 2012, 2013, 2014 और 2023 के सभी आदेशों को रद्द करते हुए आस्टिन हाइड की सजा खत्म कर दी।

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Bilashpur, Chhattisgarh
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