Hospital negligence

रायपुर में मृत घोषित युवक में दिखी हरकत, अंतिम संस्कार से पहले अस्पताल लौटाया गया, इलाज के दौरान मौत

रायपुर के एक निजी अस्पताल से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल द्वारा मृत घोषित किए गए एक युवक के शरीर में अंतिम संस्कार से पहले हलचल दिखाई देने लगी। इसके बाद परिजन उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, भिलाई के पुरानी भिलाई क्षेत्र स्थित देव बलोदा निवासी रामअवतार रात्रे 3 जून को अपने घर के बाथरूम में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें उपचार के लिए रायपुर के लोधी पारा चौक स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि रामअवतार की पसलियों में गंभीर चोट है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। कुछ समय तक इलाज चलने के बाद अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और शव परिजनों को सौंप दिया। मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया। घर पर अर्थी सजाई गई, रिश्तेदारों को सूचना दी गई और अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गईं। इसी दौरान जब शव को एम्बुलेंस से घर ले जाया जा रहा था, तब परिजनों ने युवक के शरीर में हरकत महसूस की। रिश्तेदारों का दावा है कि रामअवतार के हाथ-पैर हिलने लगे थे, जिससे सभी हैरान रह गए। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तत्काल रोक दी गई और युवक को तुरंत रायपुर के मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने निजी अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक के शरीर में हलचल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार का कहना है कि यदि युवक के शरीर में हरकत हो रही थी, तो उसे मृत घोषित कैसे किया गया। परिजनों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मरीज को मृत घोषित करने से पहले सभी आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाओं और जांचों का पालन किया गया था या नहीं। मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं और जांच की मांग तेज हो गई है।

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Bhilai / Durg, Crime, State, Top News

मुर्दाघर में चोरी का सनसनीखेज मामला, मासूम के शव से गायब हुआ सोने का लॉकेट

जांजगीर-चांपा जिले में एक दर्दनाक हादसे के बाद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बिर्रा-शिवरीनारायण मार्ग स्थित केरा गांव में तेज रफ्तार कैप्सूल वाहन की चपेट में आने से तीन वर्षीय हर्ष श्रीवास की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि हर्ष अपने पिता मनोज कुमार श्रीवास की सैलून दुकान के बाहर खड़ा था, तभी तेज गति से आ रहे वाहन ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल नवागढ़ सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को रातभर अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था, तब उसके गले में सोने का लॉकेट मौजूद था, लेकिन पोस्टमार्टम के समय वह गायब मिला। इस घटना से परिवार में आक्रोश और दुख का माहौल है। परिजनों को शक है कि अस्पताल या मोर्चरी परिसर में किसी ने लॉकेट चोरी कर लिया। पुलिस ने सड़क हादसे का मामला दर्ज कर फरार वाहन और चालक की तलाश शुरू कर दी है। साथ ही लॉकेट गायब होने के मामले में अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

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Janjgir Champa

बिलासपुर में कॉन्स्टेबल की मौत पर घिरा श्रीराम केयर अस्पताल, MLA दिलीप लहरिया ने लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई

बिलासपुर के श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत के मामले में अब राजनीतिक विवाद भी गहराने लगा है। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की चेतावनी भी दी है। मामले में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता ने मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण सत्यकुमार की हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में डॉक्टरों ने किडनी में इंफेक्शन होने की बात कही थी, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इसके बाद सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। परिवार ने मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के पिता और अन्य परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर संजय अग्रवाल को शिकायत सौंपी। विधायक ने कहा कि श्रीराम केयर अस्पताल में इलाज में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के खिलाफ शिकायतें और मुद्दे उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्यकुमार केवल सामान्य पथरी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन गलत इलाज और लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई। विधायक ने कहा कि अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है और पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। क्या है पूरा मामला? मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी 36 वर्षीय सत्यकुमार पाटले पुलिस विभाग में आरक्षक थे और उनकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत के बाद वे नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी बताकर ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अगले दिन तक सत्यकुमार सामान्य थे, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई और बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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Bilaspur, Chhattisgarh, GOVERNMENT, State, Top News

इमरजेंसी में भी पर्ची जरूरी: डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में इलाज से पहले इंतजार, मरीजों की जान पर खतरा

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों को भी तुरंत इलाज नहीं मिल पा रहा, क्योंकि पहले पर्ची (रजिस्ट्रेशन) बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के कारण कई मरीजों की स्थिति और बिगड़ने की आशंका बढ़ रही है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि एक्सीडेंट, सीने में दर्द और अन्य गंभीर समस्याओं के साथ आए मरीजों को भी काउंटर पर लाइन में खड़ा किया जा रहा है। कई मामलों में मरीजों के परिजन स्ट्रेचर और तत्काल इलाज की गुहार लगाते रहे, लेकिन स्टाफ ने साफ कहा—पहले पर्ची बनवाइए। बताया जा रहा है कि इस देरी के कारण कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर हो गई, यहां तक कि पर्ची बनवाने के दौरान मौत के आरोप भी सामने आए हैं। अस्पताल में रोजाना करीब 4 हजार मरीजों का इलाज होता है, जबकि इमरजेंसी में औसतन 200 मरीज पहुंचते हैं। स्टाफ का कहना है कि बिना पर्ची मरीज का रिकॉर्ड नहीं बनता, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी में पहले प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य होता है, जबकि कागजी प्रक्रिया बाद में पूरी की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या गंभीर दुर्घटनाओं में शुरुआती 10 से 15 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान इलाज में देरी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस व्यवस्था में क्या सुधार होता है।

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