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रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े?

डॉ. पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों पर FIR के आदेश, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़े एक बेहद संवेदनशील बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी, मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। यह मामला शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) से जुड़ा है, जहां दो साल पहले एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। क्या है पूरा मामला पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को महिला ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लड़कियां सौंप दीं। इस पर परिवार को संदेह हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद कराई गई डीएनए जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सौंपी गई दो बच्चियों में से एक बच्ची माता-पिता की जैविक संतान थी, जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था। इससे बच्चों की अदला-बदली की आशंका प्रमाणित हुई। प्रशासनिक जांच पर उठे सवाल पीड़ितों का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तो तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में छह डॉक्टरों की एक नई टीम गठित कर दोबारा जांच कराई, जिसने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। बच्चा चोर गिरोह से सांठगांठ के आरोप पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रसूखदार डॉक्टरों और बच्चा चोर गिरोह की सांठगांठ हो सकती है। न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार पहले हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन कानूनी कारणों से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर और विस्तृत जांच योग्य माना। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी कड़े सवाल उठाए और रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। पहले से विवादों में रहे हैं डॉ. पहलाजानी गौरतलब है कि डॉ. नीरज पहलाजानी पहले से ही ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित नकद लेनदेन को लेकर पूछताछ की थी। अब बच्चों की अदला-बदली जैसे गंभीर मामले में उनका नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

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IAS और नेताओं ने उड़ाए कोल स्कैम के करोड़ों: चुनाव से लेकर जेवर तक में खर्च हुई रकम — ED की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

छत्तीसगढ़ के कोयला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नई चार्जशीट ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 570 करोड़ रुपए की अवैध कमाई में से 8 नेताओं और अफसरों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। इन पैसों से कुछ ने प्रॉपर्टी खरीदी, तो कुछ ने चुनावों में करोड़ों खर्च किए और यहां तक कि गहनों पर भी जमकर खर्चा हुआ। 💰 पैसा आया कहां से? ED के मुताबिक, इस घोटाले का मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी था, जो कोल ट्रांसपोर्टर्स और वाशरी संचालकों से प्रति टन 125 रुपए तक की वसूली करता था। 🧾 किसे कितना मिला और कहां खर्च हुआ? ED की चार्जशीट के अनुसार: 💬 ED ने नेताओं और सूर्यकांत की WhatsApp चैट भी पेश की चार्जशीट में नेताओं और सूर्यकांत तिवारी के बीच की WhatsApp बातचीत के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। 📲 देवेंद्र यादव और सूर्यकांत की चैट: बातचीत में चुनाव और मुलाकातों का जिक्र है —देवेंद्र यादव ने लिखा, “भैया मैं शंकर नगर पहुंच गया हूं, कहां आना है?”सूर्यकांत ने जवाब दिया, “रेडी होकर आता हूं भाई, 10 बजे अनुपम नगर पहुंचता हूं।”बाद में यादव ने लिखा, “मुझे खैरागढ़ निकलना है, कितना समय लगेगा?”सूर्यकांत का रिप्लाई आया — “DONE.” 💍 चंद्रदेव राय की चैट: ED के अनुसार, राय ने पत्नी के लिए हार खरीदने से पहले सूर्यकांत से पूछा —“भैया जी, आपकी बहू को ये पसंद आई है, कौन-सा लूं?”सूर्यकांत ने जवाब दिया — “जो बहू को पसंद है, वही ले लो।”इसके बाद राय के ड्राइवर ने होटल से पैसे लाकर ज्वेलरी शॉप में भुगतान किया। ⚖️ ED का दावा ED ने कोर्ट में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ कोल लेवी स्कैम में करीब 570 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हुई।वसूली के लिए ऑनलाइन परमिट सिस्टम को ऑफलाइन किया गया, ताकि नियंत्रण अधिकारियों के हाथ में रहे।इस आदेश पर तत्कालीन खनिज निदेशक IAS समीर विश्नोई के हस्ताक्षर थे। 📌 मुख्य बिंदु एक नजर में

IAS और नेताओं ने उड़ाए कोल स्कैम के करोड़ों: चुनाव से लेकर जेवर तक में खर्च हुई रकम — ED की चार्जशीट में बड़ा खुलासा Read Post »

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