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इंटर-स्टेट चोर गिरोह का पर्दाफाश: 4.99 लाख का सोना बरामद, 20 दिन बाद मेरठ से आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर पुलिस ने सिलसिलेवार चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए इंटर-स्टेट गैंग के एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ताज मोहम्मद को पकड़ने के लिए पुलिस टीम ने करीब 20 दिनों तक दिल्ली और मेरठ में डेरा डालकर लगातार निगरानी की। आखिरकार 24 अप्रैल को मुखबिर की सूचना पर उसे घेरकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके पास से करीब 35.34 ग्राम गला हुआ सोना बरामद किया है, जिसकी कीमत लगभग 4.99 लाख रुपए बताई जा रही है। आरोपी चोरी के बाद गहनों को पिघलाकर उनकी पहचान मिटा देता था। यह मामला 28 सितंबर 2025 को सिविल लाइन थाना क्षेत्र के साकेत और रियल हेवन अपार्टमेंट में हुई चोरी से जुड़ा है, जिसने पुलिस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने विशेष टीम का गठन किया, जिसमें सिविल लाइन पुलिस और एसीसीयू को शामिल किया गया। टीम ने 300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने साथी के साथ बाइक से बिलासपुर आया था और पहले दो दिनों तक शहर में रेकी कर सुनसान अपार्टमेंट्स को निशाना बनाया। मौका मिलते ही वे फ्लैट के ताले तोड़कर अंदर घुसते और चोरी को अंजाम देते। वारदात के बाद गहनों को चिमनी में गलाकर उनका रूप बदल दिया जाता था, ताकि पहचान न हो सके। तीसरी वारदात के दौरान लोगों को शक होने पर दोनों आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस ने बताया कि गिरोह का दूसरा सदस्य वसीम मोहम्मद फिलहाल दिल्ली की जेल में बंद है, जिसे जल्द ही बिलासपुर लाया जाएगा। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ताज मोहम्मद पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में 47 से ज्यादा चोरी और लूट के मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उससे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और बाकी वारदातों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

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छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसे: ट्रक में घुसी कार, मां-बेटे-नाती समेत 7 की मौत

छत्तीसगढ़ में अलग-अलग सड़क हादसों ने सोमवार को कई परिवारों को झकझोर दिया, जहां कुल 7 लोगों की मौत हो गई। सबसे दर्दनाक हादसा कोरबा जिले में हुआ, जहां एक ही परिवार के तीन लोगों—मां, बेटे और ढाई साल के नाती—की जान चली गई। यह हादसा चांपा-फरसवानी रोड पर देर रात हुआ, जब चौथिया कार्यक्रम से लौट रही तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराई और फिर पलटते हुए सड़क किनारे खड़ी हाइवा में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी घटना बिलासपुर में सामने आई, जहां सिम्स मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर की कार ने ऑटो को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग के दौरान डॉक्टर को झपकी आ गई, जिससे उनकी कार पहले दूसरी गाड़ी से टकराई और फिर ऑटो से जा भिड़ी। इस हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि ब्रीथ एनालाइजर जांच में शराब के सेवन की पुष्टि नहीं हुई। इसी तरह बारात से जुड़े दो अलग-अलग हादसों में भी जान-माल का नुकसान हुआ। कोटा से मुंगेली जा रही स्कॉर्पियो अचानक सामने आए साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर कई बार पलट गई, जिसमें एक महिला की मौत और 13 लोग घायल हो गए। वहीं, सीपत क्षेत्र में बारातियों से भरी एक पिकअप मोड़ पर पलट गई, जिससे एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि वाहन में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। एक अन्य हादसे में मस्तूरी क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहनों के आगे के हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। लगातार हो रहे इन हादसों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी इन घटनाओं की मुख्य वजह बन रही है, जिससे आए दिन लोगों की जान जा रही है।

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रायपुर में अंतरराज्यीय महिला चेन स्नेचिंग गैंग का खुलासा: लग्जरी कार में घूमकर करती थीं वारदात, 8 आरोपी गिरफ्तार

राजधानी Raipur में चेन स्नेचिंग की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय महिला गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह लग्जरी कार में घूमकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिलाओं को निशाना बनाता था। पुलिस ने इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 7 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। सभी आरोपी Indore के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ये लोग अलग-अलग राज्यों में जाकर वारदात को अंजाम देते थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब डी.डी. नगर थाना क्षेत्र के चंगोराभाठा बाजार में 66 वर्षीय महिला से सोने की चेन छीनी गई। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में कुछ संदिग्ध महिलाएं घटना के दौरान आसपास मंडराती नजर आईं। तकनीकी जांच और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि संदिग्ध वाहन भाठागांव बस स्टैंड के पास मौजूद है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर इनोवा कार को रोका, जिसमें सभी आरोपी सवार थे। पूछताछ में पहले वे पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते रहे, लेकिन बाद में सबूतों के आधार पर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह रायपुर के कई थाना क्षेत्रों में एक दर्जन से ज्यादा चेन स्नेचिंग की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इसके अलावा Gujarat, Rajasthan, Maharashtra और Chhattisgarh के अलग-अलग शहरों में भी इस गिरोह की सक्रियता सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकद राशि, सोने की चेन, एक कटर, मोबाइल फोन और एक इनोवा कार जब्त की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 11.30 लाख रुपए बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने चोरी की गई चेन बेचकर ही लग्जरी वाहन खरीदा था। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है और अन्य वारदातों से जुड़े लिंक की भी जांच जारी है।

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छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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