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भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- नेताओं को ताश के पत्तों की तरह बदलते हैं पीएम मोदी

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री भाजपा नेताओं को ताश के पत्तों की तरह बदलते रहते हैं और अन्य दलों को राजनीतिक नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि देश के सामने महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रही अनियमितताओं पर जवाब देना चाहिए। बघेल ने आरोप लगाया कि NEET और CBSE जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इस बीच, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों के लिए भूपेश बघेल और अजय शर्मा को झारखंड का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों में विभिन्न राज्यों की 24 सीटों के लिए मतदान होगा। कांग्रेस ने कई राज्यों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और झारखंड सहित कई राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं।

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पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए बस यात्रा हुई मुफ्त, पहचान पत्र दिखाकर मिल रही सुविधा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए राज्य संचालित बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा सोमवार से लागू कर दी गई है। सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत महिला यात्रियों को बसों में बिना किराया दिए सफर करने की अनुमति दी जा रही है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए महिलाओं को अपनी पहचान और पश्चिम बंगाल की निवासी होने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी एक वैध फोटो पहचान पत्र को साथ रखना अनिवार्य किया गया है। मान्य दस्तावेजों में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन पहचान पत्र, सरकारी या सार्वजनिक उपक्रमों के सेवा पहचान पत्र और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जारी पहचान पत्र शामिल हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बस कंडक्टर महिलाओं को पहचान पत्र दिखाने पर शून्य किराए का टिकट जारी कर रहे हैं। यह सुविधा राज्य की छोटी और लंबी दूरी की सभी सरकारी बस सेवाओं में उपलब्ध है। परिवहन विभाग ने इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए बस कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया है। सरकार ने बताया कि शुरुआती चरण में पहचान पत्र के आधार पर यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इसके बाद पात्र महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से क्यूआर कोड युक्त स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे। आवेदन संबंधित बीडीओ या एसडीओ कार्यालय में जमा किए जा सकेंगे। स्मार्ट कार्ड मिलने तक महिलाएं मान्य पहचान पत्रों के जरिए इस योजना का लाभ उठा सकेंगी। इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेताओं ने इसे चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, कई महिला यात्रियों का कहना है कि मुफ्त यात्रा सुविधा से उनके दैनिक खर्च में कमी आएगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।

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भूपेश बघेल का तंज- धीरेंद्र शास्त्री से पेट्रोल-डीजल सस्ता कराने की पर्ची निकलवाएं

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और धर्म संतों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू का जिक्र करते हुए कहा कि वे गौमांस खाते हैं, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रामभद्राचार्य इसे सही मानते हैं। भूपेश बघेल ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पर्ची निकालकर लोगों की समस्याएं बताई जाती हैं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम कम कराने की भी पर्ची निकलवानी चाहिए। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक बताते हुए कहा था कि वे उन्हें जगद्गुरु नहीं मानते। वहीं कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान कहा कि संत समाज और अखाड़ों ने उन्हें जगद्गुरु की मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगे। रामभद्राचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें भगवान राम से प्रेम करने वालों से परेशानी है, उन्हें यह सब अच्छा नहीं लग रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जो राम से प्रेम करेगा, उसे उनका आशीर्वाद मिलेगा।

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भिलाई में भूपेश बघेल का BJP पर हमला, बोले- पुराने नेताओं को दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिया

Bhupesh Baghel ने भिलाई में भाजपा सरकार और संगठन को लेकर तीखा बयान दिया है। एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने पुराने और वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से किनारे कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर Ramvichar Netam और Brijmohan Agrawal का नाम लेते हुए कहा कि दोनों नेताओं को “दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने पुराने नेताओं को महत्व नहीं दे रही है। गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के दौरान रामविचार नेताम और बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ भाजपा के कोर ग्रुप से बाहर कर दिया गया था। Bhilai में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकार वास्तव में चला कौन रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह समझ नहीं आ रहा कि फैसले मंत्रिमंडल ले रहा है या अधिकारी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब यह ही साफ नहीं है कि “परीक्षार्थी कौन है”, तब सरकार को नंबर कैसे दिए जाएं। बघेल ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह भ्रम की स्थिति में नजर आ रही है। कानून व्यवस्था को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में भाजपा नेताओं की संलिप्तता सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने अवैध शराब, सट्टा और अफीम खेती जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। बघेल ने कहा कि देशभर में ईंधन संकट जैसी स्थिति दिखाई दे रही है और कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने Narendra Modi की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की उपलब्धियों के बारे में देश को जानकारी मिलनी चाहिए।

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छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर NSUI का CM हाउस घेराव आज, बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने जताया समर्थन

रायपुर में छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर आज 7 मई को NSUI शाम 4 बजे मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं ने अपनी राय रखी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही छात्र संघ चुनाव के समर्थन में नजर आए, हालांकि चुनाव नहीं होने को लेकर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर सवाल भी उठाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि छात्र संघ चुनाव नेतृत्व तैयार करने की पहली पाठशाला होते हैं। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में होने वाले चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संगठन क्षमता और प्रशासनिक समझ विकसित करने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के कई बड़े नेता छात्र राजनीति से निकलकर आगे आए हैं। कांग्रेस शासनकाल में चुनाव नहीं होने के सवाल पर प्रमोद दुबे ने कहा कि सरकार तैयार थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता मृत्युंजय दुबे ने भी छात्र संघ चुनाव को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में छात्रों की समस्याओं को निर्वाचित प्रतिनिधि बेहतर तरीके से प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। उनके अनुसार 18 साल का युवा जब देश के जनप्रतिनिधि चुन सकता है, तो उसे अपने कॉलेज में भी प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि मृत्युंजय दुबे ने कांग्रेस और NSUI पर सवाल उठाते हुए कहा कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी चुनाव बंद रहे, तब संगठन ने इस मुद्दे पर ज्यादा आवाज नहीं उठाई। भाजयुमो के पूर्व प्रदेश मंत्री और PTRSU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रखर मिश्रा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव गरीब और मध्यमवर्गीय युवाओं को राजनीति में आगे आने का मौका देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र राजनीति में ABVP के प्रभाव के कारण अब NSUI चुनाव की मांग को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। इस पर पलटवार करते हुए NSUI जिलाध्यक्ष शांतनु झा ने कहा कि 2019 से 2022 तक कोरोना महामारी के चलते छात्र संगठन चुनाव नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस सरकार दोबारा बनती, तो चुनाव जरूर कराए जाते। उन्होंने कहा कि NSUI लगातार छात्र हित में आंदोलन कर रही है और अब भी चुनाव कराने की मांग पर अड़ी हुई है।

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BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। बीजेपी के इतिहास में यह दूसरी बार है जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। इससे पहले जेपी नड्डा ने भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठनात्मक प्रयोग किए थे, जिनका असर बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ से जुड़े अनुभव अब राष्ट्रीय रणनीति में नितिन नवीन को 2023 में छत्तीसगढ़ बीजेपी का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर प्रदेश प्रभारी थे। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिलों और मंडलों से फीडबैक लेना और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, वहां संगठन को संतुलन में रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। नितिन नवीन ने इन जमीनी हालात को समझते हुए अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठनात्मक सख्ती और स्पष्ट संदेश पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ बीजेपी को कांग्रेस सरकार, स्थानीय मुद्दों और आंतरिक गुटबाजी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान नितिन नवीन ने संगठन को नीचे तक सक्रिय रखने पर जोर दिया। मंडल से लेकर जिला स्तर तक नियमित फीडबैक और संगठनात्मक बदलाव किए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन की कार्यशैली शांत लेकिन निर्णायक रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल जरूरी है। इसी नीति के तहत कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल भी किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संभावित फायदे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य से जुड़े मुद्दे जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, आदिवासी इलाकों का विकास, शहरी प्रशासन और कानून-व्यवस्था अब सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश तेज हो सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधे जुड़े होने के कारण संतुलन साधने की भूमिका और मजबूत हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन में बदलाव के संकेत आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू होगी। ऐसे में पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में नाम से ज्यादा काम और जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी नेताओं के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नितिन नवीन पहले भी छत्तीसगढ़ में यह संदेश दे चुके हैं कि जिम्मेदारी प्रदर्शन के आधार पर तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से सीधा जुड़ाव केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाएं भी बढ़ाता है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रस्तुत किया जाए, इस पर रणनीति और स्पष्ट हो सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। जेपी नड्डा मॉडल की पुनरावृत्ति? जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बना था। अब नितिन नवीन के चयन को भी उसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मिले संगठनात्मक अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश है कि छत्तीसगढ़ में किए गए संगठनात्मक काम और जमीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से लेता है। इससे संगठन में भरोसा और सक्रियता बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य को पार्टी किस तरह की प्राथमिकता देती है।

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SIR को लेकर BJP की रणनीतिक बैठक आज: शिव प्रकाश रायपुर में लेंगे बैठक, CM, मंत्री, सांसद और विधायक रहेंगे मौजूद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत के अगले ही दिन बीजेपी ने इस पर रणनीति बनाने के लिए अहम बैठक बुलाई है। बैठक बुधवार को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होगी। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी शिव प्रकाश शामिल होंगे। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य सरकार के सभी मंत्री, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य SIR प्रक्रिया की जानकारी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना और मतदाता सत्यापन अभियान में जनता की सहायता के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है। कांग्रेस भ्रम फैला रही, BJP करेगी जवाबी जनजागरण भाजपा के प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने बताया कि कांग्रेस, SIR प्रक्रिया को लेकर जनता में गलतफहमियां फैला रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता को सही जानकारी देगी और कांग्रेस के दुष्प्रचार का जवाब देगी।मार्कंडेय के अनुसार, “देश के 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया लागू की है, और भाजपा इस पूरे अभियान में जनता की मदद के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगी।” शिव प्रकाश देंगे दिशा-निर्देश पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शिव प्रकाश विस्तार से बताएंगे कि SIR सर्वे के दौरान कार्यकर्ताओं को मतदाताओं के नाम जोड़ने, त्रुटियां सुधारने और डुप्लीकेट नाम हटाने में कैसे सहयोग करना है।इसके अलावा, पार्टी जल्द ही एक राज्यव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करेगी ताकि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सके। नेताओं को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी बीजेपी SIR के प्रति जन-जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी अपने मंत्री, सांसद और विधायकों को देगी। पार्टी नेताओं को जनता के बीच जाकर SIR प्रक्रिया के फायदे और उद्देश्य समझाने का निर्देश दिया जाएगा।शिव प्रकाश बुधवार सुबह दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगे और दोपहर में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे।

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हाईकोर्ट नाराज़: मंत्री के निज सचिव की पत्नी ने सड़क पर काटा केक, सरकार से सख्त कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निज सचिव राजेंद्र दास की पत्नी का सड़क पर बर्थडे सेलिब्रेशन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में लग्जरी कार की बोनट पर केक काटते और आतिशबाजी करते दृश्य दिख रहे हैं। इस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है और सरकार को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश अमितेंद्र प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इस घटना पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में FIR दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा चुकी है। वायरल वीडियो में राजेंद्र दास की पत्नी सफेद कार की बोनट पर केक काटती नजर आ रही हैं, जबकि आसपास पटाखे फूट रहे हैं और वीडियो शूट किया जा रहा है। कांग्रेस ने यह वीडियो पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि क्या हाईकोर्ट के नियम सिर्फ आम जनता पर लागू होते हैं, भाजपा नेताओं और उनके सहायकों पर नहीं? राजेंद्र दास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “केक सड़क पर नहीं, घर के सामने गली में काटा गया था, और पटाखे भी मैंने नहीं फोड़े।” उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक बदनाम करने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सड़क पर बर्थडे सेलिब्रेशन और तलवार या हथियार से केक काटने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं —

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