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सुबह पुलिस की रेड, शाम को फिर नशे का कारोबार: 10 रुपये में बिक रहा गोगो पेपर, चिलम भी आसानी से उपलब्ध

राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट जोन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की छापेमारी जारी है। अवैध शराब, गांजा, ड्रग्स और नशीली दवाइयों के तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का सामान खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। कई इलाकों में नशीले पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर चोरी-छिपे पुड़िया बनाकर सप्लाई की जा रही है। तस्कर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब होम डिलीवरी जैसे तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में आसानी से मिला गोगो पेपर पुलिस की सख्ती के बीच शाम के समय राजातालाब, सड्डू, डंगनिया, टिकरापारा और रायपुरा क्षेत्रों में नशे से जुड़ा सामान खरीदने की कोशिश की गई, जहां गोगो पेपर आसानी से उपलब्ध मिला। इसका इस्तेमाल गांजा पीने के साथ-साथ अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में भी किया जा रहा है। बाजार में गोगो पेपर 10 से 25 रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी कीमतें पुलिस की लगातार कार्रवाई के चलते पहले 10 रुपये में मिलने वाला गोगो पेपर अब 25 से 30 रुपये में बिकने लगा है। पहले पान ठेलों और दुकानों में गांजा लपेटकर गोगो दिया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के डर से केवल पेपर ही बेचा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गोगो बेचने वालों को पुलिस की रेड की जानकारी पहले ही मिल जाती है। पुलिस के पहुंचते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं और कार्रवाई खत्म होते ही फिर से खोल दी जाती हैं। चिलम और हुक्का सामान भी खुलेआम गोगो पेपर के अलावा कुम्हारों के पास आज भी मिट्टी की चिलम आसानी से मिल रही है। वहीं गोलबाजार क्षेत्र में चीनी मिट्टी और प्लास्टिक की चिलम भी खुलेआम बिक रही है। प्रतिबंध के बावजूद हुक्का का सामान और फ्लेवर भी कई दुकानों पर उपलब्ध है। रायपुर नॉर्थ जोन में बड़ी कार्रवाई, 9 दुकानें सील पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार सुबह रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 9 दुकानों और पान ठेलों से गांजा सेवन में उपयोग होने वाला गोगो पेपर और हुक्का सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त कर संबंधित दुकानों को सील कर दिया है। उरला-बीर्गांव और अन्य इलाकों में भी छापेमारी इसी तरह उरला-बीर्गांव क्षेत्र में पुलिस ने चार पान ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई करते हुए गोगो पेपर जब्त किया। दुकानों को सील कर संचालकों पर कोटपा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खमतराई, उरला समेत अन्य इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि गोगो पेपर के जरिए गांजा सेवन और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। नशेड़ी इसमें बीड़ी की तरह गांजा लपेटकर कश लगाते हैं। इसी वजह से पुलिस इस पर सख्ती से रोक लगाने में जुटी है।

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धान खरीदी को लेकर AAP का प्रदेशव्यापी चक्काजाम आज, 28 फरवरी तक तारीख बढ़ाने की मांग

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी आज प्रदेशभर में चक्काजाम करेगी और धान खरीदी की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 तक बढ़ाने की मांग उठाएगी। AAP का आरोप है कि सरकार की नीतियों के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं और कई किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले किसानों से 31 जनवरी तक धान खरीदी का भरोसा दिलाया था, लेकिन अचानक 29 जनवरी से ही खरीदी बंद की जा रही है। इससे हजारों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। छोटे किसानों पर जबरन रकबा समर्पण का आरोप AAP ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा लाखों छोटे किसानों से दबाव बनाकर रकबा समर्पण कराया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि कई किसानों को अब तक धान बेचने का टोकन तक नहीं मिला, जिससे वे मंडियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि टोकन के नाम पर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया अपनाकर किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। इससे न सिर्फ खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि किसानों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। रायपुर में NH-30 पर होगा चक्काजाम आम आदमी पार्टी ने साफ किया है कि जब तक धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। पार्टी आज रायपुर के अभनपुर क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 पर दोपहर 12 बजे चक्काजाम करेगी। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी AAP कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। AAP ने सरकार से मांग की है कि किसानों के हित में तत्काल फैसला लेते हुए धान खरीदी की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 तक बढ़ाई जाए।

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मेडिकल PG एडमिशन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुराना अलॉटमेंट निरस्त, अब नई काउंसलिंग से ही मिलेगी सीट

छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमों में बदलाव होने की स्थिति में पहले किया गया सीट अलॉटमेंट स्वतः समाप्त माना जाएगा। इसके चलते राज्य में मेडिकल PG के पुराने अलॉटमेंट को रद्द कर दिया गया है और अब अभ्यर्थियों को नई काउंसलिंग प्रक्रिया से ही सीट मिलेगी। यह अहम फैसला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2025 में नियम 11 में संशोधन के बाद किसी भी उम्मीदवार को पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का कानूनी अधिकार नहीं रह जाता है। जानिए पूरा मामला मामला भिलाई निवासी अनुष्का यादव की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के 22 और 23 जनवरी 2026 के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिनके तहत पहले पूरी हो चुकी काउंसलिंग और सीट आवंटन को रद्द कर दिया गया था। अनुष्का यादव का कहना था कि उसने मेरिट के आधार पर भिलाई के एक निजी मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस विषय में पीजी सीट प्राप्त की थी। इसके बाद उसने 10.79 लाख रुपये फीस और 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर कॉलेज जॉइन भी कर लिया था। याचिकाकर्ता की दलील याचिका में कहा गया कि एक बार प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद उसे रद्द करना गलत और अनुचित है। याचिकाकर्ता ने शासन के फैसले को मनमाना और अवैधानिक बताते हुए दावा किया कि इससे पहले से एडमिशन ले चुके छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। राज्य सरकार का पक्ष राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि काउंसलिंग रद्द करने का फैसला किसी भी तरह से मनमानी नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ. तन्वी बहल मामले में दिए गए निर्देशों के पालन में लिया गया कदम है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में डोमिसाइल आधारित आरक्षण असंवैधानिक है। केवल सीमित स्तर पर संस्थागत प्राथमिकता को ही अनुमति दी जा सकती है। इसी आधार पर नियम 11 में संशोधन किया गया। संशोधित नियमों के तहत: हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा और नियमों के अधीन हो, तब प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम प्रवेश नहीं माना जा सकता। अब नई याचिकाओं पर रोक हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस मुद्दे पर अब कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी। इससे मेडिकल PG एडमिशन प्रक्रिया में अनुशासन और स्थिरता सुनिश्चित होगी। इस फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ में मेडिकल PG सीटों के लिए नए नियमों के तहत फिर से काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है।

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रायपुर: तिल्दा-नेवरा में गांजा तस्कर गिरफ्तार, 73 किलो गांजा समेत नकद और हथियार जब्त

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में नशे के कारोबार पर रायपुर ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात गांजा तस्कर मधु मिश्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के घर पर अचानक छापेमारी कर करीब 73 किलो गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत 36 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को 790 नग प्रतिबंधित नशीली गोलियां, एक चाकू, मोबाइल फोन और करीब 1 लाख 87 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। यह कार्रवाई रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत की गई। जानकारी के अनुसार, रायपुर ग्रामीण पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को तिल्दा-नेवरा इलाके में सक्रिय नशा तस्करों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया था। इसी दौरान पुलिस को मधु मिश्रा के घर से नशीले पदार्थों के भंडारण की सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने सरप्राइज चेकिंग कर आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इलाके में गांजा और नशीली गोलियों की तस्करी में लिप्त था। जब्त सामग्री को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और आरोपी से पूछताछ जारी है। मामले का औपचारिक खुलासा जल्द ही रायपुर ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के नेतृत्व में पहली बड़ी सफलता रायपुर में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्र को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में बांटा गया है। ग्रामीण थानों की जिम्मेदारी एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को सौंपी गई है। कार्यभार संभालने के बाद यह उनके नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। ग्रामीण पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।

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स्विट्जरलैंड घूमने का सपना छोड़ साध्वी बनने जा रही सुरभि, रायपुर के 8 लोग मुमुक्ष बने; 13–16 साल के बच्चे भी शामिल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से जैन समाज की आस्था और त्याग से जुड़ी एक अनोखी मिसाल सामने आई है। यहां अलग-अलग परिवारों के 8 सदस्यों ने सांसारिक जीवन त्यागकर मुमुक्ष बनने का निर्णय लिया है। इनमें एक 27 वर्षीय युवती, दो दंपती और 13 से 16 वर्ष की उम्र के तीन बच्चे शामिल हैं। इन सभी ने कठिन तपस्या और गुरुओं की कड़ी परीक्षा के बाद मोक्ष के मार्ग पर चलने की अनुमति प्राप्त की। गुरुओं द्वारा 18 घंटे तक नंगे पांव चलाकर, संयम और सहनशीलता की परीक्षा ली गई, जिसमें सभी सफल रहे। गुरु ने कहा – त्याग ही जैन धर्म की सबसे बड़ी शक्ति जैन संत योग तिलक सुरीश्वर ने बताया कि जैन धर्म में त्याग और तप का विशेष महत्व है। जब कोई व्यक्ति सांसारिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मिक सुख को अपना लक्ष्य बना लेता है, तभी वह मुमुक्ष कहलाने योग्य बनता है। उन्होंने कहा कि सच्चे मार्गदर्शन और कठिन साधना के बिना यह मार्ग संभव नहीं। आधुनिक सोच वाली सुरभि अब बनेंगी साध्वी 27 साल की सुरभि भंसाली, जिन्होंने मास्टर ऑफ फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की है, आधुनिक जीवनशैली की शौकीन थीं। घूमना-फिरना, दोस्तों के साथ समय बिताना और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उनकी मां बदामी बाई भंसाली ने बताया कि सुरभि को स्विट्जरलैंड और कश्मीर घूमने का सपना था और वह वर्ल्ड टूर करना चाहती थी। लेकिन चातुर्मास के दौरान धार्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन धर्म और साधना को समर्पित करने का फैसला किया। परिवार को पहले हैरानी हुई, लेकिन बाद में गर्व महसूस हुआ। एक ही परिवार के चार सदस्य बने मुमुक्ष रायपुर की आम्रपाली सोसायटी निवासी आशीष सुराना (44), उनकी पत्नी रितु सुराना (42) और दोनों बेटे आर्यन (16) व आरुष (14) भी मुमुक्ष बनने जा रहे हैं। चारों ने मिलकर सांसारिक रिश्तों और सुख-सुविधाओं को छोड़ने का निर्णय लिया है। दीक्षा के बाद इनका आपसी पारिवारिक रिश्ता भी समाप्त हो जाएगा। 18 घंटे नंगे पांव चलकर दी परीक्षा परिवार के सदस्य रितेश सुराना ने बताया कि गुरु द्वारा बच्चों और माता-पिता की कई स्तरों पर परीक्षा ली गई। इन सभी परीक्षाओं में परिवार सफल रहा। बिजनेस बेचकर मोक्ष की राह चुनी आशीष सुराना का रायपुर में बैग का होलसेल कारोबार था, जिसे उन्होंने दीक्षा से पहले बेच दिया। इसके बाद परिवार के साथ समय बिताया और फिर पत्नी व बच्चों के साथ मुमुक्ष बनने निकल पड़े। 13 साल का तनिष भी चुनेगा संयम का जीवन रायपुर के दावड़ा कॉलोनी निवासी 13 वर्षीय तनिष सोनिगरा भी मुमुक्ष बनने जा रहे हैं। उनके माता-पिता प्रमोद और शीतल सोनिगरा ने बताया कि शुरुआत में यह फैसला स्वीकार करना बेहद कठिन था, लेकिन तनिष के आत्मिक झुकाव को देखकर उन्होंने सहमति दी। तनिष को फिल्में देखना और अच्छा खाना पसंद था, लेकिन अब उसने स्वयं संयम और तप का जीवन चुना है। माता-पिता बने मुमुक्ष, बेटा बना सहारा सदर बाजार निवासी शैलेंद्र संकलेचा (49) और उनकी पत्नी एकता संकलेचा (47) भी मुमुक्ष बन रहे हैं। उनके बेटे यश ने कहा कि शुरुआत में यह फैसला दुखद लगा, लेकिन बाद में समझ आया कि हर इंसान को अपने जीवन में सच्चा सुख चुनने का अधिकार है। मुमुक्ष बनने के बाद ऐसा होगा जीवन मुमुक्ष बनने के बाद व्यक्ति: मुंबई में होगा दीक्षा समारोह 8 फरवरी को मुंबई में संयमरंग महोत्सव आयोजित होगा, जहां देशभर के 64 मुमुक्ष दीक्षा लेंगे। इनमें रायपुर के ये 8 मुमुक्ष भी शामिल होंगे। इससे पहले रायपुर में 25 और 26 जनवरी को संयम मनोरथ उत्सव आयोजित कर जैन समाज ने सभी मुमुक्षों को भावभीनी विदाई दी।

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सोना ₹1.59 लाख के पार, चांदी ₹3.42 लाख/kg पर पहुंची; 27 दिन में रिकॉर्ड तेजी

देश में सोने और चांदी की कीमतों ने आज (27 जनवरी) अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर ₹4,717 की छलांग लगाकर ₹1,59,027 हो गया है। इससे पहले सोना ₹1,54,310 प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। एक किलो चांदी ₹24,802 महंगी होकर ₹3,42,507 प्रति किलो पर पहुंच गई है। सिर्फ जनवरी के 27 दिनों में ही चांदी ₹1.12 लाख से ज्यादा महंगी हो चुकी है। जनवरी में ही सोना ₹25,832 और चांदी ₹1.12 लाख महंगी 31 दिसंबर 2025 को जहां 24 कैरेट सोना ₹1,33,195 प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹25,832 की बढ़त के साथ ₹1,59,027 पर पहुंच गया है। चांदी की बात करें तो साल के आखिरी दिन इसकी कीमत ₹2,30,420 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर ₹3,42,507 प्रति किलो हो गई है। सोने की कीमतों में तेजी के 3 बड़े कारण 1. ग्लोबल तनाव और ग्रीनलैंड विवादअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे हालात में निवेशक शेयर बाजार छोड़कर सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर रुख कर रहे हैं। 2. डॉलर के मुकाबले रुपये की ऐतिहासिक गिरावटआज रुपया डॉलर के मुकाबले ₹91.10 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया है। कमजोर रुपये के कारण आयातित सोने की लागत बढ़ गई है, जिससे घरेलू बाजार में सोने के दाम ₹1.5 लाख के पार चले गए। 3. सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारीRBI समेत दुनियाभर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार 2026 की शुरुआत में भी यह मांग मजबूत बनी हुई है। चांदी की तेजी के 3 प्रमुख कारण ₹1.90 लाख तक जा सकता है सोना मार्केट एक्सपर्ट और रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर अमेरिकी टैरिफ विवाद और मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो 2026 में सोना ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। वहीं चांदी ₹4 लाख प्रति किलो का आंकड़ा छू सकती है। सोना खरीदते समय रखें ये 2 जरूरी बातें 1. BIS हॉलमार्क जरूर देखेंहमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे शुद्धता की पुष्टि होती है। 2. कीमत जरूर क्रॉस-चेक करेंखरीदारी से पहले IBJA जैसी आधिकारिक वेबसाइट से सोने की कीमत जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के भाव अलग-अलग होते हैं। असली चांदी पहचानने के 4 आसान तरीके यह भी पढ़ें भारतीय घरों में जमा सोने की कीमत देश की GDP से भी ज्यादा हो चुकी है। अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 34,600 टन सोना मौजूद है, जिसकी कुल वैल्यू ₹450 लाख करोड़ से ज्यादा आंकी गई है।

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रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े?

डॉ. पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों पर FIR के आदेश, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़े एक बेहद संवेदनशील बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी, मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। यह मामला शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) से जुड़ा है, जहां दो साल पहले एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। क्या है पूरा मामला पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को महिला ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लड़कियां सौंप दीं। इस पर परिवार को संदेह हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद कराई गई डीएनए जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सौंपी गई दो बच्चियों में से एक बच्ची माता-पिता की जैविक संतान थी, जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था। इससे बच्चों की अदला-बदली की आशंका प्रमाणित हुई। प्रशासनिक जांच पर उठे सवाल पीड़ितों का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तो तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में छह डॉक्टरों की एक नई टीम गठित कर दोबारा जांच कराई, जिसने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। बच्चा चोर गिरोह से सांठगांठ के आरोप पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रसूखदार डॉक्टरों और बच्चा चोर गिरोह की सांठगांठ हो सकती है। न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार पहले हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन कानूनी कारणों से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर और विस्तृत जांच योग्य माना। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी कड़े सवाल उठाए और रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। पहले से विवादों में रहे हैं डॉ. पहलाजानी गौरतलब है कि डॉ. नीरज पहलाजानी पहले से ही ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित नकद लेनदेन को लेकर पूछताछ की थी। अब बच्चों की अदला-बदली जैसे गंभीर मामले में उनका नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

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कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी

रायपुर।रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज खमतराई CSP कार्यालय में आदतन अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कमिश्नर मयंक गुज्जर के निर्देश पर खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को खमतराई CSP ऑफिस में पेश किया गया। इस दौरान CSP पूर्णिमा लामा, उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर, गुढ़ियारी थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर और खमतराई थाना प्रभारी राजेश सिंह मौजूद रहे। खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को CSP ऑफिस में पेश किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सभी अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने, अपराध से दूर रहने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी। साथ ही यह भी साफ किया गया कि कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। रायपुर पुलिस ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलेगा।

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मजदूरों का आरोप: ठेकेदार ने बंधक बनाकर की मारपीट, 3.85 लाख की मजदूरी हड़पी; गोली मारने की धमकी, हिसाब की डायरी जलाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव में राजस्थान से कपास तोड़ने आए मजदूरों के साथ गंभीर उत्पीड़न का मामला सामने आया है। मजदूरों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदारों ने उन्हें खेत में बंधक बनाकर रखा, बेरहमी से पीटा और उनकी पूरी मजदूरी देने से इनकार कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें गोली मारने की धमकी दी गई और काम का पूरा लेखा-जोखा रखने वाली डायरी भी जला दी गई। मामला कुम्हारी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। राजस्थान के अलवर जिले से करीब 15 मजदूर—जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं—करीब दो महीने पहले दुर्ग जिले में कपास तोड़ने के लिए लाए गए थे। मजदूरों के अनुसार, नरेश नामक व्यक्ति ने उन्हें रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद उन्हें जोगेंद्र और उसके भाई गोरा मलिक के खेत में काम पर लगाया गया। मजदूरों का कहना है कि कपास तोड़ने का सौदा 10 रुपए प्रति किलो तय हुआ था, यानी 100 किलो पर 1000 रुपए मजदूरी तय की गई थी। मजदूर राजकुमार के मुताबिक, तीन महीने की मेहनत के बाद कुल मजदूरी करीब 4 लाख 35 हजार रुपए बनती है। हालांकि, 9 जनवरी को ठेकेदार ने सिर्फ 50 हजार रुपए दिए, जबकि 3 लाख 85 हजार रुपए अब भी बकाया हैं। आरोप है कि जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी की मांग की, तो ठेकेदार जोगेंद्र और गोरा मलिक ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। मजदूरों का दावा है कि 22 जनवरी को ठेकेदारों ने वह डायरी जला दी, जिसमें पूरे काम का हिसाब लिखा हुआ था। इसी दिन कई मजदूरों के साथ मारपीट भी की गई। मजदूरों का कहना है कि करीब 10 मजदूरों और 2 बच्चों को खेत में जबरन रोककर रखा गया और किसी को बाहर जाने नहीं दिया जा रहा था। डर के कारण कुछ मजदूर किसी तरह वहां से भागे और कुम्हारी थाने पहुंचे। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय ठेकेदारों का पक्ष लिया और पुलिस की मौजूदगी में भी उन्हें धमकाया गया। मजदूरों के अनुसार, जान के खतरे को देखते हुए वे देर रात करीब 3 बजे खेत से निकलकर चरोदा स्थित एक मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने रात गुजारी। मजदूरों ने घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी बनाए हैं, जिनमें बातचीत रिकॉर्ड है, हालांकि वीडियो में चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे हैं। 24 जनवरी को मजदूर भिलाई-3 स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी। दूसरी ओर, ठेकेदार जोगेंद्र ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उसका कहना है कि मजदूरों से उसका कोई विवाद नहीं है और पूरे मामले की जानकारी पुलिस ही दे सकती है। इस मामले में सीएसपी प्रशांत कुमार ने बताया कि मजदूरों को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे सामने नहीं आए। ठेकेदार के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मजदूरों को भगाने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि दोनों पक्षों को दोबारा बुलाकर मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Top News

रायगढ़ में मिलावटी दुग्ध उत्पादों पर कार्रवाई: लेबल बदलते पकड़ा गया पिकअप, 2 लाख से ज्यादा का माल जब्त

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार शाम एक पिकअप वाहन में दही और अन्य दुग्ध उत्पादों के डिब्बों पर ब्रांड का लेबल बदलते हुए लोगों ने पकड़ लिया, जिसके बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दी गई। मामले की जांच दो दिनों तक चली, जिसमें नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर करीब 2 लाख 3 हजार रुपये मूल्य के दुग्ध उत्पाद जब्त किए गए हैं। चक्रधर नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि दुर्ग जिले से एक संदिग्ध पिकअप वाहन के जरिए रायगढ़ शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी मात्रा में दुग्ध उत्पाद बेचे जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि उत्पादों के मूल लेबल से छेड़छाड़ कर दूसरे ब्रांड के रैपर चिपकाए जा रहे थे। पिकअप वाहन में दही और कॉटेज एनालॉग जैसे दुग्ध उत्पाद 5 और 15 किलोग्राम के बंद प्लास्टिक जार और पैकेटों में भरे हुए थे। पुलिस ने वाहन को थाने लाकर खाद्य सुरक्षा विभाग को सौंपा, जिसके बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ये उत्पाद कस्तूरी डेयरी, केलोविहार, रायगढ़ की प्रोपराइटर सोनिया जायसवाल द्वारा बिक्री के लिए मंगाए गए थे। यह सामग्री वैद्य फूड्स, शंकर नगर, भिलाई (दुर्ग) से लाई गई थी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पाया गया कि नंदनम क्लासिक दही, जिसे कृष्णा नंदन मिल्क एंड डेयरी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिलासपुर द्वारा निर्मित किया जाता है, उसके मूल लेबल हटाकर उस पर वैद्य फूड्स का रैपर चिपकाया जा रहा था। इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 और लेबलिंग नियम 2020 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कस्तूरी डेयरी परिसर पहुंचकर तीन खाद्य नमूने लिए। इनमें नंदनम क्लासिक दही और वैद्य फूड्स कॉटेज एनालॉग के दो अलग-अलग पैक शामिल हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया है। गुणवत्ता को लेकर संदेह और नियमों का पालन न होने के चलते मौके पर रखे गए बड़ी मात्रा में दुग्ध उत्पाद जब्त कर लिए गए। जब्त सामग्री का कुल अनुमानित बाजार मूल्य 2 लाख 3 हजार 750 रुपये बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान 515 किलोग्राम दही और 770 किलोग्राम कॉटेज एनालॉग दुग्ध उत्पाद जब्त किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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