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राज्योत्सव 2025: पीएम मोदी अब केवल 1 दिन के लिए रायपुर आएंगे, कार्यक्रम में बदलाव

छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर रायपुर में होने वाले राज्योत्सव के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा अब एक दिन का ही रहेगा। पहले उनका दो दिवसीय दौरा तय था, लेकिन बिहार चुनाव की व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम घटाकर 1 नवंबर कर दिया गया है। 🔹 पीएम मोदी का revised schedule 🔹 5 दिन तक चलेगा राज्योत्सव इस वर्ष राज्योत्सव 1 नवंबर से 5 नवंबर तक नवा रायपुर में आयोजित किया जाएगा। पहले यह आयोजन 3 दिन का होता था, लेकिन इस बार इसे 5 दिन का भव्य आयोजन बनाने का निर्णय लिया गया है। समापन समारोह में उपराष्ट्रपति भी शामिल होंगे। 🔹 तैयारी और जिम्मेदारी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों के साथ कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया।राज्य सरकार ने 6 नोडल अफसर नियुक्त किए हैं, जिनकी जिम्मेदारी विभिन्न कार्यक्रमों और उद्घाटनों की देखरेख करना है। 🔹 स्थानीय अवकाश राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा। हालांकि बैंक, कोषालय और वित्तीय संस्थानों पर यह अवकाश लागू नहीं होगा। 🔹 ऐतिहासिक महत्व प्रधानमंत्री मोदी का छत्तीसगढ़ के साथ पुराना और भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने बार-बार कहा है कि यह राज्य देश के विकास की नई ऊर्जा का केंद्र बनेगा। राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ पर उनकी उपस्थिति को ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में 10 दवाओं में बड़ी गड़बड़ी, 9 अमानक और 1 नकली पाई गई

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में देशभर में 112 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए, जबकि एक दवा नकली निकली। इस सूची में छत्तीसगढ़ की 10 दवाएं शामिल हैं, जिनमें 9 दवाएं मानक गुणवत्ता (NSQ) पर खरी नहीं उतरीं और 1 दवा नकली (Spurious) पाई गई। 🔹 अमानक और नकली दवाओं का विवरण छत्तीसगढ़ में फेल पाई गई दवाओं में आम घरेलू दवाएं भी शामिल हैं, जैसे: अमानक दवाओं में डिज़ॉल्यूशन टेस्ट और Assay टेस्ट में खामी पाई गई, यानी दवा शरीर में सही ढंग से असर नहीं कर रही थी या सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा से कम था। नकली फंगल क्रीम मामले में कंपनी ने किसी असली ब्रांड का नाम इस्तेमाल किया था और उसके पास लाइसेंस नहीं था। 🔹 दवाओं की खपत और कारोबार 🔹 NSQ यानी “Not of Standard Quality” एक दवा को NSQ तभी माना जाता है जब वह किसी निर्धारित क्वालिटी मानक पर फेल हो। यह जांच विशेष बैच पर होती है। एक बैच फेल होने का मतलब यह नहीं कि पूरे ब्रांड की दवा खराब है। 🔹 प्रशासन का कहना राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि केंद्र से नोटिफिकेशन अभी तक उन्हें नहीं मिला है। CDSCO हर महीने देशभर की दवाओं का क्वालिटी चेक करता है और फेल या नकली दवाओं की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है। 🔹 इन दवाओं से बचने के उपाय इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि बाज़ार में बिकने वाली हर दवा पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सही सावधानी बेहद जरूरी है।

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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम तैयार हो गया है — यह म्यूजियम भारत की आदिवासी विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और शौर्य गाथाओं को आधुनिक तकनीक के ज़रिए जीवंत रूप में पेश करता है।

1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। करीब 9.75 एकड़ में फैले इस म्यूजियम का निर्माण लगभग 3 साल 5 महीने में हुआ है और इस पर 50 करोड़ रुपये की लागत आई है। 🔸 डिजिटल तकनीक से सजी 14 गैलरी म्यूजियम में कुल 14 गैलरी बनाई गई हैं — जिनमें 12 आदिवासी विद्रोह और 2 सत्याग्रहों की कहानी प्रदर्शित की गई है।यहां डिजिटल स्क्रीन, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले, और प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से आदिवासी नायकों की वीरता को दिखाया गया है।लोग QR कोड स्कैन कर हर गाथा को हिन्दी और अंग्रेजी में सुन और देख सकते हैं। 🔸 प्रमुख विद्रोह और नायक हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्नम, परलकोट, तारापुर, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा और जंगल सत्याग्रह जैसे आंदोलनों को यहां जीवंत झांकी के रूप में दिखाया गया है।संग्रहालय में वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा, रानी गाइडलो, वीर गुंडाधुर, गैंद सिंह, सुकदेव पातर जैसे महान नायकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। 🔸 साल वृक्ष की प्रतीकात्मक झांकी मुख्य प्रवेश द्वार पर 1400 वर्ष पुराने साल वृक्ष की प्रतिकृति बनाई गई है, जिसकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों का संक्षिप्त वर्णन अंकित है।बाहर की दीवारों पर वीर नारायण सिंह से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज — जैसे जेल रिकॉर्ड और सजा के आदेश की प्रतियां — प्रदर्शित की गई हैं। 🔸 सभी के लिए सुविधाएं यहां सीनियर सिटिज़न और दिव्यांग जनों के लिए रैंप और आराम क्षेत्र बनाए गए हैं। परिसर में एक तालाब, सेल्फी पॉइंट्स, और कैफेटेरिया भी है। 🔸 प्रवेश शुल्क जल्द तय होगा यह म्यूजियम आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, नवा रायपुर में स्थित है।भविष्य में यहां प्रवेश के लिए टिकट लेना अनिवार्य होगा, हालांकि अभी तक प्रवेश शुल्क का निर्धारण नहीं हुआ है।टिकट काउंटर और चेक प्वाइंट की व्यवस्था पहले से तैयार कर ली गई है। यह संग्रहालय न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है — जो भारत के आदिवासी नायकों की अमर गाथाओं को डिजिटल युग में नई पहचान देगा।

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रायपुर में वक्फ बोर्ड ने तीन हिंदू परिवारों को भेजा नोटिस, मजार की जमीन पर अवैध कब्जा का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वक्फ बोर्ड ने तीन हिंदू परिवारों को नोटिस भेजकर उनके मजार की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। इस कदम के बाद परिवारों में हड़कंप मच गया है। नोटिस में जमीन और खसरा विवरण नोटिस में कहा गया है कि परिवार जिस जमीन पर रह रहे हैं, वह मजार ए शरीफ खाकी शाह साहब की दरगाह की वक्फ संपत्ति है। इसमें खसरा नंबर 1888, रकबा 0.101 हेक्टेयर का जिक्र है। नोटिस में परिवारों से वैध दस्तावेज और जवाब मांगा गया है। अगर वे समय पर जवाब नहीं देंगे, तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। परिवारों की आपत्ति नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता का माहौल है। जिनके घर नोटिस भेजे गए हैं, उनमें डॉक्टर एस एन जौहरी, अरविंद अग्रवाल और राजेश शामिल हैं। राजेश ने बताया कि उन्होंने यह जमीन 2007 में खरीदी थी और तब से अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका दावा है कि नोटिस में उल्लिखित खसरा नंबर उनकी जमीन से अलग है। उन्होंने अपने वकील की मदद से वक्फ बोर्ड को जवाब भेजा है और सही खसरा नंबर की जानकारी भी मांगी है। किराया देकर रह सकते हैं वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम रजा ने बताया कि नोटिस नियम के अनुसार जारी किया गया है। यदि परिवारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो उन्हें 1 से 3 महीने का समय दिया जाएगा। इस दौरान वे जमीन पर तय किराया देकर रह सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया जारी वक्फ बोर्ड और परिवारों के बीच यह विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाएगा। परिवार अपने दस्तावेजों के आधार पर वैधता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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धान खरीदी से पहले सहकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा — 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में इस साल 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने सरकार के खिलाफ तीन नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उनकी चार सूत्रीय मांगों को पूरा करने का पिछले साल आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि अगर इस बार भी उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो वे धान खरीदी सीजन का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। 24 अक्टूबर से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन:कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन की रूपरेखा जारी करते हुए बताया — कर्मचारी बोले — भविष्य से जुड़ी हैं हमारी मांगें:संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ वेतन या भत्तों के लिए नहीं, बल्कि लगभग 15,000 सहकारी समिति कर्मचारियों और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की निष्क्रियता के कारण कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। अगर हड़ताल शुरू होती है, तो इसका सीधा असर धान उपार्जन प्रक्रिया पर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पिछले वर्ष भी मिला था आश्वासन:संघ नेताओं ने बताया कि बीते वर्ष भी धान खरीदी से पहले आंदोलन किया गया था। उस समय शासन ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी और ऑपरेटरों ने किया खरीदी का बहिष्कार करने का ऐलान:संघ के नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धान खरीदी में भाग नहीं लेंगे। इस स्थिति में धान खरीदी केंद्रों पर असर दिखना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो इससे प्रदेश के लाखों किसानों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि धान खरीदी छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

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रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर दो महीने की रोक: तूता स्थल बंद, वैकल्पिक जगह का फैसला नहीं

रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अगले दो महीने तक किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला स्थल के रखरखाव और सुधार कार्य के कारण लिया गया है। कलेक्टर ने जारी किया आदेश जिला कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी किया है कि अगली सूचना तक तूता धरना स्थल पर कोई भी धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि यह कार्य लगभग दो महीने तक चलेगा और इस दौरान स्थल को नगर विकास प्राधिकरण के अधीन रखा जाएगा। वैकल्पिक धरना स्थल तय नहीं धरना-प्रदर्शन के लिए फिलहाल किसी वैकल्पिक स्थल की घोषणा नहीं की गई है। इसके चलते राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आंदोलनकारी फिलहाल प्रदर्शन स्थल उपलब्ध न होने की स्थिति में हैं। तूता धरना स्थल का महत्व तूता धरना स्थल नवा रायपुर के राज्योत्सव मैदान के सामने स्थित है और राज्य स्तर पर संगठनों और राजनीतिक आंदोलनों के लिए आरक्षित माना जाता है। पिछले वर्षों में यहां कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन हुए हैं।

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रायपुर में शुरू हुई जनगणना की तैयारी: वार्ड 52 बना देश का ट्रायल जोन, हर घर को दिया जा रहा यूनिक नंबर

रायपुर नगर निगम का वार्ड क्रमांक 52 (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वार्ड) अब देश के लिए जनगणना का ट्रायल जोन बन गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय के निर्देश पर यहां प्री-टेस्ट जनगणना का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया आने वाली राष्ट्रीय जनगणना की तैयारी के तौर पर की जा रही है। निगरानी में हो रहा काम जनगणना निदेशालय के अधिकारी हीरेन्द्र सिंहा ने खुद रायपुर पहुंचकर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, और नोडल अधिकारी योगेश यदु भी इस निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे। 8000 घरों में से 2500 की नंबरिंग पूरी नगर निगम की राजस्व और नगर निवेश विभाग की टीम ने वार्ड के लगभग 8000 भवनों की सूचीबद्धता और नंबरिंग का काम शुरू किया है। अब तक 2500 से अधिक भवनों को यूनिक नंबर दिए जा चुके हैं। यह काम निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जनता से सहयोग की अपील नगर निगम ने वार्ड 52 के नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना टीम का पूरा सहयोग करें। अधिकारियों ने बताया कि भवनों की पहचान और नंबरिंग का कार्य पूरी सुरक्षा और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। क्या है प्री-टेस्ट जनगणना? प्री-टेस्ट जनगणना एक ट्रायल प्रक्रिया है, जिसमें सीमित क्षेत्र में घरों की गिनती, मैपिंग और डेटा कलेक्शन किया जाता है। इसका उद्देश्य असली जनगणना के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रायोगिक चुनौतियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना होता है।

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रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में, चार अफसर रेस में – 1 नवंबर से लागू होने की संभावना

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गृह विभाग ने इस व्यवस्था से जुड़ी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दिवाली के बाद होने वाली राज्य कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो 1 नवंबर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाएगा। गृह विभाग ने कुछ समय पहले पुलिस मुख्यालय (PHQ) से रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। इसमें आईजी अजय यादव, आईजी अमरेश मिश्रा, डीआईजी ओपी पाल, एसपी अभिषेक मीणा और एसपी संतोष सिंह सदस्य थे। समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर पद के लिए चार सीनियर आईपीएस अधिकारी दावेदारी में हैं। इसी तरह एडिशनल पुलिस कमिश्नर के लिए भी चार नामों पर चर्चा चल रही है। ⚖️ कमेटी के सुझाव और विकल्प एडीजी प्रदीप गुप्ता की कमेटी ने कमिश्नर की रैंक को लेकर तीन विकल्प सुझाए हैं —1️⃣ एडीजी रैंक के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जाए।2️⃣ आईजी रैंक के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए।3️⃣ डीआईजी रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया जाए। कैबिनेट बैठक में तय किया जाएगा कि इनमें से कौन-सा विकल्प अपनाया जाए। इसके साथ ही, शीर्ष पद के अनुसार जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एसीपी के पदों की संख्या भी तय होगी। शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार, इस नई प्रणाली में 60 से अधिक अधिकारी काम करेंगे। 🌐 इन राज्यों की स्टडी की गई ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के पुलिस कमिश्नर सिस्टम का अध्ययन किया गया है। 🔍 कमिश्नर प्रणाली से पुलिस को मिलेंगे अधिक अधिकार इस व्यवस्था में पुलिस को कलेक्टर जैसी कुछ प्रशासनिक शक्तियां मिलेंगी। कमिश्नर को मजिस्ट्रेट की तरह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने, गुंडा एक्ट, रासुका और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसके अलावा होटल, बार, हथियारों के लाइसेंस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति और दंगे-झगड़ों में फौरन कार्रवाई जैसे निर्णय पुलिस स्तर पर ही लिए जा सकेंगे। 🏢 पुलिस कमिश्नरेट संरचना (Structure) इस सिस्टम में प्रमुख पद होंगे – पुलिस कमिश्नर (CP), संयुक्त पुलिस आयुक्त (Jt. CP), अपर पुलिस आयुक्त (Addl. CP), पुलिस उपायुक्त (DCP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), पुलिस निरीक्षक (PI/SHO), उप-निरीक्षक (SI) और कॉन्स्टेबल। 🗺️ अन्य राज्यों में उदाहरण राजस्थान में एसीपी को कुछ मामलों में न्यायिक अधिकार प्राप्त हैं।महाराष्ट्र में पुलिस कमिश्नर को जुलूस, आतिशबाजी, सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार है।उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में पुलिस को प्रशासनिक और एहतियाती कार्रवाई के 14 एक्ट्स के तहत अधिकार दिए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में महिला कैदियों के साथ जेल में रह रहे 60 बच्चे, प्रभावित हो रहा उनका बचपन

छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस मामले में देश में छठे स्थान पर है। नियम के अनुसार, जेल में छह साल से छोटे बच्चों को अपनी मां के साथ रखा जाता है, जिससे ये बच्चे भी जेल की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 311, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 170, बिहार में 167, मध्य प्रदेश में 126 और झारखंड में 84 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। छत्तीसगढ़ में 60 महिला कैदी बच्चों के साथ जेल में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जेल का वातावरण बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौतीपूर्ण है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित पालन-पोषण, शिक्षा और खेल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालांकि कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 तक भारत में कुल 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ जेल में थीं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी थीं, जिनके साथ 1,191 बच्चे जेल में थे, जबकि 249 महिला कैदियों को दोष सिद्ध किया जा चुका था और वे अपने 272 बच्चों के साथ जेल में थीं। बाल अधिकार विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को महिला कैदियों के बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल और शिक्षा की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उनका बचपन जेल की सलाखों में न गुजरे और वे समाज की मुख्यधारा से कट न जाएं।

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कोरबा: हितग्राहियों को नहीं मिली NTPC क्षतिपूर्ति राशि, नाराज ग्रामीण एसडीएम ऑफिस पहुंचे

कोरबा। एनटीपीसी की क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान में देरी को लेकर राखड़ प्रभावित धनरास गांव के सैकड़ों ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी ने एक साल की क्षतिपूर्ति राशि दो महीने पहले राजस्व विभाग को दे दी थी, लेकिन यह राशि अब तक प्रभावितों के खातों में नहीं पहुंची। पहले यह राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जमा होती थी, लेकिन इस बार विभाग में अटकी हुई है। दीपावली से पहले भुगतान की मांग ग्रामीणों ने त्योहार से पहले राशि जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि मुआवज़ा न मिलने से गांव में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। ग्रामीण शशि कुमार ने बताया कि पहले यह राशि सरपंच और पंच के माध्यम से प्रभावित लोगों में बांटी जाती थी। अब यह सीधे प्रभावितों के बैंक खाते में भेजी जा रही है, लेकिन इस बार उन्हें राशि नहीं मिली। प्रदूषण और बीमारियों का खामियाजा ग्रामीणों ने यह भी कहा कि एनटीपीसी द्वारा डंप की गई राखड़ के कारण होने वाले प्रदूषण और बीमारियों का खामियाजा वे भुगत रहे हैं। यही राशि उनके इलाज और रोजमर्रा के खर्चों में उपयोग होती है। प्रभावितों को लगभग 6–7 हजार रुपए मिलते हैं। एसडीएम ने दी जानकारी कटघोरा एसडीएम तन्मय खन्ना ने बताया कि अब तक 1100 से अधिक लोगों के बैंक विवरण जमा हो चुके हैं और सिस्टम में एंट्री में समय लग रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी विवरण दीपावली से पहले बैंक खातों में डाले जाएंगे। एसडीएम ने कहा कि उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन और तहसीलदार से बात की है और शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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