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नान घोटाला: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, सुप्रीम कोर्ट का आदेश न होने पर लौटे

छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में रिटायर्ड IAS अफसर आलोक शुक्ला शुक्रवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचे। लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश के बिना सरेंडर स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद आलोक शुक्ला अदालत से वापस लौट गए। कोर्ट ने क्या कहा बचाव पक्ष के वकील फैज़ल रिज़वी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक शुक्ला सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन जज ने कहा कि फिलहाल आदेश अपलोड नहीं हुआ है। जब आदेश की कॉपी आ जाएगी तभी सरेंडर स्वीकार होगा।सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आलोक शुक्ला को दो हफ्ते ED (प्रवर्तन निदेशालय) की कस्टडी और दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला नान घोटाले में हाईकोर्ट ने आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को पहले अग्रिम जमानत दे दी थी, लेकिन ED ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने ED की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने ED और EOW को तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए — ED को तीन महीने और EOW को दो महीने। क्या है नान घोटाला फरवरी 2015 में ACB/EOW ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को संभालने वाले नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे।इन छापों में 3.64 करोड़ रुपये नकद मिले थे और चावल-नमक समेत कई नमूनों की गुणवत्ता जांच में घटिया पाए गए। EOW की FIR के मुताबिक, डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा ने तत्कालीन महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा के साथ मिलकर अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कागजों और प्रक्रियात्मक दस्तावेज़ों में हेरफेर कर अपने पक्ष में जवाब तैयार करवाए ताकि अदालत में उन्हें अग्रिम जमानत मिल सके। किन धाराओं में मामला दर्ज EOW ने डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, सतीश चंद्र वर्मा और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धाराओं 7, 7(क), 8, 13(2) और IPC की धाराएं 182, 211, 193, 195-A, 166-A और 120-B के तहत केस दर्ज किया है।

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रायगढ़: मछली कंपनी के ड्राइवर से 2.57 लाख की लूट, बदमाश एक्टिवा छोड़कर भागे

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बड़ी लूट की वारदात हुई। एमएम फिश कंपनी के ड्राइवर मोहम्मद रफीक से तीन अज्ञात बदमाशों ने करीब 2 लाख 57 हजार 660 रुपये लूट लिए। पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद रफीक मछली की सप्लाई के बाद रकम कलेक्शन कर बिलासपुर लौट रहा था। इसी दौरान खड़गांव-सिथरा रोड पर एक्टिवा सवार तीन बदमाशों ने उसका रास्ता रोक लिया। उन्होंने हथियार दिखाकर उससे नकदी छीन ली। आरोपी एक्टिवा छोड़कर जंगल भागे वारदात के बाद पकड़े जाने के डर से आरोपी स्कूटी वहीं छोड़कर जंगल की ओर फरार हो गए। आरोपियों ने स्कूटी का नंबर प्लेट भी ढका हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है और वारदात की जांच जारी है।

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रायपुर में भीषण सड़क हादसे में मंत्री के भतीजे की मौत: स्पोर्ट्स बाइक डिवाइडर से टकराई, हेलमेट नहीं पहना था

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप के भतीजे निखिल कश्यप की एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। हादसा बुधवार सुबह नवा रायपुर के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में हुआ, जब तेज रफ्तार स्पोर्ट्स बाइक डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि निखिल करीब 40 फीट दूर जा गिरा। सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। तेज रफ्तार ने ली जान, बाइक के उड़े परखच्चे पुलिस के अनुसार, हादसे के वक्त निखिल अपने दोस्तों के साथ रायपुर से सत्य साईं अस्पताल की ओर जा रहा था। तीन बाइक पर चार युवक सवार थे। निखिल की स्पोर्ट्स बाइक पर उसका एक दोस्त पीछे बैठा था। हाई स्पीड के चलते बाइक अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और निखिल दूर जा गिरा। हेलमेट नहीं पहना था, दोस्त गंभीर रूप से घायल हादसे के वक्त न तो निखिल और न ही उसका साथी हेलमेट पहने हुए थे। हादसे में पीछे बैठा दोस्त भी गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका निजी अस्पताल में इलाज जारी है। मौके पर पहुंची 112 की टीम ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया और निखिल के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। घटनास्थल पर पहुंचे एसएसपी और मंत्री घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी लाल उमेद सिंह और मंत्री केदार कश्यप मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। निखिल का अंतिम संस्कार बुधवार शाम 5 बजे उनके गृहग्राम फरसागुड़ा में किया जाएगा। राजनीतिक परिवार से था ताल्लुक निखिल कश्यप बस्तर के पूर्व सांसद दिनेश कश्यप के पुत्र थे, जबकि उनकी मां वेदवती कश्यप बस्तर जिला पंचायत की वर्तमान अध्यक्ष हैं। हादसे की खबर फैलते ही पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई। सीएम सहित कई नेताओं ने जताया शोक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर शोक व्यक्त किया। साथ ही डिप्टी सीएम अरुण साव, विजय शर्मा और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से दुख प्रकट किया है। सभी ने परिवार को इस असामयिक दुःख में धैर्य की शक्ति मिलने की कामना की है।

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डॉक्टर दंपति की रहस्यमयी मौत का राज फाश – 8 साल बाद ड्राइवर निकला हत्यारा!

कवर्धा, 6 जुलाई 2025कवर्धा में आठ साल पुराने डॉक्टर दंपति हत्याकांड की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। साल 2017 में हुई इस रहस्यमयी मौत को पहले आत्महत्या माना जा रहा था, लेकिन अब जांच में यह साबित हो गया है कि यह सुनियोजित हत्या थी – और वो भी किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि खुद दंपति के चालक द्वारा। आखिर क्या है पूरा मामला? 2017 में डॉ. गणेश सूर्यवंशी और उनकी पत्नी ऊषा सूर्यवंशी अपने घर में मृत पाए गए थे। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला मान लिया गया था, लेकिन घटनास्थल से मिले साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हत्या की आशंका के आधार पर दोबारा जांच शुरू की। 8 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद बड़ा खुलासा मामले की जांच में सालों लग गए क्योंकि मुख्य संदिग्ध घटना के बाद से ही फरार था। कई बार जांच ठहर सी गई, लेकिन पुलिस ने लगातार प्रयास जारी रखे और अब सामने आया है कि इस हत्या के पीछे डॉक्टर दंपति का निजी ड्राइवर सत्यप्रकाश साहू था। घटना के तुरंत बाद से वह भूमिगत है और अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आरोपी की तलाश में इनाम की घोषणा कबीरधाम के एसपी धर्मेन्द्र सिंह ने आरोपी की जानकारी देने पर ₹10,000 का इनाम घोषित किया है, जबकि रायपुर रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने ₹30,000 की अतिरिक्त राशि घोषित की है। यानी कुल ₹40,000 इनाम उस व्यक्ति को दिया जाएगा, जो सत्यप्रकाश साहू के बारे में सटीक जानकारी देगा। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल: कब होगी गिरफ्तारी? हत्याकांड का पर्दाफाश भले ही हो गया हो, लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। अब देखना होगा कि क्या पुलिस उसे जल्द सलाखों के पीछे पहुंचा पाएगी। 🔍 प्रमुख तथ्य: 📢 नागरिकों से अपील: यदि आपके पास सत्यप्रकाश साहू या इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या कंट्रोल रूम को सूचित करें। आपकी एक जानकारी न्याय की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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Birgaon: Acholi दर्री तालाब की बदहाली से नाराज ग्रामीण, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर जताया आक्रोश

रायपुर |बिरगांव नगर निगम क्षेत्र के अछोली गांव में स्थित दर्री तालाब की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है। तालाब चारों ओर से गंदगी से घिरा है, और उसका पानी हरा पड़ चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम और जनप्रतिनिधि तालाब की हालत सुधारने को लेकर पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। विधायक और पार्षद के आश्वासन रह गए अधूरे ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय विधायक मोतीलाल साहू ने छह महीने पहले तालाब की सफाई कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, नगर निगम पार्षद राजवती निषाद पर भी लोगों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। नालियों का पानी और गंदगी पहुंच रही तालाब में तालाब अछोली गांव के लोगों के लिए स्नान और दैनिक उपयोग का प्रमुख स्रोत है। लेकिन इसमें अब आसपास के घरों का गंदा पानी, नालियों की गंदगी और कचरा जाकर मिल रहा है। इससे न केवल तालाब की सुंदरता नष्ट हो रही है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अधूरी पड़ी लाइटिंग व्यवस्था तालाब के किनारों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना छह महीने पहले बनाई गई थी। खंभे लाने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन अब तक न तो पोल लगाए गए और न ही लाइटें लगाई गईं। इसके चलते रात में अंधेरा छाया रहता है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। बुनियादी सुविधाओं का टोटा ग्रामीणों ने बताया कि भले ही अछोली गांव बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में आता है, लेकिन यहां की स्थिति किसी उपेक्षित गांव से कम नहीं है। साफ-सफाई, जल निकासी और प्रकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। ग्रामीणों की मांग गांववासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वे चाहते हैं कि: ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं।

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एयर इंडिया हादसा: ब्लैक बॉक्स से जांच शुरू, 270 की मौत के पीछे की वजह पता लगाने में जुटे जांचकर्ता

भारत में विमान हादसे की जांच कर रही एजेंसियां उस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण कर रही हैं, जो पिछले हफ्ते दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कम से कम 270 लोगों की मौत हो गई। विमान के मलबे से बरामद ब्लैक बॉक्स में मौजूद डेटा हादसे की असली वजह जानने में मदद करेगा। यह विमान अहमदाबाद से लंदन जा रहा था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद यह एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिर गया। हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए, जबकि जमीन पर मौजूद 29 लोगों की भी मौत हो गई। केवल एक यात्री इस भयानक दुर्घटना में जीवित बचा। भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की जांच कर रही है, जिसमें ब्रिटेन, अमेरिका और विमान निर्माता कंपनी बोइंग के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। ब्लैक बॉक्स क्यों है अहम पूर्व पायलट और विमानन विशेषज्ञ अमित सिंह के अनुसार, ब्लैक बॉक्स में दो डिवाइस होती हैं—कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, जो पायलटों की बातचीत, चेतावनी अलार्म और आपातकालीन संदेश रिकॉर्ड करता है; और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जो इंजन और नियंत्रण प्रणालियों की तकनीकी जानकारी सहेजता है। ये उपकरण इस तरह बनाए जाते हैं कि वे किसी भी हादसे के बाद भी सुरक्षित रह सकें। सिंह ने बताया कि इन रिकॉर्डिंग्स की मदद से दुर्घटना के क्षणों को क्रमवार समझा जा सकेगा। इसके अलावा पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच हुई बातचीत भी इससे स्पष्ट हो सकेगी। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण पहले ही पुष्टि कर चुका है कि हादसे से पहले विमान ने ‘मेडे कॉल’ (आपातकालीन संदेश) दिया था। जांच के कई पहलू सिंह ने कहा कि ब्लैक बॉक्स के अलावा जांच अधिकारी आसपास के सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान भी खंगालेंगे। पायलट की ट्रेनिंग, विमान की भार क्षमता, इंजन की स्थिति, और विमान के पिछले प्रदर्शन और रखरखाव रिकॉर्ड को भी जांच में शामिल किया जाएगा। जांच में लग सकता है समय एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के पूर्व महानिदेशक, औरबिंदो हांडा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान हादसों की जांच संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज “DOC 9756” के अनुसार होती है, जिसमें हर पहलू की जांच के लिए विस्तृत प्रक्रिया बताई गई है। उन्होंने बताया कि चूंकि यह विमान दुर्घटना बेहद गंभीर थी और विमान बुरी तरह जल चुका है, इसलिए जांच में समय लग सकता है। सबसे पहले यह जांचा जाएगा कि ब्लैक बॉक्स कितनी स्थिति में सुरक्षित हैं, क्योंकि दुर्घटना से पैदा हुई गर्मी उनके सहनशीलता स्तर से अधिक हो सकती है। सरकारी समिति और फ्लाइट्स की जांच भारत सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो हादसे की वजहों का विश्लेषण करेगी और भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के उपाय बताएगी। यह समिति तीन महीनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही, एयर इंडिया के पूरे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े की अतिरिक्त जांच और रखरखाव शुरू कर दिया गया है। एयर इंडिया के पास वर्तमान में कुल 33 ड्रीमलाइनर विमान हैं।

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Bijnor: बीच रास्ते बिगड़ी ट्रेन चालक की तबीयत, सहायक ने दिखाई सूझबूझ……….यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाया कोटद्वार

आनंद विहार टर्मिनल से कोटद्वार जा रही एक्सप्रेस ट्रेन (14089) में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब नजीबाबाद के स्नेह रोड स्टेशन के पास ट्रेन चालक बाबूराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। हालात को समझते हुए सहायक चालक ने सूझबूझ से काम लिया और ट्रेन को सुरक्षित रूप से कोटद्वार स्टेशन तक पहुंचाया। घटना के कारण कई पैसेंजर ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और समय-सारणी गड़बड़ा गई। जानकारी के अनुसार, यह ट्रेन सामान्य रूप से रात 2:55 बजे नजीबाबाद से चलती है, लेकिन गुरुवार को यह 3:15 बजे रवाना हुई। ट्रेन का खाली रैक सुबह 5 बजे तक नजीबाबाद लौटना था, मगर इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण इसमें देर हो गई। स्थिति को संभालने के लिए लक्सर से एक अन्य चालक को बुलाया गया, जिसने ट्रेन को दोबारा संचालित किया और ट्रेन लगभग 11 बजे नजीबाबाद पहुंची। इस घटना का असर नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच चलने वाली अन्य ट्रेनों पर भी पड़ा। सुबह 8:45 पर चलने वाली एक पैसेंजर ट्रेन 46 मिनट की देरी से रवाना हुई, वहीं एक अन्य पैसेंजर ट्रेन भी लेट रही। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ यात्रियों ने सड़क मार्ग से कोटद्वार जाने का फैसला किया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बीमार चालक की तबीयत में अब सुधार है और पूरी घटना की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।

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राजधानी में बांग्लादेशी घुसपैठ का नेटवर्क फैला, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आए छह घुसपैठियों और उनके एक सहयोगी को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि ये वही गिरोह है जिसके तीन सदस्य हाल ही में मुंबई में इराक भागने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे। हालांकि, अभी तक उन्हें भारत में पनाह देने और दस्तावेज बनवाने में सहायता करने वाले लोग पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। स्थानीय मददगारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहींपुलिस की जांच में सामने आया है कि रायपुर में करीब एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। लेकिन इन अवैध गतिविधियों में शामिल स्थानीय लोगों, खासकर दलालों और जनप्रतिनिधियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। अस्थायी डिटेंशन सेंटर बना थानाराज्य में डिटेंशन सेंटर न होने के चलते टिकरापारा थाने को फिलहाल अस्थायी डिटेंशन सेंटर बना दिया गया है, जहां हाल ही में पकड़े गए 10 बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। ‘अनलिमिटेड अंडा योजना’ के पीछे संदिग्ध मंशागिरफ्तार दिलावर खान ने लोगों से संपर्क बनाने के लिए एक अनोखी योजना शुरू की थी— “निश्चित राशि में अनलिमिटेड अंडा रेसिपी”। उसके अंडे के ठेले के जरिए वह धीरे-धीरे अपना नेटवर्क बढ़ाता गया। अब पुलिस को शक है कि इस योजना के पीछे कुछ और ही मकसद छिपा था। पार्षदों की भूमिका पर सवालतीन अलग-अलग मामलों में यह बात सामने आई है कि कुछ पूर्व पार्षदों ने घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेज बनवाने, आवास दिलवाने और पहचान छिपाने में मदद की। बावजूद इसके, इन नेताओं के खिलाफ अभी तक जांच शुरू नहीं हुई है। रीवा से नहीं मिला कोई पुख्ता प्रमाणगिरफ्तार बांग्लादेशी दंपति ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने मध्यप्रदेश के रीवा जिले के चाकघाटा इलाके से आठवीं कक्षा की फर्जी अंकसूची बनवाई थी। टिकरापारा थाना पुलिस वहां जांच करने गई, लेकिन किसी पक्के सबूत का पता नहीं चल सका। फर्जी दस्तावेज बनाने में कर्मचारी की भूमिकादिलावर खान के अंडा ठेले में काम करने वाला उसका कर्मचारी भी फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में सहयोगी था। इसी की मदद से दिलावर ने फर्जी अंकसूची हासिल की थी। पूरे मामले में पुलिस को अभी और खुलासों की उम्मीद है, लेकिन अब तक असली मास्टरमाइंड और दस्तावेज तैयार करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

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फर्जी अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाला हसन आबिदी गिरफ्तार, महिला पटवारी के पति से ठगे थे 1 करोड़ रुपये

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खुद को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो), ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) और ईडी का अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाला हसन आबिदी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। टिकरापारा थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया है। कैसे करता था ठगी का खेल:हसन खुद को जांच एजेंसियों का अफसर बताकर जमीन कारोबारियों और सरकारी कर्मचारियों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देता था। वह नेताओं के साथ खिंचवाए गए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खुद को रसूखदार साबित करता और इसी डर से लोग चुप रहते थे। एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला आया सामनेमहिला पटवारी के पति राजेश सोनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि हसन ने पिछले एक साल में किस्तों में उससे एक करोड़ रुपये वसूले। वह बार-बार और पैसे मांग रहा था और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहा था। मजबूरी में शिकायतकर्ता ने कर्ज लेकर और पत्नी के गहने बेचकर पैसे दिए। लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी के बाद उसने पुलिस की मदद ली। जमीन कारोबारियों को बनाता था निशानाजांच में पता चला है कि हसन मुख्य रूप से जमीन और प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोगों को टारगेट करता था। वह उनकी जमीन को विवादित बताकर कानूनी कार्रवाई की धमकी देता और बड़ी रकम वसूलता था। नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाकर बनाता था रौबहसन पिछले पांच साल से इस तरह की ठगी में शामिल था। वह नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालता था, ताकि लोग उसे प्रभावशाली समझें और डर के मारे शिकायत ना करें। पुलिस को शक है कि हसन ने और भी कई लोगों को अपने जाल में फंसाया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और जल्द ही प्रेस कांफ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करने वाली है।

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रायपुर के उरला गुमा में डामर फैक्‍ट्री में भीषण आग, 5 किलोमीटर दूर तक दिखीं लपटें – बड़ा हादसा टला

रायपुर, 14 जून। राजधानी रायपुर के उरला गुमा, औद्योगिक क्षेत्र स्थित Western Tar Production Pvt. Ltd. नामक डामर निर्माण इकाई में शनिवार सुबह भीषण आग लग गई। सुबह करीब 11:30 बजे लगी आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपटें 5 किलोमीटर दूर तक साफ दिखाई दे रही थीं। इस घटना के चलते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों के अनुसार, कंपनी छोटी इकाई है, जहां न तो फायर सेफ्टी गार्ड तैनात था और न ही अंदरूनी स्तर पर आग बुझाने के कोई समुचित इंतजाम थे। आग लगते ही आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों ने तत्परता दिखाई और अपनी दमकल गाड़ियाँ मौके पर भेजीं। इससे स्थिति पर शुरुआती स्तर पर कुछ हद तक काबू पाया जा सका। घटना की सूचना मिलने के कुछ समय बाद 112 इमरजेंसी सेवा की टीम भी मौके पर पहुँच गई। इसके साथ ही इलाके की सभी उपलब्ध दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया, लेकिन तब तक फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा जल चुका था। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि आग फैक्ट्री के ऑयल टैंक में लगी थी, जिससे तेजी से पूरी यूनिट चपेट में आ गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई भी कर्मचारी हताहत नहीं हुआ और किसी प्रकार की जनहानि की खबर नहीं है। इस दुर्घटना ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है – जब यह इलाका एक मान्यता प्राप्त औद्योगिक क्षेत्र है, तो फिर इन फैक्ट्रियों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं? यदि समय रहते आग पर काबू न पाया जाता, तो यह घटना एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी का रूप ले सकती थी। अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिला प्रशासन और उद्योग विभाग इस मामले को गंभीरता से लेंगे और भविष्य में इस तरह की लापरवाह फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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