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छत्तीसगढ़ के Bilaspur में जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी

छत्तीसगढ़ के Bilaspur में जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। ई-मेल के जरिए भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई और कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते की टीम ने पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। घटना के समय कोर्ट में नियमित कार्यवाही चल रही थी और जज, वकील तथा पक्षकार मौजूद थे। इसी बीच ई-मेल के जरिए धमकी मिलने की सूचना सामने आई, जिसके बाद तत्काल पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट रूम, गलियारों और आसपास के क्षेत्रों में गहन सर्च ऑपरेशन किया गया। यह पिछले तीन महीनों में तीसरी बार है जब जिला कोर्ट को इस तरह की धमकी मिली है। इससे पहले भी जिला न्यायालय और Bilaspur High Court को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि हर बार जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन लगातार मिल रही धमकियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। धमकी के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई और आने-जाने वाले लोगों की सख्ती से जांच की जा रही है। कोर्ट परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि यहां रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं, जिनमें न्यायाधीश, करीब एक हजार वकील और बड़ी संख्या में पक्षकार शामिल होते हैं। लगातार मिल रही इन धमकियों के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। फिलहाल पुलिस ई-मेल के तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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बिलासपुर डाकघरों से विदेश पार्सल भेजना हुआ आसान, फ्री पिक-अप और ट्रैकिंग सुविधा शुरू

छत्तीसगढ़ के Bilaspur संभाग में अब डाकघरों के माध्यम से विदेश पार्सल भेजना पहले से अधिक आसान हो गया है। India Post ने अंतर्राष्ट्रीय पार्सल सेवा को और सुविधाजनक बनाते हुए फ्री पिक-अप और ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत अब लोग स्थानीय डाकघरों से ही अपने पार्सल और जरूरी दस्तावेज विदेश भेज सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि खर्च भी कम आएगा और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी। इस सुविधा के लागू होने से लोगों को महंगी निजी कूरियर सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभाग के प्रमुख और उप डाकघरों में यह सेवा शुरू कर दी गई है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इसका लाभ उठा सकेंगे। डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पार्सल बुकिंग के समय ग्राहकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि सामग्री सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंच सके। इसके साथ ही हर पार्सल के लिए ट्रैकिंग सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे ग्राहक ऑनलाइन उसकी स्थिति आसानी से देख सकेंगे। इस सेवा की एक खास बात बड़े और भारी पार्सल के लिए निःशुल्क पिक-अप सुविधा है, जिससे लोगों को डाकघर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे घर बैठे ही पार्सल भेज सकेंगे। पार्सल भेजने के लिए ग्राहकों को प्राप्तकर्ता का पूरा पता, वैध पहचान पत्र, निर्धारित शुल्क और बुकिंग के बाद ट्रैकिंग रसीद जैसी आवश्यक जानकारी देनी होगी।

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शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में अस्थायी अतिरिक्त कोच, यात्रियों को मिलेगी राहत

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए Shalimar–Lokmanya Tilak Terminus Express में अतिरिक्त कोच जोड़ने का फैसला लिया है। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक यात्रियों को कंफर्म बर्थ उपलब्ध कराना है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन में एक अतिरिक्त एसी-3 टियर और एक स्लीपर कोच अस्थायी रूप से जोड़े जाएंगे। इससे वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक, गाड़ी संख्या 18030 (शालीमार से एलटीटी) में यह सुविधा 28, 29, 30, 31 मार्च और 01, 02, 03 अप्रैल 2026 को उपलब्ध रहेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 18029 (एलटीटी से शालीमार) में 30, 31 मार्च और 01, 02, 03, 04, 05 अप्रैल 2026 तक अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे। रेलवे के इस निर्णय से इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर त्योहार और छुट्टियों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होगी।

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रायपुर में अग्निवीर भर्ती शुरू: 1 अप्रैल 2026 तक भरें ऑनलाइन फॉर्म

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 13 फरवरी 2026 से आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। ऐसे में युवाओं को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करते हुए जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें। इस भर्ती के लिए 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष तक के युवा पात्र हैं। शैक्षणिक योग्यता के रूप में 8वीं पास से लेकर स्नातक और डिप्लोमा धारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को सेना में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। ये हेल्प डेस्क रोजगार कार्यालय, नगरीय निकाय, पॉलिटेक्निक कॉलेज, शासकीय महाविद्यालय, आईटीआई, जनपद पंचायत और नगर पंचायतों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां आवेदन से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध है। यदि किसी अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वह रोजगार कार्यालय रायपुर में स्थापित हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकता है। यहां सेना भर्ती से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन में देरी: 23 साल बाद मिल रहा पद, देश में 19वें स्थान पर राज्य

छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है। इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली। जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है। प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

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5 करोड़ की स्मार्ट वायरिंग फेल: 2 साल में सड़क पर आई केबल, खुले बॉक्स बने खतरा

राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी के तहत की गई अंडरग्राउंड वायरिंग अब सवालों के घेरे में है।जयस्तंभ चौक से फाफाडीह चौक तक किए गए इस प्रोजेक्ट में महज दो साल के भीतर ही बड़ी खामियां सामने आ गई हैं। सड़क के नीचे डाली गई बिजली केबल कई जगहों पर बाहर निकल आई हैं।जहां-जहां पाइपलाइन, नल कनेक्शन या सड़क मरम्मत के लिए खुदाई हुई, वहां केबल उखड़ गईं और दोबारा सुरक्षित नहीं की गईं। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह सिस्टम मेंटेनेंस की कमी के कारण अब असुरक्षित हो चुका है।खुले बॉक्स से बड़ा खतरा सबसे ज्यादा खतरा केबल बॉक्स से है। ये हालात किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों की शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई मौदहापारा और सदर बाजार के रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।लोगों का कहना है कि अब तो शिकायत करना भी बंद कर दिया है, क्योंकि सुनवाई नहीं होती। अन्य इलाकों में भी खराब हालात सिर्फ जयस्तंभ-फाफाडीह रोड ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर यही समस्या देखने को मिल रही है। पूरे प्रोजेक्ट पर 40 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया गया था। लापरवाही के मुख्य कारण मेंटेनेंस की कमीकाम पूरा होने के बाद नियमित जांच नहीं की गई। बार-बार खुदाईअन्य विभागों द्वारा सड़क खोदने से केबल क्षतिग्रस्त हुई। समन्वय की कमीरायपुर नगर निगम, जल विभाग और बिजली कंपनी के बीच तालमेल नहीं रहा। बॉक्स की अनदेखीकेबल बॉक्स के ढक्कन गायब होने के बाद भी उन्हें बदला नहीं गया। अधिकारियों का बयान नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि शिकायत के बाद जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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अबूझमाड़ बदल रहा है: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, अब बन रही सड़क और लौट रहे लोग

कभी ‘नो-गो एरिया’, अब खुल रहा रास्ता अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब तेजी से बदल रहा है। नारायणपुर से करीब 50 किमी दूर इस इलाके में अब पहली बार सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ है। जहां पहले नक्सलियों के बैरिकेड लगे होते थे और दिन में भी लोगों का आना-जाना मुश्किल था, अब वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी में विकास कार्य जारी हैं। सड़क के साथ बदलती जिंदगी अबूझमाड़ के अंदर क्रूसनार, बासिंघ, सोनपुर, ढोढ़रीबेड़ा, मसपुर और होरादी जैसे गांवों को जोड़ते हुए सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क आगे महाराष्ट्र तक कनेक्ट करेगी। रास्ते में कई पुलिस कैंप बनाए गए हैं और सड़क किनारे अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण भी शुरू हो चुका है। लोगों की जुबानी पुराने हालात स्थानीय महिला सुकमती मेटामी बताती हैं कि पहले यहां हालात बेहद डरावने थे। अब गांव में अस्पताल बन रहा है और बस सेवा भी शुरू हो चुकी है, जिससे लोगों को राहत मिल रही है। अनाज तक छीन लेते थे नक्सली गांव के निवासी बताते हैं कि नक्सली पहले से सूचना देकर अनाज इकट्ठा करने को कहते थे।चाहे फसल हो या न हो, गांववालों को अपना पेट काटकर भी उन्हें अनाज देना पड़ता था। अगर कोई शहर चला जाता, तो उसे सजा दी जाती थी। कई लोग डर के कारण गांव छोड़कर चले गए थे। आत्मसमर्पण कर बदल रहे हालात गांव में सुरक्षा बलों के साथ मौजूद अनथ कवची जैसे लोग भी हैं, जो पहले नक्सली थे और अब आत्मसमर्पण कर चुके हैं।वे अब सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं और बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अभियान में शामिल हैं। बस्तर में तेजी से घट रहा नक्सल प्रभाव बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान ने बड़ी सफलता हासिल की है। विजय शर्मा के अनुसार: विकास बना सबसे बड़ा हथियार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।लगातार ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और विकास कार्यों ने मिलकर हालात बदले हैं। एक तस्वीर, बड़ा संदेश हाल ही में विजय शर्मा की अबूझमाड़ में मॉर्निंग वॉक की तस्वीर सामने आई।यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि यह संकेत है कि जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब शांति और सामान्य जीवन लौट रहा है।

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प्रदूषण पर सख्ती: रात में सिस्टम बंद करने वाले 30 उद्योग सील, बिजली कनेक्शन काटे

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर बड़ा एक्शन राजधानी रायपुर में हवा को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। जनवरी से अब तक उरला, सिलतरा और धरसींवा क्षेत्र के 30 उद्योगों को पूरी तरह बंद कर उनकी बिजली सप्लाई काट दी गई है। इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पर्यावरणीय कार्रवाई माना जा रहा है। रात में बंद कर देते थे प्रदूषण कंट्रोल सिस्टम जांच में सामने आया कि कई उद्योग मुनाफा बढ़ाने के लिए रात के समय ईएसपी (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसीपिटेटर) और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद कर देते थे। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर मंडल ने सीधे क्लोजर ऑर्डर जारी कर पावर कट कर दिया। बड़े उद्योग भी कार्रवाई की जद में कार्रवाई के दायरे में कई बड़े नाम भी आए हैं, जिनमें जैसे उद्योग शामिल हैं। वहीं Sharda Energy and Minerals Limited के खिलाफ बिना अनुमति फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला भी दर्ज किया गया है। कार्रवाई का पूरा रिपोर्ट कार्ड भारी जुर्माने का प्रावधान नियमों के अनुसार बिना अनुमति राखड़ फेंकने पर 5 लाख से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उद्योग चेतावनी के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण उपकरण चालू नहीं करते, तो जल और वायु अधिनियम के तहत उनकी बिजली काटने की कार्रवाई की जाती है। सुधार के बाद ही मिलेगा संचालन की अनुमति मंडल ने साफ कर दिया है कि अब “पहले उत्पादन, बाद में सुधार” की नीति नहीं चलेगी।उद्योगों को पहले सभी पर्यावरण मानकों का पालन करना होगा, तभी संचालन की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी का बयान मंडल के सदस्य सचिव राजू अगासीमानी के अनुसार, नोटिस देने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही सिस्टम चालू किए गए, इसलिए सख्त कार्रवाई की गई है।

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सीनियर IPS रतन लाल डांगी निलंबित: SI की पत्नी ने लगाए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई SI की पत्नी द्वारा डांगी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद की गई। गृह (पुलिस) विभाग ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच लंबित होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। बताया गया है कि पांच महीने पहले ही डांगी को IG के पद से हटा दिया गया था। निलंबन के बाद उन्हें मुख्यालय, नया रायपुर PHQ पर तैनात किया गया है। आदेश के अनुसार, डांगी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकते। शिकायत की पृष्ठभूमि पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 2017 में उनकी पहली मुलाकात डांगी से कोरबा में हुई थी, जब डांगी वहां SP के पद पर तैनात थे। प्रारंभिक बातचीत सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी, जो आगे बढ़ती गई। इसके बाद डांगी ने दंतेवाड़ा में पदस्थापना के दौरान वीडियो कॉल के जरिए उन्हें योग सिखाने का प्रस्ताव दिया। राजनांदगांव और सरगुजा में IG बनने के बाद पीड़िता ने बताया कि डांगी ने उन्हें कथित रूप से परेशान करना शुरू कर दिया। बिलासपुर IG के पद पर रहते हुए उत्पीड़न की घटनाएँ और बढ़ गईं। खाली बंगले में बुलाने और धमकी देने का आरोप शिकायत में महिला ने कहा कि IPS डांगी अक्सर उन्हें अपनी पत्नी की गैरमौजूदगी में खाली बंगले में बुलाते थे। अगर वह नहीं जातीं, तो उन्हें तबादले की धमकी दी जाती थी। चंद्रखुरी पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में तबादले के बाद भी डांगी वीडियो कॉल के माध्यम से सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक संपर्क बनाए रखने का दबाव डालते थे। महिला ने यह भी दावा किया कि उनके पास कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। जांच और नियमावली जारी आदेश के अनुसार, रतन लाल डांगी के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच जारी है। इस दौरान उनके आचरण को अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 और अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना गया है। पुलिस और प्रशासन इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। निलंबन का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखना है। इस मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई ढील नहीं बरती जाएगी और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी।

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अहमदाबाद के ठगों का कॉल सेंटर सिंडिकेट फूटा, मास्टरमाइंड की तलाश में रायपुर पुलिस

रायपुर पुलिस ने मंगलवार-रविवार की रात को बड़े इंटरस्टेट ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। दो प्रमुख कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में छापेमारी कर पुलिस ने कुल 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में यह खुलासा हुआ कि पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अहमदाबाद के शातिर ठग हैं, जिनके नाम विकास शुक्ला और संजय शर्मा हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है और जल्द ही उन्हें पकड़ने के लिए सक्रिय कार्रवाई कर रही है। किराए पर लिए गए ऑफिस और फ्लैट अभियुक्तों ने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में कॉल सेंटर चलाने के लिए ऑफिस किराए पर लिया था। इसके अलावा ‘पाम बेलागियो’ में एक लग्जरी फ्लैट भी किराए पर लिया गया था। मास्टरमाइंड खुद रायपुर में स्थायी रूप से नहीं रहते थे। वे कुछ दिनों के अंतराल पर आते, मैनेजरों को निर्देश देते और फिर वापस अहमदाबाद लौट जाते थे। फिलहाल पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए पूरी तैयारी में है। अंतरराष्ट्रीय ठगी का तरीका पूरी योजना अमेरिका के समय के अनुसार तैयार की गई थी। कॉल सेंटर के कर्मचारी रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहते थे, क्योंकि उस समय अमेरिका में दिन होता है। आरोपियों के पास व्हाट्सऐप के जरिए अमेरिकी नागरिकों का डेटा आता था, जिनके पास अमेरिका के चार बड़े बैंकों से लोन थे। कॉल करने के बाद उन्हें डराया जाता था कि उनका CIBIL स्कोर खराब हो गया है या किस्त जमा नहीं हुई। इसके बाद खाते की जानकारी लेकर चाइनीज ऐप के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी की जाती थी। कॉल सेंटर प्रभारियों और वेतन संरचना पुलिस ने कॉल सेंटर के तीन मुख्य प्रभारियों को भी गिरफ्तार किया है। इसमें रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव शामिल हैं। रोहित यादव और सौरभ सिंह पिथालिया कॉम्प्लेक्स के मैनेजर थे, जबकि गौरव यादव अंजनी टावर में संचालित कॉल सेंटर का प्रभारी था।जांच में यह भी सामने आया कि इन प्रभारियों को लगभग 30,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था। कॉल करने वाले युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाता था। हिंदी स्क्रिप्ट से अंग्रेजी कॉलिंग जांच में यह भी पता चला कि कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी केवल 12वीं पास थे और उन्हें अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान नहीं था। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कागज पर हिंदी में लिखी अंग्रेजी स्क्रिप्ट दी जाती थी। कर्मचारी उसी स्क्रिप्ट को पढ़कर अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करते थे। यदि कोई ग्राहक कठिन या तकनीकी सवाल पूछता, तो कॉल तुरंत सीनियर को ट्रांसफर कर दी जाती थी। युवाओं को इस ठगी के लिए दो महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। पुलिस का कहना है कि यह अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ठगी का नेटवर्क बहुत संगठित था, और इसके मास्टरमाइंड को पकड़ना प्राथमिकता है। मकान-मालिकों और अन्य सहयोगियों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सके।

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