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अज्ञात व्यक्तियों ने कार और दो बाइक में लगाई आग, ग्रामीणों ने मिलकर बुझाई

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र में देर रात अज्ञात लोगों ने एक कार और दो बाइक को आग के हवाले कर दिया। तीनों वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत तिलकेजा के निवासी नरेंद्र उरांव ने बताया कि रात लगभग 3 बजे पड़ोसियों ने उन्हें सूचित किया कि उनके घर के पीछे बाड़ी में वाहन जल रहे हैं। ग्रामीणों ने तुरंत मदद की और आग को काबू में किया, लेकिन तब तक सभी गाड़ियां जल चुकी थीं। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच के दौरान वहां से एक जोड़ी चप्पल और माचिस बरामद की गई। ग्राम सरपंच पति देव मूरत ने कहा कि असामाजिक तत्वों ने गांव में दहशत फैलाने के उद्देश्य से यह घटना की है। इस घटना से ग्रामीण डर और चिंता में हैं। कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि उरगा थाना पुलिस को सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंची और जांच कार्यवाही जारी है।

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दुर्ग: नौकरी का झांसा देकर महिला की हत्या, 1 लाख की सुपारी में हुई वारदात

दुर्ग जिले में एक महिला की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गंगोत्री जांगड़े (40 वर्ष) को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह ने पहले लाखों रुपए ऐंठे, और जब नौकरी नहीं मिली तो महिला ने पैसे वापस मांगना शुरू किया। इसी दौरान आरोपियों ने महिला की हत्या का प्लान बनाया। हत्या की वारदात 19 सितंबर की रात, मुख्य आरोपी ने 19 साल के निर्भय जांगड़े को 1 लाख रुपए की सुपारी दी। निर्भय ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर महिला को बेल्ट और चुनरी से गला घोंटकर मार डाला। पहचान छिपाने के लिए आरोपी महिला के चेहरे को पत्थर से कुचल गए। हत्या के बाद आरोपी ढाबे में खाना खाने गए और मोबाइल फोन और जेवर सहित अन्य सामान अपने पास रख लिया। ठगी और साजिश का खुलासा जांच में पता चला कि मृतिका दो युवकों के संपर्क में थी, जिन्होंने उसे सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर पिछले 7–8 महीनों में लाखों रुपए लिए थे। जब नौकरी नहीं लगी और महिला ने दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपियों को डर था कि उनका ठगी का खेल फेल हो जाएगा। इसी डर से उन्होंने हत्या की साजिश रची। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने वीडियो कॉल पर हत्या की योजना बनाई थी। मास्टरमाइंड ने हेमलता बंजारे के खाते में कई बार रकम ट्रांसफर की थी। आरोपी और गिरफ्तारी पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है: मुख्य आरोपी अब भी फरार है। पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। नौकरी का झांसा और ठगी नेटवर्क जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह गिरोह नगर निगम, जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग जैसी जगहों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपए वसूल रहा था। गंगोत्री इस नेटवर्क से जुड़ी हुई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि उसे ठगी की जानकारी थी या नहीं। पुलिस का कहना है कि महिला के दबाव बनाने पर ही उसे रास्ते से हटाने के लिए यह खतरनाक साजिश रची गई।

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रायपुर: किराए के मकान से नक्सली दंपत्ति गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डीडी नगर थाना क्षेत्र के चंगोराभाठा इलाके से पुलिस ने एक नक्सली दंपत्ति को दबोच लिया। ये दोनों लंबे समय से शहर में रहकर नक्सल संगठन के लिए काम कर रहे थे।पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के नाम जग्गू उर्फ़ रमेश कुरसम (28) और कमला कुरसम (27) हैं। दोनों मूल रूप से बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के निवासी हैं और वर्ष 2017-18 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। फर्जी आधार से लिया किराए का मकान पुलिस जांच में सामने आया है कि दंपत्ति ने एक माह पहले ही इलाज का बहाना बनाकर मकान किराए पर लिया था। मकान मालिक को कमला ने नकली आधार कार्ड दिया था, जिसमें उसकी पहचान बदल दी गई थी।सूत्रों के मुताबिक, जग्गू ने रायपुर के कई वरिष्ठ अधिकारियों के घरों में ड्राइवर और गार्ड की नौकरी भी की है। पुलिस की कार्रवाई इंटेलिजेंस से सूचना मिलने पर डीडी नगर पुलिस ने चंगोराभाठा स्थित मकान को घेरकर दबिश दी। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन कड़ी पूछताछ में उनका असली चेहरा सामने आ गया।पुलिस ने मौके से कई दस्तावेज, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनसे नक्सली नेटवर्क से इनके संबंधों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। कोर्ट में पेशी गिरफ्तारी के बाद दोनों को बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने महिला को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया, जबकि रमेश कुरसम को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह पता लगाएगी कि दंपत्ति ने नक्सल संगठन को किस प्रकार की सूचनाएं दीं और किन-किन अफसरों के घरों में काम किया। बस्तर में नक्सलवाद घटा गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में बस्तर जिले को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर किया है। सड़क, नेटवर्क कनेक्टिविटी और सुरक्षा कैंप जैसी योजनाओं से अब नक्सलवाद का असर सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर तक सीमित रह गया है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में 287 नक्सली मारे गए, 1,000 गिरफ्तार हुए और 837 ने सरेंडर किया। 2018 में देशभर में नक्सल प्रभावित जिले 126 थे, जो अप्रैल 2024 तक घटकर 38 रह गए।

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छत्तीसगढ़: दिव्यांगों के नाम पर 1000 करोड़ का कथित घोटाला – हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर चलाए गए स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (PRRC) में कथित 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए हैं। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने इसे महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संगठित और बड़े पैमाने पर हुआ भ्रष्टाचार बताया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी फंड को फर्जी कर्मचारियों और मशीनों के नाम पर निकालकर दुरुपयोग किया गया। कोर्ट की सख्त टिप्पणी बेंच ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी को प्रशासनिक त्रुटि बताना न्यायसंगत नहीं। राज्य सरकार अपने उच्चाधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है और अब तक की जांच अधूरी और असंगत है। इसलिए सीबीआई को दस्तावेज जब्त कर स्वतंत्र रूप से जांच पूरी करनी होगी। शुरुआत कैसे हुई साल 2004 में SRC की स्थापना दिव्यांगों के पुनर्वास और प्रशिक्षण के लिए की गई थी। 2012 में PRRC खोला गया, जो कृत्रिम अंग और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए था। लेकिन आरटीआई के जरिए सामने आया कि ये संस्थान केवल कागजों में सक्रिय थे और कर्मचारियों की नियुक्ति बिना किए ही वेतन और खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये निकाले गए। याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ठाकुर ने जनहित याचिका में दावा किया कि उनके नाम पर भी फर्जी रिकॉर्ड बनाकर वेतन निकाला गया, जबकि उन्होंने कभी वहां काम ही नहीं किया। जानकारी मांगने पर उन्हें धमकियां भी दी गईं। ऑडिट और जांच में उजागर अनियमितताएं वित्त विभाग की जांच में 31 अनियमितताएं पाई गईं। SRC का 14 साल तक ऑडिट नहीं हुआ था। फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन उठाया गया, उपकरण खरीद के नाम पर कैश भुगतान हुआ, जबकि कृत्रिम अंग और मशीनें खरीदी ही नहीं गईं। 2019 में प्रबंधन समिति ने SRC को भंग कर खाते बंद कर दिए। किस पर लग रहे आरोप याचिका में पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह के साथ सात रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (विवेक ढांड, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडे, पीपी श्रोती) के नाम भी शामिल हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया क्योंकि याचिका में उनके खिलाफ स्पष्ट मांग नहीं थी। कांग्रेस का बयान कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि रमन सिंह के 15 साल के शासन में हुए भ्रष्टाचार का यह बड़ा उदाहरण है। दिव्यांगजनों के लिए आवंटित 1000 करोड़ रुपये में किस तरह घोटाला हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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नान घोटाला: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, सुप्रीम कोर्ट का आदेश न होने पर लौटे

छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में रिटायर्ड IAS अफसर आलोक शुक्ला शुक्रवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचे। लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश के बिना सरेंडर स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद आलोक शुक्ला अदालत से वापस लौट गए। कोर्ट ने क्या कहा बचाव पक्ष के वकील फैज़ल रिज़वी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक शुक्ला सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन जज ने कहा कि फिलहाल आदेश अपलोड नहीं हुआ है। जब आदेश की कॉपी आ जाएगी तभी सरेंडर स्वीकार होगा।सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आलोक शुक्ला को दो हफ्ते ED (प्रवर्तन निदेशालय) की कस्टडी और दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला नान घोटाले में हाईकोर्ट ने आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को पहले अग्रिम जमानत दे दी थी, लेकिन ED ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने ED की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने ED और EOW को तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए — ED को तीन महीने और EOW को दो महीने। क्या है नान घोटाला फरवरी 2015 में ACB/EOW ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को संभालने वाले नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे।इन छापों में 3.64 करोड़ रुपये नकद मिले थे और चावल-नमक समेत कई नमूनों की गुणवत्ता जांच में घटिया पाए गए। EOW की FIR के मुताबिक, डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा ने तत्कालीन महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा के साथ मिलकर अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कागजों और प्रक्रियात्मक दस्तावेज़ों में हेरफेर कर अपने पक्ष में जवाब तैयार करवाए ताकि अदालत में उन्हें अग्रिम जमानत मिल सके। किन धाराओं में मामला दर्ज EOW ने डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, सतीश चंद्र वर्मा और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धाराओं 7, 7(क), 8, 13(2) और IPC की धाराएं 182, 211, 193, 195-A, 166-A और 120-B के तहत केस दर्ज किया है।

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भिलाई: नौकरी की तलाश में ऑनलाइन कंपनी से जुड़े दो इंजीनियरिंग पास युवक, फर्जीवाड़े के केस में यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के भिलाई में रहने वाले दो सगे भाई नौकरी के चक्कर में फर्जी कंपनी के झांसे में आ गए। परिवार के मुताबिक, इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब दोनों को रोजगार नहीं मिला तो उन्होंने ऑनलाइन जॉब जॉइन कर ली। अब यूपी पुलिस ने उन्हें ठगी और फर्जी वीज़ा पासपोर्ट मामले में हिरासत में ले लिया है। पिता शिवशंकर शाह का कहना है कि उन्होंने 36 साल तक अंडे की दुकान चलाकर बच्चों को इंजीनियर बनाया, इसके लिए 10 लाख रुपये तक का लोन लिया। मगर अब उनके बेटे शुभम शाह (27) और विष्णु कुमार शाह (31) जेल में हैं, जबकि जिस अरेबियन कंपनी पर मामला दर्ज है, उसका नाम उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। भिलाई से उठाकर ले गई यूपी पुलिस 11 सितंबर की रात भिलाई कैंप-1 सुभाष चौक से चार से ज्यादा लोग अचानक पहुंचे और दोनों भाइयों को गाड़ी में बिठाकर ले गए। परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और छावनी थाना में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। लेकिन अगले दिन स्पष्ट हुआ कि दोनों को यूपी पुलिस ने अंबेडकर नगर ज़िले के सुल्तानपुर राजे थाने में दर्ज केस में पकड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, यूपी में विदेश भेजने और फर्जी वीज़ा पासपोर्ट तैयार कराने के आरोप में FIR दर्ज है। FIR कंपनी के खिलाफ हुई है, लेकिन यूपी पुलिस ने पूछताछ के आधार पर शुभम और विष्णु को भी अज्ञात आरोपी मानकर गिरफ्तार किया है। फर्जी कंपनी में HR हेड बने थे विष्णु परिवार का कहना है कि बड़ा बेटा विष्णु “बी फॉर एफ माइक्रो फाइनेंस” नामक कंपनी से जुड़ा था। उसे छत्तीसगढ़ का HR हेड बनाया गया था। उसका काम केवल मोबाइल पर इंटरव्यू लेकर रिपोर्ट भेजना था, पैसों का लेन-देन उसके पास नहीं था। 5 महीने काम करने के बाद भी उसे सिर्फ एक बार 25 हजार रुपए मिले, तीन महीने की सैलरी आज तक नहीं मिली। पिता ने बताया कि कंपनी ने पहले गाजियाबाद बुलाया था, फिर घर से काम करने को कहा। ऑफिस खोलने की बात भी हुई, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह संभव नहीं हो पाया। परिवार पर संकट, शादी पर भी खतरा विष्णु की फरवरी में शादी तय है, सगाई हो चुकी है। पिता को डर है कि जेल जाने से बेटों का भविष्य और शादी दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि दोनों बेटे ठगी के आरोपी नहीं हैं, बल्कि फर्जी कंपनी के शिकार हुए हैं। दुर्ग पुलिस बोली- जांच यूपी में दुर्ग पुलिस का कहना है कि अपराध उत्तर प्रदेश में दर्ज है और वहीं की पुलिस जांच कर रही है। आगे का फैसला यूपी की अदालत ही करेगी।

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रायगढ़: मछली कंपनी के ड्राइवर से 2.57 लाख की लूट, बदमाश एक्टिवा छोड़कर भागे

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बड़ी लूट की वारदात हुई। एमएम फिश कंपनी के ड्राइवर मोहम्मद रफीक से तीन अज्ञात बदमाशों ने करीब 2 लाख 57 हजार 660 रुपये लूट लिए। पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद रफीक मछली की सप्लाई के बाद रकम कलेक्शन कर बिलासपुर लौट रहा था। इसी दौरान खड़गांव-सिथरा रोड पर एक्टिवा सवार तीन बदमाशों ने उसका रास्ता रोक लिया। उन्होंने हथियार दिखाकर उससे नकदी छीन ली। आरोपी एक्टिवा छोड़कर जंगल भागे वारदात के बाद पकड़े जाने के डर से आरोपी स्कूटी वहीं छोड़कर जंगल की ओर फरार हो गए। आरोपियों ने स्कूटी का नंबर प्लेट भी ढका हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है और वारदात की जांच जारी है।

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रायपुर: डायल-112 पुलिसकर्मी से मारपीट, वर्दी फाड़ी और गाड़ी जलाने की धमकी; 4 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में डायल-112 की टीम पर हमला करने और सरकारी वाहन जलाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस घटना में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। कैसे हुआ विवाद सूत्रों के मुताबिक, 11 सितंबर को अमलीडीह के जोसेफ कॉलोनी रोड पर कुछ लोगों के सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने की शिकायत मिली थी। डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची तो वहां चार युवक नशे में थे और पुलिसकर्मी से बहस करने लगे। शिकायतकर्ता तुलेश मनहरे, जो जुलाई 2023 से 112 पर कार्यरत हैं, ने बताया कि आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की, फिर धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी और 112 की गाड़ी को जला देने की धमकी भी दी। आरोपियों की पहचान गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई — सभी आरोपी इस समय रायपुर के राजेंद्र नगर इलाके में रह रहे थे। पुलिस की कार्रवाई घटना के बाद अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और चारों युवकों को थाने ले आए। आरोपियों के खिलाफ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा और धमकी देने समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।

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शादी का झांसा देकर यौन शोषण की कोशिश का आरोप, BJYM अध्यक्ष बोले- बेबुनियाद

छत्तीसगढ़ भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा पर एक युवती ने गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि राहुल टिकरिहा ने पहले उससे नजदीकियां बढ़ाईं, हग-स्मूच किया, जबरन छूने की कोशिश की और फिर सेक्स करने की कोशिश की। पीड़िता का आरोप युवती ने मीडिया के सामने बयान देते हुए कहा कि उसका राहुल टिकरिहा से अफेयर था। वह बताती है कि जब वह कक्षा 10वीं में थी, तब पहली बार राहुल से उसका संपर्क हुआ। शुरुआत में वह मोहल्ले की समस्या (लाउडस्पीकर) को लेकर मिली थी। इसके बाद राहुल ने उसे मैसेज भेजना शुरू कर दिया और रात-रात भर परेशान करता था। पीड़िता के मुताबिक, 5 अप्रैल की रात 12 बजे वह राहुल से मिलने गई थी। खेत के पास राहुल उसे अपने साथ ले गया और रात 1 बजे उसने सेक्स करने की कोशिश की। युवती ने कहा कि उस दौरान उसका पीरियड चल रहा था और गर्भवती होने के डर से उसने मना कर दिया। इसके बाद राहुल ने उसे छोड़ दिया, लेकिन बात करते रहने की बात कही। युवती का यह भी आरोप है कि राहुल ने शादी का भरोसा दिलाया था, लेकिन बाद में मुकर गए। इस विवाद के बाद उसका परिवार भी उससे दूरी बनाने लगा है। अब युवती चाहती है कि राहुल उससे शादी करें ताकि उसकी इज्जत और जिंदगी सुरक्षित रहे। पुराने विवाद भी जुड़े कुछ दिन पहले ही राहुल टिकरिहा पर उनके कथित चाचा रविकांत टिकरिहा ने अपनी पत्नी से अवैध संबंध रखने का आरोप लगाया था। तब उनका एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था। इस नए मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। राहुल टिकरिहा का पक्ष इन आरोपों पर राहुल टिकरिहा ने कहा कि यह सब बेबुनियाद है। उनका कहना है कि कांग्रेस उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसा करवा रही है। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई है और कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

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