Raipur

रायपुर साहित्य उत्सव की शुरुआत आज: 42 सत्र, 120 से ज्यादा साहित्यकार; आज होगा चर्चित नाटक ‘चाणक्य’ का मंचन

छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को एक बड़ा मंच मिला है। अटल नगर नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आज से रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ हो गया है। यह आयोजन 25 जनवरी तक तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें साहित्य, संस्कृति, समाज और समकालीन मुद्दों पर व्यापक विमर्श होगा। उत्सव का उद्घाटन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। आयोजन में देश-प्रदेश से आए लेखक, कवि, बुद्धिजीवी और विचारक हिस्सा ले रहे हैं। आज होगा पद्मश्री मनोज जोशी का बहुचर्चित नाटक ‘चाणक्य’ साहित्य उत्सव के पहले दिन, आज शाम 7 बजे पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध अभिनेता मनोज जोशी द्वारा चर्चित नाटक ‘चाणक्य’ का मंचन किया जाएगा। इसके साथ ही बुक स्टॉल्स में साहित्य प्रेमियों की भीड़ देखने को मिलेगी। 3 दिन में 42 सत्र, 120 से अधिक नामचीन हस्तियां होंगी शामिल रायपुर साहित्य उत्सव में कुल 42 साहित्यिक और बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश और प्रदेश के करीब 120 ख्यातिप्राप्त लेखक, कवि, शिक्षाविद और विचारक शामिल होंगे। सत्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक विषयों पर चर्चा की जाएगी। लेखिका एवं पत्रकार शिखा वार्ष्णेय, कवि कमलेश कमल, डॉ. गोपाल कमल और नवगीत के शिखर पुरुष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देंगे। ये प्रमुख साहित्यकार और रचनाकार भी रहेंगे मौजूद साहित्यिक चर्चाओं में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के संचालक विकास दवे, लेखक अजय के. पांडे (यू आर माई बेस्ट वाइफ), उपन्यासकार इंदिरा दांगी, लेखिका सोनाली मिश्र, विदुषी जयश्री रॉय, फोटोग्राफर-लेखिका डॉ. कायनात काज़ी और लेखक-वक्ता अनिल पांडेय शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ी कविता और लोकगीतों पर विशेष सत्र उत्सव में छत्तीसगढ़ी कविता और लोकगीतों के लिए अलग सत्र रखे गए हैं। इसमें कवि रामेश्वर वैष्णव, रामेश्वर शर्मा, मीर अली मीर, शशि सुरेंद्र दुबे और लोकगीत सत्र में डॉ. पी.सी. लाल यादव, शकुंतला तरार, बिहारीलाल साहू, डॉ. विनय कुमार पाठक अपनी प्रस्तुतियां देंगे। 10 हजार से ज्यादा पंजीकरण, स्थल पर भी होगा रजिस्ट्रेशन अब तक 10,000 से अधिक साहित्य प्रेमी रायपुर साहित्य उत्सव के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, वे आयोजन स्थल पर भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। साहित्यकारों के नाम पर रखे गए मंडप उत्सव के विभिन्न मंडपों का नाम प्रतिष्ठित साहित्यकारों के नाम पर रखा गया है। मुख्य मंडप का नाम ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर रखा गया है। अन्य मंडप पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव के नाम पर होंगे। अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ 24 जनवरी को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन होगा। इसमें डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, अजय सहाब, अमन अक्षर, डॉ. अंशु जोशी, त्रिलोकचंद्र महावर, हर्षराज हर्ष, डॉ. अजय पाठक और राहुल अवस्थी काव्य-पाठ करेंगे। GENZ, AI, पत्रकारिता और सिनेमा पर होगी चर्चा उत्सव में डिजिटल युग, GENZ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।‘डिजिटल युग के लेखक और पाठक’ और ‘उपनिषद से AI तक: साहित्य की यात्रा’ जैसे विषयों पर विशेष सत्र होंगे। पत्रकारिता, सिनेमा और टेलीविजन पर आयोजित सत्रों में अनुराग बसु, मनोज वर्मा, रुबिका लियाकत और हर्षवर्धन त्रिपाठी शामिल होंगे।

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बिरयानी ऑर्डर से इनकार पर जोमैटो डिलीवरी बॉय ने दी जान से मारने की धमकी

फोन पर गाली-गलौज, 6 बार कॉल कर किया परेशान; पीड़ित ठेकेदार थाने पहुंचा राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिरयानी का पार्सल लेने से मना करने पर कथित जोमैटो डिलीवरी बॉय ने एक ठेकेदार को न सिर्फ फोन पर गालियां दीं, बल्कि घर में घुसकर जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पीड़ित ठेकेदार ललित प्रजापति ने मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। कैसे शुरू हुआ विवाद ललित प्रजापति ने पुलिस को बताया कि 21 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे वह अपने घर पर मौजूद थे। इसी दौरान एक अज्ञात नंबर से उन्हें लगातार 3 से 4 बार कॉल आए। कॉल करने वाले युवक ने खुद को जोमैटो डिलीवरी कर्मी बताते हुए कहा कि उनके नाम से बिरयानी का ऑर्डर आया है और पार्सल कहां देना है। ललित ने साफ कहा कि उन्होंने कोई फूड ऑर्डर नहीं किया है और इसे रॉन्ग नंबर बताते हुए कॉल काट दिया। गाली-गलौज और धमकी का आरोप कुछ समय बाद जब ठेकेदार घर के बाहर स्थित चाहत मेडिकल स्टोर पर सामान खरीद रहे थे, उसी नंबर से फिर कॉल आया। भुगतान में व्यस्त होने के कारण उन्होंने अपने परिचित दीपक ग्वाल से फोन स्पीकर पर उठाने को कहा। स्पीकर पर बात शुरू होते ही डिलीवरी बॉय ने दोबारा ऑर्डर की बात दोहराई। मना करने पर उसने अशब्द भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां दीं और घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी। घटना से भयभीत ठेकेदार सीधे थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया केस सिविल लाइन थाना पुलिस ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर आरोपी मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मोबाइल नंबर के आधार पर कथित डिलीवरी बॉय की पहचान और तलाश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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CGMSC घोटाला: डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा गिरफ्तार, 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड

सरकार को तीन गुना महंगे रिएजेंट सप्लाई कराने का आरोप, साजिश की परतें खुलीं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। नवी मुंबई स्थित डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को 22 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब तक 9 से ज्यादा आरोपी गिरफ्त में CGMSC घोटाले में इससे पहले 18 जनवरी 2026 को ACB/EOW ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, इससे पूर्व मोक्षित कॉर्पोरेशन, दुर्ग के संचालक शशांक चोपड़ा समेत पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक जिन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें भी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। ACB/EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है। कंपनी पॉलिसी दरकिनार कर बढ़ाई गई कीमतें जांच में यह सामने आया है कि डायसिस इंडिया ने अपने रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए पहले से निश्चित एमआरपी तय कर रखी थी। इसके बावजूद कुंजल शर्मा ने जानबूझकर कंपनी की नीति को नजरअंदाज किया और मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अधिक कीमतें प्रस्तावित कीं। शशांक चोपड़ा के साथ साजिश का आरोप ACB की जांच के अनुसार कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। तय एमआरपी से कहीं अधिक दरों और शर्तों को अनधिकृत रूप से CGMSC को भेजा गया, जिससे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और मोक्षित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरों को मंजूरी मिल गई। तीन गुना तक महंगे दामों पर सप्लाई जांच में यह भी सामने आया है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक महंगे दामों पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इससे राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को करोड़ों का अनुचित लाभ मिला। हमर लैब योजना की गहन जांच जारी ACB/EOW ने स्पष्ट किया है कि हमर लैब योजना के अंतर्गत हुई खरीद प्रक्रिया, भुगतान और आपूर्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। क्या है पूरा CGMSC घोटाला? CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत से सरकार को करीब 411 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि IAS और IFS अधिकारियों की सांठगांठ से महज 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये की खरीदी कर ली गई। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा फिलहाल 23 जनवरी तक ED की कस्टोडियल रिमांड पर है। 8 रुपये की चीज 2352 में, 5 लाख की मशीन 17 लाख में खरीदी जांच में सामने आया है कि इसके अलावा CGMSC ने 300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स की खरीद की। शिकायत से खुला घोटाले का राज दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने CGMSC में अनियमितताओं की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED से की थी। इसके बाद केंद्र से निर्देश मिलने पर EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज बंद EOW की जांच के घेरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनी की वेबसाइट पर फर्म की स्थिति अस्थायी रूप से बंद दर्शाई जा रही है। यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा, रायपुर में स्थित थी। कैसे मिलता था टेंडर? EOW की रिपोर्ट के अनुसार CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये का काम दिया। जरूरत न होने के बावजूद मेडिकल किट और मशीनों की खरीदी की गई।मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर टेंडर कोडिंग की, जबकि CGMSC अधिकारियों ने शर्तें इस तरह तय कीं कि दूसरी कंपनियां टेंडर से बाहर हो जाएं। 27 जनवरी 2025 को हुई थी बड़ी रेड 27 जनवरी 2025 को EOW की टीम ने रायपुर, दुर्ग और हरियाणा के पंचकुला में एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान मोक्षित कॉर्पोरेशन और उससे जुड़े 16 ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए। जरूरत न होते हुए भी 300 करोड़ की खरीदी जांच में सामने आया कि कांग्रेस शासनकाल में जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच जरूरत से ज्यादा रिएजेंट खरीदे गए। 200 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट भेजे गए, जहां न मशीन थी, न तकनीशियन।रीएजेंट की एक्सपायरी केवल 2–3 महीने शेष थी, जिससे बचाव के लिए CGMSC 600 फ्रिज खरीदने की तैयारी में था।

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डेंटल कॉलेज के पीजी-इंटर्न छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड समानता और गर्ल्स हॉस्टल की मांग

बातचीत बेनतीजा, अस्पताल सेवाएं प्रभावित राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्र पिछले 6 दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिसे अब और तेज करते हुए उन्होंने पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हड़ताल के दौरान छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल परिसर में डॉक्टरों, मरीजों और स्टाफ की आवाजाही रोक दी, जिससे दंत चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। हालात को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा आंदोलनकारी छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की कमी को दूर करना शामिल है। प्रशासन से बातचीत, नहीं निकला हल हड़ताल की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से लंबी चर्चा की। अधिकारियों ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को बसों में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ दिया। हालांकि इसके बावजूद हड़ताल जारी रही। मरीजों को हो रही परेशानी हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना परामर्श लौटना पड़ा।पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि उनके पिता का एक्सीडेंट हुआ है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया, लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन के दो प्रमुख मुद्दे 1. स्टाइपेंड में समानता की मांगपीजी और इंटर्न छात्रों का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्रों को जिस दर से स्टाइपेंड मिलता है, डेंटल कॉलेज के छात्रों को उससे कम भुगतान किया जा रहा है।छात्रों का तर्क है कि ड्यूटी टाइम, ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। वे मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड और उसे बैकडेट से लागू करने की मांग कर रहे हैं। 2. गर्ल्स हॉस्टल की कमीछात्रों ने महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने का मुद्दा भी उठाया है। कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। छात्र कॉलेज परिसर में अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका हड़ताल के चलते गुरुवार को अधिकांश ओपीडी और उपचार सेवाएं प्रभावित रहीं। कई विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं।छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

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रायपुर में आंशिक कमिश्नरेट सिस्टम लागू, पुलिस दो हिस्सों में बंटी

21 थाने कमिश्नर के अधीन, 12 थाने SP के नियंत्रण में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के एक हिस्से में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस संबंध में गृह विभाग ने बुधवार शाम आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। नए सिस्टम के तहत रायपुर की पुलिस व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है। जिले के 21 थाने पुलिस कमिश्नर के अंतर्गत आएंगे, जबकि 12 थाने एसपी (SP) के अधीन काम करेंगे। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों की पुलिसिंग अलग-अलग ढांचे में संचालित होती है। पूरे जिले में लागू नहीं हुआ सिस्टम कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इसे पूरे रायपुर जिले में लागू किया जाएगा। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था और इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखा गया था। हालांकि 21 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में IAS लॉबी के विरोध के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में भोपाल-इंदौर मॉडल के अनुसार आंशिक रूप से सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी। IPS लॉबी ने जताई नाराजगी वहीं IPS अधिकारियों का मानना है कि अधूरे कमिश्नरेट सिस्टम से जिले में भ्रम की स्थिति बनेगी। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस के लिए दो अलग-अलग प्रशासनिक स्ट्रक्चर तैयार करने होंगे, जबकि विभाग के पास न तो पर्याप्त मैनपावर है और न ही संसाधन। दो अधिकारियों के नियंत्रण में जिले की पुलिस रहने से यह व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। IPS लॉबी का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की बजाय व्यवस्थागत समस्याएं बढ़ेंगी। सीमाओं के बंटवारे पर सवाल अधिकारियों के मुताबिक कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिसिंग की सीमाएं मनमाने तरीके से तय की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के बावजूद उरला थाना क्षेत्र को कमिश्नरेट में शामिल किया गया, ताकि पंचायत क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं मुजगहन सहित करीब 10 थानों को ग्रामीण पुलिस के अधीन कर दिया गया, जहां पंचायतों से प्रशासनिक रुचि कम बताई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट भी नजरअंदाज एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पूरे जिले में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। कमेटी ने भुवनेश्वर मॉडल को अधिक प्रभावी बताते हुए अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी, लेकिन अब तक इस पर न चर्चा हुई और न ही कमेटी से कोई फीडबैक लिया गया। पुलिस बल की भारी कमी राजधानी के अनुरूप रायपुर के एक थाने में कम से कम 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत है, जबकि फिलहाल औसतन 30 से 35 जवान ही तैनात हैं। अब कमिश्नरेट सिस्टम के चलते मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड ड्यूटी में कमी आने की आशंका है। जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में प्रभावी पुलिसिंग के लिए 7500 से अधिक पुलिस बल की आवश्यकता है। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से थानों की बजाय दफ्तरों में स्टाफ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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एएनपीआर कैमरों से सख्ती: बिना बीमा, फिटनेस या पीयूसी के वाहन पर सीधे ई-चालान

प्रदेश में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब बिना फिटनेस, बीमा या प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) के चलने वाले वाहनों पर चालान अपने आप कट जाएगा। इसके लिए राज्यभर के टोल प्लाजा और प्रमुख सड़कों पर एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर सीधे एनआईसी और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) से जुड़े सिस्टम को जानकारी भेजते हैं। इसके बाद नियमों की जांच कर ई-चालान जनरेट किया जाता है और वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाता है। पहली बार 800 और दोबारा 1500 रुपए का जुर्माना परिवहन विभाग के अनुसार, यदि किसी वाहन का बीमा, फिटनेस या पीयूसी समाप्त हो चुका है तो पहली बार 800 रुपए का चालान कटेगा। दूसरी बार नियम तोड़ने पर 1500 रुपए का जुर्माना लगेगा। इसके बाद हर बार उल्लंघन पर 1500 रुपए का चालान किया जाएगा। अब तक 1 लाख 92 हजार 883 वाहन मालिकों को मोबाइल पर चालान भेजे जा चुके हैं। 24 टोल और 84 प्रमुख सड़कों पर कैमरे सक्रिय प्रदेश में कुल 24 टोल प्लाजा और 84 प्रमुख सड़कों पर हाई-रिजॉल्यूशन एएनपीआर कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे चलती गाड़ियों की नंबर प्लेट पहचान कर तुरंत डेटा सिस्टम में भेजते हैं। प्रदेश में लगभग 90 हजार भारी वाहन और करीब 69 लाख दोपहिया वाहन पंजीकृत हैं, जिन पर यह व्यवस्था समान रूप से लागू की गई है। एक दिन में एक ही बार कटेगा चालान यदि किसी वाहन का चालान एक टोल पर कट जाता है, तो अगले 24 घंटे के भीतर किसी अन्य टोल से गुजरने पर दोबारा चालान नहीं कटेगा। यह नियम दोपहिया से लेकर भारी वाहनों तक सभी पर लागू होगा। बाहर के राज्य की गाड़ियों पर भी कार्रवाई अगर किसी दूसरे राज्य का वाहन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका चालान भी कटेगा। यह चालान केंद्रीय प्रणाली के जरिए संबंधित राज्य के वाहन मालिक तक पहुंचाया जाएगा। गलत चालान की स्थिति में क्या करें यदि किसी वाहन मालिक को लगता है कि उनका चालान गलती से कटा है, तो वे ई-चालान पोर्टल या परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जांच में चालान गलत पाए जाने पर उसे रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा संबंधित जिले के आरटीओ कार्यालय में आवेदन देकर भी चालान का निराकरण कराया जा सकता है। चोरी के वाहन के मामले में राहत अगर किसी वाहन की चोरी हो चुकी है और वह टोल से गुजरते समय पकड़ा जाता है, तो वाहन मालिक थाने में दर्ज चोरी की रिपोर्ट प्रस्तुत कर जुर्माने से बच सकता है। आगे और बढ़ेगी सख्ती परिवहन विभाग के अनुसार आने वाले समय में और अधिक इलाकों में एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही ओवरस्पीडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

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रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर बड़ा फैसला जल्द हो सकता है। संकेत हैं कि नवा रायपुर के साथ-साथ पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस संबंध में आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। कमिश्नरी सिस्टम के विस्तार का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। एक सर्वे में करीब 90 फीसदी लोगों ने नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी के अंतर्गत लाने की मांग की थी। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने का समर्थन किया है। निवेश और रोजगार से जुड़ा है मजबूत कानून व्यवस्था मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी स्तर के अधिकारियों का मानना है कि जहां कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वहां निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर बनते हैं। इससे जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होता है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉ एंड ऑर्डर का सीधा असर शासन की स्थिरता पर पड़ता है। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन खाका अब तक अधूरा 31 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने का निर्णय लिया गया था। गृह विभाग को इसका पूरा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 21 दिन बीतने के बाद भी खाका तैयार नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रहना चाहिए। इसी कारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा पूरे जिले में सिस्टम लागू करने की डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कई बार पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी लागू करने को लेकर पत्राचार किया है। एडीजी स्तर की कमेटी ने भी पुलिस कमिश्नर को पूर्ण अधिकार देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार मजबूत और प्रभावी कमिश्नरी सिस्टम लागू करना चाहती है। दोहरी पुलिसिंग से बढ़ेगा खर्च अगर रायपुर शहर में कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात पुलिस सिस्टम लागू किया गया, तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। देहात क्षेत्र के लिए अलग से एसपी, एएसपी, डीएसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम और वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। थानों की दूरी बढ़ने से जनता को होगी परेशानी देहात पुलिसिंग लागू होने पर नगर निगम सीमा से लगे कई इलाकों को ग्रामीण थानों में शामिल किया जाएगा। इससे थानों की दूरी बढ़ेगी और आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से जुड़े सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव जैसे इलाके ग्रामीण थानों में चले जाएंगे। जहां विधानसभा थाना मात्र एक किलोमीटर दूर है, वहीं खरोरा या सिलतरा थाना 25 से 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। विशेषज्ञों की राय: पूरे अधिकारों के साथ लागू हो कमिश्नरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरी लागू करना पुलिस को कमजोर करेगा। औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को भी कमिश्नरी के दायरे में लाया जाना चाहिए। दिल्ली, मुंबई और कानपुर जैसे शहरों की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।

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प्रसव के बाद माताओं को मिल रहा फलदार पौधा, रायपुर में चल रहा “ग्रीन पालना” अभियान

रायपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा “प्रोजेक्ट ग्रीन पालना” अभियान संचालित किया जा रहा है। इस पहल के तहत शासकीय अस्पतालों में प्रसव के बाद माताओं को फलदार पौधे भेंट किए जा रहे हैं, ताकि नवजात के जन्म के साथ एक पौधा भी लगाया जा सके और हरियाली को बढ़ावा मिले। यह अभियान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के अनुरूप चलाया जा रहा है। जिला कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिले के अस्पतालों में 130 फलदार पौधों का वितरण मंगलवार को एमसीएच कालीबाड़ी जिला अस्पताल में 15, अभनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 और बिरगांव में 6 प्रसूता महिलाओं को कुल 130 फलदार पौधे प्रदान किए गए। पौधों के वितरण के दौरान माताओं को उनकी देखभाल, रोपण और संरक्षण से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी दी गई, ताकि पौधे सुरक्षित रूप से बढ़ सकें। मातृत्व और पर्यावरण को जोड़ने की पहल प्रोजेक्ट ग्रीन पालना का उद्देश्य मातृत्व को प्रकृति से जोड़ना है। यह अभियान न केवल नवजात शिशु के जीवन की शुरुआत को यादगार बनाता है, बल्कि आने वाले समय में स्वच्छ पर्यावरण और हरित भविष्य के लिए भी मजबूत आधार तैयार करता है। जिला प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पहल से समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ेगी।

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रायपुर सदर बाजार में सर्राफा दुकान से सोने की चेन चोरी, CCTV में महिला कैद

रायपुर के सदर बाजार इलाके में स्थित एक सर्राफा दुकान से सोने की चेन चोरी का मामला सामने आया है। ग्राहक बनकर दुकान में आई एक महिला ने बातचीत के दौरान मौका पाकर सोने की चेन चुरा ली। घटना 15 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। चोरी की गई चेन में मोती लगे हुए थे। कुल वजन 13.550 ग्राम बताया गया है, जिसमें 4.320 ग्राम 18 कैरेट सोना शामिल है। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में महिला का चेहरा साफ दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर उसकी पहचान की जा रही है। ग्राहक बनकर आई, बातचीत में उलझाकर की चोरी दुकान संचालक प्रिंस जैन ने पुलिस को बताया कि उनकी सदर बाजार में भोरावत एंड संस नाम से सोने-चांदी की दुकान है। 15 जनवरी को दोपहर करीब 3 से 3:30 बजे के बीच एक महिला दुकान में आई और सेल्समैन से सोने की चेन दिखाने को कहा। चेन देखते समय महिला ने सेल्समैन को बातचीत में उलझाए रखा और इसी दौरान एक चेन चुपचाप उठा ली। महिला के जाने के बाद स्टाफ को शक हुआ, जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। फुटेज में महिला चोरी करते हुए स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। CCTV के आधार पर महिला की तलाश जारी दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात महिला के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी महिला की पहचान की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा।

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रायपुर रेप केस: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी की अवैध दुकान ढही, नगर निगम ने चलाया बुलडोजर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी (65) की अवैध रूप से बनी दुकान को नगर निगम ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने नाबालिग बच्ची के साथ लगातार पांच दिनों तक दुष्कर्म किया। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद नगर निगम प्रशासन ने भी आरोपी के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। चॉकलेट का लालच देकर बुलाता था घर पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 7 से 11 जनवरी के बीच अपने ही मोहल्ले में रहने वाली 9 साल की बच्ची को चॉकलेट और खाने-पीने की चीजों का लालच देकर कई बार अपने घर बुलाया। इसी दौरान उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। 12 जनवरी की सुबह बच्ची असहनीय दर्द के कारण रोती हुई जमीन पर पड़ी थी। जब उसकी चाची उसे नहलाने ले गई और दर्द की वजह पूछी, तब बच्ची ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया गया। धमकी देकर चुप रहने को कहता था आरोपी बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपी हर बार गलत काम के बाद उसे धमकाता था कि अगर किसी को बताया तो मार देगा। इसी डर की वजह से वह कई दिनों तक चुप रही। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अवैध निर्माण पर नगर निगम की कार्रवाई रेप के आरोपी के खिलाफ नगर निगम ने भी सख्त रुख अपनाया। रायपुर की मेयर मीनल चौबे के निर्देश पर आरोपी की दुकान को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किया गया था। 16 जनवरी को दुकान पर नोटिस चस्पा कर जवाब देने का समय दिया गया, लेकिन तय अवधि में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाकर दुकान को ढहा दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की दुकान नगर निगम के नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी। नगर निगम प्रशासन ने साफ किया है कि गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है और अवैध निर्माण पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। रायपुर में बढ़ते अपराध चिंता का विषय रायपुर पुलिस द्वारा पेश किए गए वार्षिक अपराध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में कुल 15,896 अपराध दर्ज किए गए। इनमें 280 रेप के मामले सामने आए, जबकि 92 हत्याएं दर्ज की गईं। बीते तीन वर्षों में अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में 543 चाकूबाजी की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं। सबसे अधिक एफआईआर खमतराई थाना क्षेत्र में दर्ज की गईं, जहां एक साल में 1,013 मामले सामने आए।

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