Raipur

रायपुर की सड़कों पर उतरे विधायक और महापौर, खारुन नदी में नाला मिलने पर अफसरों को फटकार; 5 दिन में सुधार के निर्देश

रायपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा की जमीनी हकीकत परखने के लिए सड़कों पर उतरे। निरीक्षण के दौरान वे सरोना और चंदनडीह क्षेत्रों में चल रहे और पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ महापौर मीनल चौबे, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान चंदनडीह में 80 करोड़ रुपये की लागत से बने एसटीपी प्लांट की स्थिति सामने आने पर विधायक मूणत खासे नाराज नजर आए। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार चिंगरी नाले का दूषित और बदबूदार पानी अब भी सीधे खारुन नदी में मिल रहा है, जिस पर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए 5 दिन का अल्टीमेटम दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि तत्काल ठोस कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत की जाए। सरोना को विकास की दोहरी सौगात निरीक्षण के दौरान विधायक मूणत ने बताया कि अमृत मिशन 2.0 के तहत भारत सरकार से स्वीकृत 9 करोड़ रुपये की राशि से सरोना क्षेत्र में एक भव्य उद्यान विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने शीतला मंदिर के पीछे स्थित रिक्त भूमि का निरीक्षण किया और राजस्व अधिकारियों को पटवारियों के साथ तुरंत सीमांकन कर लेआउट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही चंदनडीह से सरोना होते हुए महादेव घाट तक नए बायपास रोड के निर्माण का प्रस्ताव आगामी बजट में भेजने के निर्देश दिए गए। विधायक ने कहा कि इससे क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने ट्रेंचिंग ग्राउंड की सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद निरीक्षण कार्यक्रम में महापौर मीनल चौबे, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जोन अधिकारी, योजना शाखा के अधिकारी, भू-राजस्व निरीक्षक, पटवारी, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंता और भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: 6 से 8 जनवरी तक चयन ट्रायल, रायपुर और बिलासपुर में होंगे आयोजन

छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य की टीमों के चयन हेतु 6 से 8 जनवरी 2026 तक रायपुर और बिलासपुर में चयन ट्रायल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी, जबकि बिलासपुर में तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के लिए ट्रायल होंगे। इन ट्रायल्स के माध्यम से विभिन्न खेलों में प्रतिभावान आदिवासी खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अनुसार, इच्छुक खिलाड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए खिलाड़ी विभागीय वेबसाइट sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध रजिस्ट्रेशन लिंक और क्यूआर कोड का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, सभी ट्रायल स्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल की रिहाई पर सियासत तेज, BJP ने उठाए सवाल, सिंहदेव बोले– बिना दोष सिद्ध किए दी जा रही सजा

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को जमानत मिल जाती है, उसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल ने लखमा की कभी पैरवी नहीं की और कांग्रेस शासनकाल में आदिवासी नेताओं को साजिश के तहत निशाना बनाया गया। ठाकुर ने कहा कि कवासी लखमा के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ मामला गढ़ा गया। अगर जांच निष्पक्ष है, तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल क्यों? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय शराब घोटाले को सत्ता का संरक्षण मिला। सिंहदेव का पलटवार— जांच एजेंसियों का दुरुपयोग वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर बिना अपराध सिद्ध हुए ही लोगों को सजा दे रही है, जो कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सिंहदेव ने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, देवेंद्र यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के कई नेताओं के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। भूपेश बघेल बोले— राजनीतिक बदले की कार्रवाई चैतन्य बघेल की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बेटे की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ED, IT और EOW जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल बदले की भावना से किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि चैतन्य को हाईकोर्ट से जमानत मिलना इस बात का सबूत है कि कार्रवाई गलत थी। उन्होंने बताया कि चैतन्य की रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई, जबकि ED ने जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तारी कर खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। ED के आरोप क्या हैं? ED के मुताबिक शराब घोटाले की जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें चैतन्य बघेल पर करीब 1000 करोड़ रुपए की लेयरिंग और मनी ट्रांजैक्शन का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले की रकम विभिन्न चैनलों से होते हुए चैतन्य बघेल तक पहुंचाई गई। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारियों के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में कई राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज है।

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छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन परीक्षा रद्द: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 216 पटवारियों की पदोन्नति होगी निरस्त

छत्तीसगढ़ में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एन.के. व्यास ने अपने अहम फैसले में RI प्रमोशन परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पटवारी से RI पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारियों ने भाग लिया था। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया, हालांकि अंतिम रूप से केवल 13 अभ्यर्थियों को चयनित किया जाना था। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी पदोन्नति के लिए चुन लिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया। पेपर लीक और भाई-भतीजावाद के आरोप जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा में प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था। आरोप है कि कुछ केंद्रों पर पति-पत्नी, भाई-भाई और रिश्तेदारों को जानबूझकर साथ बैठाया गया। एक मामले में फेल हुए पटवारी को बाद में पास दिखाया गया। कई उम्मीदवारों को समान अंक मिलने पर भी संदेह गहराया। EOW-ACB की कार्रवाई RI प्रमोशन घोटाले को लेकर पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर EOW-ACB ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है। 216 पदोन्नतियां होंगी रद्द हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि चयन प्रक्रिया दूषित, अपारदर्शी और पक्षपात से ग्रस्त थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः निरस्त हो जाएगी। नई परीक्षा कराने की अनुमति हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पटवारी से RI पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित करने की छूट दी है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कराई जाए, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को मिला नया पुलिस अधीक्षक, IPS मनोज खिलारी को सौंपी कमान

राज्य सरकार ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी IPS मनोज कुमार खिलारी को सौंप दी है। गृह विभाग के अवसर सचिव द्वारा देर रात जारी आदेश के अनुसार, मनोज खिलारी को जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। IPS मनोज खिलारी वर्ष 2014 बैच के अधिकारी हैं। नियुक्ति से पहले वे दूसरी वाहिनी, बिलासपुर में कमांडेंट के पद पर कार्यरत थे। जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस. आर. भगत के 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था, जिसे अब भर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मनोज खिलारी ने अपने सेवाकाल में कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं और कानून-व्यवस्था को लेकर उनका अनुभव मजबूत माना जाता है। उनके कार्यभार संभालने से जिले में सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग सिस्टम को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। नए एसपी के रूप में मनोज खिलारी का फोकस जनता की सुरक्षा, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को मजबूत करना रहेगा।

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CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का डिप्टी CM हाउस घेराव, 7 साल से भर्ती का इंतज़ार

13 दिनों से तूता में धरना, गृहमंत्री बोले – CM से चर्चा के बाद होगा फैसला छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) भर्ती 2018 के वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का सब्र अब जवाब दे चुका है। नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया। ये सभी उम्मीदवार पिछले 13 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपने परिवार के साथ आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, साल 2018 में CAF के 1786 पदों पर भर्ती निकली थी, जिसमें मेरिट लिस्ट के बाद 417 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। सात साल बीतने के बावजूद इन उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है, जबकि CAF में तीन हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। धरने के दौरान बिगड़ी बच्चे की तबीयत प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी के छह महीने के बच्चे की तबीयत खराब हो गई, जिससे आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच नाराज उम्मीदवारों ने डिप्टी सीएम के बंगले का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कैंडिडेट्स को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद पूरे मामले पर उनसे चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की। गृहमंत्री अमित शाह को भी लिखा पत्र CAF कैंडिडेट्स अपनी समस्या को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में अभ्यर्थियों ने यहां तक कहा था कि “अगर नक्सली होते तो शायद घर वापसी पर नौकरी और करियर दोनों मिल जाता।” इसके बाद राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गुरुवार को अलग-अलग जिलों से आए कैंडिडेट्स अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गृहमंत्री के बंगले पहुंचे थे। गृहमंत्री ने उनसे पुलिस मुख्यालय से नोटशीट लाने को कहा और हस्ताक्षर करने का भरोसा दिया, लेकिन उसके बाद वे दौरे पर निकल गए। मजदूरी कर चला रहे परिवार अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी न मिलने के कारण उन्हें मजदूरी कर परिवार का पेट पालना पड़ रहा है। एक कैंडिडेट के पिता गृहमंत्री आवास के बाहर हाथ जोड़कर मीडिया से मदद की गुहार लगाते नजर आए। आधे से ज्यादा कैंडिडेट हो चुके ओवरएज भर्ती के समय सभी अभ्यर्थियों की उम्र 28 से 32 वर्ष थी, लेकिन सात साल बीत जाने के कारण अब 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट 36 से 40 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वे अब किसी नई भर्ती के लिए भी योग्य नहीं रह गए हैं। मेरिट लिस्ट में चयनित कई उम्मीदवार मेडिकल में अनफिट हुए या नौकरी छोड़ दी, जिससे सीटें खाली हुईं। बावजूद इसके, वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स को मौका नहीं मिला। सरकार बदलने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। CAF और पुलिस बल में हजारों पद खाली छत्तीसगढ़ पुलिस बल में लंबे समय से भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश में कुल 83,259 स्वीकृत पदों में से केवल 65,439 जवान कार्यरत हैं। यानी करीब 17,820 पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में 13 IPS और 129 DSP अधिकारियों की कमी है। वहीं सूबेदार, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल के हजारों पद भी रिक्त हैं, जिससे अपराध जांच और कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। भर्ती प्रक्रिया भी अधर में अक्टूबर 2024 में पुलिस विभाग में 341 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन उसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। कॉन्स्टेबल भर्ती भी लंबे समय से अटकी हुई है। CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो अभी भी खाली पदों पर उनकी नियुक्ति की जा सकती है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री से होने वाली बैठक और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

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रायपुर: 500 रुपये मेंटेनेंस विवाद में बवाल, ‘मुफ्तखोर’ कहने पर लाठी-डंडों से मारपीट, VIDEO

रायपुर: राजधानी रायपुर में एक हाउसिंग सोसाइटी के वॉट्सऐप ग्रुप पर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। डूंडा इलाके की कृष्णा हाइट्स कॉलोनी में 500 रुपये के मेंटेनेंस चार्ज को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ी कि लाठी-डंडों से मारपीट हो गई। घटना में सोसाइटी के कई सदस्य घायल हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, कॉलोनी में साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए सभी सदस्यों से 500 रुपये मासिक मेंटेनेंस देने का नियम तय किया गया था। कुछ लोगों द्वारा भुगतान नहीं करने पर सोसाइटी के सदस्य अनिल सिरिया ने वॉट्सऐप ग्रुप में टिप्पणी करते हुए “मुफ्तखोर” शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि टिप्पणी से नाराज एक सदस्य ने अपने परिचितों को कॉलोनी में बुला लिया, जिसके बाद लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस दौरान कई लोगों को चोटें आईं और परिसर में तोड़फोड़ भी की गई। मारपीट का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। घटना के दौरान रजनीश द्विवेदी का सोने का चेन-लॉकेट गिरने की भी जानकारी सामने आई है। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। पीड़ित पक्ष ने मुजगहन थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से राहुल जैन ने भी पुलिस में शिकायत दी है। उनका आरोप है कि उनके माता-पिता के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई, साथ ही उन्हें धक्का देकर कॉलोनी से बाहर निकाल दिया गया। फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, DGP को कड़ी फटकार

रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB/EOW द्वारा दर्ज मामलों में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने जमानत आदेश जारी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और इसे कानून का ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ बताया। सह-आरोपी पर कार्रवाई नहीं, जांच की पारदर्शिता पर सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा कर रहा है, लेकिन उसके खिलाफ स्थायी वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, आरोपी को खुला छोड़ना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने इस लापरवाही को “Grave Violation of Law” करार देते हुए राज्य के DGP को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है। जुलाई से जेल में थे चैतन्य बघेल चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। ED ने उन्हें पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था, जबकि ACB/EOW ने भ्रष्टाचार मामले में सितंबर में तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से जेल में थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED और ACB के आरोप ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपए के लेनदेन को संभाला।वहीं ACB का दावा है कि उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए की अवैध राशि मिली और पूरे घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। भूपेश बघेल का बयान बेटे को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। आज सत्य की जीत हुई है।” जमानत की खबर के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। बचाव पक्ष की दलील चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने कहा कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जो खुद नॉन-बेलेबल वारंट का आरोपी है और खुलेआम घूम रहा था।उन्होंने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने जांच में पूरा सहयोग किया, बावजूद इसके उन्हें कभी समन नहीं भेजा गया और सीधे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच के अनुसार, भूपेश सरकार के कार्यकाल में शराब सिंडिकेट के जरिए— इस कथित सिंडिकेट में तत्कालीन IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी होने के आसार, पावर कंपनी ने 24% टैरिफ बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

रायपुर।छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया है। इसी के आधार पर कंपनी ने औसतन 24 प्रतिशत तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अगर नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को आंशिक या पूरी तरह से स्वीकार करता है, तो प्रदेश के घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। दिसंबर में दाखिल की गई याचिका नियमों के अनुसार पावर कंपनी को हर साल दिसंबर में आगामी वित्तीय वर्ष के टैरिफ निर्धारण के लिए याचिका दाखिल करनी होती है। इस बार कंपनी ने 31 दिसंबर की समय-सीमा से एक दिन पहले 30 दिसंबर को ही आयोग में अपनी याचिका प्रस्तुत कर दी। याचिका में कंपनी ने 2026-27 के लिए अनुमानित आय, खर्च, संभावित लाभ और पूर्व वर्षों के घाटे का विस्तृत ब्यौरा दिया है। कंपनी का कहना है कि नए सत्र में होने वाले लाभ को पुराने घाटे में समायोजित करने के बाद भी लगभग 6 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी। 24% तक दर बढ़ाने का सुझाव पावर कंपनी ने याचिका के साथ नया टैरिफ प्लान भी जमा किया है, जिसमें बिजली दरों में औसतन 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव शामिल है। अब इस पर राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा गहन समीक्षा की जाएगी। प्रक्रिया के तहत आम उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से दावा-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद जनसुनवाई आयोजित होगी, जिसमें लोग अपनी राय और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग अंतिम टैरिफ का फैसला करेगा। पहले भी किया था घाटे का दावा यह पहला मौका नहीं है जब पावर कंपनी ने बड़े घाटे का हवाला दिया हो। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था। हालांकि, नियामक आयोग ने उस दावे को पूरी तरह स्वीकार न करते हुए घाटा केवल 500 करोड़ रुपये ही माना था। उस समय कंपनी ने 28,397.64 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता बताई थी, लेकिन आयोग ने केवल 25,636.38 करोड़ रुपये को ही मंजूरी दी थी। तब मामूली बढ़ोतरी पर लगी थी मुहर यदि पिछली बार कंपनी का पूरा घाटा मान लिया जाता, तो बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि होती। लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के चलते बिजली दरें दो प्रतिशत से भी कम बढ़ाई गई थीं। अब एक बार फिर सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को कितनी मान्यता देता है। इसी पर तय होगा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली कितनी महंगी पड़ेगी।

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नए साल से पहले रायपुर में सूखे नशे का कारोबार तेज, 100 रुपये में खुलेआम बिक रहा गांजा

नए साल के जश्न से पहले रायपुर में सूखे नशे की मांग तेजी से बढ़ गई है। शहर में बड़ी मात्रा में गांजे की सप्लाई पहुंची है, जिसकी पुष्टि हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई से भी हुई है। पड़ताल में सामने आया है कि राजधानी के कई इलाकों में बिना किसी डर के सूखे नशे की खरीद-फरोख्त जारी है। इस अवैध कारोबार के मुख्य ग्राहक 16 से 28 वर्ष की उम्र के युवा हैं। रायपुर के पॉश इलाकों से लेकर बस्तियों के अंदर तक गांजा आसानी से उपलब्ध है। साइंस कॉलेज क्षेत्र से हटाई गई चौपाटी को एक महीने पहले आमानाका ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट किया गया था, लेकिन यह इलाका अब शहर में सूखे नशे का हॉटस्पॉट बन चुका है। यहां 100 रुपये की छोटी-छोटी पुड़ियों में गांजा बेचा जा रहा है। महिलाओं के जरिए बिक्री, पीछे से अपराधियों का कंट्रोल सूखे नशे के इस नेटवर्क में सामने महिलाओं को विक्रेता के तौर पर खड़ा किया गया है, जबकि पीछे से पूरा खेल दूसरे लोग नियंत्रित कर रहे हैं। ये लोग खुलकर सामने नहीं आते, लेकिन हाथों में रॉड और पाइप लेकर आसपास मंडराते रहते हैं। कुछ के कपड़ों के भीतर धारदार हथियार भी छिपे रहते हैं। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में ये तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। आमानाका ओवरब्रिज के नीचे शाम 7 बजे का नजारा आमानाका ओवरब्रिज के पास शाम के वक्त माहौल संदिग्ध नजर आया। यहां एक युवक ने चेतावनी दी कि सीधे पहुंचने पर पहचान हो सकती है और हमला भी हो सकता है। उसने सलाह दी कि महंगी चीजें वहीं छोड़ दी जाएं और पहचान छिपाकर ही अंदर जाया जाए। सरस्वती नगर थाना से महज 500 मीटर की दूरी पर नई चौपाटी इलाके में खानाबदोशों का डेरा है। यहां कुछ लोग हाथों में पाइप और रॉड लेकर लगातार गश्त करते दिखे। शुरुआत में यह समझ पाना मुश्किल था कि नशा कौन बेच रहा है, लेकिन कुछ देर इंतजार करने पर पूरी तस्वीर साफ हो गई। स्कूटी और कारों से पहुंचे ग्राहक, मिनटों में सौदा स्कूटी से पहुंचे एक युवक-युवती ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत की और तुरंत सामान लेकर रवाना हो गए। इसके बाद कारों से आए लोग भी तेजी से पहुंचे, महिला से पुड़िया ली और तुरंत निकल गए। इसी दौरान 100 रुपये में गांजे की पुड़िया खरीदी गई, जिसके बाद मौके से हटना पड़ा। कुकरबेड़ा बस्ती में भी सक्रिय है नशे का अड्डा सूत्रों के मुताबिक यह अकेला ठिकाना नहीं है। कुकरबेड़ा बस्ती के भीतर भी इसी तरह गांजा बेचा जा रहा है। रात करीब 8 बजे बस्ती के अंदर आग तापते लोगों का एक समूह दिखा। इशारे के बाद 100 रुपये लिए गए और एक युवती ने पुड़िया थमा दी। एक ओर सख्ती की बैठक, दूसरी ओर खुलेआम कारोबार इसी दौरान सिविल लाइन में IG अमरेश मिश्रा और SSP डॉ. लाल उमेद सिंह जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए। हालांकि जिन दो जगहों पर यह अवैध कारोबार चल रहा है, वहां की जानकारी पुलिस को पहले से होने की बात स्थानीय लोगों का कहना है। करीब छह महीने पहले शिकायत भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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