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खेलो मास्टर्स गेम्स में छत्तीसगढ़ का जलवा: एथलेटिक्स में 82 मेडल, शूटिंग में 2 गोल्ड

Khelo Masters Games के 5वें संस्करण में Chhattisgarh के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। Chandigarh में आयोजित इस प्रतियोगिता में राज्य के एथलीट्स ने एथलेटिक्स में कुल 82 मेडल जीतकर दबदबा कायम किया। इसके अलावा 10 मीटर पिस्टल शूटिंग में 2 स्वर्ण पदक, स्विमिंग में 2 रजत और 1 कांस्य, तथा टेबल टेनिस में 1 रजत पदक हासिल किया गया। टीम स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। फुटबॉल के 40+ वर्ग में टीम उपविजेता रही, जबकि 50+ वर्ग में तीसरा स्थान मिला। वॉलीबॉल में 40+ वर्ग में उपविजेता और 50+ वर्ग में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। महिला वर्ग में ज्योति अग्रवाल, बैंजो गुप्ता, आरती विश्वकर्मा, प्रिया रेड्डी, अन्नपूर्णा साहू, सुजाता, अंजलि और अपर्णा वर्मा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पदक जीते। वहीं पुरुष वर्ग में ब्रह्मानंद वर्मा, किशन कुमार साहू, जी कामेश, नेम सिंह पोर्ते, विनोद, रोशन लाल बंजारे, जयप्रकाश, देवघर ठाकुर, ज्ञान सिंह और भागवत राम नेताम ने राज्य का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता से लौटने के बाद Bhilai के प्रगति भवन में खिलाड़ियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर खेल और प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे और खिलाड़ियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

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प्रॉपर्टी टैक्स पर राहत: अब 30 अप्रैल तक जमा करें बिना जुर्माना, बाद में 17% सरचार्ज

Raipur समेत प्रदेश के नगरीय निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने वालों को बड़ी राहत दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संपत्ति कर भुगतान की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दी है, जो पहले 31 मार्च निर्धारित थी। विभाग के आदेश के अनुसार सभी नगर निगम और नगर पालिकाओं को 30 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। यह फैसला राजस्व वसूली के लक्ष्य को पूरा करने और प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अब करदाता 30 अप्रैल तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कर सकते हैं। इसके बाद भुगतान करने पर 17 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा। डेडलाइन से पहले टैक्स जमा करने के लिए शहर में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। 30 मार्च को सुबह से रात तक हजारों लोगों ने टैक्स जमा किया और एक ही दिन में करीब 9.58 करोड़ रुपए की वसूली हुई। नगर निगम के सभी जोन कार्यालयों में दिनभर भीड़ बनी रही। राजस्व विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम भी किए। वहीं, निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बकाया टैक्स नहीं चुकाने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत दुकानों और व्यावसायिक परिसरों को सील किया जा रहा है, जबकि घरों के नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा 31 मार्च को Mahavir Jayanti के सरकारी अवकाश के बावजूद नगर निगम के राजस्व कार्यालय खुले रखे गए, ताकि लोग अंतिम समय तक अपना टैक्स जमा कर सकें।

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रायपुर में बड़ा एक्शन: शराब-जुआ सिंडिकेट चलाने वाला आरोपी कोर्ट के बाहर गिरफ्तार

Raipur के गंज इलाके में अवैध शराब तस्करी और जुआ संचालन से जुड़े एक बड़े आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी दीपक मुदलियार को उस वक्त पकड़ा गया, जब वह गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की कोशिश कर रहा था। क्राइम ब्रांच और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी कि आरोपी गुपचुप तरीके से कोर्ट में सरेंडर करने की योजना बना रहा है। इसके बाद एसीपी कोतवाली के नेतृत्व में टीम ने कोर्ट परिसर के आसपास सादे कपड़ों में घेराबंदी की और मौके पर पहुंचते ही आरोपी को दबोच लिया। पुलिस के अनुसार दीपक मुदलियार गंज क्षेत्र में अवैध शराब और जुआ का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं और वह लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। बताया जा रहा है कि इलाके में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए आरोपी धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का भी सहारा लेता था। साथ ही उसे कथित तौर पर कुछ स्थानीय राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त था, जिसके चलते उसका अवैध कारोबार लंबे समय तक चलता रहा। इस मामले की शुरुआत गंज मंडी के एक व्यापारी की शिकायत से हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पहले चरण की कार्रवाई में आरोपी के कुछ साथियों को गिरफ्तार किया गया और उसके ठिकानों से बड़ी मात्रा में अवैध शराब भी बरामद की गई थी, लेकिन मुख्य आरोपी फरार हो गया था। लगातार दबिश और तलाश के बाद आखिरकार पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट के निर्देश पर आरोपी को जेल भेज दिया गया है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

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रायपुर नशामुक्ति केंद्र में युवक से बर्बर मारपीट: पाइप से पीटा, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

Raipur के पंडरी मोवा इलाके में स्थित एक नशामुक्ति केंद्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। ‘साहस नशा मुक्ति केंद्र’ में एक आदिवासी युवक के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, ओडिशा के उमरकोट निवासी अंकुर मांझी को उसके परिजनों ने नशे की लत छुड़ाने के लिए साल 2025 में इस केंद्र में भर्ती कराया था। आरोप है कि इसी दौरान केंद्र संचालिका के बेटे अनिकेश शर्मा ने युवक को पाइप से पीटा और उसके साथ गाली-गलौज की। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक की पीठ और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए और चमड़ी तक उधड़ गई। घटना के बाद उसकी मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई। फिलहाल उसका इलाज Visakhapatnam के एक अस्पताल में जारी है। परिजनों का कहना है कि जब उनका बेटा केंद्र में था, तब उन्हें उससे मिलने नहीं दिया जाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां जातिसूचक टिप्पणियां की जाती थीं और इलाज के नाम पर प्रताड़ना दी जाती थी। पीड़ित के घर लौटने के बाद जब उसकी हालत सामने आई, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी अनिकेश शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और नशामुक्ति केंद्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इस मामले में पंडरी थाना प्रभारी Swaraj Tripathi ने बताया कि आरोपी खुद भी नशे की लत से जूझ रहा है और फिलहाल टाटीबंध स्थित एक नशामुक्ति केंद्र में उसका इलाज चल रहा है। उसकी मेडिकल रिपोर्ट मंगाई गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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फाफाडीह के इलेक्ट्रॉनिक गोदाम में भीषण आग, देर रात काबू; कलेक्टर ने लिया मौके का जायजा

Raipur के फाफाडीह इलाके में गली नंबर 4 स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक सामान के गोदाम में सोमवार देर शाम अचानक आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और जिला प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद देर रात आग पर नियंत्रण पा लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, हालांकि आग लगने के कारण गोदाम में रखे सामान को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर Dr. Gaurav Singh रात करीब 12 बजे मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली तथा आग पर पूरी तरह नियंत्रण के लिए जरूरी निर्देश दिए। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और सतर्कता बनाए रखी जाए। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन और एसडीएम नंदकुमार चौबे सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

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सरकारी शिक्षकों पर नई शर्त: टीईटी पास नहीं किया तो खतरे में नौकरी, 80 हजार पर असर

Chhattisgarh के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू हुआ है, जिसके चलते अब टीईटी क्वालिफाई किए बिना शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल लगभग 1.93 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 42 प्रतिशत यानी लगभग 80 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। इन शिक्षकों को अब परीक्षा पास करनी होगी, तभी उनकी सेवा जारी रह सकेगी। इस फैसले से राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हुए हैं। खासतौर पर कोंडागांव, महासमुंद, बलौदाबाजार, सरगुजा, रायगढ़ और सूरजपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो टीईटी क्वालिफाई नहीं हैं। इस बीच शिक्षक संगठनों ने लंबे समय से मांग की है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए। उनका कहना है कि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनकी योग्यता पहले ही सिद्ध हो चुकी है। हाल ही में फरवरी में Chhattisgarh Professional Examination Board द्वारा आयोजित सीजी टीईटी परीक्षा में कई शिक्षक शामिल हुए थे, लेकिन बहुत कम ही सफल हो पाए। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा का स्तर काफी कठिन था और लंबे समय बाद दोबारा परीक्षा देना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया है कि या तो टीईटी से छूट दी जाए या फिर विभागीय परीक्षा आयोजित कर राहत दी जाए। इस मामले में फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्देश जारी नहीं हुआ है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे किसी शिक्षक को नुकसान न हो।

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नक्सलवाद पर निर्णायक जीत: 72 हजार जवानों के ऑपरेशन से ढहा लाल आतंक, सैकड़ों ढेर और हजारों ने किया सरेंडर

करीब पांच दशकों तक देश के लिए चुनौती बने नक्सलवाद पर अब निर्णायक जीत का दावा किया जा रहा है। यह सफलता सुरक्षा बलों के साहस, रणनीति और लगातार चलाए गए अभियानों का परिणाम मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 535 नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि 2898 ने आत्मसमर्पण किया है और महज 23 सक्रिय नक्सली ही शेष बताए जा रहे हैं। नक्सलवाद की शुरुआत साल 1968 में हुई, जब आंध्रप्रदेश के रास्ते यह अविभाजित मध्यप्रदेश के बस्तर क्षेत्र में पहुंचा। शुरुआत में यह एक विचारधारा तक सीमित था, लेकिन समय के साथ संगठन ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई, विस्फोटक बनाने के तरीके सिखाए गए और ‘जनताना सरकार’ के नाम पर समानांतर व्यवस्था खड़ी की गई। 1990 के दशक में यह समस्या सरगुजा तक फैल गई और 2010 तक अपने चरम पर पहुंच गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई शुरू की और 2015 में सरगुजा को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया। हालांकि बस्तर क्षेत्र अब भी चुनौती बना रहा, क्योंकि अन्य इलाकों से भागे नक्सली यहां आकर छिप गए थे। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और इंद्रावती नदी जैसे भौगोलिक कारक नक्सलियों के लिए सुरक्षा कवच बने हुए थे। साथ ही तेलंगाना, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और झारखंड की सीमाओं से सटे होने के कारण वे आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग जाते थे। साल 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के निर्देशन में केंद्र और राज्यों ने संयुक्त रणनीति के तहत बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। करीब 72 हजार सुरक्षाबल के जवानों ने डेढ़ साल तक लगातार ऑपरेशन चलाया। तकनीकी सहायता के लिए ISRO समेत कई एजेंसियों की मदद ली गई। इस अभियान में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया। 21 मई 2025 को महासचिव बसवराजू के मारे जाने को एक अहम मोड़ माना गया, जिसके बाद संगठन में तेजी से टूटन शुरू हुई। इसके बाद 18 नवंबर 2025 को हिड़मा की मौत ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण होने लगे। केंद्र सरकार ने पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। अब तक की स्थिति के अनुसार छत्तीसगढ़ लगभग पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुका है। हालांकि तेलंगाना और झारखंड में कुछ बड़े नक्सली नेता अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक राज्य में बचे हुए नक्सली अब गांवों में छिपे हुए हैं और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं। नक्सलवाद के दौर में कई दर्दनाक घटनाएं भी सामने आईं। कांकेर जिले के एक गांव में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने वाले युवक मनेश नुरेटी की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इस घटना ने उस दौर के भय और अत्याचार की तस्वीर को उजागर किया, जब आम नागरिकों को देशभक्ति दिखाने की भी कीमत चुकानी पड़ती थी। आज सुरक्षा बलों की इस सफलता को लोकतंत्र की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसमें जवानों के बलिदान और निरंतर प्रयासों ने अहम भूमिका निभाई है।

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रायपुर निगम बजट 2026-27: इलेक्ट्रॉनिक मार्केट से वुमन हॉस्टल तक बड़ी घोषणाएं, हंगामे के बीच पेश हुआ बजट

Raipur नगर निगम में महापौर Meenal Choubey ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2130 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। यह बजट पिछले साल की तुलना में 601 करोड़ अधिक है, लेकिन इसके बावजूद 206 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान जताया गया है, जिससे वित्तीय संतुलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बजट में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों की कई नई घोषणाएं की गई हैं। शंकरनगर और डूमरतराई में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट विकसित किए जाएंगे, जबकि भाठागांव में पार्किंग सुविधा तैयार होगी। सड्डू क्षेत्र में करीब 38.93 करोड़ की लागत से पानी की टंकी और फिल्टर प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही पंडरी-सिद्धार्थ चौक के पास वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान करते हुए स्वरोजगार, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और जोन कार्यालयों में सेनेटरी नैपकिन की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा 5 करोड़ रुपए से शांति गृह और 48 करोड़ रुपए से वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने की योजना शामिल है। शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सड़क चौड़ीकरण, नाला-नाली निर्माण, जलापूर्ति व्यवस्था और रोबोटिक सफाई पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। हर जोन में दो नए उद्यान विकसित करने, खेल परिसर निर्माण और अखाड़ों के जीर्णोद्धार की योजना भी शामिल है। साथ ही खारुन महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा मंदिरों से फूल संग्रह के लिए वाहन, पे-एंड-यूज शौचालय, कारी तालाब में पार्किंग और वेंडिंग जोन, तथा शहर में 15 नए वेंडिंग जोन विकसित करने की घोषणा की गई है। बजट पेश होने के दौरान निगम सभाकक्ष में राजनीतिक माहौल भी गरमाया रहा। सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच करीब आधे घंटे तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने पिछले बजट की घोषणाओं पर चर्चा की मांग की और सरकार को अधूरे वादों पर घेरा। महापौर ने अपने करीब दो घंटे के भाषण में पिछले कार्यों का विवरण देते हुए नई योजनाओं की जरूरत पर जोर दिया। वहीं विपक्ष ने इस बजट को “जुमलों का पुलिंदा” बताते हुए आरोप लगाया कि पुरानी घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं और नए वादे सिर्फ कागजी हैं। खास बात यह रही कि कई योजनाएं, जैसे वर्किंग वुमन हॉस्टल, लाइब्रेरी, तालाब विकास और रिवर फ्रंट, पहले भी बजट में शामिल थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी प्रगति सीमित रही। इसी वजह से इन्हें इस बार फिर से बजट में शामिल किया गया है।

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नक्सलवाद पर संसद में टकराव: अमित शाह के आरोपों पर भूपेश बघेल का पलटवार

लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने दावा किया कि देश अब लगभग नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है और 31 मार्च 2026 तक तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। उन्होंने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने नक्सलियों को संरक्षण दिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel का नाम लेते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो वह इसके प्रमाण भी पेश कर सकते हैं। शाह के इन आरोपों पर भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बयान को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार के पास कोई सबूत था, तो उसे पहले ही सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और उनकी सरकार ने भी इस दिशा में लगातार कार्रवाई की थी। गृह मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सल प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है और वहां तेजी से विकास कार्य किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गांवों में स्कूल, राशन दुकानें, स्वास्थ्य केंद्र और जरूरी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं, जिससे लोगों का जीवन बेहतर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों तक कांग्रेस की सरकार रहने के बावजूद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh ने भी माओवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती माना था। शाह ने नक्सलियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों Bhagat Singh और Birsa Munda से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तुलना गलत है क्योंकि स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, जबकि नक्सली संविधान के खिलाफ हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं और 4,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास योजना को अपनाया है। उनके अनुसार अब देश में केवल दो जिले ही नक्सल प्रभावित बचे हैं और हिंसा की घटनाओं में काफी कमी आई है। वहीं भूपेश बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान भी नक्सल विरोधी अभियान लगातार चलाए गए और दूर-दराज के इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिससे आज की कार्रवाई संभव हो पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने नक्सल हिंसा में अपने नेताओं को खोया है, इसलिए इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ में महंगा हुआ सफर, 1 अप्रैल से बढ़े टोल टैक्स

National Highways Authority of India ने छत्तीसगढ़ में नेशनल हाईवे पर टोल दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी, जिसके बाद हर टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों को पहले के मुकाबले अधिक शुल्क देना होगा। जानकारी के अनुसार, बिलासपुर से रायपुर, कोरबा, अंबिकापुर और रायगढ़ जैसे प्रमुख मार्गों पर सभी टोल प्लाजा में न्यूनतम 5 रुपए की वृद्धि की गई है। वहीं अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए यह बढ़ोतरी 5 से 20 रुपए तक पहुंच सकती है। सालाना पास धारकों पर भी इसका असर पड़ेगा। पहले जो वार्षिक पास 3000 रुपए में बनता था, वह अब 3075 रुपए में मिलेगा। हालांकि स्थानीय पासधारकों को राहत देते हुए पुराने दर ही लागू रहेंगे। बिलासपुर जिले के भोजपुरी, मुढ़ीपार, पाराघाट और बगदेवा टोल प्लाजा से रोजाना गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को इस बढ़ोतरी का सीधा असर झेलना पड़ेगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वालों का खर्च बढ़ेगा। यह संशोधन वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया के तहत किया गया है, जिसमें टोल दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय होती हैं। सड़क की लंबाई और उपलब्ध सुविधाओं जैसे फ्लाईओवर और अंडरपास को भी दर निर्धारण में शामिल किया जाता है। नए नियमों के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर FASTag के जरिए ही भुगतान अनिवार्य रहेगा। बिना FASTag वाले वाहनों को दोगुना शुल्क देना होगा।

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