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बिरनपुर हिंसा का ट्रायल शुरू: CBI चार्जशीट में पुलिस पर पत्थरबाजी और भुनेश्वर साहू पर हमला का खुलासा

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर हिंसा मामले में करीब दो साल बाद आज से ट्रायल की शुरुआत हो रही है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 8, 9 और 10 अक्टूबर को गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस केस में मृतक भुनेश्वर साहू के पिता और भाजपा विधायक ईश्वर साहू समेत कुल 23 गवाहों को पेश किया जाएगा। CBI ने नवंबर 2024 में चार्जशीट पेश की थी और इसमें किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है। भुनेश्वर साहू पर हमला और पुलिस पर पथरावCBI की जांच में सामने आया कि भीड़ ने भुनेश्वर साहू पर जानलेवा हमला किया और पुलिस अफसरों पर भी पत्थरबाजी की। चार्जशीट के अनुसार, थाना साजा के सब-इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर मौके पर पहुंचे और भुनेश्वर को छुड़ाने की कोशिश की। तभी भीड़ में से आवाज आई, “मुख्तार, अकबर, जनाब, जलील-पुलिस को पत्थर मारो।” इस दौरान अफसरों पर भी पत्थर फेंका गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अब्दास मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने पत्थर, ईंट और चाकू से हमला किया। भीड़ ने भुनेश्वर को पकड़कर मस्जिद के पास की गली में ले जाकर बेरहमी से पीटा और पत्थर-ईंट से वार किया। गंभीर स्थिति में उसके माता-पिता ने उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर साजा पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया। घटना की शुरुआतCBI के अनुसार, 8 अप्रैल 2023 को बच्चों के बीच साइकिल टकराने के विवाद ने बड़ी घटना को जन्म दिया। स्कूल से लौटते समय चंचल साहू और सलीम खान के बीच झगड़ा हुआ। इसके बाद मारपीट और बोतल फेंकने के दौरान कुलेश्वर साहू घायल हो गया। दोपहर में पंचायत बुलाई गई, जिसमें मुस्लिम समुदाय की भीड़ ने ईंट-पत्थर और हथियारों से हमला किया। अफरा-तफरी में कई लोग घायल हुए और भुनेश्वर को मस्जिद की ओर घसीटा गया। आरोपी और गिरफ्तारीप्रारंभिक जांच में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। बाद में CBI ने 6 और नाम जोड़े। अब कुल 18 आरोपी हैं। नए आरोपी पुलिस पर पथराव करने के दोषी हैं। हिंसा के बाद धारा 144 लागू कर दी गई थी। दो दिन बाद बिरनपुर गांव में रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की लाश मिली, जिसके बाद दोबारा तनाव बढ़ा। 8 लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। राजनीतिक पक्ष से निष्कर्षबचाव पक्ष के वकील एस के फरहान ने बताया कि CBI और पुलिस की जांच में पाया गया कि बच्चों के झगड़े के बाद हिंसा भड़क गई थी। चार्जशीट में किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया।

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बीजापुर की 11 साल की शांभवी का दिल ठीक हुआ, पूरे गांव, पुलिस और मंत्री ने मिलकर कराया मुफ्त इलाज

बस्तर के बीजापुर जिले के छोटे गांव वरदल्ली की 11 साल की बच्ची शांभवी के दिल में गंभीर समस्या पाई गई – उसके दिल में छेद था और वॉल्व पूरी तरह से खराब हो चुका था। पिता विक्कू की छोटी-सी खेती से घर चलाना मुश्किल था और महीने का आय मात्र 2,500 रुपए था। मां विजयलक्ष्मी गृहिणी हैं। पिछले साल शांभवी को अचानक सीने में दर्द शुरू हुआ और खेल-कूद भी नहीं कर पा रही थी। परिवार ने उसे निजी अस्पताल में दिखाया, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसके दिल में छेद है और इलाज रायपुर में ही संभव है। रायपुर लाने का खर्च 20-25 लाख रुपए बताया गया। गांववालों ने दिखाई इंसानियतछोटी-छोटी रकम जुटाकर गांव वालों ने पिता विक्कू को 10 हजार रुपए दिए और रायपुर रवाना होने में मदद की। रायपुर पहुंचने के बाद एम्स और सत्यसाई अस्पताल में मदद नहीं मिली। कई निजी अस्पतालों ने भी इलाज का खर्च बताया, जो विक्कू जैसे गरीब परिवार के बस में नहीं था। लॉज संचालक और पुलिस की मददथक-हारकर परिवार जयस्तंभ चौके के पास एक लॉज में रुका। लॉज संचालक ने बच्ची की कहानी सुनी और उन्हें कमरे की सुविधा मुफ्त दी। वहीं कुछ पुलिस अधिकारी वहां आए और बच्ची की स्थिति देखी। अगले दिन उन्हीं अधिकारियों ने शांभवी को स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मिलवाया। मंत्री और पुलिस ने मिलकर कराया निजी अस्पताल में इलाजमंत्री के निर्देश पर बच्ची का इलाज पहले सरकारी अस्पताल में जांच के लिए हुआ। लेकिन बेहतर इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल में एडमिट करवाया गया। इस दौरान पुलिस अफसर लगातार रिपोर्ट लेते रहे, बच्ची की जरूरत पर अपना ब्लड भी डोनेट किया। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थलगभग 20 दिन के इलाज के बाद शांभवी अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और कुछ ही दिनों में डिस्चार्ज हो जाएंगी। गांववालों, पुलिस और मंत्री की मदद के चलते यह गरीब परिवार के लिए राहत और खुशी का पल बन गया।

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एम्स रायपुर में मरीजों से वसूला जा रहा पार्किंग शुल्क, ठेकेदार के गुर्गों से बढ़ा विवाद का खतरा

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया गया एम्स रायपुर अब मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र बन गया है। अस्पताल में प्रवेश करने से पहले अब हर मरीज को वाहन पार्किंग शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है। बाइक वालों से ₹10 और ऑटो या कार से आने वालों से ₹30 वसूले जा रहे हैं। 12 घंटे से अधिक रुकने पर यह शुल्क दोगुना हो जाता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि पिछले 11 सालों में कभी भी पार्किंग शुल्क नहीं लिया गया था। अब अचानक से शुल्क लागू होने से आर्थिक तंगी झेल रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। मरीजों और पार्किंग कर्मचारियों के बीच लगातार बहस की स्थिति बन रही है। चीना पांडे के गिरोह के हाथों में पार्किंग ठेकासबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पार्किंग ठेका कोरबा के बदमाश चीना पांडे और उसके साथियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। उस पर हत्या, डकैती, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि उस पर जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। अब ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में एम्स जैसे संवेदनशील स्थान की पार्किंग व्यवस्था आने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पहली बार पार्किंग शुल्क का ठेकाएम्स रायपुर में यह पहली बार है जब पार्किंग शुल्क वसूली का ठेका दिया गया है। रोजाना करीब 3,000 मरीज ओपीडी में आते हैं और लगभग इतनी ही गाड़ियां परिसर में प्रवेश करती हैं। प्रवेश द्वार पर बिना शुल्क दिए किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। ठेका कंपनी एसएस मल्टीसर्विसेज एम्स रायपुर के नाम से पूरे परिसर में किराया सूची के बैनर लगाए गए हैं। अन्य अस्पतालों में भी वसूली का चलनडॉ. अंबेडकर अस्पताल में भी लंबे समय से एक ही कंपनी पार्किंग ठेका संभाले हुए है, जहां साइकिल से ₹10 और कार से ₹50 तक वसूले जाते हैं। वहीं डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कोई आधिकारिक पार्किंग ठेका नहीं है, लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ही अनौपचारिक रूप से शुल्क वसूलते हैं। मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंएम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीज अब पहले पार्किंग ठेकेदारों से उलझ रहे हैं, फिर अस्पताल की कतारों में लगते हैं। वहीं ऑटो चालकों ने भी पार्किंग शुल्क के चलते किराया बढ़ा दिया है। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बीमार बाघिन ‘बिजली’ का बेहतर इलाज अब गुजरात में, बिना टिकट पहुंचे वन अफसरों का स्टेशन पर चालान

तीन महीने से बीमार बाघिन ‘बिजली’ को आखिरकार बेहतर इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा भेजा गया है। रायपुर की जंगल सफारी में जन्मी ‘बिजली’ करीब ढाई महीने से यूट्रस और ओरल इंफेक्शन से जूझ रही थी। हाल के दिनों में उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। मंगलवार को उसे हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया। बिजली के साथ वन विभाग और वनतारा के पशु चिकित्सकों की टीम भी मौजूद रही। रेलवे स्टेशन पर अफसरों का चालानजब बिजली को ट्रेन में शिफ्ट किया जा रहा था, उस समय रायपुर रेलवे स्टेशन पर वन विभाग के अफसर बिना प्लेटफार्म टिकट पहुंचे। इसको लेकर रेलवे अधिकारियों से उनकी बहस हो गई। मामला बढ़ने पर रेलवे मजिस्ट्रेट ने चालान काटने के आदेश दिए और वन अमले को जुर्माना भरना पड़ा। अनुमति मिलने में हुई देरीसीटी स्कैन रिपोर्ट में बाघिन के गर्भाशय में संक्रमण (पायोमीट्रा) की पुष्टि के बाद वन विभाग ने उसे वनतारा भेजने का फैसला किया था। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से अनुमति मांगी गई, जो मिलने में 10 दिन लग गए। अनुमति के बाद बिजली को विशेष टीम की निगरानी में रवाना किया गया। जांच में सामने आया संक्रमणशुरुआती जांच में ‘बिजली’ की बीमारी को गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल समस्या माना गया था। बाद में जब अल्ट्रासाउंड और हेमेटोलॉजिकल जांच हुई, तो किडनी और यूट्रस में संक्रमण का पता चला। 26 सितंबर को वनतारा की विशेषज्ञ टीम रायपुर पहुंची और पिछले 10 दिनों से वह लगातार बिजली का इलाज कर रही थी। अब उसके आगे के उपचार के लिए गुजरात भेजा गया है।

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा – लोगों को मिले जीएसटी राहत का पूरा फायदा, पुरानी कीमतों पर सामान बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जीएसटी विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कोई भी वस्तु या उत्पाद पुरानी कीमत पर नहीं बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों में कमी का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचना चाहिए। सभी अधिकारी सुनिश्चित करें कि नई दरों के अनुसार ही वस्तुओं की कीमत तय की जाए। मंगलवार को आयोजित ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की समीक्षा बैठक में मंत्री चौधरी ने राजस्व संग्रह, कर चोरी पर नियंत्रण और विभागीय सुधारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बिना टैक्स चुकाए राज्य के बाहर से माल मंगाकर बेचने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही फर्जी या गैर-पंजीकृत फर्मों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं। उन्होंने कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी निगरानी लागू करने के आदेश भी दिए ताकि अनुशासन और पारदर्शिता बनी रहे। मंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की सफल कर प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर उसे छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। बैठक में वित्त सचिव मुकेश बंसल, राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। चौधरी ने बताया कि 99% से अधिक वस्तुएं अब 5% जीएसटी स्लैब में आ गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। कृषि उपकरण, बीमा पॉलिसी और दवाइयों पर कर घटने से लोगों के खर्च में भारी कमी आई है। उन्होंने निर्देश दिया कि हर उत्पाद पर नई संशोधित कीमत का उल्लेख अनिवार्य हो और ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की दैनिक रिपोर्टिंग की जाए। मंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य के हर नागरिक तक जीएसटी 2.0 सुधारों का लाभ पहुँचे।

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भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंत्रियों के सामने रखी शिकायतें: अफसरों, शिक्षकों और विधायकों पर लगाए आरोप, दो दिन में दर्ज हुईं 300 शिकायतें

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं और सहयोगी संगठनों ने पार्टी के जनसहयोग केंद्र में अफसरों, विधायकों और शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं। कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई अधिकारी ग्राम स्तर पर विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। मंत्रियों ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में यह “जनसहयोग केंद्र” शुरू किया गया है, जहां मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और हल किया जा सके। दो दिन में 300 से ज्यादा शिकायतें बीते दो दिनों में दो मंत्रियों ने मिलकर 300 से अधिक कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनी हैं। बुधवार, 8 अक्टूबर को वन और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप केंद्र में मौजूद रहेंगे और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। कार्यकर्ताओं ने क्या कहा केंद्र पहुंचे कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनका मकसद सिर्फ शिकायत दर्ज कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समस्याओं पर जल्द कार्रवाई हो। कई शिकायतों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लापरवाही और मनमानी के आरोप लगाए गए। भाजपा सूत्रों के अनुसार, शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई मामलों को संबंधित विभागों तक प्राथमिकता के आधार पर भेजा गया है ताकि त्वरित समाधान किया जा सके। शिक्षा, जमीन और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दे भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने ने बताया कि जनसहयोग केंद्र सीएम के निर्देश पर शुरू किया गया है। अब तक प्राप्त शिकायतों में शिक्षा, जमीन विवाद, और भ्रष्टाचार से संबंधित मामले सबसे अधिक हैं। कुछ समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया, जबकि गंभीर मामलों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रियों की जिम्मेदारी तय सहयोग केंद्र में प्रतिदिन एक मंत्री की ड्यूटी लगाई गई है— शिकायतों का पंजीयन दोपहर 1 से 2 बजे तक किया जाता है, जिसके बाद सुनवाई और समाधान प्रक्रिया शुरू होती है।

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प्रतिबंधित कफ सिरप और नशीली दवाओं की तस्करी में 5 आरोपी दोषी साबित: चार को 10-10 साल कैद, एक को 6 साल की सजा

रायपुर। नशीली टैबलेट, कफ सिरप और हेरोइन बेचने के मामलों में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच आरोपियों को सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रतिबंधित कफ सिरप और नशीली टैबलेट बेचने के दोषी चार आरोपियों को 10-10 साल कैद और 1-1 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। वहीं, हेरोइन बेचने वाले एक आरोपी को 6 साल कैद और 60 हजार रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर सभी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह कार्रवाई NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) Act के तहत की गई। मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक केके चंद्राकर ने की। नशीली टैबलेट के साथ दो युवक गिरफ्तार राजेन्द्र नगर पुलिस ने 10 सितंबर 2022 को महावीर नगर के पास सावन पुली (20) और देवनारायण साहू (20) को संदिग्ध हालत में घूमते हुए पकड़ा था। तलाशी में उनके पास से 336 नशीली टैबलेट बरामद हुई थीं, जिन्हें वे बेचने की तैयारी में थे। प्रतिबंधित कफ सिरप बेचते मिले दो आरोपी इसके बाद 3 दिसंबर 2022 को पुलिस ने संतोषी नगर क्षेत्र से मोहम्मद असीम (30) और अनिरुद्ध कामड़े (25) को पकड़ा। जांच में उनके पास से 144 बोतलें प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद हुईं। दोनों इसे अवैध रूप से बेचने की फिराक में थे। हेरोइन बेचते पकड़ा गया एक युवक 24 सितंबर 2023 को कबीर नगर पुलिस ने यदुवंशी चौक के पास निशांत सिंह संधू (24) को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 15.10 ग्राम हेरोइन मिली। पुलिस की विशेष टीम ने उसे गश्त के दौरान पकड़ा। अदालत का फैसला सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर चारों को 2-2 साल और निशांत को 6 महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

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महादेव सट्टा ऐप केस: सुप्रीम कोर्ट से 12 आरोपियों को मिली राहत, ढाई साल बाद जेल से बाहर आएंगे

रायपुर। चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 12 आरोपियों को जमानत दे दी है। ये सभी आरोपी पिछले ढाई साल से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सूदरैश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। जमानत आदेश की कॉपी रायपुर पहुंचने के बाद सभी आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया जाएगा। मामले की जांच वर्तमान में ईडी (Enforcement Directorate) कर रही है। आरोपी और मामला जिन आरोपियों को जमानत दी गई है, उनमें रितेश यादव, भारत ज्योति, विश्वजीत राय, राहुल वकटे, नीतीश दीवान, भीम सिंह यादव, अर्जुन यादव, चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर सहित कुल 12 नाम शामिल हैं। कैसे शुरू हुआ था महादेव ऐप नेटवर्क महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप की शुरुआत 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान हुई थी। इसे यूरोप के कुछ सॉफ्टवेयर डेवलपर्स ने तैयार किया था। कुछ ही महीनों में इसका नेटवर्क तेजी से फैला और पूरे देश में करीब 2000 से अधिक सेंटर बन गए, जिन्हें कमीशन पर स्थानीय लोग संचालित करते थे। 70 से ज्यादा केस, 300 गिरफ्तारियां छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप से जुड़े 70 से अधिक मामले दर्ज हैं। अब तक 300 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने करीब 3 हजार बैंक अकाउंट्स फ्रीज किए हैं, जिनमें करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ था। पहली FIR 31 मार्च 2022 को मोहन नगर थाना (रायपुर) में दर्ज की गई थी। शुरुआती जांच में दुर्ग के आलोक सिंह, खड्ग सिंह और राम प्रवेश साहू को गिरफ्तार किया गया। उनके मोबाइल और ट्रांजेक्शन डेटा से महादेव सट्टा नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद सुपेला और तेलीबांधा थानों में भी कई मामले दर्ज हुए। दुबई से चलता था पूरा नेटवर्क पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि भिलाई में जूस सेंटर चलाने वाला सौरभ चंद्राकर इस ऐप का मुख्य संचालक है। वह अपने सहयोगी रवि उप्पल और कारोबारी अनिल अग्रवाल के साथ दुबई से ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित कर रहा था। जांच में कई सराफा, कपड़ा और सरिया कारोबारियों का पैसा इस नेटवर्क में निवेशित पाया गया।

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गौ सेवा आयोग में नई समितियाँ गठित: अब तस्करों और गौशालाओं पर सख्त निगरानी, तीन साल का कार्यकाल तय

छत्तीसगढ़ सरकार ने गौ सेवा आयोग नियम 2005 में संशोधन करते हुए जिला और ब्लॉक स्तर पर नई समितियों का गठन किया है। यह राज्य बनने के बाद पहली बार है जब इतनी व्यापक स्तर पर गौशालाओं की निगरानी और निरीक्षण के लिए समितियाँ बनाई गई हैं। इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्य तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किए गए हैं। कुल 934 पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। रायपुर में लोमस कुमार यदु, दुर्ग में विजय अग्रवाल और सूरजपुर में विजय शर्मा को अध्यक्ष बनाया गया है। समितियों की भूमिका इन समितियों का मुख्य कार्य गौशालाओं के पंजीकरण, निरीक्षण, पर्यवेक्षण, अनुदान वितरण और पशुधन की देखरेख से जुड़ा होगा। साथ ही, जैविक खेती, पंचगव्य उत्पाद निर्माण और गौशाला प्रबंधन के प्रशिक्षण को भी बढ़ावा देना इनके दायित्वों में शामिल है। नियमित बैठकें अनिवार्य सरकार के आदेश के अनुसार, जिला स्तरीय समिति हर दो माह में और ब्लॉक स्तरीय समिति हर महीने बैठक करेगी। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष द्वारा की जाएगी। अनुपस्थिति की स्थिति में कोई अन्य सदस्य अध्यक्ष की भूमिका निभा सकता है। नई गौशालाओं की स्थापना में मदद जिला और ब्लॉक समितियाँ राज्य के गौ सेवा आयोग को नियमित रूप से रिपोर्ट भेजेंगी, जिसमें गौशालाओं की स्थिति, पोषण, अधोसंरचना और पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी शामिल होगी। नई गौशालाओं के पंजीकरण की अनुशंसा विकासखंड समिति करेगी और मंजूरी जिला समिति से मिलेगी। इन समितियों की मदद से राज्य में नई गौशालाओं की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा और पुराने गौशालाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित रूप से किया जा सकेगा। जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर सरकार का उद्देश्य है कि गोसेवा से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। राज्य शासन को यह अधिकार रहेगा कि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समिति की नियुक्ति को रद्द या परिवर्तित किया जा सके। नई व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि छत्तीसगढ़ में गौसंरक्षण, पशुपालन और जैविक कृषि के क्षेत्र में गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

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मंत्रियों के बंगलों की ‘फुलवारी’ पर 6 करोड़ का अतिरिक्त बोझ: पुराने बंगले नहीं छोड़े, कर्मचारियों की संख्या 200 से बढ़कर 350

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में मंत्रियों के बंगलों की सजावट और बागवानी ने उद्यानिकी विभाग की जेब ढीली कर दी है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नए-पुराने दोनों बंगलों की सुंदरता बनाए रखने के लिए पहले जहां 200 कर्मचारी लगाए गए थे, अब यह संख्या बढ़कर 350 हो गई है। विभाग के अनुसार, कई मंत्री नए बंगलों में शिफ्ट तो हो गए हैं, लेकिन पुराने बंगलों को अभी खाली नहीं किया है। दोनों जगह बागवानी के काम के कारण विभाग पर करीब 6 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आ गया है। अब विभाग के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं बचे हैं। फुलवारी सजाने में खजाना खाली मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और सभी मंत्रियों के बंगलों में सुंदरता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के फूल-पौधे लगाए गए हैं। इसके रखरखाव के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। नवा रायपुर में नए बंगलों के साथ-साथ रायपुर शहर में पुराने बंगलों में भी फुलवारी बनाए रखी जा रही है। पहले इस काम में 200 कर्मचारी लगे थे, लेकिन अब उनकी संख्या 350 तक पहुंच चुकी है। इसी कारण मजदूरी भुगतान का बोझ बढ़ गया है। विभाग ने शासन से 6 करोड़ रुपए अतिरिक्त बजट की मांग करते हुए पत्र भेजा है और कहा है कि अक्टूबर के बाद सैलरी देने के लिए धन नहीं बचा है। अरुण साव ने छोड़ा पुराना बंगला, बाकी मंत्री अब तक काबिज राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कुल 14 मंत्री हैं। इनमें से डिप्टी सीएम अरुण साव ने अपना पुराना बंगला खाली कर विभाग को हैंडओवर कर दिया है। जबकि बाकी मंत्री—मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, उद्योग मंत्री, खाद्य मंत्री और वन मंत्री—नवा रायपुर में रहने लगे हैं, पर पुराने बंगलों को अभी तक खाली नहीं किया है।मंत्री ओपी चौधरी अब भी पुराने बंगले में ही रह रहे हैं और उन्होंने नए बंगले में कोई काम शुरू नहीं कराया है। हर साल 3 करोड़ बागवानी पर उद्यानिकी विभाग का कहना है कि सिर्फ रायपुर के मंत्रियों के बंगलों में बागवानी के लिए सालाना 3 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। हर मौसम में नई फुलवारी लगाई जाती है—अब बारिश खत्म होने के बाद सर्दियों के फूल-पौधे लगाने की तैयारी शुरू है। 7 महीने से बजट अटका विभाग ने अप्रैल 2025 में नवा रायपुर के बंगलों के लिए 6 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन 7 महीने बीत जाने के बावजूद मंजूरी नहीं मिली है।उद्यानिकी विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर मिथिलेश देवांगन ने बताया कि “पुराने और नए दोनों बंगलों की देखभाल करनी पड़ रही है, जिससे खर्च काफी बढ़ गया है। इसके लिए शासन से अतिरिक्त बजट मांगा गया है, पर अभी तक स्वीकृति नहीं आई है।”

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