February 2026

सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर का धरना: 11 लाख की मंजूरी न मिलने पर निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन विरोध

रायपुर नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। शहीद हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड से कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर ने मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए राशि स्वीकृत न होने पर नगर निगम मुख्यालय में गांधी जी की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पार्षद शेख मुशीर का कहना है कि वे पिछले 11 महीनों से अपने वार्ड की जर्जर सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। धरने पर बैठे पार्षद ने साफ ऐलान किया है कि जब तक मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए मात्र 11 लाख रुपए की राशि स्वीकृत नहीं की जाती, तब तक वे रोजाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते रहेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि वार्ड में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हुआ है। धरने को समर्थन देने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी भी निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि 11 लाख रुपए जैसी छोटी राशि के लिए एक जनप्रतिनिधि को 11 महीनों तक भटकना पड़ रहा है, तो इससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि जब छोटे विकास कार्यों की यह स्थिति है, तो शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स का हाल समझा जा सकता है।

सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर का धरना: 11 लाख की मंजूरी न मिलने पर निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन विरोध Read Post »

Chhattisgarh, Raipur

चलती ट्रेन में गूंजी किलकारी: वैनगंगा एक्सप्रेस में गर्भवती महिला ने दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म, रायपुर में सुरक्षित इलाज

हैदराबाद से चांपा जा रही ट्रेन संख्या 12251 वैनगंगा एक्सप्रेस में रविवार को मानवता और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई का सराहनीय उदाहरण देखने को मिला। सफर के दौरान एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई और उसने चलती ट्रेन में ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। समय पर मिली मदद के कारण मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय अंकिता कुमारी अपने पति दिनेश कुमार के साथ हैदराबाद से चांपा की यात्रा कर रही थीं। दोनों स्लीपर कोच S-2 में सवार थे। दुर्ग स्टेशन पार करने के कुछ देर बाद महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। स्थिति को भांपते हुए कोच में मौजूद यात्रियों ने तुरंत ट्रेन के टीटीई ईशांत शर्मा को सूचना दी। टीटीई ने बिना देरी किए रेलवे प्रशासन को घटना की जानकारी दी। इस दौरान ट्रेन में मौजूद महिला यात्रियों ने डॉक्टरों के पहुंचने से पहले ही सुरक्षित प्रसव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ ही समय में रेलवे के विभिन्न विभागों को अलर्ट कर दिया गया, जिसमें रेलवे अस्पताल रायपुर, स्टेशन प्रशासन, यात्री गाड़ी नियंत्रण कक्ष और सुरक्षा विभाग शामिल थे। जैसे ही ट्रेन रायपुर स्टेशन पहुंची, स्टेशन वाणिज्य अधीक्षक एम.एस. राजा अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद थे। रेलवे अस्पताल की डॉक्टर बिजोया और नर्स दीपमाला ने मां और नवजात की प्राथमिक जांच की। महिला के पति की सहमति के बाद दोनों को एम्बुलेंस के जरिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल भेजा गया। मेकाहारा अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि मां और नवजात शिशु दोनों की हालत सामान्य है। रेलवे प्रशासन, मेडिकल टीम और सह-यात्रियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण यह आपात स्थिति बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक संभाली जा सकी। परिवार ने रेलवे स्टाफ और मदद करने वाले सभी यात्रियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

चलती ट्रेन में गूंजी किलकारी: वैनगंगा एक्सप्रेस में गर्भवती महिला ने दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म, रायपुर में सुरक्षित इलाज Read Post »

Bilaspur, Chhattisgarh

33 फीट दूर चल रही बोरिंग बनी हादसे की वजह, मकान की पार्किंग का फर्श धमाके की तरह फटा; VIDEO वायरल

बिलासपुर। शहर के गोकुलधाम इलाके में एक रिहायशी मकान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पार्किंग का फर्श अचानक तेज धमाके के साथ फट गया। जमीन के नीचे से पानी का इतना तेज दबाव निकला कि टाइल्स उखड़ गईं और पानी फव्वारे की तरह बाहर आ गया। पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना के समय मकान मालिक विशाल शर्मा मौके पर मौजूद थे और बाल-बाल बच गए। विशाल शर्मा का कहना है कि यदि वे दो कदम आगे होते, तो उनकी जान जा सकती थी। 33 फीट दूर हो रही थी बोरिंग मकान मालिक के अनुसार, उनके घर से करीब 33 फीट दूर एक खाली प्लॉट में बोरिंग का काम चल रहा था। यह काम बिना किसी अनुमति और भू-तकनीकी (जियोलॉजिकल) सर्वे के कराया जा रहा था। 29 जनवरी को अचानक पार्किंग का फर्श उखड़ने लगा और तेज प्रेशर के साथ पानी बाहर निकल आया। तेज पानी के बहाव से मकान की पार्किंग क्षतिग्रस्त हो गई, छत में दरारें आ गईं और पंखा भी टूट गया। कुछ ही पलों में घर के अंदर पानी भर गया। मदद की जगह धमकी देने का आरोप पीड़ित विशाल शर्मा ने आरोप लगाया है कि बोर खनन करा रहे आरक्षक ध्रुव पांडेय से जब नुकसान की शिकायत की गई, तो मदद करने के बजाय उन्हें धमकाया गया। विशाल शर्मा ने पूरे मामले की जांच और नुकसान की भरपाई की मांग की है। कैसे हुआ हादसा? विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रिलिंग के दौरान जमीन के नीचे मौजूद कन्फाइंड एक्वाइफर में छेद हो गया होगा। उच्च दबाव में भरा भूमिगत जल कमजोर परत या पहले से मौजूद दरारों के जरिए ऊपर की ओर निकल आया।संभावना यह भी जताई जा रही है कि किसी पुरानी या जंग लगी भूमिगत पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा हो, जिससे पानी फव्वारे की तरह बाहर आया। एक्सपर्ट बोले – यह सामान्य तकनीकी प्रक्रिया का परिणाम जियो-हाइड्रोलॉजिस्ट एस.पी. पराते के मुताबिक, बोरिंग के दौरान एयर प्रेशर और बीट से खुदाई की जाती है। इस प्रक्रिया में अगर अंदर इंटर-कनेक्टेड पोर स्पेस या कमजोर जोन बन जाए, तो इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। प्रशासन से कार्रवाई की मांग घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मोहल्लेवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से अवैध बोर खनन पर सख्त निगरानी, नियमों के पालन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

33 फीट दूर चल रही बोरिंग बनी हादसे की वजह, मकान की पार्किंग का फर्श धमाके की तरह फटा; VIDEO वायरल Read Post »

Bilaspur, Chhattisgarh, Crime, Top News

बाजारों में पार्किंग नहीं, सड़क पर गाड़ी खड़ी करना मजबूरी

पंडरी, एमजी रोड, कटोरा तालाब जैसे इलाकों में वाहन खड़े करने पर जुर्माना, लोग परेशान राजधानी रायपुर के प्रमुख बाजार इलाकों में पार्किंग की स्थायी व्यवस्था न होने से आम लोग रोजाना परेशानी झेल रहे हैं। पंडरी, एमजी रोड, कटोरा तालाब, गोलबाजार और सदर बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में लोग खरीदारी या काम से पहुंचते हैं, लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं मिलता। मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जहां ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर जुर्माना वसूल रही है। लोगों का कहना है कि जब बाजार क्षेत्रों में पार्किंग की सुविधा ही नहीं है, तो वाहन कहां खड़े किए जाएं। प्रशासन और यातायात पुलिस को कार्रवाई से पहले वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए। एक दर्जन से ज्यादा बाजार, कहीं भी पार्किंग नहीं शहर में करीब एक दर्जन बड़े बाजार ऐसे हैं, जहां न तो सरकारी और न ही निजी पार्किंग की व्यवस्था मौजूद है। इनमें पंडरी, कोतवाली चौक, सदर बाजार, गोलबाजार, शारदा चौक, फूल चौक, एमजी रोड, गुरुनानक चौक, स्टेशन रोड, तात्यापारा, कटोरा तालाब, लाखेनगर, टिकरापारा और पुरानी बस्ती प्रमुख हैं। इन इलाकों में आने वाले लोग दुकानों के सामने या सड़क पर ही वाहन खड़ा करने को मजबूर हैं। वहीं ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई अक्सर इन्हीं स्थानों पर होती है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। पंडरी बाजार में हालात सबसे खराब पंडरी छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार माना जाता है। यहां रोजाना करीब 25 हजार से ज्यादा लोग आते-जाते हैं। इसके बावजूद पूरे इलाके में एक भी अधिकृत पार्किंग स्थल नहीं है।सड़क के दोनों ओर और बाजार के अंदर खड़े वाहनों के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल वाहनों के लिए रास्ता भी बाधित होता है। नए बाजार बने, व्यवस्था नहीं कटोरा तालाब, लाखेनगर, टिकरापारा और पुरानी बस्ती जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में नए बाजार विकसित हुए हैं और भीड़ भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन इन इलाकों में भी पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। स्टेशन रोड तक पार्किंग का अभाव जयस्तंभ चौक से शारदा चौक, वहां से एमजी रोड, गुरुनानक चौक और आगे स्टेशन रोड तक पूरे कॉरिडोर में कहीं भी सुनियोजित पार्किंग की सुविधा नहीं है। दुकानदारों के पास भी अपने यहां वाहन खड़े कराने की जगह नहीं है। मल्टीलेवल पार्किंग है, लेकिन सिस्टम नहीं जयस्तंभ चौक और जवाहर बाजार में दो बड़ी मल्टीलेवल पार्किंग बनी हुई हैं, जो एक किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। इन पार्किंग में 750 से ज्यादा कार और दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं।हालांकि लोगों का कहना है कि यहां पार्किंग का कोई स्पष्ट सिस्टम नहीं है। कई जगह सीसीटीवी कैमरे खराब हैं और सुरक्षा गार्ड भी नजर नहीं आते, जिससे लोग इनका उपयोग करने से कतराते हैं। निगम का दावा—जल्द मिलेगी राहत नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि शहर में तीन बड़ी मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जा चुकी हैं और लोगों को इनका उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा निगम मुख्यालय और पंडरी क्षेत्र में नई मैकेनाइज्ड पार्किंग का निर्माण कार्य जारी है, जो जल्द पूरा किया जाएगा। इससे पार्किंग की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी। व्यापारी संगठनों ने जताया सहयोग छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि जिन बाजारों में पार्किंग नहीं है, वहां प्रशासन और पुलिस को मिलकर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजधानी के कारोबारी संगठन ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए प्रशासन को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

बाजारों में पार्किंग नहीं, सड़क पर गाड़ी खड़ी करना मजबूरी Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

14 फरवरी से पहले सुधार जरूरी, वरना कट सकता है नाम

एआई जांच में छत्तीसगढ़ की 65 लाख वोटर आईडी में गड़बड़ी, चुनाव आयोग ने भेजे नोटिस छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 64 लाख 95 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में बताया गया है कि उनके नाम, पते, फोटो या पिता के नाम से जुड़े रिकॉर्ड में त्रुटि पाई गई है। यदि 14 फरवरी से पहले सुधार नहीं कराया गया, तो आगामी मतदाता सूची के प्रकाशन में उनका नाम हटाया जा सकता है। यह नोटिस प्रक्रिया 23 दिसंबर से लगातार जारी है। राज्य में कुल करीब 2 करोड़ 12 लाख मतदाता हैं। इस तरह लगभग हर चौथे वोटर के रिकॉर्ड में एआई सिस्टम ने तथाकथित “लॉजिकल एरर” चिन्हित की है। छोटी गलतियां, लेकिन नोटिस जरूरी दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने कई ऐसी मामूली त्रुटियां पकड़ ली हैं, जिनसे मतदाता असमंजस में पड़ गए हैं।उदाहरण के तौर पर— क्या कहता है चुनाव आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी, छत्तीसगढ़ यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया कि इसमें घबराने की जरूरत नहीं है।उन्होंने कहा कि 2003 का पूरा डेटा पहले से केंद्रीय चुनाव आयोग के पास मौजूद था और SIR के दौरान भरे गए फॉर्म भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं। दोनों डेटा के मिलान में सामने आई लॉजिकल एरर के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।मतदाता अगर अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, तो तुरंत सुधार किया जाएगा। अब मतदाता को क्या करना होगा जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें अपने नजदीकी बीएलओ (Booth Level Officer) के पास जाकर दस्तावेज दिखाने होंगे।अगर बीएलओ संतुष्ट नहीं होते हैं, तो AERO या ERO के समक्ष भी अपना पक्ष रखा जा सकता है।प्रदेशभर में इस प्रक्रिया के लिए 2000 से अधिक बीएलओ तैनात किए गए हैं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी एसडीएम स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। जरूरी सवाल–जवाब 14 फरवरी तक दस्तावेज नहीं दिए तो क्या होगा?– ऐसे में नाम आगामी मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा। बाद में फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाया जा सकता है। अगर नोटिस नहीं मिला है, तब भी नाम कट सकता है?– नहीं। जिनको नोटिस नहीं मिला है, उनके रिकॉर्ड में कोई लॉजिकल एरर नहीं पाई गई है। नोटिस मिलने पर कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे?– आयोग ने कुल 13 तरह के मान्य दस्तावेज तय किए हैं, जिनमें से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। अगर वोटर आईडी के अलावा कोई और दस्तावेज नहीं है?– ऐसी स्थिति में सीधे AERO या ERO से संपर्क करना होगा। परिवार का सदस्य बाहर रहता है, तो क्या कोई और जवाब दे सकता है?– हां। परिवार का कोई सदस्य मूल दस्तावेजों के साथ उसकी ओर से नोटिस का जवाब दे सकता है। सबसे ज्यादा नोटिस कहां राज्य में सबसे अधिक नोटिस रायपुर जिले में जारी किए गए हैं, जहां राज्य सरकार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब का जिला आता है।दूसरे स्थान पर बिलासपुर जिला है, जहां 5 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।

14 फरवरी से पहले सुधार जरूरी, वरना कट सकता है नाम Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State, Top News

रायपुर में एक ही रात तीन दुकानों में बड़ी चोरी, 7 लाख से ज्यादा नकदी ले उड़े चोर

मुंह ढककर पहुंचे आरोपी, CCTV फुटेज के सहारे पहचान में जुटी पुलिस राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात चोरों ने एक के बाद एक तीन दुकानों को निशाना बनाते हुए 7 लाख रुपये से अधिक की नकदी चोरी कर ली। चोरों ने दुकानों के ताले और छप्पर तोड़कर भीतर घुसकर गल्लों में रखी रकम पर हाथ साफ किया। घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कपड़े की दुकान से ढाई लाख से ज्यादा की चोरी सिविल लाइन पुलिस के अनुसार, लाभांडी निवासी 70 वर्षीय शिव कुमार वर्मा की पंडरी इलाके में “लब-डब” नाम से कपड़ों की दुकान है। 31 जनवरी की रात करीब 10 बजे वे दुकान बंद कर घर चले गए थे।1 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे जब उन्होंने दुकान खोली, तो गल्ले का दराज खुला मिला और उसमें रखी करीब 2 लाख 75 हजार रुपये की नकदी गायब थी। जांच में सामने आया कि चोर छप्पर की टिन शेड तोड़कर दुकान के भीतर दाखिल हुए थे। फर्नीचर और हार्डवेयर दुकान भी बनी निशाना इसी इलाके में स्थित “नोवा फर्नीचर” दुकान में भी चोरों ने छप्पर तोड़कर प्रवेश किया और गल्ले में रखे करीब 1 लाख 40 हजार रुपये चोरी कर लिए।वहीं तीसरी चोरी पास की “डिजाइनर सेनिटेशन एंड हार्डवेयर” दुकान में हुई, जहां से चोर लगभग 2 लाख 85 हजार रुपये नकद ले उड़े। तीनों दुकानों से कुल मिलाकर करीब 7 लाख रुपये की चोरी होना सामने आया है। CCTV में कैद हुई वारदात पीड़ित कारोबारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी मुंह में कपड़ा बांधकर दुकानों में दाखिल होते हैं, चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं और फिर फरार हो जाते हैं।पुलिस ने दुकानदारों के साथ-साथ दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। पुलिस का दावा—जल्द होगी गिरफ्तारी पुलिस उपायुक्त मयंक गुर्जर ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रायपुर में एक ही रात तीन दुकानों में बड़ी चोरी, 7 लाख से ज्यादा नकदी ले उड़े चोर Read Post »

Chhattisghar, Crime, Raipur, State

छत्तीसगढ़ रोजगार मेले से खाली हाथ लौटे युवा

जॉब लेटर की उम्मीद, सिर्फ रिज्यूम जमा कर वापस गए बेरोजगार रायपुर स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में तीन दिनों तक आयोजित राज्य स्तरीय छत्तीसगढ़ रोजगार मेला बेरोजगार युवाओं के लिए उम्मीद से कम साबित हुआ। सरकार की ओर से दावा किया गया था कि इस मेले के माध्यम से 15 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा, लेकिन वास्तविकता में केवल 1,816 युवाओं को ही नौकरी मिल पाई। रोजगार मेले में पहुंचे युवाओं का आरोप है कि अधिकांश कंपनियों ने सिर्फ उनके रिज्यूम लेकर यह कहकर टाल दिया कि आगे की जानकारी कॉल या ईमेल के जरिए दी जाएगी। बड़ी संख्या में युवा जॉब लेटर मिलने की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने से निराश होकर वापस लौट गए। “रिज्यूम तो पहले से जमा है, फिर बुलाया क्यों?” कई युवाओं ने सवाल उठाया कि उनका रिज्यूम पहले से ही रोजगार पंजीयन कार्यालय में मौजूद है, इसके बावजूद उन्हें दोबारा बुलाया गया। युवाओं का कहना है कि अगर तत्काल नियुक्ति नहीं देनी थी, तो रोजगार मेले का उद्देश्य क्या था। कम वेतन ऑफर पर नाराजगी मेले में पहुंचे युवाओं ने कंपनियों द्वारा अपेक्षा से काफी कम वेतन ऑफर करने पर भी नाराजगी जताई। कुछ मामलों में जहां 18 हजार रुपये की सैलरी की उम्मीद थी, वहां 14 हजार या उससे भी कम का प्रस्ताव दिया गया। “कंपनी बोली—बाद में बताएंगे” बलौदाबाजार से आए शिवनाथ साहू ने बताया कि उन्होंने टेक्नीशियन और सुपरवाइजर पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन कंपनी ने उनका रिज्यूम रखकर आगे की प्रक्रिया की जानकारी बाद में देने की बात कही।देवनारायण वर्मा ने बताया कि उन्होंने सोलर फिटर असिस्टेंट के लिए आवेदन किया, जहां कंपनी ने उनकी शैक्षणिक जानकारी लेकर बाद में संपर्क करने की बात कही। रिज्यूम कलेक्शन बनकर रह गया मेला रायपुर निवासी उमाशंकर साहू ने कहा कि ज्यादातर सेक्टर की कंपनियों ने सिर्फ रिज्यूम जमा किए। कुछ चुनिंदा कंपनियों ने ही जॉब लेटर दिए। वे ब्रांच मैनेजर और बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट पद के लिए पहुंचे थे। जांजगीर-चांपा से आए दिवाकर ने बताया कि रोजगार मेला खत्म होने के बाद भी वे बेरोजगार ही लौट रहे हैं। कंपनी ने ईमेल पर इंटरव्यू की सूचना भेजने की बात कही है। वहीं मुजगहन निवासी दुर्गेश ने कहा कि रिकवरी एजेंट की नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक जॉब कंफर्म नहीं हुई। दूर-दराज से आईं युवतियां भी निराश पाटन की रहने वाली प्रतिभा ने बताया कि उनके पास अनुभव होने के बावजूद उन्हें उम्मीद से कम सैलरी का ऑफर मिला। उन्होंने कहा कि इतना लंबा सफर तय कर आने के बाद भी परिणाम निराशाजनक रहा। नौकरी मिली, लेकिन सैलरी चिंता का विषय कुछ युवाओं को नौकरी तो ऑफर हुई, लेकिन वेतन और पोस्टिंग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।योगेश मानिकपुरी ने बताया कि सोलर प्लेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में उन्हें नौकरी मिली है, लेकिन इसके लिए हरियाणा या ओडिशा जाना पड़ेगा। सैलरी बाहरी खर्चों के हिसाब से कम है, इसलिए परिवार से चर्चा के बाद ही निर्णय लेंगे। रिसाली निवासी कैलाश यादव को डाटा एंट्री ऑपरेटर और टेलीकॉलर की नौकरी मिली, लेकिन उनका कहना है कि वेतन काफी कम है। वहीं जांजगीर के होमराज चौहान को विशाखापट्टनम में नौकरी ऑफर हुई है, जिसे वे फ्रेशर होने के कारण जॉइन करने का मन बना रहे हैं। अनुभव के बावजूद कम वेतन का ऑफर बालोद के बलदाऊ साहू ने बताया कि वे होटल मैनेजर पद के लिए पहुंचे थे। वे फिलहाल बिलासपुर के एक होटल में 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं और उनके पास 8 से 10 साल का अनुभव है, इसके बावजूद उन्हें यहां 14 हजार रुपये तक का ऑफर मिला। बेमेतरा जिले के एक युवक, जो दो बच्चों और पत्नी का खर्च उठा रहे हैं, डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी के लिए पहुंचे थे। उन्हें 12 हजार रुपये की सैलरी ऑफर हुई, जिसे उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिहाज से अपर्याप्त बताया। 64 हजार पंजीयन, सिर्फ 7 हजार पहुंचे जानकारी के मुताबिक राज्य स्तरीय रोजगार मेले के लिए करीब 64 हजार युवाओं ने पंजीयन कराया था, लेकिन केवल 7,009 युवा ही इंटरव्यू के लिए पहुंचे। इनमें पहले दिन 2,090, दूसरे दिन 2,004 और तीसरे दिन 2,915 युवक-युवतियां शामिल हुए।इसका मतलब है कि 56 हजार से ज्यादा पंजीकृत युवाओं ने रोजगार मेले में आने में रुचि नहीं दिखाई। कुछ युवाओं ने बताया कि कंपनियों की ट्रेनिंग शर्तें और दूसरे राज्यों में पोस्टिंग की जानकारी उन्हें मेले में पहुंचने के बाद मिली, जिससे वे पीछे हट गए। रोजगार विभाग का पक्ष रोजगार विभाग के उपसंचालक ए. ओं. लॉरी ने कहा कि रोजगार मेले में कई युवाओं को जॉब लेटर दिए गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में युवाओं का प्राथमिक स्तर पर चयन हुआ है, जिनसे संबंधित कंपनियां आगे संपर्क करेंगी।

छत्तीसगढ़ रोजगार मेले से खाली हाथ लौटे युवा Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर

जगदलपुर में बस्तर पंडुम का करेंगी शुभारंभ, प्रशासनिक तैयारियां तेज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पहुंचेंगी। अपने प्रस्तावित दौरे के दौरान राष्ट्रपति बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होकर इस सांस्कृतिक आयोजन का विधिवत शुभारंभ करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर राज्य प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों को लेकर हाल ही में मुख्य सचिव विकास शील ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर कलेक्टर को जगदलपुर में सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत सुरक्षा घेरा, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा रायपुर कलेक्टर को भी राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षित रहें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State, Top News

तेलीबांधा तालाब पर पार्किंग शुल्क को लेकर निगम का यू-टर्न

महापौर मीनल चौबे बोलीं– फिलहाल नहीं वसूला जाएगा चार्ज, चर्चा के बाद होगा अंतिम फैसला रायपुर के तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) पर पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बाद नगर निगम ने फिलहाल अपने फैसले पर रोक लगा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क पर पार्किंग शुल्क दर्शाने वाले बोर्ड लगाए जाने के बाद आम लोगों में भ्रम और नाराजगी देखी गई थी।इस पूरे मामले पर एक फरवरी की शाम महापौर मीनल चौबे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि, अभी तालाब किनारे किसी भी प्रकार का पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। महापौर ने माना कि सड़क पर खड़े वाहनों से शुल्क वसूलना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के पास तेलीबांधा तालाब के आसपास ऐसी कोई चिन्हित पार्किंग जगह नहीं है, जहां वाहनों को सुव्यवस्थित ढंग से खड़ा कराया जा सके। इसी वजह से अगले करीब 15 दिनों तक तालाब क्षेत्र में आने-जाने वालों और वाहनों की निगरानी की जाएगी। अव्यवस्था पर नियंत्रण यातायात पुलिस के हाथ महापौर मीनल चौबे ने यह भी बताया कि तालाब के दूसरी ओर सड़क किनारे कई बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। वहां आने वाले लोग अपने वाहन तालाब की ओर खड़े कर देते हैं, जिससे अव्यवस्था पैदा होती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर पार्किंग और यातायात व्यवस्था का अधिकार नगर निगम के बजाय यातायात पुलिस के पास है। इस मुद्दे पर निगम, यातायात समिति और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा। पहले भी उठ चुका है पार्किंग का मुद्दा महापौर ने बताया कि वर्ष 2021-22 में भी तेलीबांधा तालाब किनारे पार्किंग व्यवस्था को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उस समय कई विसंगतियों के चलते भाजपा संगठन और पार्षद दल ने ही इसका विरोध किया था।उन्होंने कहा कि वर्तमान निर्णय राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 के संकल्प के आधार पर लिया गया था, जिसमें पार्किंग शुल्क की दरें तय थीं। उसी आधार पर व्यवस्था लागू करने की कोशिश की गई। यातायात समिति से राय नहीं लेने का आरोप इधर, कांग्रेस और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पार्किंग शुल्क तय करने से पहले यातायात समिति से कोई चर्चा नहीं की गई। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे ने कहा कि बिना प्रक्रिया अपनाए सीधे बोर्ड लगाकर शुल्क घोषित करना गलत है और इससे जनता में भ्रम फैला। कांग्रेस का विरोध, निजीकरण का आरोप तेलीबांधा मरीन ड्राइव के कथित व्यवसायीकरण के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को जनविरोधी बताया।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जीई रोड शहर का प्रमुख सार्वजनिक मार्ग है और यहां पार्किंग ठेका देना नियमों के विपरीत है। उनका आरोप है कि वर्षों से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के लिए इस्तेमाल होने वाले इस सार्वजनिक स्थल को व्यावसायिक हितों के हवाले किया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन समेत अन्य नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पार्किंग शुल्क का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जबरन वसूली रोकने की मांग कांग्रेस ने मरीन ड्राइव में कथित जबरन पार्किंग शुल्क वसूली पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, रायपुर सांसद और शहर के चारों विधायकों को पत्र भेजा है।पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब पर्याप्त पार्किंग सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, तो शुल्क वसूली किस आधार पर की जा रही थी।

तेलीबांधा तालाब पर पार्किंग शुल्क को लेकर निगम का यू-टर्न Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी: दीपक बैज

कांग्रेस ने 15 दिन और धान खरीदी बढ़ाने की उठाई मांग छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी अपने तय लक्ष्य से काफी पीछे रह गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार ने 165 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य घोषित किया था, लेकिन वास्तविक खरीदी सिर्फ 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही हो सकी। इस तरह लक्ष्य से करीब 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा गया। दीपक बैज ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में भी इस बार 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम धान खरीदी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले 75 दिन धान खरीदी का आश्वासन दिया था, लेकिन केवल 53 दिनों में ही खरीदी बंद कर दी गई। 31 जनवरी अंतिम तिथि थी, पर शनिवार और रविवार पड़ने के कारण अंतिम दो दिनों में किसानों को धान बेचने का मौका ही नहीं मिला। पंजीयन और टोकन की गड़बड़ी से किसान वंचित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में करीब 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, लेकिन लगभग 2.5 लाख किसान धान नहीं बेच पाए। वहीं एग्रीस्टेक पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण करीब 5 लाख किसानों का पंजीयन ही नहीं हो सका।उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह किसानों से बिना सहमति के जबरन रकबा सरेंडर कराया गया और पहले से जारी टोकन भी रद्द कर दिए गए, जिससे हजारों किसान धान खरीदी से वंचित रह गए। 29 जिलों में घटी खरीदी, फिर भी सरकार का जश्न दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश के 29 जिलों में धान खरीदी में गिरावट दर्ज की गई, इसके बावजूद सरकार ने जश्न मनाया। जिलावार आंकड़े जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएमएस के जरिए बधाई दी गई कि किस जिले में कितनी कमी आई।उन्होंने सवाल उठाया कि जब लक्ष्य ही पूरा नहीं हुआ, तो बधाई किस बात की दी जा रही है। यह साफ दर्शाता है कि सरकार का इरादा शुरू से ही कम धान खरीदने का था। कुछ जिलों में गंभीर हालात कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि केवल नारायणपुर, बलरामपुर और बस्तर जिलों में ही पिछले साल के आसपास खरीदी हुई है। बाकी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।महासमुंद, कवर्धा और कोरबा जैसे जिलों में किसानों की परेशानी बढ़ी है। कुछ स्थानों पर किसानों द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटनाएं सामने आईं, वहीं एक मामले में किसान की मौत भी हुई। 15 दिन अतिरिक्त धान खरीदी की मांग दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार विशेष अभियान चलाकर कम से कम 15 दिनों के लिए धान खरीदी दोबारा शुरू करे, ताकि बचे हुए सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा सके।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ हुए इस अन्याय के लिए सरकार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी: दीपक बैज Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State
Scroll to Top