पोलियो वैक्सीन की 8500 शीशियां टूटीं, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा, लाखों का नुकसान | बस्तर-रायपुर
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सरकारी अस्पतालों में ओरल पोलियो वैक्सीन की बड़ी खेप में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। सप्लाई के दौरान करीब 8500 से अधिक वैक्सीन वायल्स टूटी और चटकी हुई हालत में पाई गईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यह वैक्सीन नवजात और छोटे बच्चों को पोलियो से सुरक्षा देने के लिए भेजी गई थी, जिससे लगभग 1.71 लाख बच्चों को लाभ मिल सकता था, लेकिन खराब स्थिति के कारण पूरी खेप को इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी क्षतिग्रस्त वायल्स को बायो-मेडिकल वेस्ट गाइडलाइंस के तहत तुरंत नष्ट किया जाए। प्रारंभिक जांच में इस नुकसान के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें अत्यधिक ठंड के कारण फ्रीजिंग स्ट्रेस, ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खराब सड़कों पर झटकों से कांच का टूटना और निर्माण स्तर पर ग्लास क्वालिटी में संभावित तकनीकी खराबी शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र में जर्जर सड़कों और डिलीवरी के दौरान सुरक्षा पैकेजिंग की कमी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर संभाग में दर्ज किया गया है, जहां करीब 40,000 खुराक की खेप में से लगभग 7000 वायल टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में भेजी गई 5000 खुराक में से 1500 वायल खराब मिलीं, जबकि सुकमा में केवल 50 वायल क्षतिग्रस्त पाई गईं जिन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकारी अनुमान के अनुसार एक वायल की कीमत लगभग 220 से 250 रुपये है, ऐसे में हजारों वायल के नष्ट होने से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन देश की प्रमुख राष्ट्रीय लैब्स जैसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और अन्य केंद्रों में किया जाता है। इसके बाद इसे कोल्ड-चेन सिस्टम के तहत विशेष रेफ्रिजरेटेड वाहनों से रायपुर स्टेट वैक्सीन स्टोर और फिर अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

