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समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम अरुण साव का सख्त संदेश, अवैध प्लॉटिंग पर अफसरों पर भी कार्रवाई तय

छत्तीसगढ़ में नगर पंचायत क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग, अतिक्रमण और अव्यवस्थित निर्माण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगर पंचायतों के कामकाज की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन गतिविधियों पर हर हाल में रोक लगाई जाए। बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 31 मई तक नई संपत्तियों पर कर लगाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नई कार्य प्रणाली अपनाने और रोजाना सुबह अपने-अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने को कहा। क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को भी हर तिमाही सभी निकायों का निरीक्षण कर सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। बरसात को ध्यान में रखते हुए 31 मई तक नालों और नालियों की सफाई पूरी करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि जलभराव की समस्या न हो। इसके अलावा हर भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सुनिश्चित करने, पाइपलाइन लीकेज सुधारने और सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर जोर दिया गया है। आने वाले 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेयजल योजनाएं तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में निकाय कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और बिजली बिल का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई। संपत्ति कर, जल कर और यूजर चार्ज की वसूली सख्ती से करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही एनर्जी ऑडिट कर अनावश्यक बिजली कनेक्शन हटाने की बात कही गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत स्वीकृत मकानों को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवास स्वीकृति के एक सप्ताह के भीतर भवन निर्माण की अनुमति जारी करें और लाभार्थियों को योजना की पूरी जानकारी दें। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कागजी कार्यवाही के बजाय जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए और सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

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सड़क पर मवेशियों की हाजिरी पर कड़ा एक्शन: 192 में से 140 निकायों ने नहीं भेजी रिपोर्ट, 904 पशु मालिकों से वसूला 20 हजार का जुर्माना

राज्य सरकार सड़क हादसों को रोकने के लिए सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े पर गंभीर है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए एक महीने तक लगातार अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर हफ्ते इस अभियान की रिपोर्ट भेजने का आदेश भी जारी किया गया। लेकिन अधिकांश नगर निकायों ने इस निर्देश की अनदेखी की। रिपोर्ट न भेजने और कार्रवाई न करने पर अब उन्हें रिमाइंडर भेजकर काम पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को निर्देश दिए हैं कि शहर के 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में भी पशुओं की निगरानी की जाए। आवारा और घुमंतू पशुओं को हटाने, उनके मालिकों को जागरूक करने और सड़क हादसों को रोकने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सड़कों पर रात में होने वाले हादसों को रोकने के लिए आवारा पशुओं पर रेडियम स्ट्रिप लगाने, प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइट लगाने और सड़क संकेतक बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थितिप्रदेश के 192 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में से 140 निकायों ने अभी तक इस मामले में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। जिन्होंने कार्रवाई की, उनके मुताबिक 917 सड़कों पर कुल 2,323 मवेशी पकड़े गए, जबकि 3,600 पशु मालिकों को समझाइश दी गई। इस दौरान 904 पशु मालिकों से कुल 20,000 रुपए का जुर्माना वसूला गया। खास बात यह है कि राजधानी रायपुर और बिरगांव में मवेशियों के जमावड़े के बावजूद कोई भी पशु मालिक दंडित नहीं हुआ। वहीं, कुरुद में एक पशु मालिक से केवल 100 रुपए का जुर्माना वसूला गया। पशु मालिकों की पहचान और कानूनी कार्रवाईअब सड़कों पर पाए जाने वाले मवेशियों के मालिकों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस और जुर्माना के अलावा, खुले में पशु छोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इसका उद्देश्य है कि सड़क हादसों को रोकने के साथ-साथ मवेशियों को सुरक्षित तरीके से सड़क से हटाया जाए।

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